Quotes by બદનામ રાજા in Bitesapp read free

બદનામ રાજા

બદનામ રાજા

@kishorshrimali4376


में चलते चलते इतना थक गया हूं, चल रही सकता,
मगर में सूर्य हूं, संध्या से पहले ढल नहीं सकता...

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सुना है आखिर तक कुछ भी बाकी नहीं रहता,
तो फिर तेरी हर याद क्यु मुकम्मल है मुझमें...

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हृदय इस हद तक कुंठित ओर पीड़ा से पीड़ित हैं,
कि, जीवन के अंतिम क्षणों में,
में अपने आप को समस्त बंधनों से मुक्त रखना चाहुंगा...

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बेरहम हादसों से गुजरना पड़ता है,
बाजुओं पर ताबीज़ बांधने से ज़मीर मजबूत नहीं होते...

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चाहने वाले को उम्मीद होती है, लौट हि आयेगा,
जाने वाले को वहम होता है, भुल हि जायेगा...

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प्रेम उस सहमति का भी नाम है
जिसमें आप
दूसरे की थकान को
अपनी जिज्ञासा से
परेशान नहीं करते...
कुछ दिन
बात न होना भी
एक तरह का साथ होता है...

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"जिंदगी"
दो उंगलियों के बीच में दबी जलती
हुई सस्ती सीगरेट के टुकड़े कि तरह हैं,

जिसे कुछ लम्हों में पीकर गली में फेंक दूंगा...

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फुलों का बिखरना तो तय था,
लेकिन कुछ इसमें हवाओं कि सियासत भी बहुत थी...

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સમસ્ત માસુમ ભાવનાઓનો અંત થયાં પછી
શરું થાય છે વાસ્તવિક જીવન...

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मुसलल धूप में चलना, चिरागों कि तरह जलना,
ये हंगामे तो मुझको वक्त से पहले थका देंगे...

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