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New bites

शब्दों की चिंगारी तह को जला गयी..
बची खुची जिंदगी कहानी बना गयी..
--
जिंदगी भर वह मुफ़लिसी का शिकार रहा
मरने के बाद भी उसे शब्दों से प्यार रहा.
---
डॉ अनामिका--
#ऊर्दूअल्फ़ाज़ #हिंदीशब्द #हिंदीकाविस्तार

rsinha9090gmailcom

#Arsia

#hukm aur hasarat 🔥

एक झलक अध्याय 3 की ,,

जल्द ही प्रकाशित होगा 30 जुलाई को!💗

~Diksha mis kahani 😙

dikshaparashar.699046

#Arsia

#hukm aur hasarat 🔥

sneak peek of ch 3

It will publish on 30!🔥

dikshaparashar.699046

લોક વાણી ભાગ. ૬

અજાણ્યા વ્હાલની એ અધિરાય છે.
સ્મરણમાં શબ્દ બની ને લહેરાય છે.

છોડવા મથો તો છોડી નહીં શકો,
વનમાં વચતી વેલીય વનરાય છે.....


ધારો કઈકને કંઈક હોય જુદું,
પ્રકાશે દીપ ને ઉડતું રહે ફુદું.

કંઈક પામવાનો એજ પમરાટ છે.

એવા જ એવા હોઈએ છીએ એવા,
ભટકો નહીં ભ્રમમાં કહો છો તેવા.

રહેશું તેમ રહેશું રસમ રહેવાય છે....

ભૂલો ના ભ્રમિત ભ્રમણા ના ભેદો,
અજ્ઞાન ના પડે છે અવિરત સેદો.

ભૂલાવે સાન ભાન શમણાં સેવાય છે...

ઓળખવા પણ કઠીન કહેવામાં,
તદ્રુપ તામાં તે જ મય રહેવામા.....

તર્કના તાણા માં સહુ તણાય છે....

મનરવ પણ એ અણઘડ અજાણ છે.

સુગમ લય મેળ

મનજીભાઈ કાળુભાઇ મનરવ મુ બોરલા

manjibhaibavaliya.230977

औरत का दिल,
अगर किसी को
खुद में बसा लें तो.......

तो उसे ईश्वर से कम नहीं समझता है।

और जरुरत पड़ जाए अगर तो
उस शख्स के लिए,
वह इस पूरी दुनिया से लड़त है

vrinda1030gmail.com621948

#.....!

gautamsuthar129584

Gud morning friends

kattupayas.101947

👇Save Your Friend's Status👇
#H_R

er.hr.731220

“कुछ तन्हाइयाँ हमसफ़र बन जाती हैं…”
जब लोग आँखें चुराते हैं, हम ख़ामोशियाँ ओढ़ लेते हैं।
और जब जज़्बात कोई न समझे — हम उन्हें शायरी बना देते हैं।

इस कविता में धीर सिर्फ एक नाम नहीं,
वो हर वो आत्मा है जिसने अकेलेपन से मोहब्बत सीखी है,
जिसने अपनी टूटन को शब्दों में पिरोया है,
और जिसे अब किसी के आने या जाने का मलाल नहीं रहा।

कभी-कभी सन्नाटा सबसे खूबसूरत संगीत होता है,
बस उसे महसूस करने की हिम्मत चाहिए।

“ज़िन्दगी अब तू साज़ है…”
हर दर्द को सुर बनाकर जीना भी एक हुनर है — और यही हुनर है धीर के शब्दों में।

📖 अगर कभी आपकी आंखों ने बिना आंसुओं के रोया है — तो ये पोस्ट आपके लिए है।

#तन्हाई #PoetryOfTheSoul #खामोशियाँ #HindiPoetry #WritersOfInstagram
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dhirendra342gmailcom

✨ एक छोटी सी मुस्कान ✨

एक छोटी सी मुस्कान हो,
दिल से निकली जान हो,
बिना कहे जो सब कह जाए,
ऐसी कोई पहचान हो।

चांदनी सी रातों में,
तारों की बातों में,
तू मिल जाए ख्वाबों में,
बन जाए वो बातों में।

बचपन की मिठास हो,
संग तेरा एहसास हो,
हर लम्हा कुछ कहता जाए,
तू पास हो, ये आस हो।

फूलों सा नर्म दिल तेरा,
हवा सा प्यारा अंदाज़ हो,
तू रहे सदा मुस्कुराता,
तेरे नाम ये अल्फाज़ हो।

ankit26

naukari hamari pakki hai
bas
salary nahin milati
khushkismat hai shaher ki auraten
jinko pata hai ki mahila Divas bhi manaya jata
susma mishra

lalitmishra7728

“यह सिर्फ एक किताब नहीं…
यह उन गांवों का स्मारक है जिन्होंने हमें हमारी जड़ों से जोड़ने की कोशिश की — चाहे हम लौटे या नहीं।”
– जब पहाड़ रो पड़े (लेखक: धीरेंद्र सिंह बिष्ट)

जब आपने गांव छोड़ा था, क्या सच में सिर्फ जगह छोड़ी थी?
या पीछे रह गई थी वो मां जो अब भी हर त्यौहार पर वही मिठाई बनाती है —
वो पिता, जो आज भी हर सुबह खेतों में हल लेकर निकल जाते हैं…
शायद इस उम्मीद में कि बेटा एक दिन लौटेगा और कहेगा —
“बाबू, चलो खेत दिखाओ…”

“जब पहाड़ रो पड़े” कोई साधारण किताब नहीं,
यह उस खामोशी की चीख है जिसे आज तक कोई सुन न सका।

हर अध्याय में एक आंसू है,
हर लाइन में एक गांव की दहलीज़,
और हर शब्द में — एक सवाल:
क्या हम सच में अपने गांव को भूल चुके हैं?

अगर आपने कभी पलायन को महसूस किया है,
अगर आपको अपने बचपन का आंगन याद आता है,
अगर मां की रसोई की गंध अब भी नाक में बसती है —
तो यह किताब आपके दिल के सबसे कोमल हिस्से को छू जाएगी।

यह सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं… महसूस करने के लिए है।

📚 #जब_पहाड़_रो_पड़े
#DhirendraSinghBisht #HindiBooks #BookLoversIndia
#ViralReads #PahadiEmotions #GharKiYaad #BookstagramIndia
#IndianAuthors #DeshKiJadSeJudo

dhirendra342gmailcom

“यह सिर्फ एक किताब नहीं…
यह उन गांवों का स्मारक है जिन्होंने हमें हमारी जड़ों से जोड़ने की कोशिश की — चाहे हम लौटे या नहीं।”
– जब पहाड़ रो पड़े (लेखक: धीरेंद्र सिंह बिष्ट)

जब आपने गांव छोड़ा था, क्या सच में सिर्फ जगह छोड़ी थी?
या पीछे रह गई थी वो मां जो अब भी हर त्यौहार पर वही मिठाई बनाती है —
वो पिता, जो आज भी हर सुबह खेतों में हल लेकर निकल जाते हैं…
शायद इस उम्मीद में कि बेटा एक दिन लौटेगा और कहेगा —
“बाबू, चलो खेत दिखाओ…”

“जब पहाड़ रो पड़े” कोई साधारण किताब नहीं,
यह उस खामोशी की चीख है जिसे आज तक कोई सुन न सका।

हर अध्याय में एक आंसू है,
हर लाइन में एक गांव की दहलीज़,
और हर शब्द में — एक सवाल:
क्या हम सच में अपने गांव को भूल चुके हैं?

अगर आपने कभी पलायन को महसूस किया है,
अगर आपको अपने बचपन का आंगन याद आता है,
अगर मां की रसोई की गंध अब भी नाक में बसती है —
तो यह किताब आपके दिल के सबसे कोमल हिस्से को छू जाएगी।

यह सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं… महसूस करने के लिए है।

📚 #जब_पहाड़_रो_पड़े
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dhirendra342gmailcom

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम है मयूर, मैने हाल ही में। dhumketu नाम की fantasy epic स्टोरी लिखी है।
कहानी का पहला चैप्टर 31 जुलाई 2025 को रिलीज होगा, ______अजय नाम का बहुत ही होनहार लड़का, जिसे एक दिन उल्कापिंड का असाधारण सा टुकड़ा मिल जाता है, फिर उसके जिंदगी में उथल - पुथल मच जाती है।
क्या है उस उल्कापिंड का रहस्य,?
आखिर कितनी बुरी ताकतें है उल्कापिंड के पीछे?

जानने केलिए हमें follow करें, और इंतजार करें कहानी के हर एक भाग का।

mayurpokale921810

कधी शांततेत बोलतो तो, माझ्यासारखा
कधी स्वप्नात फिरतो तो, माझ्यासारखा...
लपवतो प्रत्येक वेदना हास्याआड
आणि मग एकटाच रडतो तो, माझ्यासारखा...

कधी नजरेतून उलगडतो सारे रहस्य
कधी स्वतःपासूनही घाबरतो तो, माझ्यासारखा...
प्रत्येक प्रवासात शोधतो एक आपलंसं चेहरा
आणि मग स्वतःलाच भेटतो तो, माझ्यासारखा...

तोही लिहितो भावना कागदावर शांतपणे
प्रत्येक शब्दात हुंदके असतात त्याचे, माझ्यासारखे...
जरी कितीही लपवला स्वतःला दुनियेकडून
आतून तुटतो तो, माझ्यासारखा...!! 🥀

– फज़ल अबुबकर एसाफ

fazalesaf2973

My new story

kajalthakur

कल देर से फिर,
काली रात से बात हो गई

है कितना अंधेरा उसके पास,
इस बात पर बात हो गई

गिना कर अपना अंधेरा,
चांद तारो के साथ वो मायूस हो गई

देखकर उसको मायूस ऐसे,
मैं भी अपने पन्ने पलटने पर मजबूर हो गई

पन्ने पूरे खुलते,
इस से पहले ही रात को घबराहट हो गई

बिना चांद तारो के ,
इतना अंधेरा देख रात भी हैरान हो गई

उसके इस सवाल पर,
मै मुस्कुरा कर रह गई

रहती हूं इस तरह कैसे,
रात के सवाल पर मैं मौन हो गई

जवाब तो शायद यही था,
कि बस इस अंधेरे की आदत मुझे हो गई

vrinda1030gmail.com621948

Good evening friends

kattupayas.101947

પાસે આવવાથી હું ક્યાં પાસ થાઉં છું.
દૂર જાઉં તો હું પણ ફેલ થાઉં છું.!
વચ્ચે લટકીને હું ક્યાં સુધી લાંબો થાઉં?
કેમકે બન્ને બાજુ ખેંચાવામાં તૂટી હું જાઉં છું.
- વાત્સલ્ય

savdanjimakwana3600

🌼 अनुभूति – दिल से दिमाग तक की यात्रा 🌼


अनुभूति आई सुबह-सुबह, दरवाज़ा खटखटाई,
बोली — “मैं दिल से आई हूँ, ज़रा चाय तो पिलाई!” ☕

मैं बोला — “अभी-अभी तो टूटी है नींद प्यारी,
और तू लेने लगी है दर्शन की जिम्मेदारी?”

कभी खुशी में झूमती, कभी दुःख में रो देती,
बिना बुलाए आ जाए, बातों से बहका देती! 😅

जब छत पर आया कबूतर, बोली — “प्यार का संकेत है!”
पर नीचे गिरा जो परिंदा, बोली — “अरे ये तो लफड़े की रीत है!” 🐦

शर्म से बोली — “वो देखो, पड़ोसी मुस्कराया,”
मैं बोला — “बिजली का बिल आया है, वो रोने को छुपाया!” ⚡

फिर भूख लगी तो बोली — “देखो जीवन की साधना है,”
रोटी देख बोली — “प्रेम की सर्वोच्च भावना है।” 🍞

गर्मी में पंखा चला तो बोली — “शीतल स्पर्श की अनुभूति है,”
AC चला तो बोली — “बिल से जीवन में त्रुटि है!” 😂

Online क्लास में टीचर ने डाँटा — “Unmute कर के बैठा करो!”
अनुभूति बोली — “यह मौन साधना का चरम है, ज़रा संयम से सहो!” 🎧

खाँसी आई तो बोली — “कोरोना फिर से आया है,”
जब दादी ने हल्दी दी — “यही अनुभव तो माया है।” 🤧

मैं चुप बैठा मोबाइल में, reels देखता जा रहा था,
अनुभूति बोली — “अरे वाह! तुम तो Self-realisation पा रहा था!” 📱

प्याज़ काटते आँखें बहने लगीं — “ये तो सच्चा इश्क़ है!”
पर जब सब्ज़ी जली तो बोली — “तपस्या में फिस्क है।” 🧅🔥

अंत में बोली — “अब मैं जाऊँ, दिनभर काफी छाप छोड़ी,”
मैं बोला — “ठीक है बहन, पर कल मत आना, बहुत चिट्ठियाँ छोड़ी!” ✋

😄 "अनुभूति" — जब हो जाए थोड़ी ज़्यादा, तो जीवन बन जाए पूरी ड्रामा-सीधा नाटकशाला!

✍️ डॉ. पंकज कुमार बर्मन
(कटनी, मध्यप्रदेश)

pintumajhi.678666

લોકો દ્વારા રમાતી ગેમ શોધવા માટે આખું playstore ખોળી કાઢ્યું પણ એ ગેમ તો મળી જ નહીં..

krupalipatel.810943

🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾
मुट्ठीभर बीज बिखेर दो,
दिल की जमीन पर।
मौसम बारिश का है,
शायद अपनापन पनप जाये।
🌱❤🌱❤🌱❤🌱❤🌱❤

jighnasasolanki210025

આભાર વાચકો😊

s13jyahoo.co.uk3258