दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में न चप्पल हैं, न जूते। “क्या कर रहे हो, भैया?” वह पीछे देखकर हँसते-हँसते बोलती है। “ये कौन-सा खेल है?” वह दौड़ती रहती है। “मेरा सर घूम रहा है, भैया,” उसकी आवाज़ में अब थकान उतर आई है। “मुझे आराम करना है।” एक पेड़ के पास पहुँचकर वह लड़खड़ाती है। घुटनों के बल गिरती है। फिर वहीं ज़मीन पर लेट जाती है। “और नहीं, भैया,” उसकी आवाज़ अब बहुत धीमी है। “अब और नहीं।” उसकी आँखें मूँदने लगती हैं। उसके पास एक परछाईं आकर रुकती है।
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 1 - भूत ले गया उसे
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में न चप्पल हैं, न जूते। “क्या कर रहे हो, भैया?” वह पीछे देखकर हँसते-हँसते बोलती है। “ये कौन-सा खेल है?” वह दौड़ती रहती है। “मेरा सर घूम रहा है, भैया,” उसकी आवाज़ में अब थकान उतर आई है। “मुझे आराम करना है।” एक पेड़ के पास पहुँचकर वह लड़खड़ाती है। घुटनों के बल गिरती है। फिर वहीं ज़मीन पर लेट जाती है। “और नहीं, भैया,” ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 2 - सवाल-जवाब
कबलोई जाने वाली बस खटारा थी। सीटों का फोम बाहर निकला हुआ। खिड़कियाँ आधी बंद, आधी जाम। हर गड्ढे बस ऐसे उछलती जैसे विरोध कर रही हो। वर्षा मलिक खिड़की के पास बैठी थी। उसकी गोद में एक फ़ाइल खुली थी। पीले पड़ चुके अख़बार की कतरनें। “तीसरी बच्ची लापता।” “प्रशासन पर सवाल।” ब्लॉग पोस्ट के प्रिंटआउट — गाँव में तांत्रिक सक्रिय? बच्ची खुद भागी? राजनीतिक साज़िश? वह पन्ने पलटती जाती है। हर केस में एक समानता। उम्र। समय। और फिर — अचानक चुप्पी। फोन वाइब्रेट करता है। स्क्रीन पर नाम चमकता है — मिश्रा सर। वह कॉल काट ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 3 - छिपे हुए खतरे
जीप गाँव से बाहर निकल चुकी थी। धूल पीछे उड़ रही थी। सड़क धीरे-धीरे कच्चे रास्ते में बदल रही वर्षा पीछे की सीट पर बैठी थी। दोनों तरफ़ दो आदमी। सामने ड्राइवर और एक और। वर्षा ने धीरे से मोबाइल निकाला। नेटवर्क के दो टिमटिमाते बार। फिर गायब। उसने कॉल लगाने की कोशिश की। कट। फिर संदेश टाइप किया— Location unknown. Being taken— सेंड नहीं हुआ। स्क्रीन पर उभरा — No service. उसका गला सूख रहा था। वह खिड़की से बाहर देखने लगी। सूखी झाड़ियाँ। दूर खेत। कोई बस्ती नहीं। जीप और अंदर जा रही थी। उसी समय दूसरी ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 4 — सुराग
अगली सुबह। नदी के किनारे हल्की धूप उतर रही थी। दूर झाड़ियों के पास जोगी की मोटरसाइकिल खड़ी थी। घुटनों के बल बैठी नोट्स ले रही थी। रेत पर कुछ पुराने निशान थे — आधे मिटे हुए। जोगी काला चश्मा पहने खड़ा था। नदी में कंकड़ फेंक रहा था। हर कंकड़ पानी में गिरकर गोल-गोल लहरें बना रहा था। वह कभी-कभी पैर से रेत उछाल देता। वर्षा ने बिना ऊपर देखे पूछा— “पुलिस को यहाँ से कुछ नहीं मिला?” जोगी के चेहरे पर एक तंज भरी मुस्कान उभरी। “दस-दस गाँव पर एक थाना है,” वह बोला। “पुलिस यहाँ कुछ ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 5 — इंस्पेक्टर अनीश
जोगी नीचे चला गया था बाइक निकालने। वर्षा ने जल्दी-जल्दी सामान समेटा। एक बार कमरे को देखा। बिस्तर। कुर्सी सूखे कपड़े। ठंडी इस्त्री। फिर बिना रुके बाहर निकल गई। नीचे बरामदे में जोगी बाइक के पास झुका था। एक छोटे पंप से टायर में हवा भर रहा था। वह उठ खड़ा हुआ। “किसी ने टायर की हवा निकाल दी।” उसने जेब से मुचड़ा हुआ कागज़ निकाला। “ये एक्सहॉस्ट में फँसा था।” वर्षा ने कागज़ खोला। अख़बार की कटिंग्स से काटे गए अक्षर। बेमेल। साफ़। सुनियोजित। “जिन रास्तों पे चल रहे हो वहाँ सिर्फ़ मौत मिलेगी। लौट जाओ।” वर्षा ने ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 7 — लंका दहन
मकान का पिछला बरामदा छोटा था। ढके हुए कूलर। पुराने एसी के आउटडोर यूनिट। टूटे गमले। अनीश ने सिक्योरिटी का मुँह रुमाल से कसकर दबा रखा था। गार्ड छटपटा रहा था। कुछ सेकंड। फिर शरीर ढीला पड़ गया। अनीश ने उसे धीरे से ज़मीन पर लिटाया। “Clear,” उसने फुसफुसाया। कमर के पीछे खोंसी हैंडगन निकाली। बाकी तीनों दीवार फाँदकर बरामदे में आ चुके थे। अनीश ने पीछे का दरवाज़ा हल्के से धक्का दिया। चर्र… रुका। साँस रोकी। कोई हलचल नहीं। हाथ से इशारा। चारों अंदर घुसे। लंबा गलियारा। दीवारों पर उतरता पेंट। नमी के धब्बे। अंत में एक बड़ा ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 6 — मुझे मारने आये थे
अनीश के जबड़े कस गए थे। दाँत ऐसे भींचे जैसे टूट जाएँगे। “ये विग वाला हरामी… राज लढवान… इसका कई फाइलों में था,” उसने धीरे कहा। “पर कभी ठोस लिंक नहीं मिला।” वह उठा। राइफल हाथ में ले ली। “मैंने इसे एक बिगड़ा अमीरज़ादा समझ कर छोड़ दिया था। गलती की।” वर्षा एक कदम पीछे हटी। उसने पहली बार अनीश को कंट्रोल खोते देखा। जोगी शांत स्वर में बोला— “अनीश जी… मान लीजिए कि ये वही है… तो भी ढूँढेंगे कैसे?” अनीश हँसा। सूखी, खतरनाक हँसी। “इसी इलाके में है ये लढवान। इसी गाँव के बाहर। उसकी माँ—अपराजिता लढवान। ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 8 — पाप का अंत
शहर की सड़कें चौड़ी थीं। पेड़ों की कतारें। साफ़ फुटपाथ। ऊँची दीवारों के पीछे खामोश बंगले। वर्षा की टैक्सी बड़े, सफ़ेद पत्थर के फाटक के सामने रुकी। ऊपर तांबे की नेमप्लेट। अपराजिता लढवान सांसद सुरक्षा कड़ी थी। दो गार्ड। एक मेटल डिटेक्टर। अंदर CCTV. “किससे मिलना है?” गार्ड ने पूछा। “सांसद जी से,” वर्षा ने शांत स्वर में कहा। “अपॉइंटमेंट है?” “नहीं।” गार्ड ने सिर हिलाया। “गाड़ी लौटा लीजिए मैडम, बिना अपॉइंटमेंट नहीं मिल सकते।” वर्षा ने बिना बहस किए फोन निकाला। स्क्रीन खोली। वीडियो चलाया। गार्ड की आँखें फैल गईं। स्क्रीन पर — राज लढवान कुर्सी से बँधा। ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 9 — सौदा
वर्षा पेन को मेज़ पर टिक-टिक कर रही थी। एक ही रिदम। नसों में उतरती हुई। सौना की बात अपराजिता लढवान न जाने कहाँ चली गई थी। कमरे में एयर-कंडीशनिंग ठंडी थी, पर वर्षा की हथेलियाँ पसीने से भीगी थीं। तभी दरवाज़ा खुला। वही नौकरानी। “आइए वर्षा दीदी,” उसने सिर झुकाकर कहा। “मैडम ने आपको बुलाया है।” वर्षा एक पल ठिठकी। फिर उठी। चल पड़ी। लंबे गलियारों से गुज़रते हुए, कई बंद दरवाज़े पार करके, वे एक पॉलिश्ड लकड़ी के भारी दरवाज़े के सामने रुकीं। अंदर से हल्का-सा धुआँ निकल रहा था। नौकरानी ने दरवाज़ा खोला। भीतर जाते ही ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 10 — भीड़
छोटा कमरा। कैमरा ट्राइपॉड पर। लाइट तीखी। कोई एंकर नहीं। कोई डिबेट नहीं। बस सीधा कैमरा। वर्षा कुर्सी पर है। दो टेक हो चुके हैं। तीसरे टेक से पहले की चुप्पी। वर्षा के मन में एक विचार आया। “ये आख़िरी बार है जब मैं सच बोल सकती हूँ। इसके बाद लौटना मुमकिन नहीं होगा।” अब वो रिकॉर्ड बटन की तरफ़ देखती है। और बोलना शुरू करती है। आवाज़ हल्की काँपती है — लेकिन शब्द साफ़। रूकती है, बोलती है, आँसू पोंछती है। एक जगह वो अटकती है। फिर खुद ही रिपीट करती है। और अंत में चुप हो जाती ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 12 — इन्साफ़
सुबह का समय था। एक दुबला-पतला युवक थाने की ओर जा रहा था। हाथ में स्टील की केतली और चाय से भरे काँच के गिलास। रोज़ का काम। रोज़ की राह। मोड़ पर कोई दीवार से अलग हुआ। अनीश। लड़का चौंका, फिर मुस्कुराया — “अरे अनीश सर!” अनीश ने उँगली होंठों पर रखी। पास बुलाया। कान में कुछ फुसफुसाया। लड़के का चेहरा उतर गया। “सर… ये…?” अनीश ने बिना जवाब दिए नोटों की मोटी गड्डी उसकी शर्ट की जेब में ठूँस दी। “कुछ नहीं होगा। बस ये वाला कप… ठीक जगह पहुँचना चाहिए। और मिलेंगे।” उसने जेब से एक ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 11 — पूस की रात
संभावित सिंह सामने तनकर खड़ा था। चेहरे के एक तरफ़ जले के पुराने निशान — दाग़दार, चकत्तों जैसे उभरे अपराजिता अपने डेस्क पर एक फ़ाइल पलट रही थी। कुछ पल बाद उसने उसे तेज़ आवाज़ के साथ बंद कर दिया। “अनीश की लाश कहाँ है?” अपराजिता की आवाज़ धीमी थी, पर धारदार। “तूने तो कहा था कि एक्सीडेंट में कोई नहीं बचा। सिर्फ़ जोगिंदर सांगवान।” संभावित सिंह ने पसीना पोंछा। “जी वो… उस समय—” “बकवास बंद कर!” अपराजिता गरजी। कुर्सी से थोड़ा आगे झुकी। “अड़तालीस घंटे। मुझे अनीश चाहिए। ज़िंदा… या मुर्दा। समझा?” संभावित सीधा होकर सलाम ठोंकता है। ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 13 — त्रिकोण
थोड़ी देर बाद। शहर के बाहर एक बियाबान इलाका। गाड़ी की हाई-बीम लाइट में एक चौकोर गड्ढा खोदा जा था। फावड़े चल रहे थे। मिट्टी उछल रही थी। जोगी हाँफते हुए बोला — “आज तो आपने रेस करवा दी, सर।” अनीश हल्का मुस्कुराया। “इन सब को कम अंतराल पर ठोकना ज़रूरी था। नहीं तो एक सपोला मर जाए तो बाकी सब बिलों में छिप जाते हैं।” जोगी ने पसीना पोंछा। “इस तीसरे साँप को मैं ख़त्म करूँगा।” अनीश रुका। “कभी जान ली है किसी की?” “उस पहलवान की गर्दन तोड़ी थी,” जोगी बोला। “वो सेल्फ-डिफेन्स था। गर्म खून। कोल्ड-ब्लड ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 14 — सफ़ेद साड़ी वाली डायन
अपराजिता लढवान की मौत को दो महीने बीत चुके थे। शहर के बाहरी हिस्से में एक पुराना गोदाम। ऊपर टूटी हुई टीन की छत। अंदर लोहे की गंध और पसीने की महक। गोदाम के एक कोने में एक मेज़ पर फाइलों का ढेर। उनमें आधा डूबा हुआ बैठा था — अनीश। चश्मा नाक के नीचे सरक आया था। कागज़ पलटते-पलटते आखिर उसने सिर उठाया और मुस्कुरा उठा। “मिल गया।” अनीश मुस्कुराया। “आख़िरकार एक ढंग की लीड मिल ही गई।” फ़ाइल उठाकर फेंक दी। थोड़ी दूर पर कोने में लगे छोटे से जिम में जोगी। नंगे बदन, सिर्फ पैंट पहने, ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 15 — अनाथालय
साउथ मुंबई। InfluencerX टॉक सीरीज़ का मंच रोशनी में नहाया हुआ था। स्पॉटलाइट के बीच खड़ी थी — सफ़ेद में, बड़ी बिंदी लगाए नवीना जांगिड़। उसकी आवाज़ आत्मविश्वास से भरी थी। “हम मुंबई में पाँच और पूरे देश में बीस अनाथालय चलाते हैं — सिर्फ गरीब, अनाथ और बेसहारा बच्चियों के लिए।” हॉल शांत था। लोग ध्यान से सुन रहे थे। नवीना ने थोड़ा रुककर कहा — “एक लड़की को जब डर लगता है… तो कैसा लगता है — मैं समझती हूँ।” उसकी आवाज़ भर्रा गई जैसे। “और इसी दर्द ने मुझे प्रेरित किया।” उसने हाथ जोड़ दिए। “आप ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 16 — स्कूल बस
सुबह। अनाथालय का गेट खुला था। पीली स्कूल बस अंदर खड़ी थी। इंजन धीमे-धीमे घरघर कर रहा था। लड़कियाँ करके चुपचाप बस में चढ़ रही थीं। कोई बात नहीं कर रहा था। कल रात की घटना के बाद आँगन में जैसे डर की परत जम गई थी। बस के पास एक लंबा आदमी खड़ा था, नाम प्रभु। लगभग छह फुट लंबा। काला कोट-सूट। चेहरे पर कोई भाव नहीं। वह हाथ में छोटी डायरी लिए लड़कियों की गिनती कर रहा था। एक… दो… तीन… उसकी उँगली नामों पर चल रही थी। अचानक वह रुक गया। भौंहें सिकुड़ीं। “एक कम है।” ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 18 — निकलो वहां से
गोदाम। अँधेरे कमरे में बड़ी स्क्रीन चमक रही थी। सामने अनीश चुप खड़ा देख रहा था। टीवी चैनलों की एक के बाद एक चल रही थीं। एंकर चीख रहा था— “भिवंडी की दर्दनाक घटना! पच्चीस मासूमों को निगल गई नदी!” नीचे टिकर भाग रहा था— “शराबी ड्राइवर बना मौत का सौदागर।” “स्कूल बस हादसे में सभी बच्चियों के मारे जाने की आशंका।” अनीश कुर्सी पर झुका बैठा था। उसने सिर खुजलाया। “पर ज़ेरोइन… इसका हमारे क्लू से क्या लेना-देना?” स्क्रीन के दूसरे कोने में एन्क्रिप्टेड विंडो खुली थी। डिजिटल मास्क। ज़ेरोइन की बदली हुई आवाज़। “एल्गोरिथ्म पैटर्न सर्च का ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 17 — टूटा पुल
सुबह। पीली स्कूल बस हाईवे पर दौड़ रही थी। अंदर लड़कियाँ चुप बैठी थीं। कल रात का डर अभी हवा में था। कुछ देर बाद बस अचानक हाईवे छोड़कर एक संकरी सड़क पर मुड़ गई। एक लड़की ने धीरे से कहा — “भैया, ये रास्ता स्कूल का नहीं है…” ड्राइवर चुप रहा। कुछ किलोमीटर आगे बस रुक गई। सड़क किनारे एक ट्रक खड़ा था। चार आदमी इंतज़ार कर रहे थे। काली गाड़ी से प्रभु उतरा। बस का दरवाज़ा खुला। लड़कियों को जल्दी-जल्दी नीचे उतारा गया। रोना, घबराहट, दबे हुए चीख। उन्हें ट्रक के पीछे धकेल दिया गया। तिरपाल गिरा। ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 19 — तहक़ीक़ात
दो दिन बाद। नया अड्डा। शहर के दूसरे छोर पर एक और पुराना माल-गोदाम। चारों तरफ धूल जमी हुई बड़े-बड़े कंप्यूटर, स्क्रीन, मशीनें — सब पर प्लास्टिक के कवर पड़े थे। जैसे किसी ने जल्दी में सब यहाँ जमा कर दिया हो। बीच में एक मेज़ पर बैठा था जोगी। स्क्रीन पर लगातार सर्च विंडो खुल रही थीं। नवीना जांगिड़। एक पुरानी तस्वीर उभरी। “मिस जहानाबाद प्रतियोगिता — विजेता।” एक तंग स्विम-सूट में फोटो, कई साल पहले की। दूसरी फोटो। रैम्प पर चलती मॉडल। फिर कुछ सालों का खालीपन। गूगल के पन्नों पर बस एक लाइन— “सामाजिक कार्यकर्ता।” जोगी ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 20 — ज़ेरोइन
छेदीपुरा गाँव। पुरानी सराय का पिछला हिस्सा। एक कम रोशनी वाले कमरे में सभी लड़कियाँ फर्श पर बैठी थीं। एल्यूमिनियम की थालियाँ। दाल-चावल खा रही थीं। कोई बात नहीं कर रहा था। बस चम्मचों की हल्की आवाज़। और बीच-बीच में दबे हुए सिसकियों की आहट। सराय के भीतर एक दूसरा कमरा। उसे जल्दी-जल्दी कॉन्फ्रेंस रूम जैसा बना दिया गया था। टेबल। कुर्सियाँ। एक स्पीकर फोन। टेबल के उस पार बैठा था प्रभु। पास में एक लेडी डॉक्टर। दो नर्सें। स्पीकर फोन से आवाज़ आई। नवीना जांगिड़। “सभी लड़कियाँ medically fit चाहिए। कोई चोट, घाव, बीमारी नहीं। सभी को vaccine ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 21 — तोहफा
स्टोरेज यूनिट के भीतर चार बड़े मिलिट्री ड्रोन रखे थे। काले मैट फिनिश वाले भारी ढाँचे। चार-चार मोटे रोटर। गिम्बल पर लगे हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे। दो ड्रोन के पेट के नीचे छोटे लेकिन खतरनाक मशीन-गन मॉड्यूल भी फिट थे। सभी एक लंबी चार्जिंग स्टेशन रेल से जुड़े हुए थे। नीली लाइटें जल रही थीं। हर यूनिट के ऊपर छोटा इंडिकेटर— FULL CHARGE — 48 HOURS बीच की मेज़ पर एक टैबलेट कंट्रोल यूनिट रखी थी। साथ में एक लंबी रिमोट आर्म-बैंड कंट्रोल रिग— जिसे बाजू पर बाँधकर ड्रोन उड़ाया जा सकता था। अनीश ने चारों ड्रोन को देखते हुए धीमे ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 22 — छेदीपुरा अटैक
चार घंटे बाद का समय। छेदीपुरा गाँव से करीब तीन किलोमीटर दूर। सड़क किनारे घनी झाड़ियाँ। अनीश ने गाड़ी से कच्चे रास्ते पर उतारी और इंजन बंद कर दिया। रात गहरी थी। दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे। जोगी ने पीछे का दरवाज़ा खोला। डिक्की से पहला ड्रोन निकाला। भारी मशीन। चार मोटे रोटर। काले मैट फिनिश वाला ढाँचा। उसने बाजू पर कंट्रोल स्ट्रैप बाँधा। टैबलेट ऑन किया। स्क्रीन पर सिस्टम बूट हुआ। SYSTEM READY जोगी ने ड्रोन ज़मीन पर रखा। “लॉन्च करूँ?” अनीश ने दूर अंधेरे में झाँका। “कर।” जोगी ने अंगूठे से कंट्रोल दबाया। ड्रोन के रोटर ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 23 — छेदीपुरा रेस्क्यू
सराय के दरवाज़े टूटकर अंदर गिर चुके थे। अंदर पहले से तैयार खड़े थे— जॉन के विदेशी मर्सिनरी। और के आदमी। सबके हाथों में मशीनगन्स। एक पल के लिए सन्नाटा। फिर— तड़तड़तड़तड़!!! गोलियों की बौछार गाड़ी पर टूट पड़ी। शीशे चटक गए। लोहे की बॉडी पर गोलियाँ बरसने लगीं। अनीश और जोगी तुरंत गाड़ी से कूदे। दरवाज़ों के पीछे पोज़िशन ली। पर दुश्मनों का फायर-पावर इतना भारी था कि वे सिर भी नहीं उठा पा रहे थे। जॉन आगे बढ़ा। गोलियों की बारिश के बीच भी उसकी भारी आवाज़ सराय में गूँजी— “Come play with daddy… you bastards!” उसके ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 24 — नासूर
उधर— सराय जल चुकी थी। आग की लपटें आसमान को छू रही थीं। अनीश बुलेटप्रूफ बस को लिए छेदीपुरा आख़िरी गलियों से निकलकर अँधेरी सड़क पर दौड़ा जा रहा था। बस के अंदर डरी हुई लड़कियाँ सिमटी बैठी थीं। ऊपर आसमान में चारों ड्रोन उनके साथ उड़ रहे थे। — उसी समय… छेदीपुरा गाँव की दूसरी तरफ अँधेरी गलियों में डॉक्टर दीदी बाकी पाँच लड़कियों को लेकर भाग रही थी। साँसें तेज़। सबके कदम हड़बड़ाए हुए। पीछे कहीं दूर अभी भी गोलियों की आवाज़ गूँज रही थी। एक छोटी लड़की हाँफते हुए बोली— “दीदी… हमें कहाँ ले जा रही ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 26 — थप्पड़
कमरे में हल्की पीली रोशनी थी। दीवारों पर परछाइयाँ हिल रही थीं। त्रिशा जैकब्स अभी भी काला चोगा पहने थी। पर लाल दैत्य मुखौटा उसने उतार दिया था। टेबल पर रखा उसका फोन स्पीकर पर था। उधर से घबराई हुई आवाज़ आ रही थी— “म-मैडम… वो… वो निकल गए…” त्रिशा की आँखें सिकुड़ गईं। “क्या मतलब निकल गए?” उधर से वही आदमी लगभग रोते हुए बोला— “मैडम… हमारे बहुत से लोग मारे गए… पूरा हाईवे… आग लगी है… गाड़ियाँ उलटी पड़ी हैं…” त्रिशा ने दाँत भींचे। “जॉन? वो विदेशी?” फोन के उस पार कुछ सेकंड सन्नाटा रहा। फिर टूटी ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 25 — मोटरबाइक युद्ध
हाईवे पर बस दहाड़ती हुई दौड़ रही थी। पीछे धूल का गुबार उठ रहा था। रियर-व्यू मिरर में जोगी देखा— मोटरसाइकिलों का पूरा झुंड अब काफी करीब आ चुका था। बीस… शायद पच्चीस। सब फैलकर दौड़ रहे थे। जोगी ने ड्रोन कंट्रोल टैबलेट उठाई। “आ गए बाराती।” अनीश ने स्टीयरिंग कसकर पकड़ा। “पकड़ कर बैठो सब!” बस और तेज़ हो गई। पीछे— एक काली SUV तेज़ी से आ रही थी। सनरूफ से ऊपर निकला था— जॉन। गंजे सिर पर सूखा खून। चेहरे के किनारे पड़ा नील। आँखों में ज्वलंत क्रोध। उसने अपने रेडियो पर गरजकर कहा— “कोई बस पर ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 27 — अदालत
गाल पर हाथ रखे नवीना पीछे हटने लगी। फिर अचानक भीड़ चीरकर भागी। रिपोर्टर उसके पीछे दौड़ पड़े। “मैडम दीजिए!” “क्या ये सच है?” “मैडम!” नवीना अपनी कार तक पहुँची। दरवाज़ा खोला और अंदर कूद गई। ड्राइवर ने गाड़ी झटके से आगे बढ़ा दी। एक रिपोर्टर दरवाज़े से चिपक गया। दूसरा बोनट पर गिर पड़ा। पर कार तेज़ी से निकल गई। पीछे रह गया— उबलता हुआ मीडिया। अब सारे कैमरे फिर मुड़े— अनीश और जोगी की तरफ। लड़कियाँ खुद उन्हें आगे खींचकर लाई। एक लड़की ने काँपती आवाज़ में कहा— “इन लोगों ने हमें बचाया है।” कुछ सेकंड सन्नाटा ...Read More
Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 28 — न्याय
जज की आवाज़ कोर्टरूम में गूँज रही थी। “अदालत ने प्रस्तुत सबूतों, गवाहों और पुलिस की जाँच रिपोर्ट का किया है।” कमरे में साँसें थम गईं। “इस मामले में प्रस्तुत अधिकांश सबूत कमज़ोर हैं, सर्कमस्टांशियल हैं।” “मुख्य गवाह—” उन्होंने फ़ाइल से नज़र उठाई। “वर्षा— लापता है।” कोर्टरूम में हल्की फुसफुसाहट हुई। जज ने हथौड़ा मेज़ पर हल्का सा ठोका। “शांति रखिए।” फिर बोले— “पुलिस की जाँच… लापरवाहियों से भरी हुई है।” सरकारी वकील की आँखें झुक गईं। जज की आवाज़ अब पहले से भारी थी। “और इस अदालत के सामने यह तथ्य भी है कि अभियुक्तों ने अपनी जान ...Read More