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New bites

પગાર આવ્યો 💸💸💰💰
અને તરત જ જતો રહ્યો. 😟
કેમ છે દોસ્ત..? 😏😏
એવુ પુછવાય ઊભો ના રહ્યો... 😒
આવતા મહિને ફરી આવીશ એવુ કહીને
ઉતાવળમા નીકળી ગયો .
મારો બેટો...,
એક ચોકલેટ ખવડાવવાય ના રોકાયો....!
😜😜😜😜😜 🤣🤣🤣🤣

jighnasasolanki210025

ઉત્તમ પુસ્તકો ઉત્તમ તમ મિત્રની ગરજ સાર છે. 🌹🌹🙏🌹🌹🙂

drbhattdamayntih1903

ધણી થવામાં વાંધો નથી, પણ ધણીપણું બજાવવામાં વાંધો છે. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150

ક્રોધ મનુષ્ય નો મોટો શત્રુ છે.🌹🌹🙏🌹🌹🙂

drbhattdamayntih1903

पावसाळ्यात काहीतरी खमंग
आणि मस्त

पनीर सँडविच भजी

भज्याचे तिखट मीठ ओवा व थोडेसे मोहन घालुन पातळसर पीठ भिजवणे
पनीरचे लांबट पातळ तुकडे करुन
मध्ये नारळाची घट्टसर हिरवी चटणी
भरणे
सँडविच प्रमाणे तयार करून
गरम तेलात तळून घेणे
बाहेरून कुरकुरीत
आणि आतून मऊसर
खमंग आणि खुसखुशीत 💗

jayvrishaligmailcom

जुगनू और सूर्य
रात में जुगनू बहुत सुंदर लगता है। अंधेरे में उसकी छोटी-सी चमक भी चमत्कार जैसी प्रतीत होती है। लेकिन क्या कभी किसी जुगनू ने रात को दिन बनाया है?
यही मनुष्य की सबसे बड़ी भूल है। जहाँ अंधकार अधिक होता है, वहाँ छोटी-सी रोशनी भी ईश्वर जैसी लगने लगती है।
आज धर्म के नाम पर यही हो रहा है। जिसने दो-चार शास्त्र पढ़ लिए, कुछ प्रभावशाली शब्द सीख लिए, कुछ अनुयायी इकट्ठे कर लिए, वह गुरु कहलाने लगा। जिसने कुछ चमत्कार दिखा दिए, वह अवतार घोषित हो गया। जिसने भीड़ जुटा ली, उसे लोग सूर्य मान बैठे।
लेकिन भीड़ सत्य का प्रमाण नहीं होती। भीड़ केवल अपनी आवश्यकता का प्रमाण होती है। प्यासा व्यक्ति मृगतृष्णा को भी पानी समझ सकता है।
सच्चा गुरु तुम्हें अपने पास बाँधता नहीं, तुम्हें स्वयं तक पहुँचाता है। उसका कार्य तुम्हारे भीतर वह दीप जलाना है, जिसके बाद तुम्हें किसी बाहरी प्रकाश की आवश्यकता न रहे।
धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय का सदस्य बनना नहीं है। धर्म का अर्थ है—अपने भीतर के अंधकार को पहचानना और उसे देखना। जो अंधकार को देख लेता है, उसके भीतर प्रकाश अपने आप प्रकट होने लगता है।
समस्या यह नहीं कि संसार में झूठे गुरु हैं। झूठे गुरु हमेशा रहे हैं। समस्या यह है कि मनुष्य सत्य से अधिक सांत्वना चाहता है। सत्य कठिन है, क्योंकि वह तुम्हारा अहंकार तोड़ता है। सांत्वना आसान है, क्योंकि वह तुम्हारे भ्रमों को सहलाती है।
इसीलिए जुगनू अधिक लोकप्रिय हैं और सूर्य कम।
सूर्य को तुम्हारी प्रशंसा की आवश्यकता नहीं। वह उगता है, क्योंकि उसका स्वभाव प्रकाश देना है। उसे अनुयायियों की भी ज़रूरत नहीं, प्रमाणपत्रों की भी नहीं। उसका होना ही उसका प्रमाण है।
जो वास्तव में जाग गया है, वह तुम्हें अपने विश्वास नहीं देगा; वह तुम्हें देखने की आँख देगा। वह तुम्हें विचार नहीं देगा; वह तुम्हें जागृति देगा। वह तुम्हें अपने पीछे चलने के लिए नहीं कहेगा; वह तुम्हें स्वयं के भीतर उतरने का साहस देगा।
जब तक तुम उधार के प्रकाश से संतुष्ट रहोगे, जुगनू तुम्हें सूर्य लगते रहेंगे। जिस दिन तुम्हारे भीतर चेतना का सूर्य उदित होगा, उसी दिन समझ में आएगा कि अब तक जो चमक दिखाई देती थी, वह केवल अंधकार की पृष्ठभूमि पर खेलता हुआ एक छोटा-सा भ्रम थी।

वेदांत 2.0 Independent Researcher & Philosopher
Vedanta 2.0 ©
ORCID: https://orcid.org/0009-0000-8083-0685
(इंटरनेशनल रजिस्टर्ड – विज्ञान और वेदांत का संश्लेषण)परिचय:
वेदांत 2.0 “न मार्ग, न साधना, न नियम –
केवल समझ।
जो देख लिया, वही मोक्ष;
जो समझ गया, वही साधना, तो अभी जी लिया वही ईश्वर जीवन ही ईश्वर है।"

bhutaji

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hudda.476154

सब गुज़र तो जाता है,, लेकिन सब भुलाया नहीं जाता ।

nandiv

थोड़ा ठहर जाना कभी कभी जिंदगी का सबसे हसीन याद बन जाता है,,,
और गुजरा हुआ कभी कुछ वापस नहीं आता,,
चाहे वो पल हो या इंसान,,,,।

nandiv

मैं भी दूसरों के लिए रोए



क्या कभी किसी और के लिए रोया है
मैं जिंदगी भर सोचती रही मैं सेल्फिश

इसमें दो राय नहीं है
मैं सचमुच में सेल्फिश हूं


खुद की आजादी के लिए मैं दुनिया छोड़ सकती हुं

और वसी अगर किसी को अपनी मानलु तो
उसके लिए मैं खुद को तोड़ दूं




मै ऐसे ही हुं
थोड़ी सी जिद्दी थोड़ी सी बेपरवाह
थोड़ी सी पागल



लोग मुझे मतलबी कहते हैं
पर मैं भी दूसरों के लिए रोती हुं


मेरे सीने में भी दिल ही है पत्थर नहीं
और यह दिल इंसानी जज्बातों से भरी हुई है



हां मैं भी दूसरों के लिए रोया
और बहुत रोया

abhinisha

The story of Lord Alarnath is not only a religious tradition but also a lesson in unwavering faith. When the doors of one temple close, another door of divine grace opens.
For countless devotees, the journey from Puri to Brahmagiri is more than a pilgrimage—it is a journey from longing to divine comfort.
As the holy chants of "Jai Jagannath" echo across Odisha, Lord Alarnath continues to remind every devotee that sincere devotion is never separated from the Divine.
Jai Jagannath! Jai Lord Alarnath! 🙏

skptech

इश्क की सुराही से जब अमृत बरसता है,
जो जितना पीता है उतना ही तरसता है.🩷🌻🍂🍁🌹

narayanmahajan.307843

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse

दिल की बात खामोशी के साथ ✨✨

deepikajoshiruhanidilse

विषय ब्राह्मण,, मेरी_ कलम_ से मेरी कविता। 🌹🌹🙏🌹🌹😊

drbhattdamayntih1903

Do You Know that if someone were to insult you right now, would you not recognize it immediately? Who becomes depressed the moment someone says, 'you have no sense'? Isn't it the egoism that does?

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#spirituality #spiritualfacts #doyouknow #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

@love@life@two liner

neerbha

🌱ओव्याची पाने
आणि बटाटा 🥔भजी

🌱बटाटा भजी नेहेमी केली जातात
माझ्याकडे ओव्याचे झाड असल्याने ओव्याची पानांची भजी सुद्धा नेहमी होतात
हे थोडे वेगळे कॉम्बिनेशन...
🌱साहित्य
दहा बारा ओव्याची पाने
दोन मध्यम बटाटे
अर्धा चमचा तिखट
हळद.
एक चमचा बडीशेप
मीठ चवीनुसार
🌱कृती
प्रथम ओव्याची पाने बारीक तुकडे करून घेणे
बटाटे धुवून त्याच्या पण बारीक
काचऱ्या करणे
दोन्ही काप एकत्र करून
तिखट मीठ हळद व बडीशेप घालून मिक्स करणे
याचा गोळा होईल इतपत डाळीचे पीठ घालून
दोन मोठे चमचे कडक तेलाचे मोहन घालून
पीठ भिजवून दहा मिनिटे झाकून ठेवावे
दहा मिनिटांनी तेल कडकडीत तापवून आच मंद करावी
व या पिठाची भजी तळावी
थोड्या वेगळ्या चवीची खुसखुशीत चवदार भजी तयार होतात
सोबत टोमॅटो सॉस

jayvrishaligmailcom

पर्दा उठा प्रदर्श से, हुई तंद्रिका भंग ।
देख रंग बदरंग सब, विजय हो गए दंग ।।

राम तुम्हारे तीर्थ में, ये कैसा अपकर्म ।
दान - कोष को लूटते, मिले कई बेशर्म ।।

सबसे बड़े कुकर्म की, चर्चा चारो ओर ।
दान - सम्पदा राम की, रहे चुराते चोर ।।

करते थे जो आपकी, सेवकाई दिन - रात ।
भक्तों के विश्वास पर, किये कुठाराघात ।।

नैतिकता की आड़ में, हुआ अनैतिक कृत्य ।
गणना के गणितज्ञ थे, किये नग्नवत नृत्य ।।

vijaypshahi

पलभर जरा मुस्कुराकर उसनें
सबकुछ था मेरा छीन लिया
दिल की कोरी क़िताब का
हर पन्ना था उसनें गिन लिया

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

सुभाषितम् 🌹😊🌹🙏

यथा तीर्थं तथा वाचो यथा वाचा स्तथा क्रिया ।
चीते वाणयां क्रियायां साधुजनाम एकरूपता।।

ભાવાર્થ :
જેવું મન તેવી વાણી જેવી વાણી તેવું કર્મ, ચિત્ત, વાણી અને કર્મ ત્રણેયમાં સજન પુરુષો નો વ્યવહાર એકરૂપ હોય છે.
ડો. દમયંતી ભટ્ટ

drbhattdamayntih1903