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में चलते चलते इतना थक गया हूं, चल रही सकता, मगर में सूर्य हूं, संध्या से पहले ढल नहीं सकता... 🌸
सुना है आखिर तक कुछ भी बाकी नहीं रहता, तो फिर तेरी हर याद क्यु मुकम्मल है मुझमें... 🌸
हृदय इस हद तक कुंठित ओर पीड़ा से पीड़ित हैं, कि, जीवन के अंतिम क्षणों में, में अपने आप को समस्त बंधनों से मुक्त रखना चाहुंगा... 🌸
बेरहम हादसों से गुजरना पड़ता है, बाजुओं पर ताबीज़ बांधने से ज़मीर मजबूत नहीं होते... ✊🏻🙌🏻🌸
चाहने वाले को उम्मीद होती है, लौट हि आयेगा, जाने वाले को वहम होता है, भुल हि जायेगा... 🌸
प्रेम उस सहमति का भी नाम है जिसमें आप दूसरे की थकान को अपनी जिज्ञासा से परेशान नहीं करते... कुछ दिन बात न होना भी एक तरह का साथ होता है... 🌸
"जिंदगी" दो उंगलियों के बीच में दबी जलती हुई सस्ती सीगरेट के टुकड़े कि तरह हैं, जिसे कुछ लम्हों में पीकर गली में फेंक दूंगा...
फुलों का बिखरना तो तय था, लेकिन कुछ इसमें हवाओं कि सियासत भी बहुत थी...
સમસ્ત માસુમ ભાવનાઓનો અંત થયાં પછી શરું થાય છે વાસ્તવિક જીવન... 🌸
मुसलल धूप में चलना, चिरागों कि तरह जलना, ये हंगामे तो मुझको वक्त से पहले थका देंगे... 🌸
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