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✦ My Contract Marriage ✦


शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।



अध्याय 1 – सौदा

आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।

उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।

एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”

आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।

कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।

आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”

कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।



अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत

शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।

दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।

शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।

आरव काम में व्यस्त रहता।

कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।

दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।


अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।

लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।



अध्याय 3 – बदलते रिश्ते

धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।

एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”

आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।

इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।



अध्याय 4 – दिल की धड़कनें

समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।

एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।

दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।


अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।

दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”



अध्याय 5 – तूफ़ान

लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।

आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।

दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?

गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”

दोनों अलग हो गए।


अध्याय 6 – सच्चाई

कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।

वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”

कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”




अध्याय 7 – नया सफ़र

दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।

आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।

विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।


उपसंहार

कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थी

rajukumarchaudhary502010

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rajukumarchaudhary502010

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rajukumarchaudhary502010

🌟 Exciting News! 🌟
My dream has finally come true… 📰✨
My article is published in Akila Daily newspaper!
Feeling so grateful and motivated to keep writing. 💙✍️

nensivithalani.210365

सीधे-साधे थे हम, वो समझते रहे चालाक,
हर बार उनकी बातों से, मन होता रहा परेशान।
हमारी सादगी का भी, उन्होंने फायदा उठाया,
और खुद की गलती पर, हमें ही बताया नादान।

archanalekhikha

मेरी यादे मेरी यादे रही
मेरे ख्याल मेरे ख्याल रहे
पिछे मेरे कुछ ना छुटा
बस कुछ मसले और मलाल रहे .

mashaallhakhan600196

ರಾಮು ಒಂದು ಸಣ್ಣ ಹಳ್ಳಿಯ ಹುಡುಗ.
ಅವನು  ದೊಡ್ಡ ಉದ್ಯಮಿಯಾಗಬೇಕೆಂಬ ಕನಸನ್ನು ಕಂಡಿದ್ದ. ಆದರೆ ಜೀವನ ಸುಲಭವಾಗಿರಲಿಲ್ಲ. ಅವನು ಮಾಡಿದ ಮೊದಲ ವ್ಯವಹಾರವೇ ನಷ್ಟದಲ್ಲಿ ಮುಗಿಯಿತು. ಗ್ರಾಮದ ಜನರು ನಕ್ಕರು, ನಿನಗೆ ಆಗೋದಿಲ್ಲ ಎಂದರು.
ಆ ರಾತ್ರಿ, ಅವನ ತಾಯಿ ಮುದ್ದಾಗಿ ಹೇಳಿದಳು:
ಮಗನೇ, ಬಿದ್ದರೆ ಎದ್ದೇಳು. ಬಿದ್ದಿಲ್ಲ ಅಂದ್ರೆ ನಡೆಯುವುದೇ ಕಲಿಯೋದಿಲ್ಲ.ಅದೇ ಮಾತು ರಾಮುಗೆ ದಾರಿ ತೋರಿಸಿತು.
ಅವನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದ. ಸಣ್ಣ ಸಣ್ಣ ಹೆಜ್ಜೆಗಳ ಸಹಾಯದಿಂದ ನಡೆದು ತಾನು ಕಂಡ ಕನಸಿನಂತೆ ದೊಡ್ಡ ಉದ್ಯಮಿಯಾದ.

ಈ ಕಥೆಯ ಸಂದೇಶ:
ಬಿದ್ದರೂ ಎದ್ದೇಳುವವನೇ ಗೆಲ್ಲುತ್ತಾನೆ.

sandeepjoshi.840664

Goodnight friends..

kattupayas.101947

ಪ್ರೇಮಿಯ ಮೌನ, ಹೇಳಲಾಗದ ನೋವು ಮತ್ತು ಕಣ್ಣುಗಳ ಸಂಕೇತ
​ಪ್ರೀತಿ ಈ ಎರಡು ಅಕ್ಷರಗಳ ಹಿಂದೆ ಅಡಗಿರುವ ಭಾವನೆ ಅದೆಷ್ಟು ಸುಂದರ, ಅಷ್ಟೇ ಸಂಕೀರ್ಣ. ಒಬ್ಬ ಪ್ರೇಮಿಯ ಪಾಡು ಹೂವಿನ ಹಾಸಿಗೆ ಮತ್ತು ಮುಳ್ಳಿನ ಹಾದಿಯ ಸಮ್ಮಿಲನವಿದ್ದಂತೆ. ಸಂತೋಷ, ಉತ್ಸಾಹಗಳು ಒಂದು ಭಾಗವಾದರೆ, ವಿರಹ ಮತ್ತು ಹೇಳಲಾಗದ ನೋವು ಇನ್ನೊಂದು ಭಾಗ.
ಪ್ರೇಮಿಯ ಪಾಲಿಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಕಷ್ಟಕರ ಸನ್ನಿವೇಶ ಯಾವುದೆಂದರೆ ಪ್ರೀತಿಪಾತ್ರರು ಹತ್ತಿರವಿದ್ದಾಗಲೂ ಅದನ್ನು ಹೇಳಿಕೊಳ್ಳಲಾಗದ ಪರಿಸ್ಥಿತಿ. ಆಗ ಹೃದಯವು ಜೋರಾಗಿ ಬಡಿದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಿರುತ್ತದೆ, ಮಾತುಗಳು ಗಂಟಲಲ್ಲಿ ಸಿಲುಕುತ್ತವೆ. 'ನಿನ್ನನ್ನು ಪ್ರೀತಿಸುತ್ತೇನೆ' ಎಂಬ ಮೂರು ಮಾತುಗಳನ್ನು ಹೇಳಲು ಸಾವಿರ ಕಾರಣಗಳುಅಡ್ಡಿಬರುತ್ತವೆ. ನಿರಾಕರಣೆಯ ಭಯ, ಸ್ನೇಹ ಮುರಿದುಹೋಗುವ ಆತಂಕ, ಮತ್ತು ಅತಿಯಾದ ಭಾವನಾತ್ಮಕ ತಳಮಳ.

ಮೌನ ಸಂಕೇತಗಳು ದೇಹ ಭಾಷೆಯೇ ಮಾತು
ಹಾಗಾದರೆ, ಈ ಮೌನಿಯಾದ ಪ್ರೇಮಿ ತಮ್ಮ ಪ್ರೀತಿಯನ್ನು ಹೇಗೆ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸುತ್ತಾರೆ? ಮಾತುಗಳು ನಿಂತರೂ, ಅವರ ದೇಹ ಭಾಷೆ ಮತ್ತು ಸಣ್ಣ ಕ್ರಿಯೆಗಳು ಮಾತನಾಡುತ್ತವೆ. ಪ್ರೀತಿಸುತ್ತಿದ್ದಾನೆ ಎಂದು ತೋರಿಸುವ ಕೆಲವು ಪ್ರಬಲ ಸಂಕೇತಗಳು ಇಲ್ಲಿವೆ
1. ​ಕಣ್ಣುಗಳ ಮಾತು: ಅವರು ಪದೇ ಪದೇ ನಿಮ್ಮನ್ನು ನೋಡುತ್ತಾರೆ, ಆದರೆ ನೀವು ನೋಡಿದ ತಕ್ಷಣ ಕಣ್ಣು ತಿರುಗಿಸುತ್ತಾರೆ. ಅವರ ಕಣ್ರೆಪ್ಪೆಗಳು ನಿಮ್ಮ ಉಪಸ್ಥಿತಿಯಲ್ಲಿ ಸೂಕ್ಷ್ಮವಾಗಿ ಹಿಗ್ಗುತ್ತವೆ. ಅವರ ದೀರ್ಘವಾದ ಮತ್ತು ಸೂಕ್ಷ್ಮವಾದ ನೋಟವೇ ಅವರ ಮೊದಲ ಪ್ರೇಮ ಪತ್ರ.
2. ​ಶಾರೀರಿಕ ಒಲವು: ಗುಂಪಿನಲ್ಲಿದ್ದಾಗಲೂ ನಿಮ್ಮ ಹತ್ತಿರವೇ ನಿಲ್ಲಲು ಅಥವಾ ಕೂರಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಾರೆ. ಅವರ ದೇಹದ ಮುಂಭಾಗವು (ಕಾಲುಗಳು, ಭುಜಗಳು) ಯಾವಾಗಲೂ ನಿಮ್ಮ ಕಡೆಗೆ ತಿರುಗಿರುತ್ತದೆ.
3. ​ಅತಿ ಕಾಳಜಿ:ನೀವು ಹೇಳಿದ ಸಣ್ಣ ವಿಷಯಗಳನ್ನೂ ನೆನಪಿಟ್ಟುಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ನಿಮಗೆ ತೊಂದರೆಯಾದಾಗ, ಎಲ್ಲರಿಗಿಂತ ಮೊದಲು ನಿಮಗೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡಲು ಅಥವಾ ನಿಮ್ಮ ಸಮಸ್ಯೆಗಳನ್ನು ಕೇಳಲು ಓಡೋಡಿ ಬರುತ್ತಾರೆ.
4. ​ತಳಮಳ (Nervousness): ನಿಮ್ಮ ಹತ್ತಿರವಿದ್ದಾಗ ಸ್ವಲ್ಪ ತಳಮಳದಿಂದ ಕೈಗಳನ್ನು ಉಜ್ಜುವುದು, ಕೂದಲನ್ನು ಸರಿಪಡಿಸುವುದು ಅಥವಾ ಮಾತುಗಳಲ್ಲಿ ತಡಬಡಾಯಿಸುವುದು ಸಹ ಪ್ರೀತಿಯ ಒಂದು ಲಕ್ಷಣ.
ಇನ್ನೊಂದು ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಹೇಳುವುದಾದರೆ ಪ್ರೇಮಿಯ ಪಾಡು ಎಂದರೆ ಕೇವಲ ಸಂತೋಷದ ಅನುಭವ ಮಾತ್ರವಲ್ಲ, ಅದು ಸವಾಲುಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸಿ ಮೌನವಾಗಿ ಪ್ರೀತಿಯನ್ನು ಸಾಗಿಸುವ ಒಂದು ಜುಗಲ್ಬಂದಿ. ಮಾತುಗಳಲ್ಲಿ ಹೇಳಲಾಗದ ಪ್ರೀತಿಯನ್ನು ತಮ್ಮ ವರ್ತನೆ, ನೋಟ ಮತ್ತು ಮೌನ ಕಾಳಜಿಯ ಮೂಲಕ ನಿರಂತರವಾಗಿ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸುವ ಅವರ ಪ್ರಯತ್ನ ನಿಜಕ್ಕೂ ವಿಶೇಷ.
​ನಿಮ್ಮ ಅನಿಸಿಕೆ ಏನು? ಪ್ರೀತಿ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಲು ನೀವು ನೋಡಿದ ವಿಚಿತ್ರ ಅಥವಾ ಸುಂದರ ಸಂಕೇತ ಯಾವುದು? ಕಮೆಂಟ್ ಮಾಡಿ ತಿಳಿಸಿ.

sandeepjoshi.840664

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है दिल दर्पण

mamtatrivedi444291

কেমন আছেন ?
জানি তো ভালোই আছেন ,,আমাকে তো আর মনে পড়ে না ।পড়বে কেনো ? আমি আপনার কে হই?
কিছু লাগলেই তো মনে পড়বে !
আজ হঠাৎ করেই মন খারাপ হয়ে গেলো । উঁহুহ আপনার কথায় মনে পড়ছে ।জানি না যখনি আপনাকে ভুলতে চাই তখনি চোখ দিয়ে পানি পড়ে।বুঝি না কেনো পড়ে ? কে হন আপনি আমার ? হঠাৎ করেই আজ বড্ড দেখতে ইচ্ছে করছে আপনাকে .
দেখতে তো রোজই ইচ্ছে করে কিন্তু আজ একটু বেশি করছে ।মনে হচ্ছে একটু যদি দেখতে পারি তবে পৃথিবীর সব চেয়ে সুখি মানুষ টি হবো আমি ।আমি এটাও জানি আপনার সেই চোখে বেশি সময় চেয়ে থাকার সাধ্য আমার নেই । তারপর ও বেহায়া মন আপনাকেই দেখতে চায় ।কেনো চায় একটু বলবেন আমাকে ?
আমি আজ ক্ষতিগ্রস্ত।হ্যা আপনার কারনে ক্ষতিগ্রস্ত,কি ওমন লস হতো আপনার যদি আপনি কখনো আমার সামনে না আসতেন তো ?

জানেন মাঝে মাঝে নিজেকে বড্ড অসহায় অনুভব করি ।
আচ্ছা এক তরফা ভালোবাসা এতো কষ্টের কেনো হয় ?
আমি জানিনা এটা ভালোবাসা নাকি অন্য কিছু?
নাকি কয়েক দিনের মোহ !
কয়েক দিনের মোহ তো কেটে যায় কিন্তু মায়া টা রয়ে যায় .!

একটু বলবেন আপনার জন্য আমার মনে এতো কিসের টান?
হঠাৎ বৃষ্টি হলেই মনে হয় আপনি হয়তো কাকভেজা হয়ে আমার দিকে ছুটে আসবেন ‌।আবার আপনাকে নিয়ে চিন্তা ও হয় আমার ।এই যে বৃষ্টি হচ্ছে এই সময় আপনি কোথায় আছেন ? কেমন আছেন ? বৃষ্টিতে ভিজে ঠান্ডা না বেঁধে বসে আবার আপনার।এই তো গরম পড়ল ! গরমে ঘেমেনেয়ে একাকার হয়ে যাওয়া আপনার মুখ টা দেখতে বড্ড ইচ্ছে করে . আপনাকে নিয়ে চিন্তা ও হয় !
গরমে আপনার অবস্থা টা কি ? বেশি গরম লাগে না তো ?

আপনাকে মাঝে মাঝে এলোমেলো অবস্থায় ও দেখতে চায় এই মন ।আপনার কুঁচকে যাওয়া পাঞ্জাবি।গায়ের সঙ্গে লেপ্টে থাকা ঘামের গন্ধ, উস্ক খুশ্ক এলোমেলো চুল । খোঁচা খোঁচা দাড়ি তেও দেখতে চায় মন ।এই মন এতো বেহায়া কেনো বলেন তো ?

এই যে আপনি এতো দিন ধরে আমার মনের মাঝে বাস করেন ? এক বার তো ভাড়া ও দিলেন না ?
এই আপনি এমন কেনো ?
এই আবেগী কিশোরীর মন চুরি করে নিজে তো আরামে ঘুমাচ্ছেন।এক বার কি মন টা খারাপ করে না ?

ভালোবাসা সে নাকি এক অসহায় অনুভূতি!
তবে আমার কাছে ভালোবাসা এক অদ্ভুত অনুভূতি। শরীরের ঠান্ডা শিহরণ সে ,যার আসার সময় আমরা টের পাই না তবে খানিক বাদে যখন উপলব্ধি করি তখনি মানুষ টি আর থাকে না । ভালোবাসা যে কারো সাথে হতে পারে ।সেই মানুষ টি হোক পৃথিবীর সব থেকে নিকৃষ্টতম ব্যক্তি কিংবা পৃথিবীর সব থেকে সুদর্শন ব্যক্তি।ঠিক সেই অনুভূতির গভীরে যখন ডুবে যাই, তখনই মনে হয়—ভালোবাসা আসলে কোনো যুক্তি মানে না। সে এসে হুট করেই হৃদয়ের দরজায় কড়া নাড়ে, ঠিক যেমন তুমি নাড়ালে আমার হৃদয়ে।

জানো, কখনো কখনো মনে হয়, তুমি যেন আমারই এক অংশ, যা আমি ছুঁতে পারি না, ছুঁয়ে দেখতে চাই, কিন্তু পারি না। তুমি আছো, তবুও নেই। তুমি দূরে, তবুও সবচেয়ে কাছের। এই অনুভূতি বোঝানোর মতো কোনো ভাষা আমার জানা নেই, শুধু জানি, তুমি আছো আমার প্রতিটা নিঃশ্বাসে, প্রতিটা ভাবনায়।
তোমাকে নিয়ে আমার চিন্তার শেষ নেই। তুমি কোথায় যাচ্ছ, কী করছ, কেমন আছো—সব কিছু জানতে ইচ্ছে করে। অথচ জানি, এসব জানার কোনো অধিকার আমার নেই। জানি, তুমি আমার নও। তবুও, আমার এই উন্মাদ মন তোমাকে নিজের ভেবে বসে।

রাতের গভীর নিস্তব্ধতায় তোমার অনুপস্থিতি আমাকে কুরে কুরে খায়। জানো, কতবার মনে হয়েছে তোমার একটা বার্তা আসবে, একটা ডাক আসবে? কিন্তু না, তুমি তো অচিনপুরের এক রাজা, যার কাছে আমার অস্তিত্ব নেই।আচ্ছা, তুমি কি একটুও টের পাও না আমার মনের এই টান? একটুও কি তোমার বুকের ভেতর শিহরণ জাগে না? নাকি তুমি নিঃস্পৃহ?আমার ভালোবাসা একতরফা, জানি। তবু, আমি ভালোবাসি।তুমি আমাকে না ভালোবাসলেও, আমি তোমার জন্যই আছি, তোমার জন্যই থাকব। কেননা ভালোবাসা তো দখল নেওয়া নয়, ভালোবাসা তো কেবলই অনুভব। আর আমি তোমাকে অনুভব করি… প্রতিটি নিঃশ্বাসে, প্রতিটি মুহূর্তে।

ভালোবাসা বুঝি না, শুধু জানি তুমি আছো আমার প্রতিটি নিঃশ্বাসে, প্রতিটি অনুভূতিতে।
তোমার খবর নিতে কোনো অধিকার নেই তবু মনে হয়, তুমি কেমন আছো? কোথায় আছো? আমাকে একবারও কি মনে পড়ে?
তুমি দূরে থেকেও এত কাছে কেন? কেন এই মন শুধু তোমাকেই খোঁজে?জানি, তুমি আমার নও। তবু, ভালোবাসা তো দখল নয়, ভালোবাসা শুধু অনুভব। আর আমি তোমাকে অনুভব করি—নিঃশব্দে, নির্ভীকভাবে, একতরফাভাবে… চিরকাল।

ridhikaislamhimigmail.com701625

तेरा मेरा सफ़र जैसे ख्वाबों का शहर,
हर कदम पर बस तेरी हँसी का असर।

हवा में तेरी खुशबू, दिल में तेरी बातें,
रातें भी सजती हैं, जब तू मेरे साथ है।

तू सामने हो और मैं बस तुझमें खो जाऊँ,
सारे जहां की फ़िक्रें, जैसे धुंध में छुप जाऊँ।

तेरी नज़रों का जादू, मेरी रूह तक उतर गया,
हर पल तेरा नाम, मेरे होंठों पर फिसल गया।

तेरी मुस्कान की गर्मी, जैसे सूरज की रोशनी,
तू मेरे पास हो, तो हर दर्द भी लगता है हल्का।

तेरा मेरा सफ़र, सिर्फ़ कहानी नहीं,
ये प्यार का अहसास है, जो हर पल बढ़ता ही चला जाए।

Payal

payaldevang08gmail.com936925

Good evening friends.. have a wonderful evening

kattupayas.101947

सच्चाई आमतौर पर कड़वी होती है, इसलिए लोग उसे शब्दों की मीठी चाशनी में नापसंद कर देते हैं। जितनी शोर शराबा, उतने अधिक विचार-जाल — एक शब्द भीतर डालो तो सो हजार निकलते हैं। हमारे पास सिर्फ़ तीन मूल चीज़ें हैं: देह, मन और आत्मा। मन दोनों छोरों का पुल है; यदि तुम देह-प्रधान हो तो आत्मा दिखनी बंद हो जाती है और बाहर के गुरु, किताबें, रीति-रिवाज़ ही ईश्वर बन जाते हैं — बाजार की चीज़ें। असली अभ्यास यह है: शब्दों का नियंत्रण, मौन में रुकना, और शरीर-मन के बीच वह शून्य खोजना जहाँ असली केंद्र है। वहाँ खड़े होकर बुद्धि-इंद्रियाँ जरूरत पर काम करें, अन्यथा सब शांत। कुछ जन्म लगेगा — मन की छोटी-मोटी मृत्यु — पर वही नया जन्म है।

manishborana.210417

भीतर की यात्रा — सत्य का मार्ग ✧

मनुष्य का सबसे बड़ा धोखा यही है कि वह सत्य को बाहर खोजता है।
कभी वह गुरु की ओर भागता है, कभी शास्त्रों की ओर, कभी किसी संस्था या संप्रदाय के आभामंडल में शरण लेता है। बाहर की ओर उसका आकर्षण इसीलिए होता है क्योंकि वहाँ शब्द हैं, कर्मकांड हैं, वचनबद्ध आश्वासन हैं। बाहर की दुनिया हमेशा व्यापार करती है—कभी धर्म के नाम पर, कभी पाप-पुण्य के सौदे पर, कभी ईश्वर के वादे पर।

लेकिन सत्य का व्यापार नहीं होता। सत्य बिकाऊ नहीं है, न ही किसी आचार्य के प्रमाण पत्र पर निर्भर है।
वह बाहर नहीं, भीतर छिपा है।

भीतर जाना ही असली आध्यात्मिकता है।
इस मार्ग पर न गुरु चाहिए, न कोई कर्मकांड।
बस तीन बातों को समझना है:

1. मन — जो तुम्हारे हर अनुभव को रंगता है। यदि मन जड़ प्रधान है तो वह देह और बाहरी संसार में उलझा रहेगा। यदि आत्मा की धारा में डूबा है तो भीतर के बीज तक ले जाएगा।

2. देह — जो साधन है, आधार है। इसका ज्ञान तुम्हें दिखाता है कि जीवन नश्वर है और भीतर का साक्षी ही शाश्वत है।

3. चैतन्य प्रवाह — वह सूक्ष्म बिंदु, वह 0-जैसा केन्द्र, जिसकी वजह से तुम हो। यही ब्रह्मांड का बीज है।

यहीं से यात्रा शुरू होती है।
सारा ब्रह्मांड इसी बिंदु में संकुचित है, और बाहर की हर खोज इसी बीज से छूटकर तुम्हें भटकाती है।

धर्मशास्त्र, उपनिषद्, गीता, बुद्ध के वचन—ये सब एक ही दिशा इशारा करते हैं:
“भीतर जाओ।”
लेकिन दिशा-दर्शन को ही लोग मार्ग समझ लेते हैं, और मार्गदर्शक को ही लक्ष्य मान बैठते हैं।
यहीं से माया जन्म लेती है।

वास्तविक मार्ग तो भीतर का मौन है—जहाँ मन थमता है, देह केवल साधन रह जाती है, और चैतन्य अपना स्वरूप प्रकट करता है।
वहाँ पहुँचने पर कोई शास्त्र नहीं, कोई गुरु नहीं, कोई संस्था नहीं बचती।
केवल तुम और वह बीज—जो स्वयं ब्रह्मांड है।
agayat agyani

manishborana.210417

बारिश की बूंदों में तुम ☔❤️

सावन की हल्की फुहारों में,
तेरा चेहरा आईने सा चमकता है,
हर बूँद संग दिल ये कहता है,
तू ही मेरी दुनिया, तू ही आसमां लगता है।

गीली ज़मीन की वो ख़ुशबू,
तेरे आने की आहट जैसी है,
बारिश की हर सरगोशी में,
तेरी हँसी की गूँज जैसी है।

जब भीगी राहों पर हम साथ चलें,
तो लगता है वक्त यहीं थम जाए,
बारिश की इन प्यारी बूँदों संग,
तेरे बिना ये दिल अब रह न पाए।

rashmidwivedi205340

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leylines

મરીઝ થઈ ને હવે તો મરવા પડ્યા
છીએ.......

પથારીએ પડ્યા પડ્યા આંસુને સંતાડીને કેટલુ એ રડ્યા છીએ.....

જિંદગી ની યાદ

ajit3539

सच्चे-झूठे की गाथा



सुना, तुम कल्कि रूप में आओगे,
भक्तों को बचाने आओगे,
सब धर्मों को फिर से जोड़ोगे,
दुनिया में नया उजाला लाओगे।
पर मैंने देखा सच का दुख,
और झूठों के चेहरे पर सुख।
वो मंदिर जाएँ, फूल चढ़ाएँ,
तुम उनसे क्यों प्रसन्न हो जाते?
उनकी हर इच्छा पूरी कर जाते।
तुम तो सच्चे मन को चाहते हो,
निर्मल भाव से ही प्रसन्न हो जाते हो।
यहाँ तो सब उल्टा हुआ है,
झूठा मौज में, सच्चा दुख से रोया है।
सच्चे पर लगते इल्ज़ाम,
तुम क्यों नहीं आते, हे राम?
वो मज़ाक बनाते हैं, कहते हैं,
"अपराधी के पास भगवान नहीं रहते।"
सुनो प्रभु, अब लाज तेरी है,
मैंने तो कहा, "मेरे ईश्वर संग मेरे हैं।"
गर न आए, तो मेरा नहीं, तेरा मज़ाक बनेगा,
हमारा क्या, हमारा तो रोज़ अपमान होगा।
हम तो आदी हो गए सुनकर,
पर दुष्ट लोग हो जाएँगे खुश,
बढ़ेगा अत्याचार, होगा तुम्हारा उपहास,
कल्कि! कुछ तो करो,
तुम सह लोगे, पर हमसे न होता बर्दाश्त।
कोई चमत्कार दिखाओ,
उन दुष्टों के होश उड़ाओ।
अब तो आओ प्रभु, अब तो आओ,
सच्चों की लाज बचाओ।
समय-समय पर ट्रेलर दिखाओ,
उन दुष्टों को डराओ,
"मैं आ रहा हूँ, अब तो सुधर जाओ।"
मेरे साथ!

archanalekhikha

तेरी हसद ने जाने कितने मका गिराये
दिल जो रो रहा कोई इसकी खता बताये
गेरो पर यकि कोई कैसे कर सकता है
जो अपनो की कही एक बात भी सून ना पाये .

mashaallhakhan600196