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જય શ્રી કૃષ્ણ

આજે ખૂબ જ ગર્વ, આનંદ અને ભાવુકતા સાથે હું મારા એક એવા ડ્રીમ પ્રોજેક્ટની સત્તાવાર જાહેરાત કરવા જઈ રહી છું, જે મારા હૃદયની ખૂબ નજીક છે.ગુજરાતી સંગીતના ઈતિહાસમાં કદાચ પ્રથમવાર, એક એવા વિષય પર સંગીતમય સંવાદ કરવાનો નમ્ર પ્રયાસ કર્યો છે, જેને સમાજે વર્ષોથી સંકોચ અને રૂઢિઓના પડદા પાછળ રાખ્યો છે
."લાલી" માસિક ધર્મ (Periods), સ્વાસ્થ્ય અને સ્ત્રીત્વના ગૌરવને વંદન કરતી ગુજરાતની સર્વપ્રથમ ૫ ગીતોની કન્સેપ્ટ આલ્બમ સીરિઝ ટૂંક સમયમાં તમારી સમક્ષ આવી રહી છે.

એક માતા પોતાની દીકરીને વ્હાલ, સંસ્કાર અને વિજ્ઞાન સાથે આ શારીરિક બદલાવ સમજાવે છે, ત્યાંથી શરૂ કરીને સ્ત્રી અસ્તિત્વના ઉત્સવ સુધીની આ એક અનોખી સંગીતમય સફર છે.આ સાહસિક અને ક્રાંતિકારી પ્રયાસને આપ સૌના આશીર્વાદ, પ્રેમ અને સાથ-સહકારની અપેક્ષા છે.

કોન્સેપ્ટ અને ગીતકાર (Concept & Lyrics): માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી 'કૃષ્ણસખી'

આલ્બમ સ્ટેટસ: ટૂંક સમયમાં આવી રહ્યું છે (Coming Soon)

#Laali #Period #BreakingTaboos #MenstrualAwareness #Womanhood

desaimansi547624

छुपा के सारे दर्द अपने

मुस्कान की चादर ओढ़ी है



बेरहम निकला इश्क मेरा

उसने मेरी रूह तड़पती छोड़ी हैं

anisroshan324329

મા, શું હું તને પાછી બોલાવી શકું?
મારા ઘરના પાછળના દરવાજેથી,
તું આવીને મને પૂછજે,
“મારી દીકરી, તું કેમ છે?”

“બાળકોને સ્કૂલે મોકલી દીધા?
કંઈ ખાધું કે નહીં?
તારી તબિયત બરાબર છે ને?”
મા, તારા આ નાના-નાના સવાલો
આજે પણ મને બહુ યાદ આવે છે.

મા, તું મને બહુ યાદ આવે છે,
મને તારી સંભાળની જરૂર છે,
આ દુનિયાથી જ્યારે થાકી જાઉં,
મને બસ તારી જ જરૂર છે.

શું મા, હું તને પાછી બોલાવી શકું?
એક વાર ફરી મને “મારી દીકરી” કહીશ?
એક વાર મારા માથે હાથ મૂકીને,
મને તારા પાલવમાં લઈશ?

heenagopiyani.493689

મહાન પિતા
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જીવ આપીને જીવન ઘડનાર.
કેમ કરી ભૂલાય ?
જાત ખર્ચીને મકાન આપે.
આરામદાયી જિંદગી બનાવે.
એને કેમ કરી ભુલાય ?
ભૂખ્યા નહીં કદી સુવાડે,
જેના શ્રમથી ઘરમાં, અવનવા પકવાન રંધાય.
એ કેમ કરી ભુલાય ?
ટાઢ તડકો સહી મૌન થઈ જાય.
આપે સંતાનને હર ઋતુનું રક્ષણ.
એ રક્ષક કેમ કરી ભુલાય ?
માં'જેનાં પગલે હરદમ ચાલે.
એ પરિવારનો પરમેશ્વર. કેમ કરી ભુલાય ?
'માં'ચાલતાં શીખવે ઘૂંટણિયેથી પગભર.
પણ પિતા પગભર ઉભો રહેતાં શીખવે જીવનભર.
એ પિતા કેમ કરી ભુલાય?
પરિવારનું છત્ર છાયા કહેવાય. એ
"મહાન પિતા" કેમ કરી ભુલાય ?
🖊️જયા.જાની.તળાજા."જીયા"

davejayaben809394

લીલાંછમ પાંદડાંઓની ઓથે,
પવનનો મીઠો સથવારો છે,
કુદરતી દીવાલોની વચ્ચે,
જીવંત એક સંસાર છે.

માટીના કુંડામાં છલકે,
અમૃતરૂપી શીતળ નીર છે,
તરસ છીપાવવા દોડી આવે,
ખિસકોલી ને ચકલી ધીર છે.

ડાળીએ ઝૂલે ચણપાત્ર,
બધાં પંખીને હરખભેર છે,
મીઠો કલરવ ગૂંજી ઊઠે,
આંગણે કુદરતનો મેળ છે.

મનોજ નાવડીયા

#nature #green #kudarat #manojnavadiya #manojnavadiyabooks

manojnavadiya7402

कोई कैसे समझेगा नाता तेरा-मेरा
रूह का ये बंधन आँखों से नहीं दिखेगा 💞

narayanmahajan.307843

ગણપતિના આગમનની હાર્દિક શુભકામના એક ગણપતિના આગમનનું AI થી બનાવેલુ ગીત પ્રસ્તુત છે.
https://youtu.be/jqzm4o9yjnc?si=sgvlanPK8P_weYF4

amiralidaredia175421

घर का बड़ा बेटा
आज घर में सब दुआओं में बैठे थे और बेसब्री से अमित के रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे थे। इंतज़ार सिर्फ़ रिज़ल्ट का नहीं था—उम्मीदों का था, सपनों का था और अपने बोझ के थोड़ा कम हो जाने का था। पापा को इंतज़ार था कि अमित के रिज़ल्ट से उनके कंधों का थोड़ा बोझ कम हो जाएगा। माँ को इंतज़ार था कि वह सबसे कह सकेगी—उसका बेटा सरकारी अफसर बन गया। वहीं भाई-बहनों को इंतज़ार था कि अब वे बड़े शहर के अच्छे कॉलेज में पढ़ने जा सकेंगे।
​वहीं अमित अपने कमरे में लेटा छत को एकटक देख रहा था। घड़ी की टिक-टिक के साथ उसके दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी। बाहर से आती घरवालों की आवाज़ें जैसे उसकी बेचैनी और बढ़ा रही थीं। वह किसी गहरी सोच में डूबता जा रहा था। अगर आज रिज़ल्ट उसके हक़ में नहीं आया तो वह क्या करेगा? सबको क्या जवाब देगा? एक पल को उसकी साँस जैसे गले में ही अटक गई। माथे पर पसीने की छोटी-छोटी बूँदें तैर आईं। बड़ी मुश्किल से उसने खुद को संभाला, लेकिन मन की चाल पर भला किसका बस होता है। करवट बदलते ही एक और ख्याल उसके मन में आ गया।
​वह पापा का बोझ कैसे कम करेगा? माँ से कैसे नज़र मिलाएगा? छोटे भाई को पढ़ने के लिए बाहर भेजना है… और बहन की भी तो शादी की उम्र हो गई है। इन सबके बारे में सोचते हुए उसने एक लंबी साँस ली और आँखें बंद कर लीं। उसे याद आया, जब उसने बारहवीं में टॉप किया था, तब उसके पापा ने शर्मा अंकल से बड़े गर्व से कहा था— "अमित मेरा बोझ कम करेगा।" शर्मा अंकल भी मुस्कुराकर बोले थे— "अमित जैसा होनहार बेटा मिलना बड़ी किस्मत की बात है।" उन्हीं बातों को सोचते-सोचते न जाने कब उसकी आँख लग गई।
​कुछ देर बाद माँ ने कमरे के दरवाज़े पर दस्तक दी। उसके साथ पापा, भाई और बहन भी थे। माँ ने अमित को प्यार से जगाया, उसका माथा चूमा और उसे सीने से लगा लिया। अमित कुछ समझ पाता, उससे पहले पापा अपनी आँखों की नमी छिपाते हुए बोले— "मुझे तो पता था… हमारा बेटा हमारा नाम ज़रूर रोशन करेगा।" अमित का रिज़ल्ट आ चुका था। वह सरकारी अफसर बन गया था। अमित कुछ पल तक अचंभित होकर सबको देखता रहा। जब बहन ने उसे हिलाकर बधाई दी, तब जाकर जैसे उसे होश आया। वह उठकर माँ-पापा के पैर छूने लगा।
​अमित की जॉइनिंग हो गई। उसके दोस्तों ने शहर से काफी दूर पोस्टिंग ली थी, ताकि वे अपनी जिंदगी थोड़ा खुलकर जी सकें। मन तो अमित का भी था। दोस्तों की बातें सुनकर वह कुछ देर सोच में पड़ गया। लेकिन अगले ही पल उसके मन में उन खर्चों की उधेड़बुन शुरू हो गई, जो कभी उसके पापा किया करते थे। कौन देखेगा घर? माँ-पापा का खर्च कैसे चलेगा? भाई की पढ़ाई? बहन की शादी?
​चेहरे पर एक अनजानी-सी मुस्कान लिए अमित ने कहा "मैं कुछ साल शहर के आसपास ही रहूँगा।" धीरे-धीरे अमित ने घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ अपने ऊपर ले लीं। छोटे भाई का अच्छे कॉलेज में दाखिला करवाया। बहन के लिए अच्छा-सा घर देखकर धूमधाम से उसकी शादी की। इन सबके बीच जब कभी माँ अमित से उसकी शादी की बात करती तो वह हँसकर टाल देता— "अभी उम्र ही क्या है मेरी… कर लूँगा।" लेकिन अमित के मन में कुछ और था। वह पहले अपने छोटे भाई को अपने पैरों पर खड़ा करना चाहता था।
​एक रोज़ अमित अपने कमरे में कुछ कागज़ ढूँढ़ रहा था। किताबों के बीच से एक पुरानी बाइक की तस्वीर निकलकर नीचे गिर गई। वही बाइक, जिसे वह कभी खरीदना चाहता था। दोस्तों के साथ उसी बाइक पर घूमने और लंबी यात्राओं पर जाने के कितने सपने देखे थे उसने। तस्वीर को देखकर अमित के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई। उसने एक लंबी, ठंडी साँस ली। तभी पीछे से माँ की आवाज़ आई— "अमित…" माँ की आवाज़ सुनते ही अमित ने तस्वीर को वापस किताब के बीच रख दिया और कमरे से बाहर चला गया।
​अमित अपनी ज़िम्मेदारियों से खुश था। उसे सुकून मिलता था कि उसके कारण घर की कोई चिंता थोड़ी कम हो जाती है। उसने कभी किसी से शिकायत नहीं की। बस अपनी मुस्कान के पीछे अपनी थकान छिपाना सीख लिया था।
​एक शाम अमित ऑफिस से घर आया तो उसने अपनी बहन को देखा। मुस्कुराकर बोला— "गुड़िया, तुम कब आई?" बहन ने भाई के चेहरे की तरफ देखा। आज उसे पहली बार महसूस हुआ कि उसका भाई कितना थक गया है। रात को खाना खाते समय अमित अपनी बहन के ससुराल का हाल-चाल पूछ रहा था। वह उसकी खुशियों और परेशानियों के बारे में जान लेना चाहता था। लेकिन बहन की नज़र बार-बार अपने भाई के चेहरे पर जा रही थी। उसे याद आने लगा— उसकी शादी में भाई ने कितनी मेहनत की थी। उसकी पसंद की हर चीज़ का ध्यान रखा था। माँ-पापा का कितना ख्याल रखता था। छोटे भाई का इतने बड़े शहर के अच्छे कॉलेज में दाखिला भी उसी ने करवाया था, जबकि पापा इतने खर्चे को लेकर परेशान थे। तब अमित ने ही पापा को समझाया था— "पापा, आप परेशान मत होइए… सब हो जाएगा।"
​बहन की आँखों में नमी उतर आई। उसने बहुत धीरे से पूछा— "भैया… आप शादी कब करेंगे?" अमित ने एक पल उसकी तरफ देखा। फिर खाने की प्लेट में नज़र झुकाकर बोला— "कर लेंगे गुढ़िया… बस कुछ काम और पूरे कर लूँ।" फिर मुस्कुराते हुए बोला— "तुम इतना मत सोचो… तुम खुश रहो।" अमित की बात सुनकर जैसे उसकी बहन की साँस कुछ पल के लिए रुक गई। खाने की मेज़ पर अचानक एक ख़ामोशी उतर आई। वह चुपचाप अपने भाई को देखती रही। उसकी निगाहें अमित के थके हुए चेहरे और आँखों के नीचे उभरी हल्की-सी कालिख पर टिक गईं।
​अमित ने उसकी तरफ देखा और हमेशा की तरह मुस्कुराकर पूछा— "क्या हुआ गुढ़िया?" वह कुछ नहीं बोली। बस उठी, उसके पास गई और हल्के से उसके कंधे पर हाथ रख दिया। अमित उसकी तरफ देखता रहा। वह कुछ कहे बिना वहाँ से चली गई। अमित ने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसके लिए शायद यह भी रोज़ की तरह ही एक शाम थी। लेकिन बहन के लिए वह शाम पहले जैसी नहीं थी। उसे पहली बार महसूस हुआ कि जिस भाई से उसने हमेशा अपनी हर परेशानी बाँटी थी, उसने अपनी कोई परेशानी कभी किसी से बाँटी ही नहीं। वह सबके लिए खड़ा रहा और शायद इसी वजह से सबको लगा कि उसे किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं।
​उस रात घर में सब सो गए। लेकिन बहन की आँखों में नींद नहीं थी। उसे बार-बार अमित का वही जवाब याद आ रहा था"कर लेंगे बस कुछ काम और पूरे कर लूँ।" वह सोचती रही पता नहीं अमित की ज़िंदगी में अपने लिए जीने की बारी कब आएगी। और शायद पहली बार उसे यह समझ आया कि ज़िम्मेदारियाँ निभाते-निभाते इंसान हमेशा नहीं थकता, कभी-कभी वह बस थकने का हक़ खो देता है

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ronakjoshi2191

हमारा समाज कैसा होना चाहिए?

indianartistmahi

❤️🌹 " ભીંજાયેલી યાદો " 🌹 ❤️

કરશો જો યાદ તો હરેક વાત યાદ આવશે,
કરેલી કોઈ અનોખી મુલાકાત યાદ આવશે.

પહેલા વરસાદની સતત ટપકતી બૂંદો વચ્ચે,
હથેળી ઉપર મૂકેલો કોઈ હાથ યાદ આવશે.

વર્ષાના શોરમાં એકાકાર પાયલનો ઝણકાર,
ને કદમથી કદમ મિલાવેલ સાથ યાદ આવશે.

મંદ મંદ લહેરાતા એ ઠંડા પવનમાં મહાલતાં,
ગુજારેલી હસીન એ એક રાત યાદ આવશે.

ઘનઘોર ઘેરાયેલા વાદળ વચ્ચે સેરડો પાડીને,
ધરતી પર ઊતરી આવેલ ચાંદ યાદ આવશે.

અતિશય યાદમાં છલકાઈ જશે આ આંખો,
ભીંજાયેલી એ પ્રણયની જાત યાદ આવશે.

હવે તો જિંદગી વીતી જશે એ જ યાદોમાં,
"વ્યોમ" દિલના એ જઝબાત યાદ આવશે.


✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી) અંજાર. મુ. રાપર.

omjay818

बहुत गुरूर था सड़कों को अपनी लंबाई पे...
मैंने इसे कदमों से पैदल ही नाप दिया था।
​मैं कभी भूख से व्याकुल, तो कभी पानी की तलाश में था,
कहीं बच्चों के पैरों में दर्द, तो कहीं माताओं की आँख में पानी था॥

कभी पैरों में चप्पल थी, नहीं तो नंगे पैरों से दौड़ लगाया था
अपनों के लिए ही दूर गया था,
आज अपनों के लिए ही भागा था॥

कभी कुछ मिला तो खाया नहीं तो भूख को गले लगाया था,
एक 'काल' से बचने की चिंता में मग्न...
'मति' का मारा मैं वहाँ क्यों सोने को जा रहा था?
​अब मुझे क्या पता, कि दूसरे 'काल' को वहीं से गुज़र के जाना था,
शायद भूल गया था कि 'काल को हराना' मुश्किल ही नहीं,
नामुमकिन के बराबर था॥

और कोई नहीं... मैं देश का एक गरीब और अब तो मरा हुआ आदमी था,
जो 'शिवम्' के हाथ से लिखकर आपको कुछ याद दिलाने वापस आया था!!

दिनांक-08/05/2020
(औरंगाबाद रेल्वेट्रैक हादसा)

shivamdhuriya291955

​ये मेरा दिल है जनाब
कोई धर्मशाला नहीं,
यहाँ आने वाले लोग जाते नहीं,
'बस' जाते हैं...

shivamdhuriya291955

sannari gujratmitr newspaper 📰

niraliipatel.127808

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"अंत में कुछ नहीं बचेगा, सिवाय उन कहानियों के जिन्हें तुमने जिया है।"

Very Good Morning

erdharmendra

💨ओट्स प्रोटीन डोसा

💨साहित्य
मसुर ,तूर ,उडीद ,मूग ,हिरवे मूग
या सर्व डाळी एक मोठी वाटी भरून
ओट्स एक मध्यम वाटी
जिरे
कोथिंबीर
गाजर कीस
चीज
मीठ
मिरची दोन ते तीन
आले दोन तिन तुकडे

💨कृती
आदल्या दिवशी रात्री सर्व डाळी भिजत टाका
सकाळी एक वाटी ओट्स
पंधरा ते वीस मिनिटे भिजवा
सर्व डाळी आणि भिजलेले ओट्स मिरची आले घालून वाटून घ्या
सात ते आठ तासात पीठ फुगून येते
डोसा करताना थोडे मीठ व जिरे घालून पीठ फेसून घेणे
गरम तव्यावर मध्यम आचेवर डोसा घालणे
कडेला तेल सोडून घेणे
डोसा कुरकुरीत झाल्यावर
डोश्यावर गाजर कीस, चीज कीस व कोथिंबीर घालून त्याची घडी घालावी

💨खुप चविष्ट व पौष्टिक डोसा तयार होतो 😋

jayvrishaligmailcom

kalyug की मोहब्बत

अजीब सा प्रपोज किया उसने बोल रही थी अपनी लाश को जलाने का मौका मेरे बच्चों को दोगे क्या

anisroshan324329

काल गढ़ की तारा - 2

काल गढ़ एक ऐसा किला है जहाँ हड्डियाँ बिछी हैं, खून का समंदर है,
काला धुआँ साँसें रोक रहा है।
सिर्फ चीखें हैं और एक भयानक हँसी
जो दिमाग में गूँज रही है।******यूँ तो गुनहगार हैं हम किसी की नज़र में,
पर बेगुनाही के सबूत लिए बैठे हैं,
किसी ने सुना ही नहीं हमारी ख़ामोशी को,
हम अपनी ही तन्हाई में जिए बैठे हैं,

बस एक बार दे दो मौका सफ़ाई का हमें,
ना सही तो इल्ज़ाम भी क़ुबूल है,
हम तो आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं,
जहाँ इश्क़ का दावा किए बैठे हैं।

क्या तारा अपनी बेगुनाही साबित कर पाएगी?
या काल गढ़ उसे भी अपना हिस्सा बना लेगा?

एक हॉरर, मिस्ट्री और सैड लव स्टोरी का दूसरा भाग।

#KaalGadhKiTaara2 #HorrorStory #Mystery #BhayanakKahani #HindiHorror #Matrubharti #SadLoveStory #BhootKahani #Taara #EkBhaykatha

raktkamal

Saarghaa 3 : Barson Ka Intezaar - A Horror Love Story

- Jaise barson purane dost ho, darwaze par jo dastak thi wo ab nahi thi. Bahar barish ab tez nahi, bas tap-tap gir rahi thi Kya wo lautega? Ya ye intezaar hi Saarghaa ka aakhiri sach hai?

Ek Horror Love Story jo aapko raat bhar jagaye rakhegi.

Yun to gunahgaar hain hum kisi ke,
Par begunahi ke saboot liye baithe hain,
Bas ek baar de do mauka safai ka,
Apni safai me to puri duniya ko liye baithe hain.

#horror , #saarghaa , # intezaar, #bhoot , #romantic horror new part ke liye follow kijiye

raktkamal

#लाडूचलाडू
साधे सोपे मुगाचे लाडू
श्री गणेशाच्या आरती साठी
सकाळ संध्याकाळ वेगळा प्रसाद आपण करीत असतो
छोट्या आकारात हे लाडू प्रसाद म्हणुन करता येतात
हे लाडू अक्षरशः दहा ते पंधरा मिनिटात होतात
शिवाय पाक वगैरेची गरज नसते

एक वाटी मूग डाळ
पाऊण वाटी गुळ
तीन चमचे साजुक तूप

प्रथम मुगाची डाळ कोरडीच खमंग भाजून घेणे
फार लाल करायची नाही
फक्त भाजलेला वास यायला हवा
आता ती थोडी थंड होऊ द्या
थंड झाल्यावर ही डाळ आपल्या मिक्सर मध्ये बारीक करून घ्या
कढईत एक चमचा तूप घालून हे डाळीचे पीठ भाजुन घ्या
आता पुन्हा हे पीठ गार होण्यासाठी ताटलीत काढा
कढईत उरलेले दोन चमचे तूप घाला
तूप वितळले की त्यात पाऊण वाटी चिरलेला गूळ घाला
या मिश्रणाला शिजून बुडबुडे येताच ताबडतोब कढई खाली उतरवून मुगाचे भाजलेले पीठ घाला
व चांगलें एकजीव करा
गरम असतानाच लाडू वळा
वळताना लाडू मऊ वाटतात
थंड झाले की हे लाडू घट्ट होतात
मुगाचे पीठ मुळातच स्वादिष्ट असतें
मुगाचा मूळचा स्वाद राखण्यासाठी
यात वेलदोडे घालणे किंवा काजु बदाम सजावट याची गरज पडत नाही
तरीपण आवडत असल्यास जरूर घाला

jayvrishaligmailcom

"दुनिया गोल है, इसलिए जो भागते हैं वो लौट कर वहीं आ जाते हैं जहाँ से डर कर भागे थे।"


शुभ रात्रि

erdharmendra

Good evening friends.. have a nice time

kattupayas.101947

​"કોરા કાગળ પર ફરિયાદ લખાય,
કલમ ચાલે આપોઆપ;

પાના કાયમ લખાઈને ભરાય,
પણ ઉકેલ ના આવે કોઈ બાપ!"

d h a m a k

heenagopiyani.493689