The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.
SYNOPSIS!"Roses are blooming without looking at any seasonI am losing myself to you without any reason." said Julie Taylor. Cut! Cut! "You did a marvellous job, Julie!" The director said as it was the last shot for Julie. Julie always dreamt of being a well-reputed doctor and didn't desire to step into the film industry but she somehow landed there and it was Charles Smith a well-known actor and a childhood friend of Julie who would help her with every problem that she faced in the film industry and all these friendly help that Charles did, was later misunderstood by both their families. What takes place when two big celebrities who were good friends are now forced by their families to be married? However their marriage issues don't end the novel here, instead, it gives birth to a vengeful evildoer, Barbara always tried her best to make a permanent part for herself in the Smith Clan each of them in the world knows how prosperous, grandeur, and majestic the Smith Clan is! She tried her best to be near Charles but he turned down her proposal very soon. Glancing, Julie at her place could have only provoked her vengeance.On the other side of the tale, Clara is an unprosperous actress and she blames Julie to be the reason for her unsuccessful career and so she vowed revenge on Julie and Charles. This novel has a promising collection of friendship, love, care, flirting, royal romance, and poisonous vengeance. A beautiful romance story was written under the circumstances of an act, a movie, and in the cinematic world. How love can be written in the stars you will find out in this book
https://amzn.in/d/igNfPQi
रिश्ते अचानक नहीं टूटते!
वे दरकते हैं,
अनदेखी पर!
वे दरकते हैं,
अपमानित किए जाने पर!
वे दरकते हैं,
पीड़ा के समय प्रेम के अभाव में!
वास्तव में,
रिश्ते अचानक नहीं टूटते!
बल्कि वे धीरे धीरे दरकते रहते हैं,
उन पर पड़ती अनगिनत चोटों से!
और ऐसी ही किसी एक चोट से,
वे दरार खाए रिश्ते,
बिखर जाते हैं काँच के समान!
जिन्हें पुनः जोड़ने पर भी,
कुछ निशान ताउम्र रह जाते हैं...
आज मैं अपने दोस्तों के साथ बैठा था, पर चुप था। अक्सर मैं ऐसे ही चुप रहता हूं, जब लोग मेरे सामने होते हैं। मेरी चुप्पी कभी-कभी दूसरों को अजीब लगती है, और आज भी ऐसा ही हुआ। मेरे एक दोस्त ने मेरे दूसरे दोस्त से पूछा, "ये चुप क्यों है? ये तो तुम्हारा दोस्त है, तुम तो जानते हो न?" तो उसने जवाब दिया, "मुझे नहीं पता, यह ऐसा ही रहता है।"
वो सवाल मेरे भीतर गूंज रहा था। मैंने खुद को सफाई देने के लिए कहा, "मेरे बारे में किसी को नहीं पता, मैं किसी को अपने बारे में ज्यादा नहीं बताता।" और यह बात मैंने गर्व के साथ कही, मानो खुद को justify कर रहा था। लेकिन कुछ समय बाद, जब मैंने यह बात एक और दोस्त से शेयर की, तो उसने मेरी सोच को एक नई दिशा दी। उसने कहा, "यह जरूरी नहीं कि तुमने कभी अपने बारे में बताया नहीं, कि तुम क्या पसंद करते हो, क्या चीज़ें तुम्हें खुश करती हैं, या तुम चुप क्यों रहते हो। हकीकत तो यह है कि शायद कभी किसी ने तुम्हें इतना खास माना ही नहीं, कि वह तुम्हारे बारे में जानने की कोशिश करें।"
उसकी बातों ने मुझे अंदर से झकझोर दिया। मैं हमेशा यह सोचता था कि मेरी चुप्पी मेरी पर्सनल स्पेस का हिस्सा है, और मैं इसे अपनी पहचान बना चुका था। लेकिन उसने जो कहा, वह बिल्कुल सही था। क्या वाकई, कभी किसी ने मुझे इतना समझने की कोशिश की, कि मैं कौन हूं और क्यों चुप रहता हूं? क्या कभी किसी ने मुझे उस तरह से देखा, जैसे मैं खुद को देखता हूं?
कभी-कभी हम अपनी चुप्पी को अपने गहरे विचारों और निजीता के प्रतीक के रूप में देखते हैं, पर असल में यह भी हो सकता है कि लोग हमारी चुप्पी को अनदेखा कर देते हैं। उन्हें लगता है कि हम या तो कुछ छुपा रहे हैं या फिर हम उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं कि हमारे बारे में जानने का प्रयास करें। यह स्थिति बहुत कुछ हमारे भीतर के खालीपन और अकेलेपन की भी पहचान हो सकती है, जो हम दूसरों से छिपाने की कोशिश करते हैं।
इसने मुझे यह सिखाया कि कभी-कभी हमें अपनी चुप्पी का कारण दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से पूछने की जरूरत होती है। क्या हम खुद को वाकई पूरी तरह से समझते हैं? क्या हमने कभी अपनी चुप्पी की असल वजह को पहचानने की कोशिश की है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या हम खुद को उस तरह से खास मानते हैं जैसे हम दूसरों से उम्मीद करते हैं कि वे हमें देखे?
•┈✤ SuNo न..🦋
ए लड़की.ऐसा नहीं है कि सिर्फ तुम्हें
देखते रहने से,
बल्कि, जब-जब मैं अपनी आंखें बंद
करता हूं न, तब भी तुम आकर बैठ
जाती हो,
मेरी पलकों की मुंडेर पर और झांकती
हो मेरी आँखों में, और बिखेर देती हो
उनमें न जाने कितनी ख्वाहिशें कितने
सपने कितनी ही चाहतें"
और जब मैं देखता हूं तुम्हारी बड़ी-बड़ी
झील सी आँखों में तब मुझे यही बे-रंग
सा संसार कितना सुनहरा लगने
लगता है...❤️
╭─❀💔༻
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh 😊°
╨──────────━❥
“शब्द आजाद है, लेकिन मेरी कहानी नहीं,
हर एक लफ्ज़ में छुपी है एक न सुनाई जाने वाली कहानी।
एक समय था जब लफ्ज़ों का सरमाया था,
हर बात कहने का हक़ और हिम्मत पास था।
मगर अब हालात कुछ ऐसे बदले,
कि लफ्ज़ तो हैं, पर उन पर पहरे हैं कई।
जब दिल टूटा, तो शब्द भी बिखर गए,
आंसुओं के सैलाब में गुम होकर रह गए।
जिन हर्फ़ों में कभी प्यार का रंग था,
आज उन्हीं में दर्द की परछाई है।
कहने को सब कुछ है, पर जुबां खामोश है,
शब्द आजाद हैं, पर उनका कोई जोश नहीं है।
हर एक बात दिल में दबा कर रखी,
क्योंकि सुनने वाला अब कोई अपना नहीं है।
वक्त ने वो जख्म दिए, जो बयान नहीं हो सके,
शब्दों ने चाहा बहुत, पर दर्द हल्का नहीं हो सके।
हर दिन जी रहा हूँ मैं इस उम्मीद में,
शायद कोई समझे मेरी इस दर्द भरी नज़्म को।
शब्द आजाद हैं, पर मन बंधनों में है,
दिल के जख्मों को अब कोई मरहम नहीं है।
हर एक लफ्ज़ में छुपी है एक सिसकती आवाज़,
शब्द तो आजाद हैं, मगर दिल में एक कैद का राज़।”
जो परवश करे, उसका संग कैसे रखा जा सकता है? - दादा भगवान
अधिक जानकारी के लिए: https://hindi.dadabhagwan.org/
#quote #quoteoftheday #spiritualquotes #spirituality #hindiquotes #dadabhagwanfoundation #DadaBhagwan
" સારું નથી "
અંદર ને અંદર ઘૂંટાવું, એ સારું નથી.
ખુદનું ખુદથી જ લડવું, એ સારું નથી.
હળવું થઈ જવાય જો એ સારવાથી,
તો હર આંસુને રોકવું, એ સારું નથી.
ખંતથી ખેડતાં રહો જીવનની સફરને,
કોઇને પણ કાંઈ પૂંછવું, એ સારું નથી.
પદ, મોભાની હવામાં ઊડતાં ચેત,
હદથી વધારે ઉડવું, એ સારું નથી.
દુખ દર્દનું શું? એ તો આવે "વ્યોમ"
વારેઘડી રોદણું રડવું, એ સારું નથી.
✍... વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર.
जब भी कभी बात होती है तुम्हारी
असंख्य मुस्कुराहट आ जाती है चेहरे पर..
---
जो तुम ना होते चांद तारों की बातें ना होतीं
आसमानी चांदोबा की वो बिछातें न होतीं.
----
खूबसूरत चांदनी की सिलवटें प्रसरित ना होतीं
रश्मियाँ होतीं, धरा को अंक में समेटे हुए..
---
पर कैसे बताऊं.. ? जो बात तुमसे है..
वो बात औरों में कहाँ है .. !!
----
तुम सुंदर सुबह हो तुम्हारे बगैर
दिन-रात की खूबसूरती फिर कहाँ होती..
--डॉ अनामिका----
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Copyright © 2025, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Copyright © 2025, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.