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Part 16 डायरी का अगला पन्ना पलटते ही मेरे चेहरे पर एक सुकून-सी मुस्कान आ गई। पिछ...
सुखपुर नाम का वह गाँव कभी अपनी असीम हरियाली, लहलहाते खेतों और आपस में मिल-जुलकर...
(सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही है। सिमरन नींद से उठती है, उसका चेहर...
संस्मरण :_ अपने अपने नामवर ----------------------------------------- "तुम्...
अपने सारे मन में चल रहे विचारों को साइड रखते हुए मान्या सोफे पर बैठ जाती है... र...
रणविजय ने अंकिता को बिस्तर पर धक्का दिया और गुस्से से उसकी ओर बढ़ा। उसने उसका जब...
शहद की गुड़िया - प्रकरण -61 " दादू! अर्जु...
पुस्तक चर्चाप्रबोध जी पर विभिन्न एंगल से साहित्यिक सामाजिक शोध बोध चर्चा : विवेक...
आर्यमन की उलझन और पिघलती बर्फआर्यमन का आंतरिक संघर्षपूरे दिन कानपुर की गलियों मे...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल...
धनबाद शहर , जहां के सड़को पर अशोक और राजबीर एक building से बाहर भागते हूए दिखता है । दोनो बाप बेटा शहर मे लड़कियों की smuggling और ड्रग्स का धंधा करता है , पर रुद्रा और एंथोनी जो अ...
राणा जैसे ही कमरे में प्रविष्ट हुआ तो चौंक उठा राज के सिर पर पट्टी बंधी हुई थी।उसके पास बैठते हुए राणा बोला, क्या रात में दीवार के साथ सिर टकराया था ?हां।अगर यह सच है तो तुम्हें पा...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
रात का गहरा अंधेरा चारों तरफ फैला हुआ था। सड़क लगभग सुनसान थी। दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। एक काली कार तेज़ रफ्तार से सड़क पर दौड़ी चली जा रही थी। उसकी हेडलाइट...
खिड़की खुली जरा, जरा परदा सरक गया बहोत ही खबसूरत सा गाना सोनू नीगम का गाया हुआ रेडिओ पर बज रहा था और तभी रोडपर हंगामा हो गया. कोई राह चलता हुआ युवक एक महिला से टकरा गया जो सब्जीमंड...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...
शिवपुर। एक ऐसा शहर… जहाँ रातें गोलियों की आवाज़ से शुरू होती थीं और लाशों पर खत्म। यहाँ लोग नाम से नहीं, गिरोह से पहचाने जाते थे। कानून सिर्फ दीवारों पर टंगे पोस्टरों में जिंदा...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
"प्यार, दोस्ती और अंतहीन सस्पेंस से बुनी एक ऐसी दास्तान, जहाँ हर कदम पर एक नया राज़ छिपा है। तीन दोस्त—अमन, कबीर और ज़ोया, जिनकी ज़िंदगी एक आलीशान कॉटेज में हमेशा के लिए बदल जा...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
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