मकान का पिछला बरामदा छोटा था।
ढके हुए कूलर।
पुराने एसी के आउटडोर यूनिट।
टूटे गमले।
अनीश ने सिक्योरिटी गार्ड का मुँह रुमाल से कसकर दबा रखा था।
गार्ड छटपटा रहा था।
कुछ सेकंड।
फिर शरीर ढीला पड़ गया।
अनीश ने उसे धीरे से ज़मीन पर लिटाया।
“Clear,” उसने फुसफुसाया।
कमर के पीछे खोंसी हैंडगन निकाली।
बाकी तीनों दीवार फाँदकर बरामदे में आ चुके थे।
अनीश ने पीछे का दरवाज़ा हल्के से धक्का दिया।
चर्र…
रुका।
साँस रोकी।
कोई हलचल नहीं।
हाथ से इशारा।
चारों अंदर घुसे।
लंबा गलियारा।
दीवारों पर उतरता पेंट।
नमी के धब्बे।
अंत में एक बड़ा हाल।
दरवाज़ा आधा खुला।
अनीश ने उँगलियाँ उठाईं।
एक।
दो।
तीन।
चारों अंदर घुसे।
और तभी—
सड़ी हुई, मीठी, गंदी बदबू।
जोगी ने सहज ही नाक ढक ली।
छत पर डिम बल्ब।
पीली, बीमार रोशनी।
सामने लंबी लकड़ी की मेज़।
उस पर कतार में जली मोमबत्तियाँ।
हर मोमबत्ती के सामने—
पत्तों के दोने।
हर दोने में अधखाई जलेबियाँ।
काली पड़ी।
कुछ पर सफ़ेद फफूँद।
एक…
दो…
पाँच…
दस…
बीस…
जैसे गिनती रखी गई हो।
जैसे ट्रॉफियाँ।
अनीश की आँखों में खून उतर आया।
“हरामज़ादा…”
तभी—
कोने में लाल बत्ती।
चमकती।
बुझती।
अनीश फुसफुसाया—
“CCTV…”
और उसी क्षण—
धड़ाम!
दूसरा दरवाज़ा पूरी ताक़त से खुला।
एक विशाल शरीर।
हाथ में भारी तलवार।
वह दहाड़ता हुआ उनकी तरफ़ दौड़ा।
“आ गए तुम लोग!”
अनीश ने instinct में गोली चलाई।
धाँय।
गोली उसके पेट में लगी।
पर वह रुका नहीं।
रफ्तार थोड़ी डगमगाई—
पर कदम नहीं।
उसने पूरी ताक़त से तलवार घुमाई।
अनीश का साथी उसे धक्का देता है।
तलवार हवा चीरती हुई निकली—
और साथी की कमीज़ व पीठ की चमड़ी छील गई।
खून की लकीर।
अनीश और साथी दोनों गिर पड़े।
जोगी ने बंदूक तानी—
पर दैत्य ने हाथ मारकर उसे झटका दिया।
गन फर्श पर फिसल गई।
उसने जोगी की गर्दन जकड़ ली।
दूसरे पुलिसवाले ने पीछे से गन की बट उसके सिर पर मारी।
धप्प।
पर गोली खाए आदमी में अजीब ताक़त थी।
उसने ज़ोरदार हाथ घुमाया—
और पुलिसवाला मोमबत्तियों और जलेबी वाले दोनों पर जा गिरा।
मोमबत्तियाँ बिखर गईं।
मोम फर्श पर।
फफूँद लगी जलेबियाँ पैरों तले कुचल गईं।
दैत्य ने अब जोगी की गर्दन और कस ली।
वह ताक़त में भारी था।
जोगी दीवार से जा टकराया।
साँस अटकने लगी।
तभी—
ट्र-ट्र-ट्र।
पीछे से गोलियों की आवाज़।
राज लढवान दरवाज़े में खड़ा था।
हाथ में पिस्टल।
चेहरे पर पागलपन।
“मेरे घर में घुसते हो सालों!”
गोलियाँ दीवारों से टकराईं।
स्पार्क्स।
अनीश लुढ़ककर साइड में गया।
जवाबी गोली चलाई।
राज पीछे हटा।
उधर—
जोगी ने आख़िरी ज़ोर लगाया।
दैत्य का हाथ अपनी गर्दन से हटाकर हल्का मोड़ा, और नीचे से घूमकर उसी की गर्दन पकड़ ली।
फिर अपने पूरे शरीर का वज़न अकस्मात् उस पर डाल दिया।
एक सूखी-सी आवाज़।
कड़क।
दैत्य का शरीर ढीला।
वह ज़मीन पर गिर पड़ा।
निर्जीव।
कुछ सेकंड।
सिर्फ़ भारी साँसें।
बारूद की गंध।
जली हुई मोम।
राज एक कोने में दुबका देख रहा था।
भागने को मुड़ा।
अनीश ने भागकर उसके पैर में अड़ंगी लगाई।
राज हवा में हल्का उछला,
जोगी तेज़ी से उठा, राज को हवा में ही पकड़ा और ज़ोर से पीठ के बल फर्श पर दे मारा।
पिस्टल गिर गई।
राज अपनी पीठ पकड़कर लेटा रह गया, एक चूँ मुंह से नहीं निकली, पर चेहरा बता रहा था कि दर्द बेहिसाब था।
अनीश और दोनों साथी उठ चुके थे।
राज को कुर्सी से बाँधा गया।
रस्सी कसकर।
उसके होंठ फटे थे।
दाँतों से खून रिस रहा था।
वह हँस रहा था।
धीरे-धीरे।
“तुम लोग मेरी मम्मी को जानते नहीं हो…
यहाँ की बाहुबली वही है।”
अनीश ने अपनी कमीज़ की बाहें मोड़ीं।
एक ज़ोरदार थप्पड़।
राज ने टूटा हुआ दाँत एक ओर थूक दिया। दाँत खून से सने।
चीखा, “सालों… मेरी माँ डायन है… खा जाएगी तुम सबको।”
अनीश ने जोगी को इशारा किया— “सबूत बना, फौजी।”
जोगी ने फोन निकाला।
रिकॉर्डिंग चालू।
क्लोज-अप—
बंधा हुआ राज।
“देखिये ये है राज लढवान, मासूम लड़कियों का हत्यारा।”
फिर फोन घुमाया।
फफूँद लगी जलेबियाँ।
मोमबत्तियाँ।
खून।
वह बोलता जा रहा था।
दो मिनट की रिकॉर्डिंग के बाद बटन क्लिक किया।
—
उधर
बस शहर में प्रवेश कर रही थी।
वर्षा ने वीडियो खोला।
उसकी आँखों में ठंडी चमक।
हल्की मुस्कान।
धीरे से बोली— “We got you.”
—
हॉल में मोमबत्तियों की लौ अब भी काँप रही थी।
जोगी राज के सामने खड़ा था।
बंदूक उसकी जाँघ से सटी हुई।
अनीश ने इशारा किया।
“तू यहीं रुक।
हम बाकी घर देखते हैं।”
दोनों पुराने पुलिसवाले उसके साथ हो लिए।
घर की तलाशी शुरू हुई।
पहला कमरा।
हल्का-सा ड्रॉइंग रूम।
सस्ता सोफ़ा।
काँच की सेंटर टेबल।
कुछ नहीं।
दूसरा कमरा।
एक बड़ा फ्रिज।
अनीश ने दरवाज़ा खोला।
ठंडी भाप निकली।
अंदर—
मांस के बड़े टुकड़े।
कटे हुए।
पॉलीथीन में लिपटे।
कुछ खुले।
साथी ने पूछा— “ये क्या है?”
अनीश ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“पता नहीं।
फॉरेंसिक देखेगा।”
फ्रिज बंद।
तीसरा कमरा।
अलमारी अस्त-व्यस्त।
कपड़े बिखरे।
बिस्तर उलझा।
टेबल पर— तीन लैपटॉप।
दो डेस्कटॉप कंप्यूटर।
हार्ड-डिस्क ड्राइवों का ढेर।
कम से कम आठ।
अनीश की आँखें ठंडी हो गईं।
“इन सबको ज़ब्त करना होगा।”
साथी खिड़की तक गया।
बाहर झाँका।
“लठैत गायब हैं।”
दूसरे ने कहा— “गोलियों की आवाज़ से भाग गए होंगे।”
अनीश रुका।
धीरे बोला— “या किसी को खबर करने गए होंगे।”
तीनों की आँखें मिलीं।
कमरे में एक भारी चुप्पी उतर आई।
—
वापस हॉल में
राज कुर्सी से बँधा था।
जोगी उसके सामने खड़ा। चेहरे पर तीव्र नफरत।
“क्यों किया रे हैवान ये सब?”
राज ने गर्दन टेढ़ी की।
आँखें चमकीं।
धीमे से हँसा।
“क्योंकि मुझे परियाँ पसंद हैं।”
एक पल।
फिर फुसफुसाया—
“तू नहीं समझेगा।
तू मेरी तरह फरिश्ता नहीं है।”
जोगी की मुट्ठी कस गई।
उसने खुद को रोका।
“फरिश्ता?”
राज की हँसी और पागल हो गई।
“हम उन्हें ऊपर भेजते हैं।
पवित्र करते हैं।”
मोमबत्ती की लौ उसके चेहरे पर पड़ रही थी।
उसकी आँखें सच में खाली थीं।
—
शहर में बस पहला स्टॉप पार कर रही थी।
वर्षा अचानक उठ खड़ी हुई।
“यहीं रोकिए।”
बस रुकी।
वह उतरी।
सड़क पर ट्रैफिक।
शहर की गंध।
हॉर्न।
उसने तुरंत टैक्सी रोकी।
“कहाँ जाना है मैडम?” ड्राइवर ने पूछा।
वर्षा ने फोन निकाला।
दो सेकंड सोचा।
पहले ऑफिस जाने का ख्याल आया।
रुकी।
फिर स्क्रीन ड्राइवर को दिखाई।
“इस पते पर।”
स्क्रीन पर लिखा था— अपराजिता लढवान, आधिकारिक निवास।
ड्राइवर ने सिर हिलाया।
गाड़ी चल पड़ी।
—
उधर गाँव वाली कोठी में, अनीश हार्ड-डिस्क एक बैग में भर रहा था।
जोगी राज को घूर रहा था।
राज मुस्कुरा रहा था।
और दूर कहीं— सायरन की बहुत हल्की आवाज़।
अभी साफ़ नहीं।
पर आ रही थी।
— जारी —