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New bites

The upcoming Satsang and Gnanvidhi is happening in Pune, India.

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dadabhagwan1150

पति बोला —
“घर टूटने की वजह पत्नी ही होती है!”

पत्नी मुस्कुराकर बोली —
“क्या तुमने मधुमक्खी का छत्ता देखा है?”

“मधुमक्खी तब तक नहीं काटती
जब तक कोई उसके छत्ते को छेड़े नहीं।

लेकिन जैसे ही कोई
उसका
छत्ता गिराने की कोशिश करता है,
वह अपने घर को बचाने के लिए
काटने के लिए पीछे पड़ जाती है

“ठीक वैसे ही पत्नी भी होती है…
वह झगड़ा घर तोड़ने के लिए नहीं करती,
बल्कि अपने घर बसाने के लिए लड़ती है।”

✨ इसलिए पत्नी को दोष देने से पहले
यह समझो कि वह लड़ क्यों रही है।

archanalekhikha

#तुम_बिन ❣️
जितना आसान है
अपनी आँखें बंद कर
तुमको अपने पास
महसूस कर लेना
और उतना ही कठिन
खुली आँखों से
तुम बिन यूँ अकेले जीना।✍️❣️

narayanmahajan.307843

किसी की पसंद होना कोई बड़ी बात नहीं..
कब तक रहते हो पसंद ये बड़ी बात है..

momosh99

Time for Breakfast

kattupayas.101947

Charlie Chaplin is the best example for enjoying life even in the sad part of life. life is crazy and believe in future

kattupayas.101947

જેમના માટે હું જગત જીતવા નીકળ્યો હતો....

એમણે જ મારી હારનો હવાલો આપી દીધો......

ગયો હું ફરિયાદ કરવા એ ખુદા જોડે, એમને પણ કહ્યું તારા જ વ્યક્તિએ તને ત્યજી દીધો......

જિંદગી ની "યાદ"

ajit3539

मिलने आया था आपको के आप बहोत दुःखी हो जानकर l
आकर देखा आपने दोस्त समझकर,आप बहोत सुखी हो देखकर ।।
- वात्सल्य

savdanjimakwana3600

Colourful life VS Minimalist life

How far our choices have changed. Our living standards, and even our lives, shifted from colourful to black and white. We lost colours... Choose to be minimalist in everything.... Modernity is now minimalistic, not detailed. We lost structure, art, and so on. Now, more seems like a mess, and less seems like perfection.

- Vishakha

mothiyavgmail.com3309

Nitish Kumar और Narendra Modi दोनों 100% देशी-विदेशी एलीट लोगों के प्रति वफादार हैं। फिर देशी-विदेशी एलीट लोगों ने नीतीश कुमार से इस्तीफा क्यों दिलवाया?
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जल्द ही कई मुस्लिम देशों को मजबूर होकर ईरान के साथ मिलकर अपनी सेना के साथ युद्ध में शामिल होना पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो सकता है। जो पाकिस्तानी सेना पर दबाव डाले कि वह ईरान की सेना का पूरी तरह समर्थन करे और युद्ध में उसका पूर्ण सहयोगी बन जाए।

जब तीसरा विश्व युद्ध (WW3) शुरू होगा, तब विदेशी एलीट चाहते हैं कि भारत में धर्म के आधार पर एक बड़ा गृहयुद्ध हो।

ताकि हिंदुओं को यह समझाया जा सके कि वे अमेरिका-यूके-पश्चिमी देशों (US-UK-WME) के आक्रमण का सक्रिय रूप से समर्थन करें। क्योंकि अगर भारत में कोई गृहयुद्ध नहीं होगा, तो अधिकांश हिंदू तटस्थ (न्यूट्रल) रहने का समर्थन करेंगे।
.

यह ओरिजनल पोस्ट Rahul Mehta द्वारा लिखा गया है, जिसे मैने हिंदी में अनुवाद किया है। राहुल मेहता जी ने हीं भारत में पहली बार - EVM BLACK CLASS डेमो मशीन का आविष्कार किया है।।

sonukumai

कोई अपना होता तो करते भी बात उसकी..
गैरों की बात करना भी भला कोई बात हुईं..

momosh99

Goodnight friends.. sweet dreams

kattupayas.101947

“जयपुर की बारिश में खोई यादें”जयपुर ट्रिप के दौरान अचानक अपने एक्स-हस्बैंड से मिलने के बाद, मैं कमज़ोर हो गई और उनके साथ एक मज़ेदार रात बिताई…
जयपुर की वह रात असामान्य रूप से शांत थी, लेकिन आसमान जैसे अपने भीतर दबे हुए किसी दर्द को बरसात की मोटी बूंदों में बाहर निकाल रहा था। मानसून की बारिश होटल की ऊँची खिड़कियों से टकराकर ऐसी आवाज़ कर रही थी मानो किसी पुराने गीत की उदास धुन बज रही हो।

मैं होटल के बार के कोने में अकेली बैठी थी।

मेरे सामने आधी पिघली हुई मार्गरीटा का गिलास था। उसके किनारों पर जमी नमक की परत धीरे-धीरे नमी से घुल रही थी। सॉफ्ट जैज़ म्यूज़िक हल्के-हल्के बज रहा था, और उसके साथ मिलकर बारिश की बूंदें एक अजीब सा सुकून और उदासी पैदा कर रही थीं।

मेरा नाम अनिका है।

चौंतीस साल की, एक सफल महिला, अपनी मेहनत से बनाई हुई जिंदगी के साथ। लोग कहते हैं मैं मजबूत हूं, आत्मनिर्भर हूं। लेकिन सच यह है कि कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो बाहर से नहीं दिखते।

तीन साल पहले मेरा तलाक हुआ था।

कागज़ पर वह बस एक कानूनी प्रक्रिया थी। लेकिन दिल के अंदर… वह किसी तूफान से कम नहीं था। तीन साल बीत चुके थे, फिर भी कुछ यादें ऐसी थीं जो पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं।

मैं जयपुर काम के सिलसिले में आई थी — कम से कम यही आधिकारिक वजह थी।

असल में, शायद मैं अपने खाली अपार्टमेंट से भागना चाहती थी। उन दीवारों से, जो अभी भी अतीत की गूंजों से भरी हुई थीं।

घड़ी ने रात के ग्यारह बजाए।

मैंने गिलास को हल्के से घुमाया और खिड़की के बाहर गिरती बारिश को देखने लगी।

तभी अचानक मेरे पीछे से एक आवाज़ आई।

“अनिका? क्या वह तुम हो?”

मेरे हाथ वहीं रुक गए।

वह आवाज़…

मेरी रीढ़ में जैसे ठंडी लहर दौड़ गई।

यह आवाज़ इतनी परिचित थी कि एक पल के लिए मुझे लगा मैं सपना देख रही हूँ। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन मैं तुरंत मुड़ी नहीं।

क्योंकि अगर मैं मुड़ती… और वह वही होता… तो?

धीरे-धीरे मैंने अपनी कुर्सी घुमाई।

और अगले ही पल मेरी सांसें रुक गईं।

मेरे सामने खड़ा था—

अर्जुन।

मेरा पूर्व पति।

तीन साल पहले अदालत के उस ठंडे कमरे में जिस आदमी ने मेरी जिंदगी से हमेशा के लिए निकल जाने का फैसला सुनाया था… वही आदमी आज मेरे सामने खड़ा था।

वह पहले से भी ज्यादा परिपक्व और आकर्षक लग रहा था। नेवी ब्लू सूट, हाथ में रेड वाइन का गिलास, और चेहरे पर वही आधी मुस्कान… जो कभी मेरे दिल की धड़कन बढ़ा देती थी।

“अर्जुन…?” मेरे मुंह से बस इतना ही निकल पाया।

वह मुस्कुराया और मेरे पास वाली कुर्सी खींचकर बैठ गया।

“कितना अजीब संयोग है,” उसने कहा। “तीन साल बाद… और तुम यहाँ।”

उसकी खुशबू हवा में घुल रही थी — वही चंदन की हल्की खुशबू जिसे मैं कभी पहचान सकती थी, चाहे भीड़ कितनी भी बड़ी क्यों न हो।

पहले कुछ मिनट अजीब चुप्पी में बीते।

फिर बातचीत शुरू हुई।

पहले औपचारिक सवाल — काम कैसा चल रहा है, जिंदगी कैसी है, स्वास्थ्य कैसा है। लेकिन जैसे-जैसे शराब के घूंट बढ़ते गए, बातचीत भी गहराई में उतरने लगी।

अर्जुन ने बताया कि वह अब दिल्ली में रहता है। उसका रियल एस्टेट बिज़नेस बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स, विदेश यात्राएं, नए अवसर।

मैं बस सुनती रही।

कभी-कभी उसकी आँखें मेरी आँखों में टिक जातीं, जैसे वह मेरे चेहरे पर कोई पुरानी याद ढूंढ रहा हो।

फिर उसने अचानक पूछा—

“और तुम? तुम्हारी जिंदगी में कोई नया है?”

मैं हँस पड़ी।

“नहीं,” मैंने कहा। “शायद काम ही काफी है।”

अर्जुन ने गहरी सांस ली।

फिर उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया… और मेरे हाथ को हल्के से छू लिया।

उस स्पर्श में कुछ ऐसा था जिसने मेरे अंदर दबी हुई यादों को जगा दिया।

“अनिका…” उसने धीमी आवाज़ में कहा।

“मुझे माफ कर दो।”

मैं ठिठक गई।

क्योंकि तीन साल में पहली बार… अर्जुन ने अपनी गलती स्वीकार की थी।

उसकी आँखों में पछतावा था।

या शायद… मुझे ऐसा लगा।

उस रात बारिश बाहर गिरती रही, संगीत बजता रहा… और हमारी बातचीत धीरे-धीरे हमें उस अतीत के करीब ले जाने लगी जिसे हमने कभी पीछे छोड़ दिया था।

लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह मुलाकात सिर्फ एक संयोग नहीं थी…

बल्कि एक ऐसी रात की शुरुआत थी जो मेरी जिंदगी की सबसे खतरनाक सच्चाई को सामने लाने वाली थी।
👉👉कृपया पूरी कहानी कमेंट सेक्शन में पढ़ें।👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu

rajukumarchaudhary502010

https://youtube.com/shorts/2bUHfy6-GgQ?si=kdtmYrP8fbq4GJbf

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jaiprakash413885

વાર્તા ૩૫: ૧૦ હેડફોન (The Loop)
​તેણે ધીમેથી પોતાના હેડફોન કાન પર ચઢાવ્યા અને બહારના ઘોંઘાટને જાણે એક જ સેકન્ડમાં સ્વીચ ઓફ કરી દીધો. બસ ટર્મિનલની ભીડ, રિક્ષાના હોર્ન અને લોકોની નકામી વાતો—બધું જ એકાએક શાંત થઈ ગયું. હવે તેની પાસે પોતાની એક ખાનગી દુનિયા હતી, જેમાં માત્ર તે અને તેનું ગમતું સંગીત હતું.
​પ્લેલિસ્ટમાં સેંકડો ગીતો હોવા છતાં, તેની આંગળીએ એ એક જ ગીત પસંદ કર્યું. એ ગીત જે તેના હૃદયના કોઈ ખૂણે ધરબાયેલી યાદને ફરી જીવતી કરતું હતું. તેણે 'રીપીટ' બટન દબાવ્યું. ગીત લૂપ પર શરૂ થયું.
​આખી દુનિયાથી કપાઈ જવું કેટલું સહેલું છે ને? બસ, બે ઈયરબડ્સ કાનમાં નાખો અને તમે તમારા ભૂતકાળમાં, તમારા સપનામાં કે તમારી કોઈ અધૂરી ઈચ્છામાં ખોવાઈ શકો છો. લૂપ પર વાગતું એ ગીત એના માટે માત્ર સંગીત નહોતું, પણ એક સુરક્ષિત કવચ હતું. એ ગીતની દરેક લાઇન તેને કોઈના અવાજની, કોઈના સાથની કે કોઈ જૂની સાંજની યાદ અપાવતી હતી.
​જ્યારે આપણે એક જ ગીત વારંવાર સાંભળીએ છીએ, ત્યારે એનો અર્થ એ છે કે આપણે એ ગીતની લાગણીમાંથી બહાર નીકળવા નથી માંગતા. આપણે એ હૂંફને પકડી રાખવા માંગીએ છીએ. હેડફોન પહેરીને ભીડમાં ચાલતી એ વ્યક્તિ ભલે એકલી દેખાતી હોય, પણ એની અંદર યાદોનું એક આખું સરઘસ ચાલતું હોય છે.
​આધુનિક યુગમાં હેડફોન એ 'ડિસ્ટર્બ ન કરો' (Do Not Disturb) નું જીવતું જાગતું બોર્ડ છે. એ આપણને પરવાનગી આપે છે કે આપણે આપણી પોતાની મરજીથી, આપણી પોતાની લયમાં જીવી શકીએ. ભલે દુનિયા ગમે તેટલી ઝડપથી દોડતી હોય, પણ એ ગીતના લૂપમાં સમય જાણે થંભી જાય છે.
​ક્યારેક આખી દુનિયાનો અવાજ સાંભળવા કરતાં, હેડફોન લગાવીને પોતાના મનનો અવાજ સાંભળવો વધુ જરૂરી હોય છે.
​અનકહી કોફી

desaimansi547624

“अरबपति पिता ने सोचा—मेरी पत्नी और बेटी मुझे सिर्फ एटीएम समझती हैं… लेकिन जिस रात उनकी फ्लाइट कैंसल हुई और वे बिना बताए घर लौटे, दरवाज़े की दरार से जो देखा… उसने उनका दिल हमेशा के लिए बदल दिया।”

राजेश अग्रवाल एक अरबपति थे। देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी उनके नाम पर थी। दुनिया भर में उनके ऑफिस थे, उनके जहाज़ समुद्रों पर राज करते थे।

लेकिन अपने ही घर में…

वे लगभग मेहमान बन चुके थे।

राजेश को लगता था कि प्यार दिखाने का सबसे अच्छा तरीका है—पैसा। इसलिए उन्होंने अपने परिवार को हर चीज़ दी।

उनकी पत्नी प्रिया को लग्ज़री लाइफ मिली।

उनकी बेटी आराध्या को सबसे महंगा स्कूल, सबसे सुंदर कमरे और ढेर सारे खिलौने मिले।

लेकिन राजेश ने कभी यह नहीं सोचा कि शायद उनके परिवार को इन सब चीज़ों से ज्यादा…

उनकी मौजूदगी की जरूरत है।

राजेश का मन धीरे-धीरे कठोर होता गया।

उन्हें लगता था कि उनके परिवार को उनसे नहीं, बल्कि उनके पैसों से प्यार है।

जब भी फोन आता, उन्हें लगता —
फिर कोई खर्चा होगा।

जब भी बेटी पास आती —
उन्हें लगता, फिर कोई नया खिलौना मांगा जाएगा।

इसलिए उन्होंने खुद को काम में और ज्यादा डुबो दिया।

एक दिन उनका सिंगापुर का ट्रिप तय था। लेकिन आखिरी पल में फ्लाइट कैंसल हो गई।

राजेश ने अचानक फैसला किया—

आज घर चलते हैं… बिना बताए।

उनके मन में एक अजीब सा विचार चल रहा था।

“देखता हूं… मेरे बिना घर में क्या हो रहा है।”

रात को जब वे घर पहुंचे…

तो उन्हें कुछ बहुत अजीब लगा।

पूरा महल शांत था।

कोई पार्टी नहीं।

कोई मेहमान नहीं।

बस… सन्नाटा।

तभी घर की पुरानी आयाह लक्ष्मी सामने आईं।

लेकिन राजेश को देखकर उन्होंने जोर से स्वागत नहीं किया।

उन्होंने तुरंत उंगली होंठों पर रखी।

“साहब… प्लीज़… आवाज मत कीजिए।”

राजेश चौंक गए।

“क्यों? क्या चल रहा है यहां?”

आयाह लक्ष्मी ने कुछ नहीं कहा।

बस उनका हाथ पकड़कर उन्हें धीरे-धीरे फैमिली रूम के दरवाजे तक ले गईं।

फिर फुसफुसाकर बोलीं—

“साहब… अंदर मत जाइए। पहले बस देख लीजिए…”

राजेश ने दरवाजे की छोटी सी दरार से अंदर झांका।

उन्होंने सोचा था—

शायद वहां पार्टी होगी।

शायद उनके पैसों से जश्न चल रहा होगा।

लेकिन कमरे के अंदर जो था…

उसने उनके दिल को एक पल में हिला दिया।

👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

ये मानकर चलना तुम बहुत अच्छे जब तक लगोगे..
तब तक मोहन अगले का मक़सद ना पूरा हो जाए..

momosh99

हेलो दोस्तो,

मेरी फर्स्ट किताब कल 10 मार्च को आ रही है । किताब का नाम "अधूरी धुन" है
कृपया करके आप यह किताब पढ़े और आपके विचार प्रस्तुत करे।

धन्यवाद 💫❤️

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kaushikdave4631

​हां, मैं ही झूठी हूं
नहीं, तुम जैसी सच्ची कोई नहीं।

​हां, मैंने आज कुछ खास नहीं किया
नहीं, तुम जैसा कोई काम करता नहीं।

​हां, आप तो वो हो
नहीं, तेरे सामने मैं कुछ नहीं।

​हां, मैं जिद पर अड़ी हूं
नहीं, तेरी सादगी का जवाब नहीं।

​हां, मैं राहें भटक जाती हूं अक्सर
नहीं, तू चले तो फिर कोई खोता नहीं।

​हां, मुझमें हजार कमियां होंगी
नहीं, तुझ बिन मेरा वजूद मुकम्मल नहीं।

​हां, मैं बस एक आम सी कहानी हूं
नहीं, तू वो किताब है जिसका अंत नहीं।

kaushikdave4631

એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે,
નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.

તારી નજર પડે તો વસંત ખીલી ઉઠે છે,
નહિતર દરેક ઋતુમાં અજબ શીત થાય છે.

તારા શબ્દોથી દિલને અજબ શાંતિ મળે છે
નહિતર મનમાં કેટલી અનકહી પ્રીત થાય છે.

તું નજીક હોય ત્યારે સમય પણ થંભી જાય છે
પળ પળ જાણે પ્રેમની નવી જીત થાય છે.

તું દૂર હોવા છતાં મારાં અહેસાસમા સાથે છે.
એટલે જ આ દિલને થોડી રાહત મળી જાય છે.

તારી યાદ આવે તો રાત ચાંદની બની જાય છે
નહિતર આ આંખોમાં અંધકારનો વસવાટ થાય છે.

તું મળ્યો ત્યારથી મને જીવનનો અર્થ મળ્યો છે,
નહિતર આ સફર બસ એક અજાણી રીત થાય છે.

તારા સાથમાં પીડા પણ સંગીત બની જાય છે,
તારાં વિના ખુશી પણ ક્યારેક હાર બની જાય છે.

દિલમાં હવે તો એક જ દુનિયા બનાવી છે,
જ્યાં તારાં જ અહેસાસનો દરબાર ભરાય છે.

મારા દિલની વાત કલમથી લખી દઉં છું,
એક તારાં જ નામથી દરેક પ્રીત થાય છે.

એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે,
નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.

palewaleawantikagmail.com200557

જે માણસ પારકાંને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી, તે પોતાની જાતને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી! - દાદા ભગવાન

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