जब भी कभी बात होती है तुम्हारी
असंख्य मुस्कुराहट आ जाती है चेहरे पर..
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जो तुम ना होते चांद तारों की बातें ना होतीं
आसमानी चांदोबा की वो बिछातें न होतीं.
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खूबसूरत चांदनी की सिलवटें प्रसरित ना होतीं
रश्मियाँ होतीं, धरा को अंक में समेटे हुए..
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पर कैसे बताऊं.. ? जो बात तुमसे है..
वो बात औरों में कहाँ है .. !!
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तुम सुंदर सुबह हो तुम्हारे बगैर
दिन-रात की खूबसूरती फिर कहाँ होती..
--डॉ अनामिका----