रिश्ते अचानक नहीं टूटते!
वे दरकते हैं,
अनदेखी पर!
वे दरकते हैं,
अपमानित किए जाने पर!
वे दरकते हैं,
पीड़ा के समय प्रेम के अभाव में!
वास्तव में,
रिश्ते अचानक नहीं टूटते!
बल्कि वे धीरे धीरे दरकते रहते हैं,
उन पर पड़ती अनगिनत चोटों से!
और ऐसी ही किसी एक चोट से,
वे दरार खाए रिश्ते,
बिखर जाते हैं काँच के समान!
जिन्हें पुनः जोड़ने पर भी,
कुछ निशान ताउम्र रह जाते हैं...