चार घंटे बाद का समय।
छेदीपुरा गाँव से करीब तीन किलोमीटर दूर।
सड़क किनारे घनी झाड़ियाँ।
अनीश ने गाड़ी धीरे से कच्चे रास्ते पर उतारी और इंजन बंद कर दिया।
रात गहरी थी।
दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे।
जोगी ने पीछे का दरवाज़ा खोला।
डिक्की से पहला ड्रोन निकाला।
भारी मशीन।
चार मोटे रोटर।
काले मैट फिनिश वाला ढाँचा।
उसने बाजू पर कंट्रोल स्ट्रैप बाँधा।
टैबलेट ऑन किया।
स्क्रीन पर सिस्टम बूट हुआ।
SYSTEM READY
जोगी ने ड्रोन ज़मीन पर रखा।
“लॉन्च करूँ?”
अनीश ने दूर अंधेरे में झाँका।
“कर।”
जोगी ने अंगूठे से कंट्रोल दबाया।
ड्रोन के रोटर घूमने लगे।
पहले धीमे।
फिर तेज़।
रॉटर्स की मद्धम गूँज।
कुछ सेकंड बाद ड्रोन धीरे-धीरे ऊपर उठ गया।
पाँच फुट।
दस फुट।
फिर सीधे आसमान में चढ़ने लगा।
टैबलेट की स्क्रीन पर लाइव कैमरा खुल गया।
पहले काली ज़मीन।
फिर पेड़।
फिर धीरे-धीरे पूरा इलाका दिखने लगा।
ड्रोन ऊपर चढ़ता गया।
पचास मीटर।
सौ मीटर।
अब छेदीपुरा गाँव साफ दिखाई दे रहा था।
अँधेरे में डूबा छोटा सा गाँव।
लेकिन बीच में—
एक जगह तेज़ रोशनी थी।
पुरानी सराय।
जोगी ने कैमरा ज़ूम किया।
सराय के बाहर चार हथियारबंद आदमी।
दो मोटरसाइकिलें।
एक जनरेटर।
और बगल में खड़ी थी—
एक बड़ी बस।
सफ़ेद।
साइड में टूरिस्ट कंपनी का नकली लोगो।
काले टिंटेड ग्लास।
अनीश ने ध्यान से देखा।
“यहाँ क्यों खड़ी है?”
जोगी ने कैमरा और ज़ूम किया।
बस के नीचे मोटे टायर।
बॉडी मोटी।
उसने धीरे से कहा—
“ये नॉर्मल बस नहीं है।”
कुछ सेकंड स्क्रीन देखता रहा।
फिर बोला— “बुलेटप्रूफ है।”
अनीश की आँखें सिकुड़ गईं।
धीरे से मुस्कुराया। “यही हमारे काम आएगी।”
ड्रोन ऊपर मंडरा रहा था।
टैबलेट स्क्रीन पर पूरा छेदीपुरा खुल चुका था।
जोगी ने थर्मल विज़न ऑन किया — “अंदर करीब पंद्रह गार्ड होंगे।”
अनीश ने बंदूक उठाई।
“पहले ड्रोन को ऊपर उठाओ।
गाँव के कमज़ोर हिस्से और निकलने के रास्ते पढ़ते हैं।
इतने में दूसरे ड्रोन को भी उड़ाओ बारूद लगाकर।
कुछ तो इस्तेमाल करेंगे।”
जोगी ने टैबलेट पर उँगलियाँ घुमाईं।
गाड़ी में पड़ा एक और ड्रोन हरकत में आ गया।
जोगी ने उसके नीचे ग्रेनेड मॉडल फिट किया।
तेज़ी से लॉन्च किया।
—
पहला ड्रोन अब गाँव के काफी ऊपर मंडरा रहा था।
अनीश ने बाहर निकलने का रास्ता साफ़ मार्क कर लिया था।
जोगी ने कैमरा घुमाया।
सराय से थोड़ा दूर—
एक छोटा पावर स्टेशन दिखाई दिया।
लोहे की जाली।
अंदर ट्रांसफॉर्मर।
मोटे केबल पूरे गाँव में जा रहे थे।
जोगी बोला— “यही है पूरे गाँव की सप्लाई।”
अनीश ने स्क्रीन देखी।
“इसे उड़ा दें तो अफरातफरी मच जाएगी।”
जोगी ने दूसरा ड्रोन पावर स्टेशन के ठीक ऊपर पहुँचा दिया।
अनीश — “इसे स्टैंड बाइ पर रख, जैसे ही हम गाँव में घुसे, बूम कर देना।”
उसने गाड़ी स्टार्ट की।
इंजन गरजा।
गाड़ी झाड़ियों से निकलकर सीधे कच्चे रास्ते पर आ गई।
—
उसे समय सराय का कॉन्फ्रेंस रूम, ऊपर की तेज़ रोशनी से जगमगा रहा था।
टेबल के सामने बैठा था—
जॉन।
बगल में प्रभु।
टेबल पर रखी बड़ी टीवी स्क्रीन तीन हिस्सों में बंटी थी।
पहली स्क्रीन पर— नवीना जांगिड़।
सफ़ेद साड़ी।
बड़ी बिंदी।
चेहरे पर वही शांत मुस्कान।
दूसरी स्क्रीन— त्रिशा जैकब्स।
पुलिस कमिश्नर।
आज यूनिफॉर्म में नहीं थी।
सफ़ेद कमीज़।
खुले बाल।
जैसे सोने की तैयारी में हो।
तीसरी स्क्रीन— सिर्फ एक स्त्री का साया।
कमरा अंधेरा।
चेहरा दिखाई नहीं पड़ रहा था।
बस एक धुँधली आकृति।
जॉन ने स्क्रीन की तरफ देखा।
“हम कल सारा लड़की का शिपिंग करेगा।”
उसने प्रभु की तरफ इशारा किया।
“Mister Praaabyu here, helped a lot।”
प्रभु हल्का झेंप गया।
नवीना मुस्कुराई।
“प्रभु तो है ही हमारे भरोसेमंद।”
त्रिशा बोली— “हमारी तरफ से ऑल-क्लियर है।
किसी नाके पर गाड़ी नहीं रोकी जाएगी।
रनवे स्ट्रिप तक ग्रीन कॉरिडोर समझिए।”
जॉन ने थोड़ी टूटी हिंदी में पूछा—
“वो दो लोग… Are they going to trouble us?”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
त्रिशा ने गहरी साँस ली।
“उनके आख़िरी अड्डे पर हमने लोग भेजे थे।
वहाँ ब्लास्ट हुआ।
कौन बचा… कहना मुश्किल है।”
जॉन ने अचानक मेज़ पर मुक्का मारा।
धम।
“Just two men… तुम उन्हें स्टॉप नहीं कर सकते?”
उसकी आवाज़ भारी हो गई।
“Let me know if I need to call in some muscle?”
इससे पहले कोई जवाब देता—
तीसरी स्क्रीन से हल्की हिस्स की आवाज़ आई।
साये वाली औरत—स्वामिनी।
धीमी।
फुसफुसाती।
नवीना की पलकें अनायास झुक गईं।
त्रिशा सीधी होकर बैठ गई।
स्वामिनी बोली—
“John… Focus on what is in front of you… जो होगा… देखा जाएगा।”
कमरे में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया।
हट्टे-कट्टे जॉन के चेहरे पर भी एक पल को डर झलक गया।
उसने हल्का-सा गला साफ किया।
“Okay, ma’am.”
फिर बोला—
“We’re ready, ma’am.”
—
ठीक उसी समय अनीश और जोगी तीव्र गति से गाँव की बाउंड्री में घुस चुके थे।
दो लठैत उनके पीछे भागे।
“अरे गाड़ी!
रोक साले को!”
अनीश ने एक्सेलेरेटर दबाया —
“Drop now!”
जोगी ने ग्रेनेड से लैस ड्रोन पर कमांड भेजी।
नीचे लगे दो ग्रेनेड्स की पिन अलग हुई।
टक।
ग्रेनेड गिरे।
एक सेकंड।
दो।
फिर— धड़ाम!!!
ट्रांसफॉर्मर आग के गोले में फट गया।
चिंगारियाँ आसमान में उड़ीं।
और अगले ही पल—
पूरा छेदीपुरा अँधेरे में डूब गया।
गाँव में अफरा-तफरी मच गई।
“लाइट चली गई!”
“क्या हुआ?”
—
अंदर कॉन्फ्रेंस रूम की लाइट एक पल को झपकी… और बुझ गई।
एक सेकंड का अँधेरा।
फिर जनरेटर की घरघराहट सुनाई दी।
लाइट वापस जल उठी।
पर तब तक कॉल कट चुकी थी।
स्क्रीन काली पड़ चुकी थी।
प्रभु चौंककर खड़ा हो गया।
जॉन तुरंत उठ खड़ा हुआ।
उसने अपनी हैंडगन निकाली और कॉक की।
“Those bastards are here.”
और उसी पल—
छेदीपुरा का हमला शुरू हो चुका था।
सराय के अंदर की सारी बत्तियाँ जल रही थीं।
पर पूरे गाँव में अब भी घना अँधेरा पसरा था।
—
अँधेरे में अनीश की गाड़ी तेज़ी से सराय की ओर बढ़ रही थी।
लठैत पीछे छूट चुके थे।
कुछ सेकंड बाद—
सराय का बड़ा लकड़ी का दरवाज़ा सामने था।
अनीश ने एक्सेलेरेटर दबा दिया।
“पकड़ कर बैठ जोगी!”
गाड़ी ने पूरी ताकत से दरवाज़ा तोड़ दिया।
लकड़ी के तख्ते उड़ते हुए अंदर गिरे।
गाड़ी सीधे सराय के आँगन में घुस गई।
लेकिन अंदर जो उनका इंतज़ार कर रहा था…
उसके लिए वे तैयार नहीं थे।
बिल्कुल भी नहीं।
— जारी —
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