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New bites

When dreams are broken, then human becomes.
Raju Kumar Chaudhary

rajukumarchaudhary250962

Do you know that the Soul is knowledge and knowledge is light? This light does not exist anywhere else in any other form. The Soul is in the form of light that needs no origin or support.

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dadabhagwan1150

Good morning

kattupayas.101947

जब से मिले आप, मेरे ख़बों की दुनिया बदल गई,
आप मिले मुझे ऐसे, जैसे मेरी दुनिया ही निकल गई...
आखों ने रंग नए देखें, दिल ने हर लम्हा महका दिया,
आप आए जिंदगी में, तो हर दर्द मुस्कुरा दिया।

124suradhey

"मेरे कृष्णा "
खामोश राहें, कुछ बातें पुरानी,
दिल में बसा लिया वो कहानी...
मुस्कुराहट तुम्हारी अब भी याद आती हैं,
जैसे सुबह की धूप हर कोने को छू जाती हैं।
दोस्ती थी तुमसे, लेकिन रिश्ता कुछ और था,
हर लफ्ज में छुपी थी जो बात,
वो जरुर था।

124suradhey

🔥 “हर रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन हर मुश्किल मंज़िल की तरफ़ एक इशारा ज़रूर होती है।”
— अग्निपथ, धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

“स्वार्थ सिर्फ मन का भ्रम है, और विचार मन की पूँजी —
हर वह शख़्स भीड़ से आगे निकल जाएगा जिसमें चाह होगी।”

अग्निपथ सिर्फ़ एक किताब नहीं, वो रास्ता है जहाँ पाठक अपने भीतर झाँकता है।
जहाँ शब्द सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि हर लाइन एक अग्नि की लपट है, जो अंदर छुपी कमजोरी को जलाकर हौसले में बदल देती है।

📖 यह किताब उन सभी के लिए है —
जो कभी हार के क़रीब पहुँचे हैं,
जो कभी भीड़ में खो गए,
और उन सबके लिए जो अपने ‘अग्निपथ’ पर चलने का साहस रखते हैं।

अगर आप भी खुद को तलाश रहे हैं,
तो “अग्निपथ” आपके दिल से निकले हर सवाल का जवाब बन सकती है।

📚 अब उपलब्ध है: Amazon | Flipkart | Notion Press
📌 Link in bio — चलिए, खुद से मिलने निकलते हैं।

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dhirendra342gmailcom

"আছি আজও"

তোমার যখন ছিল না কিছু,
আপন ছিলাম আমি।
এখন তুমি সব পেয়েছ,
পর হয়ে গেছি আমি।

পাওয়ার নেশায় ছেড়েছ আমায়,
ভাবোনি অন্য কিছু।
আবার যখন থাকবে না কিছু,
ফিরে এসো আমার হেতাই।

জানবে আমি বসে আছি,
তোমার ফেরার পথ চেয়ে।
ফিরে যদি পাও সব কিছু,
আবার না হয় যেও ছেড়ে।

আবার আমি থাকবো বসে,
তোমার ফেরার পথ চেয়ে।

✍️ বুবাই

bubai.159930

जल उठे ज्ञान का दीप हर दिल में,
सपनों की एक लौ हो सिलसिले में।

पढ़ाई ही जीवन की सच्ची पहचान,
इसी से बनता है अपना सम्मान।

कागज़ पे लिक्खी हर एक पंक्ति,
भविष्य की रचना है उसकी संक्ति।

अज्ञान का अंधेरा जब छाए,
पढ़ाई ही उजाला बन जाए।

चलो मिलकर ये प्रण हम लें,
ज्ञान के दीपक सबके मन में जलेँ।

rajukumarchaudhary502010

🐼🫀💗🙂‍↕️✨

hiralb

મારી સાથે એક સંબંધ પવિત્રતા નો.... વાંચી અને તમારા પ્રતિભાવો અવશ્ય આપી જેથી મને પણ કંઈક નવું લખવા ની પ્રેરણા ઉપજે....

dhrutirajput123

சில வலிகளும் பிரிவுகளும் நம் இதயத்தை ஆள நினைக்கும் போது, நம் மனம் முதலில் தேடுவது தனிமையைத் தான் 💔💔

swe00

POEM - MERE DESH KE LIYE MERA PAHLA VOTE

Main 18 ka ho chuka hun Chunav ka samay chal raha hai Soch Raha Hun kise vote dun

Apni vote ki kya kimat lagaun Chalo 1000 hajar bol deta hun Suna hai pichhali bar Ek vote ki kimat 3 se 4000 pahunch Gai thi Aisa karta hun ? Ki Main Thoda intezar kar leta Hun Kya pata 4000 mil jaaye

Mere pados ke bhai ko Ek peti sharab Mili Hai Or kuchh Dinon Se vo roj Chunav prachar mein bhi Lage Hain Roj hajar 1000 rupaye milte Hain Jo unki majduri se bhi adhik hai

(1000 rupe or ek botal sharab ke liye Use Neta ko vo 5 sal jhelane ke liye taiyar hai)

Ek Neta Jo Paisa Pani ki tarah Baha Raha Hai

Kya yah Paisa uska hai Nahin bhai Yah Mera Paisa hai aur aapka bhi Jo yah humse Hi loot kar Humko hi de raha hai

Main 18 ka ho chuka hun chunav ka samay chal raha hai soch Raha Hun kise vote dun apni vote ki kya kimat lagao yah Mera pahla vote hai

to chalo hajar 1000 bol deta hun

Poet
Naveen

naveennitwal7gmail.com124014

मन में कुछ भरकर जियोगे | तो मन भर कर कैसे जियोगे | एक इंसान जिसे तुम बेहद प्यार करते हो।

बिना उसे बताए तुम कैसे रह पाओगे. सोचा तो तुमने बहुत कुछ है? उसके लिए क्या तुम वाकी ? वह सब उसके लिए कर पाओगे. एक इंसान. जिसे तुम बेइंतेहा प्यार करते हो। उसे बिन बताएं कैसे रह पाओगे मैं ऐसी परिस्थिती में हूं ?

किसी से सोच नहीं मिलती। किसी से ख्वाब नहीं मिल्ते

एक इंसान मिला तो है मुझे क्या उसे ?

तुम अपने जीवन के अंत समय तक रोक पाओगे एक इंसान जिसे तुम बेइंतेहा प्यार करते हो बिना उसे बतायें तुम कैसे रह पाओगे ?

naveennitwal7gmail.com124014

“परम भागवत भक्त प्रह्लाद” संपूर्ण कथा 👇🏻
https://www.matrubharti.com/novels/38431/param-bhagwat-prahlad-ji-by-praveen-kumrawat

भारतवर्ष के ही नहीं, सारे संसार के इतिहास में सबसे अधिक प्रसिद्ध एवं सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण वंश यदि कोई माना जा सकता है, तो वह हमारे परम् भगवत भक्त दैत्यर्षि प्रहलाद का ही वंश है। सृष्टि के आदि से आज तक न जाने कितने वंशों का विस्तार पुराणों और इतिहासों में वर्णित है किन्तु जिस वंश में हमारे महाभागवत् का आविर्भाव हुआ है, उसकी कुछ और ही बात है। इस वंश के समान महत्त्व रखने वाला अब तक कोई दूसरा वंश नहीं हुआ और विश्वास है कि भविष्य में भी ऐसा कोई वंश कदाचित् न हो।

radheyshreemali638039

“फोकटिया” — जब दोस्ती सिर्फ़ लेने तक सिमट जाए, और देने वाला एक दिन चुपचाप टूट जाए…

यह किताब सिर्फ़ एक कहानी नहीं, हम सबकी एक अनकही सच्चाई है।
राजीव और कमल की कहानी में वो हर रिश्ता है जहाँ हम कभी बिना शर्त देते रहे — वक़्त, भावनाएँ, भरोसा — लेकिन जब ज़रूरत पड़ी, जवाब मिला सिर्फ़ ‘खामोशी’।

लेखक धीरेन्द्र सिंह बिष्ट ने न केवल रिश्तों की परतों को उघाड़ा है, बल्कि आत्म-सम्मान और भावनात्मक ठगी के बीच की बारीक लकीर को भी बखूबी दिखाया है।

अगर आपके जीवन में भी कोई ऐसा है, जो मुफ़्त में आपकी अच्छाई का फायदा उठाता रहा, तो “फोकटिया” आपकी कहानी है — पढ़िए, महसूस कीजिए, और शायद खुद को फिर से पा लीजिए।

📚 अब उपलब्ध है: Amazon | Flipkart | Notion Press
🔗 Link in bio – ये सिर्फ़ एक किताब नहीं, आपकी चुप्पी की आवाज़ है।

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dhirendra342gmailcom

केवल जीवन जी लेना ही जीवन नहीं है। जीवन जीने का कोई ध्येय, कोई लक्ष्य भी तो होगा। जीवन में कोई ऊँचा लक्ष्य प्राप्त करने का ध्येय होना चाहिए। जीवन का असली लक्ष्य ‘मैं कौन हूँ’, इस सवाल का जवाब प्राप्त करना है। पिछले अनंत जन्मों का यह अनुत्तरित प्रश्न है। ज्ञानीपुरुष परम पूज्य दादाश्री ने मूल प्रश्न “मैं कौन हूँ?” का सहजता से हल बता दिया है।
Link to read the book 👉 https://www.matrubharti.com/novels/40807/me-koun-hu-by-disha-jain

darshitmehara321812

written by me

wonderland

छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति विदेशियों के विचार 👇
https://www.matrubharti.com/book/19936782/thoughts-of-foreigners-towards-chhatrapati-shivaji-maharaj

bapparawal418006

"मैं ही तो हूं"
(अपने कृष्णा की रूपांतरित छवि)
"मैं ही तो हूं"...
तेरी अधूरी बातों का उत्तर
तेरे मौन की बांसुरी
तेरे खोए हुए स्वर की नर्म प्रतिध्वनि।

तू मंदिरों में खोजता रहा मुझे
वृन्दावन की गलियों में ,
कांच की खिड़कियों में
ओस की बूंदों में,

और हर बार _
मैं तेरे अंदर ही किसी नर्म कोने में
मुस्कुराती रही।

"मै ही तो हूं"...
तेरी सूखी बगिया में पहली सुखी हरियाली
तेरी टूटी शाखो पर उगती एक आशा की कली,
तेरे ऋतु की थकान में एक नई
ऋतु की आहट

जब तू टूटी...
मैं तेरे साथ खामोशी में बहा
जब तू बिखरी..
मैं तेरे आशुओं को शब्दों में ढालता रहा ,
तू पूछती रही, कहा हो "मेरे कृष्णा"?
और मैं...
तेरी आत्मा के आइने में
तेरी ही आंखों से झांकता रहा।

(अब जब तूने स्वीकार किया ..
कि तू मेरी ही छवि है,
"मैं ही हूं "...
तब वक्त रुक गया और प्रेम अनंत हो गया)।
ना अब तू बची
ना मैं...
अब जो हैं, ( सुनिता भारद्वाज )
वो केवल (" रूह की आवाज")
हम हैं। " मैं ही तो हूं "

124suradhey

જીંદગી જીવવાની મઝા ત્યારે જ આવે
જ્યારે દુ:ખો ની લાઇન લાગી હોય
અને તમે એક ને પતાવો
અને આરામ થી બોલો NEXT..
💛🧡❤️

dipika9474

પૂજ્ય નીરુમા રચિત પ્રસ્તુત પદ “દાદાજી છે મારા હૃદયમાં” દ્વારા તેમની પરમ પૂજ્ય દાદા ભગવાન પ્રત્યેની અભેદતાની ઝલક નિહાળીએ.

Watch here: https://youtu.be/_C5zdeJRwG0

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dadabhagwan1150

অলস ভাব আমায় শেষ করলো 🥱🥱🤣

bubai.159930

Disha jain प्रोफ़ाइल लिंक— https://www.matrubharti.com/dishajain221416

"पाप-पुण्य "पुस्तक पढ़ने के लिए लिंक follow करे.👇
https://www.matrubharti.com/novels/40636/paap-puny-by-disha-jain

Description :
पाप या पुण्य, जीवन में किये गए किसी भी कार्य का फल माना जाता है|

इस पुस्तक में दादाश्री हमें बहुत ही गहराई से इन दोनों का मतलब समझाते हुए यह बताते है कि, कोई भी काम जिससे दूसरों को आनंद मिले और उनका भला हो, उससे पुण्य बंधता है और जिससे किसी को तकलीफ हो उससे पाप बंधता है। हमारे देश में बच्चा छोटा होता है तभी से माता-पिता उसे पाप और पुण्य का भेद समझाने में जुट जाते है पर क्या वह खुद पाप-पुण्य से संबंधित सवालों के जवाब जानते है?

आमतौर पर खड़े होने वाले प्रश्न जैसे: पाप और पुण्य का बंधन कैसे होता है? इसका फल क्या होता है?क्या इसमें से कभी भी मुक्ति मिल सकती है? यह मोक्ष के लिए हमें किस प्रकार बाधारूप हो सकता है? पाप बांधने से कैसे बचे और पुण्य किस तरह से बांधे? इत्यादि सवालों के जवाब हमें इस पुस्तक में मिलते है।

इसके अलावा, दादाजी हमें प्रतिक्रमण द्वारा पाप बंधनों में से मुक्त होने का रास्ता भी बताते है। अगर हम अपनी भूलो का प्रतिक्रमण या पश्चाताप करते है, तो हम इससे छूट सकते है|

अपनी पाप-पुण्य से संबंधित गलत मान्यताओं को दूर करने और आध्यात्मिक मार्ग में प्रगति करने हेतु, इस किताब को ज़रूर पढ़े और मोक्ष मार्ग में आगे बढ़े।

bapparawal418006