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ऋषभ जी के रचित श्रीराम आरती -
छन्द - चौपाई
आरती वर श्रीराम जी क ।
मङ्गल कीर्ति सीय स्वामी क ॥टेक॥
परब्रह्म लौकिक अवतारा ।
निराकार लेहन आकारा ॥
अद्भुत लीला से जग तारा ।
तिमिर पाप दूरी भक्तन्ह क ॥क॥
सन्त वेद पुराण गावेला ।
रामचरित मङ्गल फल देला ॥
सुघर पवित्र चरित्र सुहेला ।
जीवन दर्शन बा श्रीराम क ॥ख॥
गावा विधि हर मुनि जन नारद ।
शुक सनकादि पार्वती शारद ॥
व्यास वर कवि विज्ञान विशारद ।
ग्रन्थ शेष हनु सन्त वाल्मीक ॥ग॥
काकभुशुण्डि कीर्ति गावेला ।
दर्शन दे परम धाम देला ॥
सव मोह माया दुःख हरेला ।
माता पिता हर तरह ऋषभ क ॥घ॥

ऋषभ विश्वकर्मा

rishabhvishwakarma

सर्द सूरत गुलाब हो जाए,
और आदत खराब हो जाए ।।

शाम को साथ बैठिए आ के,
एक प्याली शराब हो जाए ।।

बेखुदी के सवाल पर मेरे,
आपका भी जबाब हो जाए ।।

खर्च कितना किया पसीने पे,
आज इसका हिसाब हो जाए ।।

झाँक कर देखिए विजय दिल में,
राज सब बेनक़ाब हो जाए ।।

@सर्वाधिकार सुरक्षित - डाॅ.विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

have to varshi ja mehula

naranjijadeja7114

हमनें देखा हैं अपनीं आँखों से
इक दिल के टूटने का मंज़र
जब अपनें हीं उतार देते हैं
अपनों के हीं सीनें में खंजर

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

good morning 🌅

nikitavinzuda6548

🫶🍁🫶

devakidevjeetsingh0819

मीठी मीठी बातों से दिल जीतकर
लोग ज़िंदगी उजाड़ देते है..
💔💯🥺

narayanmahajan.307843

जय श्री कृष्ण

naranjijadeja7114

डाॅ.विजय प्रताप शाही को "आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय- रायबरेली" द्वारा "विद्या वाचस्पति मानद उपाधि " दिया गया -

११.०४.२०२६
गोरखपुर में आचार्य कुल के दो दिवसीय (१०-११ अप्रैल ) आयोजन के समापन के बाद गोरखपुर में सरल सहज व्यक्तित्व/वरिष्ठ कवि साहित्यकार डा. विजय प्रताप शाही जी आवास पर जाने का अवसर मिला।
जहाँ उन्हें "आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय- रायबरेली" द्वारा "विद्या वाचस्पति मानद उपाधि " एवं "दिव्य गंगा सेवा मिशन- हरिद्वार" द्वारा "गंगा सेवी सम्मान" प्रदान किया गया। इस अवसर पर आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति शिवनाथ सिंह "शिव" जी व कुलाधिपति आ इन्द्र बहादुर सिंह जी स्वयं, दी ग्राम टूडे के संस्थापक/संपादक आदरणीय शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी, वरिष्ठ साहित्यकार/धर्मावलंबी आ. नंदलाल मणि त्रिपाठी 'पीतांबर' जी, आ देव दीप के संस्थापक आ. दिनेश गोरखपुरी जी, आ. ईश्वर चन्द्र विद्या वाचस्पति जी आ. मुक्तिनाथ त्रिपाठी जी आदि ज्येष्ठ श्रेष्ठ मनीषियों का सानिध्य आल्हादित करने वाला रहा।
उक्त अवसर पर आ. शाही जी ने अपनी भक्ति रचना "श्री हनुमंत प्रकाश " की एक - एक प्रति सभी भेंट स्वरूप प्रदान कर गौरवान्वित किया।
इस विशेष अवसर का साक्षी बनने और एक साथ इतने वरिष्ठ जनों का सानिध्य, स्नेह आशीर्वाद मेरे लिए भी अविस्मरणीय है।
आ. शाही जी को उनकी उपलब्धियों/सम्मान के लिए बधाइयां शुभकामनाओं के स्वस्थ सानंद और दीर्घायु जीवन की कामना के साथ सभी उपस्थित विभूतियों को नमन वंदन प्रणाम ।

vijaypshahi

Book review: शंभू बावनी
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छत्रपती संभाजी महाराजांवर मराठी भाषेत लिहिल्या गेलेलं काव्य तसं पाहिलं तर कमी प्रमाणात आहे. मात्र ओंकार पांडव यांनी हे कार्य उत्तमरित्या पेललं आहे. ह्या पुस्तकाचे नाव सार्थ ठरवत हे पुस्तक आपल्यासमोर श्री शंभूराजांची शौर्य गाथा काव्य रूपात मांडते. लेखकांनी ही रचना करताना शिवकालीन कवी भूषण ह्यांच्या छंदांची शैली वापरली आहे. त्यामुळे आपल्याला शिवकालीन काव्याचा भास होतो. अनेक श्लोक हे मराठीसह हिंदी भाषेत आहेत.

शंभूराजांचे पराक्रम, मुघल सत्तेला वाटणारी त्यांची भीती हे अत्यंत गीतमय पद्धतीने इथे मांडलेले आहे. ह्यातील वीररसाचा उत्तम वापर ही आणखी एक जमेची बाजू. ही शंभूगीते जर नव्या पिढीने आत्मसात केलीत तर शंभूराजांची कीर्ती आणखी दूर पसरेल ह्यात शंका नाही. शिवकालीन भाषा समजणे सामान्य लोकांना अवघड जाऊ शकते हे लक्षात घेऊन प्रत्येक श्लोकाचा मराठी अर्थ आणि भाव-विशेष मांडलेले आहेत. त्यामुळे पुस्तक अधिक वाचनीय होते.

पुस्तकातील भोसले कुल-वर्णन काव्य, छत्रपती शिवाजी महाराजांवर रचलेले “शिवराज अष्टक” अश्या इतर रचनांमुळे हे पुस्तक परिपूर्ण झालेले आहे. तेव्हा छत्रपती संभाजी महाराजांचे गुण-दर्शन करणारे हे पुस्तक नक्की वाचावे आणि संग्रही ठेवावे असे आहे.

लेखक: बाजी (ओंकार) पांडव
Insta: @baaji.pandav_writes
प्रकाशक: मुलुखगिरी प्रकाशन

mandarkulkarni

"श्री हनुमंत प्रकाश" से -

वंदउँ बारम्बार, गुरु पद पारस मनहिं मन ।
करहिं जगत उजियार, हे सत साधक सहज बढ़ि ।।

वंदउँ बारम्बार, श्री गणेश विघ्नेश अब ।
करहिं नमन् स्वीकार, आदि पूज्य प्रथमेश पुनि ।।

वंदउँ बारम्बार, विमला विद्या महाश्रया ।
विपुल ज्ञान भण्डार, जिन कर पावहिं मूढ़मति ।।

वंदउँ बारम्बार, गौरी शंकर सरस मुख ।
आदि शक्ति ओंकार, सकल सृष्टि आधार जेहि ।।

वंदउँ बारम्बार, अतुल युगल छवि धारि हिय ।
सत्य धर्म अवतार, सियाराम सुख धाम जेहि ।।

बंदउ बारंबार अब, चतुर सुवीर सुजान ।
पवन पुत्र अंजनी सुत, रामदूत हनुमान ।। (01)

हे हनुमंत बीर बलवंता ।
दानव दलन संत रिपुहंता ।।
मंगल मूर्ति महा बलवाना ।
संकट मोचन कृपानिधाना ।।
अंजनि पुत्र केसरी लाला ।
शंकर सुअन शुभंकर बाला ।।
महावीर बजरंगी वीरा ।
वायुपुत्र कपि शैल शरीरा ।।
हे रुद्रांश लोक हितकारी ।
राम सहाय धर्म ध्वज धारी ।।
रामदूत सियसुत कपिनायक ।
धर्म धुरंधर धर्म सहायक ।।
हे दुखभंजन हे जगबंदन ।
हे कपिचंदन मारुतिनंदन ।।
हे रणबीरा हे मतिधीरा ।
हरहुँ नाथ जन जन की पीरा ।।

करहुँ निवेदन नाथ पुनि, चंदन चरण पखारि ।
धरहिं विराजहिं पवन सुत, पुनः धर्म ध्वज धारि ।। (02)

स्वरचित
@ सर्वाधिकार सुरक्षित – डाॅ.विजय प्रताप शाही

vijaypshahi

Ice Cream 1 Horror Game Story In Hindi Comming Soon By Speedy Gamer

vihanbakshi008153

કહેવાય છે ને કે સંઘરેલો સરપ પણ કામ આવે એમ અમારા ઘરમાં આઝાદી સમયનુ પણ ઘણુય સંઘરેલુ જોવા મળે. વરસમા ૨ વાર ધુહ-જારા ટાઈમે કાઢી,સાફ સફાઈ કરી પાછુ ઠેકાણે મુકી દેવાનુ એ આશાથી કે કયારેક કામ આવશે. એમાનો આ સિકકો બ્રિટિશ ઇન્ડિયા વન પાઈસ તાંબાનો સિક્કો છે જે ૧૯૪૩ અને ૧૯૪૭ ની વચ્ચે બનાવવામાં આવ્યો હતો.આ સિક્કાના મધ્યમાં એક વિશિષ્ટ છિદ્ર છે, જે યુદ્ધ દરમિયાન ધાતુ બચાવવા માટે રચાયેલ છે. આ એક રૂપિયાના ૧/૬૪મા ભાગ અથવા એક અન્નાનો ૧/૪ ભાગ બરાબર હતું.આ સિક્કાઓ ક્યારેક જ્યોતિષશાસ્ત્રમાં અથવા તેમના ઐતિહાસિક મહત્વને કારણે ઘરેણાંના પેન્ડન્ટ તરીકે ઉપયોગમાં લેવાય છે. ખુબ નસીબદાર સમજુ છુ હુ મારી કે મારા દાદા-પરદાદાની વીરાસત જોઈ-જાણી તથા આપણા અમુલ્ય વારસાને માણી શકુ છુ.

jeniagravatgmailcom

निगाहों के सहारे जो मन में उतरे उस एहसास का नाम बारिश है कुछ घाटाये क्या उतरी जमी पर सारा जहां जैसे खूबसूरती के नए रंगों में सज गया

himanidave555935

कविता
नारी तेरी यही कहानी,
आँचल में दूध और आँखों में पानी।
पर यह तो हुई बात पुरानी,
बदल गया समय, बदल गई नारी।
शिक्षा में वह अव्वल आए,
आसमान में ऊँची उड़ती जाए।
भारत के निर्माण कार्य में,
जीवन-शक्ति बन बहती जाए।
जात-पात सब पीछे छूटी,
अब सबको मिलता है सम्मान।
जो नारी पहले पिछड़ी थी,
आज बढ़ा रही देश की शान।
घर की नींव है हर एक बेटी,
भ्रूण हत्या फिर क्यों कराएँ?
जिसे बेटी नहीं अपनानी,
वह पहले अपनी सोच बदलाए।
संदेश:
"बेटी बचाएँ, बेटी पढ़ाएँ। नारी का सम्मान करें, क्योंकि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं सुख, समृद्धि और सफलता का वास होता है।"
कवयित्री शालिनी गौतम

shalinigautam080427

सुभाषितम्।
उद्यम:साहसं धैर्यं बुद्धि: शक्ति: पराक्रम:।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देव: सहायकृत् ।।

ભાવાર્થ:-
મહેનત, સાહસ, ધૈર્ય ,બુદ્ધિ ,શક્તિ અને પરાક્રમ આ છ ગુણો જ્યાં હોય છે ત્યાં દેવ સહાય કરે છે.
જીવનમાં સફળતા મેળવવા માટે આ છ ગુણો જરૂરી છે અને જેની પાસે આ છ ગુણ છે તેને જ ભાગ્ય અને દેવ સહાયતા ફરે છે.
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drbhattdamayntih1903

मारा प्रेमनो अहेसास

ज्यारे पवन तारा चेहराने अडके,
ने आभथी चोमासूँ हेते वरसे,
तूँ एकलो वरसादमाँ भींजातो होय,
हूँ छतरी लैने तारी पासे दोडी आवीश।

एकाद टीपाँ चेहरा पर रहेवा देजे,
एमाँ पण प्रेमनी मीठो अहेशास हशे।
मारी साथे चालतो दरेक रस्तो,
जीवनभरनी सुंदर याद बनी रहशे।

एक ज छतरी नीचे ज्यारे मलीशूँ,
वरसादने पण हसताँ हसताँ जीवी लैशूँ।
तूँ काईं न बोले, आँखो बद्धूँ कही देशे,
मौन पण प्रेमनूँ गीत बनी रहशे।

भीना रास्ताओ पर पगला पड़शे,
यादोना फूल त्याँ खिलताँ रहशे।
समय भले केटली झडपे पसार थाय,
आ पळो हमेशा हૈયामाँ जीवती रहशे।

ज्यारे दिवस तने थोड़ो थकवी नाखे,
के कोई वात मनने चूप करी नाखे,
हूँ शब्दो वगर तारी बाजुए रहीश,
एक स्मितथी तारो बद्धो भार हलको करी दईश।

heenagopiyani.493689

मैं और मेरे अल्फ़ाज़💗

anitasorte6489gmail.com190157

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skptech

મારી નવી વાર્તા આવી ગઈ છે તો જરૂરથી જરૂર વાંચજો ખૂબ જ આભાર તમારો..... ઝાપટું.... છે મારી વાર્તાનું નામ..

saturavaliya827405

એડજસ્ટ એવરીવ્હેર' આ વાક્ય તમારો સંસાર 'ટોપ' ઉપર લઈ જશે. વ્યવહારમાંય 'ટોપ' ઉપર ગયા સિવાય કોઈ મોક્ષે ગયેલો નહીં. વ્યવહાર તમને ના છોડે, ગૂંચવ ગૂંચવ કરે તો તમે શું કરો? માટે વ્યવહારનો ફટાફટ ઉકેલ લાવો. - દાદા ભગવાન

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dadabhagwan1150