Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

✨ Exciting News ✨



Niyati: The Girl Who Waited – 11 is now LIVE on Matrubharti! 💕



📖 Chapter 11: The Rise of Niyati

Two years after her MBA, Niyati has grown stronger—turning struggles into success and leading with courage and compassion. Her journey will inspire you to believe in resilience and new beginnings.



👉 Haven’t started reading Niyati yet? Now is the perfect time! Begin from the first chapter and experience her full journey. 💫



🔗 Read now: https://www.matrubharti.com/book/19982178/niyati-the-girl-who-waited-11-by-nensi-vithalani



#Niyati #TheGirlWhoWaited #NewChapter #Matrubharti #ReadersChoice #Storytime

nensivithalani.210365

🩸खजूर चिंच चटणी

🩸जेवताना किंवा नाष्टा करताना तोंडी लावायला, चाट, पाणीपुरीवर घालायला चिंचेची चटणी लागतेच ही चटणी चविष्ट तर आहेच पण त्याचसोबत ती पौष्टीकही आहे.

🩸साहित्य..

बिया नसलेली चिंच एक वाटी
बिया काढलेला खजूर एक वाटी
एक वाटी गूळ
एक चमचा बडीशेप पावडर
अर्धा चमचा धने पावडर
अर्धा चमचा जिरे पावडर
अर्धा चमचा सुंठ पावडर
एक चमचा लाल तिखट
मीठ चवीनुसार

🩸 कृती..

प्रथम कढईत चिंच, खजूर आणि गूळ टाका.
नंतर त्यात दोन वाट्या पाणी टाका
आणि हे सर्व चांगले मिसळा.
आणि दहा मिनिटे शिजवा

🩸यानंतर बडीशेप पावडर, धने पावडर, जिरेपूड, सुंठ पावडर, लाल तिखट आणि मीठ घालून मिसळा.

🩸पाच मिनिटे परत मंद आचेवर शिजवा
थंड झाल्यावर हे मिश्रण मिक्सरमधून सरबरीत वाटून घ्या

🩸आकर्षक रंगाची चटणी तयार होते
यात थोड पाणी घालून पातळ केली असता भेळीसाठी अथवा चाट साठी उपयोगी येते

🩸टीप
.चिंच आणि खजूर सम प्रमाणात असावा
तिखट पावडर लाल असावी
चटणी नेहेमी मध्यम आचेवर शिजवावी

jayvrishaligmailcom

शास्त्र, मंदिर और आज का धर्म ✧

---

शास्त्र और मंदिर – समर्पण के प्रमाण

भारत के इतिहास को देखें तो शास्त्र और मंदिर दोनों ही अत्यंत ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण हैं।
ऋषि-मुनियों ने शास्त्र रचे, और राजा-महाराजाओं ने धन देकर मंदिर खड़े किए।
यह प्रमाण हैं कि – ‘हम नहीं, मैं नहीं, मेरे नहीं – सब उस ईश्वर के हैं।’
मंदिर ईश्वर-समर्पण के महान प्रमाण हैं।

मंदिर – केवल संकेत, न कि अनुभव

लेकिन आज मंदिरों में पूजा-पाठ और दर्शन का कोई वास्तविक मूल्य नहीं रहा।
यह तो केवल संकेत और प्रमाण हैं उस अनुभूति के – जैसे बुद्ध ने कहा:
“मैं नहीं हूं, वही है।”
जिनके पास सम्पदा थी, उन्हें भी शांति तब मिली जब यह बोध हुआ कि ‘मैं नहीं हूं’ –
मंदिर उसी बोध की अभिव्यक्ति हैं।

विज्ञान और आत्मा – संतुलन का धर्म

यदि सब कुछ ‘मेरा’ होता, तो केवल विज्ञान पैदा होती।
भारत में पहले विज्ञान पैदा हुई थी, लेकिन समय के साथ ऋषियों ने यह समझ लिया कि
मनुष्य विज्ञान से केवल उलझेगा, सुलझेगा नहीं।
विज्ञान अगर साधन बन जाए तो अत्याचार और अशांति लाएगी,
क्योंकि शक्ति की आँखें नहीं होतीं।
रावण के पास भी बड़ी विज्ञान थी, पर सुख नहीं था।

आज की विज्ञान भी वही है – खोज ज़रूर करती है,
परन्तु सुख नहीं देती।
सुख तभी संभव है जब आत्मा और शरीर दोनों का संतुलित विकास हो।
बिना आत्मिक विकास के जीवन अंधकार है –
बाहर स्वर्ग-सा दिखेगा, लेकिन भीतर नर्क, अशांति और दुःख भरा होगा।

---

भीतर की ऊर्जा – अनंत संभावनाएँ

इसलिए जड़-सुविधा एक हद तक ठीक है,
पर उतनी ही विज्ञान विकसित होनी चाहिए जितनी आत्मिक विकास हो।
क्योंकि ईश्वर और यह जीवन – दोनों भीतर ही हैं।

विज्ञान कहती है: एक परमाणु में अपार ऊर्जा है।
आध्यात्मिकता कहती है:
हमारे श्वास, भोजन, पानी में भी अपार ऊर्जा है –
हम कितनी संभावना भीतर ले रहे हैं।
यदि मनुष्य इसे समझ ले, अनुभव ले, तो उसका प्रफुल्लित होना अवर्णनीय होगा।

परमाणु छोड़िए –
भीतर वीर्य की एक बूंद के आनंद को ही मनुष्य सह नहीं पाता।
तब अनंत का बोध कैसे संभव होगा?
यौन-सुख अनुभव घटाता है,
या वहां व्यक्ति अपने-आप में टूटता है।
इस टूटने, अलग होने का बोध ही प्रमाण है कि
भीतर अन्य सूर्य मौजूद है –
सेक्स तो केवल एक किरण है।

---

आत्मा-बोध – ‘मैं’ की सीमा

प्रश्न उठता है –
जिस ‘मैं’ से हम चिपके बैठे हैं, उससे यह बोध संभव नहीं।
उसकी औक़ात नहीं है आत्मा का बोध करने की।
तभी आत्मिक विकास चाहिए।
सत्य, अनंत, ब्रह्म – जब भीतर बोध हो जाता है
तो फिर न त्याग बचता है, न पकड़।
क्या तुम्हारा? क्या मेरा?
सब उसी का है।

तब मंदिर, शास्त्र, ईश्वर – सब कुछ वही हैं।
हम नहीं, हम केवल साक्षी हैं।
तुम ही सब कुछ हो।

---

आज का धर्म – आँखों पर पट्टी

आज का धर्म क्या सिखा रहा है?
विश्वास, श्रद्धा, आशा, स्वप्न…
हमारा अतीत ज्ञान-बोध था,
और आज हमारे धार्मिक कहाँ खड़े हैं?

क्या हमारे धार्मिक ज्ञान दे रहे हैं?
शास्त्र के अतीत से यह स्पष्ट है –
आज का धर्म अंधा है।
तब सामान्य इंसान क्या करेगा?
धर्म उसके भीतर क्या भर रहा है?
क्यों ज्ञान दे रहा है?
उसके आत्मिक परिणाम क्या हैं?
इसके प्रमाण सामने हैं।

---

धार्मिक कृपा – झूठ का मुखौटा

कहाँ आत्मा-परमात्मा और कहाँ आज के धार्मिक रक्षक?
कितनी दूरी है आत्मा और ईश्वर के बीच।
धार्मिकों की “कृपा” की झलक उनके भक्तों में साफ दिखाई देती है।
उनके स्वभाव, उनके विचार, उनकी मांग और उनकी इच्छाएँ – सब यही दिखाते हैं कि
धर्म का आशीर्वाद और कृपा आज किन रूपों में उतर रही है।

---

धर्म का परिणाम – अधर्म की खेती

परिणाम सामने है –
आज की दुनिया में धर्म का असर स्पष्ट झलकता है।
विज्ञान शिक्षा दे रही है, विज्ञान विकसित हो रहा है।
लेकिन धर्म और धार्मिक क्या दे रहे हैं?
संस्कार नहीं, आत्मा-विकास नहीं।
इसके बजाय मनुष्य के भीतर भ्रांति और बंधन ही भर रहे हैं।

यह केवल किसी एक धर्म की बात नहीं है,
विश्व के सभी धर्मों की दिशा और दशा यही हो गई है।
धार्मिकता का परिणाम ठीक विपरीत दिखाई दे रहा है।
आज समाज में चोरी, भ्रष्टाचार, बलात्कार, दंगे, लूट –
इन सबके पीछे भी धर्म-आधारित मानसिकता की छाया है।
क्योंकि धर्म को राजनीति और विज्ञान से ऊपर स्थान दिया गया,
और धर्म ने क्या उपजाया?
अशांति और अधर्म।

राजनीति और विज्ञान इतनी अनैतिक शिक्षा नहीं देते
जितनी धर्म के नाम पर फैली हुई है।
सोचने की बात है –
इन धार्मिकों का असली चरित्र क्या है?
खुद जो लोग समाज के ‘रक्षक’ कहलाते हैं,
वही आए दिन चोरी, खून, बलात्कार और भ्रष्टाचार में पकड़े जाते हैं।

मतलब यह कि जिन्हें धर्म, राजनीति और विज्ञान से भी उच्च समझा गया –
उन धार्मिकों की दशा आज बिल्कुल उजागर हो चुकी है।
उनकी आड़ में समाज का पतन ही बढ़ रहा है।

---

धर्म की नग्नता – परिणाम स्पष्ट

किसी साधारण व्यक्ति से आत्मा-परमात्मा पर प्रश्न करो –
उनकी बकवास स्पष्ट कर देती है
कि आज का धर्म किस दिशा में जा रहा है।

ज्ञान पूरा बकवास-सा बन गया ह

bhutaji

યુદ્ધથી શું ખરેખર શાંતિની સ્થાપના થઇ શકે?
પ્રશ્ન નાનો છે પણ મનમાં ઉદભવ્યો છે.

ઈઝરાયેલ અને ગાઝાના આતંકવાદીઓ(હમાસ )હવે આતંકવાદીઓ જ નહીં ત્યાંની નિર્દોષ પ્રજા સાથેનું યુદ્ધ.

બીજું રહ્યું રશિયા અને યુક્રેન નું યુદ્ધ જે વર્ચસ્વ અને આત્મસન્માન નાં નામે લડાઈ રહ્યું છે.

આ બન્ને યુદ્ધ બસ આ નાના પ્રશ્નનું ઉદગમસ્થાન રહ્યું!

શું ખરેખર યુદ્ધ થી શાંતિ સ્થાપિત થઇ શકે??

જો ખરેખર યુદ્ધ થી શાંતિ સ્થાપિત થતી હોય તો ભવિષ્યમાં ઘણા યુદ્ધો લડાયા છે.

વર્તમાનમાં ક્યાં શાંતિ છે?

એક સદીમાં બબ્બે વિશ્વ યુધ્ધ!
શાંતિના નામે નહીં પરંતુ પ્રભુત્વ અને અહમ્ ને પોષવા લડાયા.

કોઈ શું પામ્યું?

તે એક અલગ વાત રહી પરંતુ દુઃખ,વેદના અને ના ભુલી શકાય તેવા દુઃખદ સ્મરણો દરેક પામ્યા છે.

યુધ્ધ એ જીવનની ઉત્પત્તિ સાથે જ શરૂ થયું હશે?

કોઈ યુદ્ધ ખુદને ટકાવી રાખવા કોઈ યુદ્ધ સ્ત્રી માટે, જમીન માટે , કોઈ અપમાન નો બદલો લેવા માટે.ભૌતિક સંપત્તિની લાલચ કે સમગ્રપણે પ્રભુત્વ મેળવી લેવાની ગાંડી ઘેલછા માટે.

યુદ્ધ તો થયા જ છે.
હજુપણ થાય છે જ.

યુદ્ધથી કોઈ પામે છે અને કોઈ ગુમાવે છે.
કંઈક પામી લેવાની વિચારણા જ યુદ્ધ નું કારણ બંને છે.

જો યુદ્ધ માણસો વચ્ચે લડાઇ રહ્યું તો બન્ને પક્ષ પામવા કરતા ગુમાવે છે વધુ.

માનવતા પ્રથમ નાશ પામશે.

કલિંગનાં યુદ્ધમાં થયેલા રક્તપાતે સમ્રાટ અશોક ને સમજાવ્યું.

યુદ્ધથી પ્રાપ્ત ધનસંપત્તિ સાચું સુખ નથી.
રક્તપાત જીવનનો સાચો ધબકાર નથી.

લોકોની શાંતિ હણીને થોડી શાંતિ પ્રાપ્ત કરી શકાય.

બસ પછી સમ્રાટ "બુદ્ધ શરણં ગચ્છામિ".

શાંતિ મળે એ જ તો જીવનની સાચી સંપત્તિ રહી.

યુદ્ધ થી કદી ના મળે.

ધર્મની સ્થાપના કરવા કૃષ્ણએ મહાભારતનું યુદ્ધ કરાવ્યું.

શું ખરેખર ધર્મની સ્થાપના થઇ?
તર્ક થી વિચારવા જેવી વાત રહી.

જે શ્રી કૃષ્ણે 'ધર્મ સ્થાપના' માટે યુદ્ધ કરાવ્યું તેમના જ જ્ઞાતિબંધુઓ પરસ્પર ધર્મ વિરોધી કર્મ કરીને યુદ્ધ કરીને જ મર્યા.

યુદ્ધથી કૃષ્ણ પણ શોકમગ્ન થાય છે.
ઈશ્વરનું સ્વરૂપ રહ્યું પરંતુ રહ્યો માનવદેહ.

એમ જ એકાંત વાસમાં ભાલકાતીર્થ ગયાં નહીં હોય.

ત્યાં પણ યુદ્ધનું જ અસ્ત્ર તીરથી વૈકુંઠ ગમન.

આપણે ઈશ્વર લીલામાં યુદ્ધ ને એક ભાગ તરીકે સંતોષ સ્વીકારવો રહ્યો.

યુદ્ધ એ કદી શાંતિ લાવી શકે નહીં.

આજે જે ઈઝરાયેલ રક્ષણ નાં નામે નિદોર્ષ લોકોને મારીને પોતાનું પ્રભુત્વ વિસ્તરણ કરી રહ્યું છે.

તે નૈતિકતા ની દષ્ટિએ ખોટું છે.
એકના પાપે સો નિર્દોષ મરે?

આતંકવાદી મૃત્યુને લાયક છે.
તેમાં જરા પણ ના નથી.

કોઈ ધર્મ ક્યાં આતંક ફેલાવાનું કહે છે. બસ સમજવાની રીત અથવા સમજાવનાર ની દાનત ખોટી હોય છે.

યુદ્ધમાં જે નિર્દોષ વ્યકિતની પત્ની, પુત્ર પુત્રી કે માં બાપ કે કોઇપણ મર્યું હશે.

શું તે બદલો લેવા હથિયાર ઉપાડશે કે નહીં?
તેને ઉપાડવા જોઈએ?

આપણે તેમની જગ્યાએ હોય તો શું કરીએ?

આવા યુધ્ધો આતંકવાદીઓ નો ખાત્મો નહીં પરંતુ બીજા અનેક આતંકીઓ ઉભા કરે છે.

મારી નજરથી,

સત્ય છે પણ પચે તેવું નથી.
જરા કડવું છે.દરેકને ભાવશે નહીં.

જેને ગુમાવ્યું છે, તે તેના સમયે પાછો ઘા કરશે તેનાં મતે બદલો હશે.

બસ આ રીતે ચક્ર ચાલશે.

વેરથી વેર ના શમે.
એમ જ તો કહ્યું નહીં હોય.

મનમાં પણ સારા અને ખરાબ વિચારો નું યુદ્ધ ચાલે જ છે.

જો નિમ્ન વિચારો જીતી ગયા તો વિનિપાત નક્કી રહ્યો માનવતાનો.

parmarmayur6557

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं

mamtatrivedi444291

🙏🙏જ્યાં 'યુદ્ધનું' વાતાવરણ છે ત્યાં કદી "પ્રવાસી" મહેમાન બનીને આવશે નહીં.🦚🦚

*✈️World tourism day 🛫*

parmarmayur6557

ऐ जिंदगी इतना बवाल मत किया कर..
वरना किसी दिन ख़त्म कर दूंगी तुझे
उबलती चाय में उबाल कर.....
Bitu....

bita

🌹🌹जय राधे कृष्णा 🙏

rashmidwivedi205340

कभी-कभी दिल की खामोशी भी बोल जाती है, हर एहसास अपनी जगह छू जाता है, और अधूरी दास्तान बनकर हमारे भीतर की गहराई में हमेशा रह जाती है।”
कुछ मोहब्बतें उस पल तक ही सीमित रहती हैं, जिन्हें हम पा नहीं सकते, लेकिन उनकी यादें हर सोच, हर ख्वाब, हर सांस में बस जाती हैं।
“हर अधूरा रिश्ता, हर अनकही बात, हर टकराया हुआ नजरिया… सब मिलकर हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत और दर्दभरी दास्तान रचते हैं।”
“कुछ प्यार हमारे पास आकर भी कभी पूरा नहीं हो पाता, फिर भी उसकी मौजूदगी हमारे हर एहसास को एक नई गहराई दे जाती है।”
“अधूरी दास्तान सिर्फ़ कहानी नहीं होती, ये वो एहसास है जो हर मुस्कान, हर आंसू और हर खामोशी में हमारी रूह तक उतर जाता है।”

Payal

payaldevang08gmail.com936925

..

shivani139143

यह कहानी उस बड़े संघर्ष को दर्शाती है जो तब पैदा होता है जब एक परिस्थिति एक भारतीय सुपर हीरो को सबसे शक्तिशाली नेटिव अमेरिकन (Native American) से लड़ने के लिए मजबूर करती है, जिसकी ज़बरदस्त हरकतें अनजाने में दुनिया को विनाश की ओर धकेल रही हैं।

आखिर यह नेटिव अमेरिकन कौन है? उसके प्रभाव से वैश्विक विनाश इतना नज़दीक क्यों है? और कौन सी शक्ति उसे अराजकता के इस मार्ग पर ले जा रही है?

इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए मेरा नॉवेल पढ़ें, जो जल्द ही Amazon Kindle Unlimited पर मुफ्त में उपलब्ध होगा।

धन्यवाद
सूर्य बंडारू (Surya Bandaru)

surya1991

ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ನಂಬರ್​ಗಳ ಮಹತ್ವ: ಅದು ಕೇವಲ ಒಂದು ಕನಸಲ್ಲ,
​ನಾವು ಕನಸುಗಳನ್ನು ಕಾಣುತ್ತೇವೆ. ಆ ಕನಸುಗಳಲ್ಲಿ ಕೆಲವೊಮ್ಮೆ ವಿಚಿತ್ರ ಚಿತ್ರಗಳು, ವ್ಯಕ್ತಿಗಳು, ಅಥವಾ ಸನ್ನಿವೇಶಗಳು ಇರುತ್ತವೆ. ಆದರೆ, ಈ ಕನಸುಗಳಲ್ಲಿ ಸಂಖ್ಯೆಗಳು (ನಂಬರ್​ಗಳು)  ಕಾಣಿಸಿಕೊಂಡರೆ ಏನರ್ಥ? ಸಂಖ್ಯಾಶಾಸ್ತ್ರದ ಪ್ರಕಾರ, ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ಬರುವ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಸಂಖ್ಯೆಗೂ ಒಂದು ವಿಶೇಷ ಅರ್ಥ ಮತ್ತು ಮಹತ್ವ ಇರುತ್ತದೆ. ಈ ಸಂಖ್ಯೆಗಳು ನಮ್ಮ ಜೀವನದ ಯಾವುದೋ ಒಂದು ಅಂಶದ ಬಗ್ಗೆ ಸುಳಿವು ನೀಡುತ್ತಿರಬಹುದು.
ಒಂದರಿಂದ ಒಂಬತ್ತರವರೆಗಿನ ಸಂಖ್ಯೆಗಳ ಸಂಕ್ಷಿಪ್ತ ಅರ್ಥ:
ಸಂಖ್ಯಾಶಾಸ್ತ್ರವು ಸಾಮಾನ್ಯವಾಗಿ 1 ರಿಂದ 9 ರವರೆಗಿನ ಸಂಖ್ಯೆಗಳನ್ನು ಪ್ರಮುಖವೆಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತದೆ.
ಸಂಖ್ಯೆ 1: ಇದು ಹೊಸ ಆರಂಭ, ನಾಯಕತ್ವ ಮತ್ತು ಸ್ವಾವಲಂಬನೆಯ ಸಂಕೇತ. ಈ ಸಂಖ್ಯೆ ಕಂಡರೆ ನೀವು ಹೊಸ ಯೋಜನೆ ಪ್ರಾರಂಭಿಸಲು ಸಿದ್ಧರಾಗಿದ್ದೀರಿ ಎಂದರ್ಥ.
ಸಂಖ್ಯೆ 2: ಇದು ಸಹಕಾರ, ಸಮತೋಲನ, ಮತ್ತು ಸಂಬಂಧಗಳು ಸೂಚಿಸುತ್ತದೆ. ನಿಮ್ಮ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಸೌಹಾರ್ದತೆ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ ಎಂಬ ಸಂದೇಶ ಇದಾಗಿರಬಹುದು.
ಸಂಖ್ಯೆ 3: ಇದು ಸೃಜನಶೀಲತೆ, ಸಂವಹನ, ಮತ್ತು ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಪ್ರತಿನಿಧಿಸುತ್ತದೆ. ನಿಮ್ಮ ಆಲೋಚನೆಗಳನ್ನು ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಲು ಸಮಯ ಬಂದಿದೆ.
ಸಂಖ್ಯೆ 4:ಇದು ಸ್ಥಿರತೆ, ಶ್ರಮ ಮತ್ತು ಬಲವಾದ ಅಡಿಪಾಯವನ್ನು ಸೂಚಿಸುತ್ತದೆ. ನಿಮ್ಮ ಗುರಿಗಳನ್ನು ಸಾಧಿಸಲು ನೀವು ಶ್ರಮಿಸಬೇಕು ಎಂದು ಇದು ಹೇಳುತ್ತದೆ.
ಸಂಖ್ಯೆ 5: ಇದು ಬದಲಾವಣೆ, ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ, ಮತ್ತು ಸಾಹಸದ ಸಂಕೇತ. ನಿಮ್ಮ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಒಂದು ದೊಡ್ಡ ಬದಲಾವಣೆ ಬರಲಿದೆ ಎಂದರ್ಥ.
ಸಂಖ್ಯೆ 6: ಇದು ಕುಟುಂಬ, ಜವಾಬ್ದಾರಿ, ಮತ್ತು ಆರೈಕೆಯನ್ನು ಪ್ರತಿನಿಧಿಸುತ್ತದೆ. ನಿಮ್ಮ ಮನೆಯ ಮತ್ತು ಪ್ರೀತಿಪಾತ್ರರ ಬಗ್ಗೆ ಗಮನ ಹರಿಸಲು ಇದು ನೆನಪಿಸುತ್ತದೆ.
ಸಂಖ್ಯೆ 7: ಇದು ಅಂತರ್ದೃಷ್ಟಿ, ಆಧ್ಯಾತ್ಮಿಕತೆ, ಮತ್ತು ಆಂತರಿಕ ಜ್ಞಾನಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದೆ. ನೀವು ನಿಮ್ಮ ಅಂತರಂಗವನ್ನು ಆಲಿಸುವ ಅವಶ್ಯಕತೆ ಇದೆ.
ಸಂಖ್ಯೆ 8: ಇದು ಶಕ್ತಿ, ಸಮೃದ್ಧಿ, ಮತ್ತು ಆರ್ಥಿಕ ಯಶಸ್ಸು ಸೂಚಿಸುತ್ತದೆ. ವೃತ್ತಿ ಅಥವಾ ಹಣಕಾಸಿನ ವಿಷಯದಲ್ಲಿ ಇದು ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಚಿಹ್ನೆ.
ಸಂಖ್ಯೆ 9: ಇದು ಪೂರ್ಣಗೊಳಿಸುವಿಕೆ, ಅಂತ್ಯ, ಮತ್ತು ಮಾನವೀಯತೆಯ ಸಂಕೇತ. ನಿಮ್ಮ ಜೀವನದ ಒಂದು ಅಧ್ಯಾಯ ಮುಗಿದು ಹೊಸ ಆರಂಭಕ್ಕೆ ಸಿದ್ಧವಾಗಿದೆ.

​ಪುನರಾವರ್ತಿತ ಸಂಖ್ಯೆಗಳ ಮಹತ್ವ: ​ಒಂದೇ ಸಂಖ್ಯೆಗಳು (ಉದಾಹರಣೆಗೆ 111, 222, 333 ಅಥವಾ ನಿಮ್ಮ ಜನ್ಮ ದಿನಾಂಕ) ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ಪದೇ ಪದೇ ಕಾಣಿಸಿಕೊಂಡರೆ ಅವುಗಳಿಗೆ ಇನ್ನೂ ಹೆಚ್ಚಿನ ಮಹತ್ವ ಇರುತ್ತದೆ. ಇವುಗಳನ್ನು ಸಾಮಾನ್ಯವಾಗಿ 'ದೇವದೂತರ ಸಂಖ್ಯೆಗಳು' (Angel Numbers) ಎಂದು ಕರೆಯಲಾಗುತ್ತದೆ. ಇವು ನಿಮ್ಮ ಮನಸ್ಸಿನ ಮತ್ತು ಬ್ರಹ್ಮಾಂಡದ ನಡುವಿನ ಆಳವಾದ ಸಂಪರ್ಕವನ್ನು ಸೂಚಿಸುತ್ತವೆ.
ನಿಮ್ಮ ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ಕಂಡ ಸಂಖ್ಯೆಗಳು ನಿಮ್ಮ ಇಂದಿನ ಜೀವನದ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಗೆ ಯಾವ ರೀತಿ ಹೊಂದಿಕೆಯಾಗುತ್ತವೆ ಎಂಬುದನ್ನು ನೀವು ಯೋಚಿಸಬೇಕು. ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬರಿಗೂ ಸಂಖ್ಯೆಗಳ ಅರ್ಥವು ವೈಯಕ್ತಿಕವಾಗಿರುತ್ತದೆ. ನಿಮ್ಮ ಅಂತಃಪ್ರಜ್ಞೆಯನ್ನು ಬಳಸಿ, ಆ ಸಂಖ್ಯೆಗಳು ನಿಮಗೆ ಏನು ಹೇಳುತ್ತಿವೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಅರಿತುಕೊಳ್ಳಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದರೆ ಮಾತ್ರವೇ ತಿಳಿಯುತ್ತದೆ.
ಮುಖ್ಯವಾಗಿ ​ಈ ಕನಸುಗಳ ಮೂಲಕ ನಿಮ್ಮ ಉಪಪ್ರಜ್ಞೆ (Subconscious Mind) ನಿಮಗೆ ಒಂದು ಮುಖ್ಯ ಸಂದೇಶವನ್ನು ಕಳುಹಿಸುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಮರೆಯಬೇಡಿ.
ನನಗೂ ಐದು ದಿನಗಳ ಹಿಂದೆ ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ಒಂದು ನಂಬರ್ ಕಾಣಿಸಿತು. ಆ ನಂಬರ್ 109, ಅದರಲ್ಲೂ ಆಶ್ಚರ್ಯಕರ ಸಂಗತಿ ಎಂದರೆ ನನ್ನ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಪ್ರಥಮಬಾರಿಗೆ ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ನಂಬರ್ ಕಂಡಿದ್ದು ನನಗೆ ಆಶ್ಚರ್ಯವಾಯಿತು. ಇದರ ಅರ್ಥವನ್ನು ಕಂಡು ಕೊಳ್ಳುವ ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ನಾನು ಅಧ್ಯಯನ ಮಾಡಿದಾಗ ನನಗೆ ದೊರೆತ ಉತ್ತರ ನಿನ್ನ ಗುರಿ ಸಾಧನೆಗೆ ಒಬ್ಬ ಹೊಸ ವ್ಯಕ್ತಿಯ ಬೆಂಬಲ ಸಿಗುತ್ತದೆ ಎಂದು ತೋರಿಸಿತು. ಇದಕ್ಕೆ ಸಾಕ್ಷಿ ಎಂಬಂತೆ ನಿನ್ನೆ ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ನನ್ನ ಹಾಗೆ ಒಬ್ಬ ಅನುಭವಸ್ಥ ಯು ಟ್ಯೂಬರ್   ಪರಿಚಯ ಆಯಿತು. ಅವರು ನನ್ನ ಬರವಣಿಗೆ ಶೈಲಿ, ನನ್ನ ಕ್ರಿಯೇಟಿವಿಟಿಯನ್ನು ನೋಡಿ ನಿಮಗೆ ಖಂಡಿತ ನಾನು ಸಪೋರ್ಟ್ ಮಾಡ್ತೀನಿ ಎಂದು ಹೇಳಿ ನನ್ನ ಕಾಂಟ್ಯಾಕ್ಟ್ ನಂಬರ್ ಕೂಡ ಪಡೆದುಕೊಂಡರು.
​ನಿಮ್ಮ ಕನಸಿನಲ್ಲಿ ಯಾವ ಸಂಖ್ಯೆಗಳು ಕಾಣಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತವೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಕಾಮೆಂಟ್ ಬಾಕ್ಸ್ ನಲ್ಲಿ ತಪ್ಪದೇ ತಿಳಿಸಿ.

sandeepjoshi.840664

इजहार हो जाने दो

इस इश्क़ अभी कुछ सुधार आने दो,
मुलाक़ातों में कुछ तकरार हो जाने दो।

तेरी आँखों का जादू असर ढाएगा,
इस दिल को पहले बीमार हो जाने दो।

तेरे हाथों की गर्मी से छू ले हवा,
चाहत का दरबार-ए-एलान हो जाने दो।

तेरे लब से कोई ग़ज़ल छू के गुज़रे,
मेरे दिल में वो सरगम उतार हो जाने दो।

तेरे काँधों पे सर रख के जी लें लम्हे,
इस ख्वाब का हक़ीक़त में विस्तार हो जाने दो।

तेरे आँचल की ख़ुशबू में बस जाऊँ मैं,
इस रूह का तुझसे कारोबार हो जाने दो।

फिर देखना मोहब्बत कहाँ तक पहुँचती है,
पहले दिल से दिल तक इजहार हो जाने दो।

DB-ARYMOULIK
1996 में लिखा गया

deepakbundela7179

गफलत मे थे तो किनारा देख आये
तेरे शहर का थोड़ा नजारा देख आये
यू तो निकल चुके थे सफर मे कही
पर तेरी याद आयी दुबारा लोट आये .

mashaallhakhan600196

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
कविता का शीर्षक है! साया

mamtatrivedi444291

जागरण कविता ✧
बाहर के चोर डराते हैं,
पर भीतर का डाकू मौन में लूट लेता है।

उसका चेहरा हर दिन बदलता है,
कभी वासना, कभी धर्म, कभी अहंकार।

भीड़ को जगाने का स्वप्न
नारा बनकर हवा में उड़ जाता है,
जागरण तो बस उन चंद पथिकों के लिए है
जो मौन में सत्य खोजते हैं।

वे अकेले चलते हैं,
पर एक छोटा-सा विश्वास
दीपक की लौ बन जाता है।

धर्म प्रचार से नहीं,
मौन से गहरा होता है।
भीड़ की गंदगी से लड़ना
खुद को गंदा कर लेना है।

तो काम बस इतना है—
जहाँ शांति की हल्की-सी किरण हो
उसे हवा देना।

याद रखना—
सत्य है, आत्मा है,
शांति संभव है।

बाक़ी सब मुखौटे हैं।
पथिक को बस अपने मार्ग पर खड़ा रहना है।

bhutaji

தற்செயலாகவே உலகின் அழிவுக்குக் காரணமாக அமையும் அதிசக்தி வாய்ந்த ஒரு பூர்வீக அமெரிக்கருக்கு (Native American) எதிராக ஒரு இந்திய சூப்பர் ஹீரோ போராட வேண்டிய சூழல் உருவாகிறது. இந்தச் சூழலில் அவர்களின் மோதல் எந்த அளவிற்கு இருக்கும் என்பதை இந்தப் புதினம் ஆராய்கிறது.

உண்மையில் அந்தப் பூர்வீக அமெரிக்கர் யார்? அவரது தாக்கத்தால் உலக அழிவு ஏன் உடனடி ஆகிறது? குழப்பத்தின் பாதையை அவர் தொடர என்ன காரணம்?

இந்தக் கேள்விகள் அனைத்திற்கும் விடையைத் தெரிந்துகொள்ள, விரைவில் Amazon Kindle Unlimited-இல் இலவசமாக வெளிவரவிருக்கும் எனது நாவலைப் படியுங்கள்.

நன்றி,
சூர்யா பண்டாரு (Surya Bandaru).

surya1991