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सुकून ढूँढा था दुनिया में, कहीं मिला नहीं, महादेव के चरणों में बैठा, फिर कुछ चाहा नहीं। - Anita
दिल में हसरतें पालना हम सभी का कुदरती स्वभाव होता हैं, और सभी हसरतें पूरी हों ये ज़रूरी तो नहीं.... क्योंकि वो तो पारियों की कहानी की तरह सिर्फ़ ख्वाबों में पूरी होती हैं, हक़ीकत में शायद ही कभी... - Anita
उम्मीदें 🥀 रिश्ते टूटे तो समझ आया, कि अपने भी वक़्त के साथ बदल जाते हैं। ज़िंदगी ने बस इतना सबक दिया है, उम्मीदें कम रखो... लोग नहीं, अक्सर उम्मीदें ही दिल तोड़ जाती हैं।
तू घाट बनारस का मैं बहती गंगा बन जाऊ.... चली आऊ तेरी ओर तुझसे ही मैं जानी जाऊं, नाही कोई पहचान हो मेरी, तुझ से जुड़ा मेरा अस्तित्व है, जहां शिव वहीं गंगा....कितना पावन यह प्रेम का बंधन है.... हर हर महादेव 🌿🙏
ना मंजिल की प्यास थी, ना तेरे मिलने की आस थी... तुझमे बातें थी, जो कुछ खास थी.... कैसे भूल जाए उन यादों को, जो जीने की आस थी.... ना हफ़्ते ना महिने, ना कुछ सालों का था वो सफ़र, जो भूल जाऊ तेरी यादें..... हर लम्हा सदियों सा था जो जिये हैं तेरे साथ.... अब तो मरने के बाद भी रूह से लिपटी रहेगी तेरे मेरे सफ़र की वो सुनहरी यादें।। 💖 💖 क्योंकि कुछ रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं, मगर उनकी यादें कभी नहीं खत्म होती। - Anita
वो पल 💖 ये पल भी मेरा, वो पल भी मेरा, पर मैं हूं कहां, जागती राते, सोती सुबह बिछड़ गई परछाईयां... बटोरे जो झुककर ख़ुद को बिखर से जाते हैं, महफुज रहने की चाह में, कुछ बदल से जाते हैं, बिना जले भी ख्वाहिशें करती है मुझमें धुआं... ये पल भी मेरा, वो पल भी मेरा, पर मैं हूं कहां.... मोहरे लगी हैं रूह पर, हमको वक्त के घाव बताती हैं, कुछ ख़ुद से मिले, कुछ अपनो से सारा हाल सुनाती हैं, भरते नहीं अब जख्म भी, बेअसर सारी दुहाइयां.... ये पल भी मेरा, वो पल भी मेरा, पर मैं हूं कहां.... खुमार भी किया हमनें, लड़खड़ाए कदम भी चले, कोई वफ़ा का हाथ ना मिला, बेवफईयों में जले, बख्शा नजरों ने ख़ुद ही को, दूजा था कहां... ये पल भी मेरा, वो पल भी मेरा, पर मैं हूं कहां.... जलाकर दो दिए हम, सारे अंधेरों से लड़ते रहे, एक दायरें की रोशनी से उम्मीदों में पलते रहे, ढांक लौह कांपते रहे हाथ, बेरहम थी आंधियां... ये पल भी मेरा, वो पल भी मेरा, पर मैं हूं कहां.... हलके कदम रखे हैं, भरोसे की कच्ची सड़क पर, दरारें दिखती रही हैं, हर राह दूर दराज नज़र पर, आज के किस्से ही सौदागर, कल की बिसात कहां.... ये पल भी मेरा, वो पल भी मेरा, पर मैं हूं कहाँ...।। मेरे एहसास 🥀
एक स्त्री चाहती हैं केवल प्रेम, और इस प्रेम के अनेक रूप हैं। एक बेटी चाहती हैं परिवार से निस्वार्थ स्नेह... एक बहन चाहती हैं भाई का संपूर्ण सानिध्य.... एक पत्नी चाहती हैं पति से उसका सदैव समर्पण.... एक बहु चाहती हैं, ससुराल में उसका सम्मान.... एक मां चाहती हैं, बच्चों से केवल ममत्व.... इस स्नेह, सानिध्य, सम्मान के बदले में न्योछावर है स्त्री का सम्पूर्ण जीवन, उसके सपने....सारी ख्वाहिशें .... और उसकी अपनी आज़ादी।
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