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New bites

અહેસાસ

શબ્દો વિના પણ જે સમજાય, એ વાત છે તું,
મારી નિઃશબ્દતામાં છુપાયેલો ભાવ છે તું।

આ અજાણી રાહોમાં જ્યારે ખોવાઈ જાઉં હું,
મને ફરી માર્ગ દર્શાવે, એ વિશ્વાસ છે તું।

જ્યારે તારી આંખોમાં મારી નજર અટકી જાય છે,
સમય પણ જાણે થંભી જઈ મારો સાથી બની જાય છે।

હવાના મીઠા સ્પર્શ સમો તારો અહેસાસ છે,
મારા દરેક સ્વપ્નમાં હવે તારો જ નિવાસ છે।
DHAMAK

heenagopiyani.493689

हँस के मिलती है मगर काफ़ी थकी लगती है,
उसकी आँखें कई सदियों से जगी लगती हैं।
चेहरे पर मुस्कान है, पर दिल में खामोशी गहरी,
हर हँसी के पीछे एक अधूरी कहानी छुपी लगती है।
लोग समझते हैं उसे बेफिक्र और खुशमिज़ाज,
पर उसकी खामोशी बहुत कुछ कहती लगती है।
वो सबके सामने खुद को मजबूत दिखा लेती है,
पर तन्हाई में उसकी आँखें भीगी लगती हैं।

narayanmahajan.307843

I’m happy to share that the cover page of "A Love in the Shadows" has been finalized by the publisher. ✨

Editing is currently in progress, and the journey toward its release continues. 📖

Stay tuned for more exciting updates! 👀

anand5870

और यहा चारू बोराते हुए! (माई डियर प्रोफेसर भाग 14 प्रकाशित हो चुका है। आपलोग पढ सकते हो। और कमेंट , रेटिंग कर दिया करो। क्यो कंजूसी दिखाते हो आप लोग। )

gautamreena712gmail.com185620

बैसाखी की धूप में, अभि सोना झरे खेत,
मेहनत रंग लायी यहाँ, खिल उठे हर चेत।

ढोल नगाड़े गूँजते, यहॉं नाचे गाँव-समाज,
हँसी-खुशी के रंग में, भींगा हर एक आज।

धरती माँ के आँचल में, अन्न भरा अपार,
किसान के मुख पर सजे, संतोषी श्रृंगार।

पसीने की हर एक बूंद, बनती मीठा फल,
मेहनत से ही जग में, मिलता सच्चा बल।

आशा की हर किरण से, जीवन हो उजियार,
बैसाखी का ये पर्व है, खुशियों का त्योहार।

abhi006

तोरा मन दर्पण कहलाए-Tora Mann Darpan Kahalaaye - Live | Vanita Thakkar | Original : Asha Bhosle
https://youtu.be/1nubYnLwnxM

Heartfelt, Humble Tributes To Asha Tai 🙏🏻🙏🏻🎵🎵
This song used to be one among the many Farmaaish songs I used to present during my childhood - a favourite of many, many listeners 🎵🎵

तोरा मन दर्पण कहलाए-Tora Mann Darpan Kahalaaye - Live ….

Singer : Vanita Thakkar
Recorded Live on StarMaker on 12th April, 2026

This soulful Devotional song / Bhajan originally sung by Asha Bhosleji softly turns listeners introspective, making them self-aware, thoughtful, confident and humble ….

Lyricist : Sahir Ludhiyanavi
Music Director : Ravi
Singer : Asha Bhosle
Film : Kaajal (1965)

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vanitathakkar

વીરચંદ ગાંધી : વિશ્વ ધર્મ પરિષદનું બીજું અણમોલ રત્ન by Vishakha Mothiya | વેબ ગુર્જરી

વિશ્વ ધર્મ પરિષદનું નામ સાંભળીએ કે તરત જ આપણા માનસપટ પર સ્વામી વિવેકાનંદની તસ્વીર આવી જાય છે, પરંતુ આપણામાંથી બહુ ઓછા લોકોને ખબર હશે કે એ પરિષદમાં સ્વામીજીની સાથે અન્ય એક મહાન વિભૂતિ પણ ત્યાં ગયા હતા,

ચાલો જાણીએ, વિશ્વ ધર્મ પરિષદનું બીજું અણમોલ રત્ન એવા - વીરચંદ ગાંધી વિશે.

વાંચવા અહીં ક્લિક કરો :- 
https://webgurjari.com/2026/04/14/veerchand-gandhi/


#mustread #knowledgesharing #informative #articlewriting #jain

mothiyavgmail.com3309

quotes by me

gunjangayatri949036

💗

avinashgondukupe96025gmail.com5127

“ना दोस्त हैं, ना कोई सहारा है,
इस भीड़ में बस तू ही हमारा है…
तू दूर हुई तो सब खत्म हो जाएगा,
क्योंकि तेरे बिना ये दिल भी बेचारा है…”

sonambrijwasi549078

ગમે તેવા સંયોગો હોય પણ મહીં ચંચળતા ના હોવી જોઈએ. મહીં ચંચળતા થાય તો સમજવું કે હજી કષાય છૂટ્યા નથી. - દાદા ભગવાન

વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/nxsxXLzT

#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

**“I move with silence,
but my presence speaks volumes.
I don’t explain my choices,
I elevate them.
Not everyone gets access to me—
and that’s not attitude,
that’s self-respect.
I’m not here to fit in…
I’m here to build, grow, and become
something rare.”** 👑✨

**“I don’t compete,
I create my own space.
Respect is earned,
and I don’t lower my standards for anyone.”** 🔥👑

parmarsantok136152

" ખરેખર ? "

નજરથી નજર મળતાં આંખો થઈ 'તી ચાર, ખરેખર!
પહેલી નજરનું તીર થયું' તું દિલની આરપાર, ખરેખર!

ના લાગતી ભૂખ તરસ, બસ મન રહેતું કાયમ ગુમસૂમ,
સતત એના વિચારોમાં જ દિલ રહેતું બેકરાર, ખરેખર!

બસ, એક ઝલક એની દેખવા રહેતો આકુલવ્યાકુલ,
વળતી દિલને ટાઢક જ્યારે થતાં એનાં દિદાર, ખરેખર!

એ પગપાળા ચાલતી આગળ, સાઈકલથી હું પાછળ,
પૈડાં ઘસાઈ ગયાં હતાં સાઈકલના દસ બાર, ખરેખર!

આજ તો હું જરૂર કહી દઈશ, મારા દિલની વાત એને,
ચૂપ થઈ જતો એની સામે, ના થતો એકરાર, ખરેખર!

કિશોરાવસ્થાની એ નાદાનિયત પણ ખુબ યાદ આવે છે,
"વ્યોમ" એ હતું બસ આકર્ષણ, નહીં કે પ્યાર, ખરેખર????

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

दो दिन पहले एक केस देखा था बीच सड़क पर ।ये छोटी सी लाइन है गौर करे 🙏 🙏 🙏


कितनी मासूम होती हैं वो लड़कियाँ,*
जो दर्जनों आशिकों से आशिकी करती हैं,
पर विवाह तो परिवार की मर्जी से ही करती हैं,
बाप की पगड़ी गिरने नहीं देतीं...

हाँ, वो बात अलग है कि उनके बाप को पता नहीं होता,
कि लोगों ने उसे अलग-अलग नंबर
प्लेट की गाड़ियों पर बैठे हुए देखा है...

और...

कितनी चालाक होती हैं वो लड़कियाँ,
जो किसी एक से अत्यंत प्रेम करती हैं,
परिवार में उन्हें कुलटा, कुलक्षणी, बेहया, बेशर्म,
नाक कटवाने वाली कहा जाता है...
जिन्हें या तो मरना पड़ता है,
या घुट-घुट कर जीना...

तो यही फर्क है-

जो मासूम है उन्हें चालाक कहके प्रताड़ित किया जाता है
और जो चालाक है, वो इज्जतदार है
*समाज के लिए भी और परिवार के लिए भी..।


इस पर आपकी क्या राय है कॉमेंट करके बताओ 🙏🙏🙏🙏✍️✍️✍️✍️✍️✍️

writer bhagwat singhnaruka

mystory021699

एक दम सच्ची बात है ✅✅✅✅

जब कभी स्त्रियों ने ठानी मोहब्बत निभाने की,🥻🥻
*उनका महबूब ही दग़ाबाज़ निकल जाता है...!!*👨👨‍❤️‍💋‍👨❤️‍🩹❌

इस पर आपकी क्या राय है कॉमेंट में बताओ

writer bhagwat singhnaruka ✍️

mystory021699

कितना निश्चल, निर्मल है,
कल-कल बहता तेरा जल।
इन पत्थरीले पथ पर तुम,
कैसे चलती कोमल तल।
बहती जाती, बढ़ती जाती,
दुग्ध मेखला-से वस्त्र तुम्हारे,
कितने सुंदर अस्त्र तुम्हारे,
रक्त प्रवाह-सी नस-नस में तुम।
सह लेती हँस-हँस कर तुम,
हर बाधा को अपनाती हो;
तन यौवन की देहरी पर,
मन तेरा अब भी बालक ।
चंचल, चतुर, खेल-खेल में,
चुपके से भर देती बादल।
कभी धरा पर आने को,
होती कितनी व्याकुल तुम;
अनजाने में घर-आँगन,
खलिहानों में भर देती जल।
#चंद्रविद्या #अविरल प्रवाह #जीवन धारा

chandervidya

🌅 good morning 😊
🌅have a nice day 🤗

nikitavinzuda6548

அனைவருக்கும் இனிய தமிழ் புத்தாண்டு வாழ்த்துக்கள்🎉🎊

kattupayas.101947

Good morning friends.. have a great day

kattupayas.101947

क्या कारण हैं कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक होती है?
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निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने एवं उन्हें पदोन्नत करने का अधिकार कम्पनी के मालिको एवं शेयर होल्डर्स के पास होने के कारण निजी क्षेत्र के कर्मचारी एवं मैनेजर निरंतर कुशलता एवं ईमानदारी से कार्य करते है - बस यही वजह है। इसके अलावा कोई वजह नहीं।
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यदि भारत में निचे दिया गया क़ानून लागू कर दिया जाए तो मेरा मानना है कि अगले दिन से ही निजी क्षेत्र के कर्मचारी भी सरकारी अधिकारियों एवं नेताओं के स्तर को छू लेंगे :

यदि किसी फैक्ट्री के शेयर होल्डर्स ( मालिक ) किसी मैनेजर को नौकरी पर रखते है तो उसे 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं निकालेंगे। और यदि उन्होंने किसी कर्मचारी को नौकरी पर रखा है तो शेयर होल्डर्स उसे अगले 30 वर्षो तक नौकरी से नहीं निकाल सकेंगे। यदि मालिक किसी कर्मचारी के आचरण से पीड़ित है तो वह मेनेजर से शिकायत कर सकते है। और मैनेजर की इच्छा है तो वह अमुक कर्मचारी को नौकरी से निकाल भी सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है।

स्पष्टीकरण : शेयर होल्डर्स को मैनेजरो के बारे में जितनी छानबीन करनी है, उसे नौकरी पर रखने से पहले ही करनी होगी। यदि एक बार नौकरी पर रखने के बाद मैनेजर को 5 वर्ष से पहले नौकरी से निकाला नही जा सकेगा ।

मैनेजरो एवं सभी कर्मचारियों को हर महीने की एक तारीख को तय वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जायेगा।

स्पष्टीकरण : यदि नौकर काम पर नही आता है, या केवल टाइम पास करने के लिए घंटे दो घंटे के लिए आकर चला जाता है, तब भी नौकर को पूरे वेतन का भुगतान किया जाएगा। हालांकि शेयर होल्डर्स सम्बंधित यूनिट के मैनेजर से इसकी शिकायत कर सकते है। मैनेजर चाहे तो कर्मचारी को चेतावनी दे सकता है, या उसे नौकरी से निकाल सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है।

फैक्ट्री की विभिन्न यूनिट्स के मेनेजरो को यह अधिकार होगा कि वे आपस में सलाह मशविरा करके अपने वेतन, भत्तो, सुविधाओं में वृद्धि करना चाहे तो कर सके। मैनेजर चाहे तो नौकरों के वेतन में भी वृद्धि कर सकते है।

स्पष्टीकरण : मैनेजरों ने खुद के वेतन में जो भी वृद्धि की है शेयर होल्डर्स अदा करने के लिए बाध्य होंगे। इसमें विशेष बिंदु यह है कि मैनेजरो का समूह अपनी वेतन वृद्धि के बारे में शेयर होल्डर्स को सिर्फ सूचित करेगा किन्तु उनसे अनुमति नहीं लेगा। यदि फैक्ट्री में पैसा कम है तो मैनेजर शेयर होल्डर्स पर टेक्स या पेनेल्टी लगाकर और पैसा मांग सकते है, या फैक्ट्री के स्वामित्व में स्थित अन्य कोई संपत्तियां बेचकर अपनी पूर्ती कर सकते है।

5 वर्ष बाद शेयर होल्डर्स को अपने मैनेजरों को बदलने का एक दिवसीय मौका मिलेगा। तब वे चाहे तो किसी मैनेजर को बदल सकते है। किन्तु नौकर वही रहेंगे और उन्हें किसी भी सूरत में बदला नही जा सकेगा।

यदि शेयर होल्डर्स किसी नौकर के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराते है तो शिकायत की जांच उसकी यूनिट का मैनेजर ही करेगा, एवं अपील किसी अन्य यूनिट के मैनेजर के यहाँ की जा सकेगी। किन्तु शेयर होल्डर्स को नौकरों के खिलाफ जांच करने और फैसला सुनाने का अधिकार नही होगा।

यदि कोई शेयर होल्डर्स अपने किसी मैनेजर या नौकर के कार्य से संतुष्ट नही है या नौकर फैक्ट्री को गंभीर क्षति पहुंचा रहा है, तो वे अमुक मैनेजर को सीधी राह पर लाने के लिए रोड़ पर आकर अनशन, धरने, प्रदर्शन आदि विधियों का प्रयोग कर सकेंगे। किन्तु शेयर होल्डर्स न तो मैनेजरो का वेतन रोक सकेंगे और न ही उन्हें नौकरी से निकाल सकेंगे। यदि अमुक शेयर होल्डर्स समृद्ध है तो सोशल मीडिया आदि पर भी अपना असंतोष वगेरह प्रकट कर सकते है।
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शेयर होल्डर्स के लिए सुझाव :
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कृपया नौकरी पर रखने से पूर्व अपने मेनेजरो के बारे में गहन जांच पड़ताल करें तथा ईमानदार मैनेजर को ही चुने। बेहतर होगा कि आप मेनेजर का ब्लड टेस्ट करवा ले कि उसमें HBC ( Honest Blood Cells ) यानी ईमानदारू कोशिकाओ का स्तर क्या है। प्रत्येक मनुष्य के खून में ये कोशिकाएं पायी जाती है। पेड मीडिया कर्मी जब भी आपको ईमानदार मेनेजर को नौकरी पर रखने की सलाह देते है तो उनका आशय HBC काउंट चेक करने से ही होता है। HBC टेस्टिंग के बारे और अधिक जानकारी के लिए आप किसी भी पेड मीडिया कर्मी या पेड बुद्धिजीवी से सम्पर्क कर सकते है।
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इस क़ानून के आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ?
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मेरा मानना है कि, जल्दी ही फैक्ट्री की अलग अलग यूनिट्स के सभी मैनेजर आपस में गठजोड़ बना लेंगे और नौकर भी इनके गठजोड़ में शामिल हो जायेंगे। यदि शेयर होल्डर्स 5 वर्ष बाद मेनेजरो को बदल भी देंगे तो नियुक्त होने के साथ ही वे भी भ्रष्ट हो जायेंगे। और यदि इत्तिफाक से कोई ईमानदार मैनेजर आ भी जाता है तो शेष मेनेजर मिलकर या तो उसे दबा देंगे या फिर शेष मैनेजरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा।
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फैक्ट्री को सबसे अधिक नुकसान नौकरों की तरफ से होगा। चूंकि उन्हें 30 वर्ष से पहले किसी भी स्थिति में निकाला नहीं जा सकता अत: उनमे से ज्यादातर भ्रष्ट हो जायेंगे, और ईमानदार मैनेजर के आने के बावजूद नौकरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा। जो भी नये मैनेजर आयेंगे, ये भ्रष्ट नौकर जल्द ही उनसे गठजोड़ बना लेंगे। अब मैनेजरों एवं नौकरों का ये गठजोड़ फैक्ट्री में चोरी चकारी करना शुरू करेगा, और धीरे धीरे फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता गिरने लगेगी। और तब एक बिंदु के बाद फैक्ट्री की दशा यह हो जायेगी कि उसे चलाना मुश्किल हो जाएगा। तब मैनेजर वगेरह इसकी विभिन्न यूनिट्स को घूस खाकर बेचना शुरू करेंगे, और एक एक करके सभी यूनिट्स बेच देने के बाद फैक्ट्री बंद हो जायेगी।
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यदि आपको ये सब मजाक लग रहा है तो आप वही बात कह रहे है, जो कि 1925 में अहिंसा मूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल एवं अहिंसा मूर्ती महात्मा चन्द्र शेखर आजाद ने कही थी, तथा 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी ने इस बात को दोहराया था।
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भारत में पिछले 70 वर्षो से देश की राजनेतिक व्यवस्था इसी तरीके से चल रही है। ऊपर दी गयी व्यवस्था में यदि आप मैनेजरों की जगह जन प्रतिनिधियों ( विधायक, सांसद, पार्षद, सरपंच ) को तथा नौकरो की जगह सरकारी अधिकारियों को रख ले तो आप इस फैक्ट्री के शेयर होल्डर है !!
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भारत के नागरिको के पास शीर्ष सरकारी अधिकारियों को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। इसके अलावा भारत के नागरिको के पास सरकारी अधिकारीयों को दण्डित करने की शक्ति भी नहीं है। नागरिको के प्रति वे शून्य जवाबदेह है। उन्हें बस अपने उच्च अधिकारी को खुश रखना होता है। तो वे जनता से जो घूस वसूलते है उसमे से एक हिस्सा उच्च अधिकारियों को दे देते है। और जो अधिकारी ज्यादा घूस ऊपर पहुंचाता है उसकी पदोन्नति के अवसर भी बढ़ जाते है। इस तरह यहाँ नकारात्मक प्रोत्साहन है।
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निजी क्षेत्र में मालिक के पास अपने नौकर को नौकरी से निकालने एवं पदोन्नत करने का अधिकार होता है, अत: कर्मचारी अपना बेहतर योगदान देने की कोशिश करते है।
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अमेरिका के सरकारी विभागों में भारत की तुलना में कम भ्रष्टाचार क्यों है ?
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अमेरिका के नागरिको के पास अपने कई जिला एवं राज्य स्तर के अधिकारियों जैसे एसपी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, मुख्यमंत्री आदि को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को वोट वापसी कहते है। नौकरी से निकाले जाने के इस भय की वजह से वे जनता के प्रति जवाबदेह बने रहते है, और कार्यकुशलता का प्रदर्शन करते है। यदि कोई अधिकारी निकम्मापन एवं भ्रष्ट आचरण करता है तो वहां के नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उन्हें नौकरी से निकाल देते है। इसके अलावा यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो उसकी सुनवाई करने एवं दंड देने की शक्ति भी वहां के नागरिको के पास है।
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मेरा मानना है यदि अमेरिका के नागरिको से वोट वापसी का क़ानून छीन लिया जाए तो महीने भर में ही अमेरिका के सरकारी अधिकारी भारतीय अधिकारियों से भी ज्यादा निकम्मे हो जायेंगे और आम अमेरिकी से किसी न किसी बहाने से घूस वसूलना शुरू कर देंगे।
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बहरहाल, हमें अमेरिका की व्यवस्था को बदतर बनाने की जगह इस बात पर विचार करना चाहिए कि भारत के सरकारी विभागों को किस तरह ईमानदार एवं कार्यकुशल बनाया जा सकता है।
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भारत के सरकारी विभागों को कार्यकुशल एवं ईमानदार बनाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए ?
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मेरा मानना है कि यदि भारत में वोट वापसी एवं जूरी सिस्टम कानून लागू कर दिए जाते है तो भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी, और सरकारी अधिकारीयों की कार्य कुशलता में सुधार होने लगेगा। मैंने इसके लिए जूरी कोर्ट का क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :

जिला पुलिस प्रमुख
जिला शिक्षा अधिकारी
जिला चिकित्सा अधिकारी
जिला जूरी प्रशासक
मिलावट रोक अधिकारी
DD चेयरमेन
RBI गवर्नर
CBI डायरेक्टर
BSNL चेयरमेन
सेंसर बोर्ड चेयरमेन
जिला जज
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
राष्ट्रिय जूरी प्रशासक
केन्द्रीय सूचना आयुक्त
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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इसके अलावा यदि उपरोक्त अधिकारियों के खिलाफ को शिकायत आती है तो इसकी सुनवाई आम नागरिको की जूरी करेगी। यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे।
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जूरी कोर्ट का पूरा ड्राफ्ट जूरी कोर्ट मंच पर देखा जा सकता है

sonukumai

क्या कारण हैं कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों से अधिक होती है?
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निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने एवं उन्हें पदोन्नत करने का अधिकार कम्पनी के मालिको एवं शेयर होल्डर्स के पास होने के कारण निजी क्षेत्र के कर्मचारी एवं मैनेजर निरंतर कुशलता एवं ईमानदारी से कार्य करते है - बस यही वजह है। इसके अलावा कोई वजह नहीं।
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यदि भारत में निचे दिया गया क़ानून लागू कर दिया जाए तो मेरा मानना है कि अगले दिन से ही निजी क्षेत्र के कर्मचारी भी सरकारी अधिकारियों एवं नेताओं के स्तर को छू लेंगे :

यदि किसी फैक्ट्री के शेयर होल्डर्स ( मालिक ) किसी मैनेजर को नौकरी पर रखते है तो उसे 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं निकालेंगे। और यदि उन्होंने किसी कर्मचारी को नौकरी पर रखा है तो शेयर होल्डर्स उसे अगले 30 वर्षो तक नौकरी से नहीं निकाल सकेंगे। यदि मालिक किसी कर्मचारी के आचरण से पीड़ित है तो वह मेनेजर से शिकायत कर सकते है। और मैनेजर की इच्छा है तो वह अमुक कर्मचारी को नौकरी से निकाल भी सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है।

स्पष्टीकरण : शेयर होल्डर्स को मैनेजरो के बारे में जितनी छानबीन करनी है, उसे नौकरी पर रखने से पहले ही करनी होगी। यदि एक बार नौकरी पर रखने के बाद मैनेजर को 5 वर्ष से पहले नौकरी से निकाला नही जा सकेगा ।

मैनेजरो एवं सभी कर्मचारियों को हर महीने की एक तारीख को तय वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जायेगा।

स्पष्टीकरण : यदि नौकर काम पर नही आता है, या केवल टाइम पास करने के लिए घंटे दो घंटे के लिए आकर चला जाता है, तब भी नौकर को पूरे वेतन का भुगतान किया जाएगा। हालांकि शेयर होल्डर्स सम्बंधित यूनिट के मैनेजर से इसकी शिकायत कर सकते है। मैनेजर चाहे तो कर्मचारी को चेतावनी दे सकता है, या उसे नौकरी से निकाल सकता है, और नहीं भी निकाल सकता है।

फैक्ट्री की विभिन्न यूनिट्स के मेनेजरो को यह अधिकार होगा कि वे आपस में सलाह मशविरा करके अपने वेतन, भत्तो, सुविधाओं में वृद्धि करना चाहे तो कर सके। मैनेजर चाहे तो नौकरों के वेतन में भी वृद्धि कर सकते है।

स्पष्टीकरण : मैनेजरों ने खुद के वेतन में जो भी वृद्धि की है शेयर होल्डर्स अदा करने के लिए बाध्य होंगे। इसमें विशेष बिंदु यह है कि मैनेजरो का समूह अपनी वेतन वृद्धि के बारे में शेयर होल्डर्स को सिर्फ सूचित करेगा किन्तु उनसे अनुमति नहीं लेगा। यदि फैक्ट्री में पैसा कम है तो मैनेजर शेयर होल्डर्स पर टेक्स या पेनेल्टी लगाकर और पैसा मांग सकते है, या फैक्ट्री के स्वामित्व में स्थित अन्य कोई संपत्तियां बेचकर अपनी पूर्ती कर सकते है।

5 वर्ष बाद शेयर होल्डर्स को अपने मैनेजरों को बदलने का एक दिवसीय मौका मिलेगा। तब वे चाहे तो किसी मैनेजर को बदल सकते है। किन्तु नौकर वही रहेंगे और उन्हें किसी भी सूरत में बदला नही जा सकेगा।

यदि शेयर होल्डर्स किसी नौकर के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराते है तो शिकायत की जांच उसकी यूनिट का मैनेजर ही करेगा, एवं अपील किसी अन्य यूनिट के मैनेजर के यहाँ की जा सकेगी। किन्तु शेयर होल्डर्स को नौकरों के खिलाफ जांच करने और फैसला सुनाने का अधिकार नही होगा।

यदि कोई शेयर होल्डर्स अपने किसी मैनेजर या नौकर के कार्य से संतुष्ट नही है या नौकर फैक्ट्री को गंभीर क्षति पहुंचा रहा है, तो वे अमुक मैनेजर को सीधी राह पर लाने के लिए रोड़ पर आकर अनशन, धरने, प्रदर्शन आदि विधियों का प्रयोग कर सकेंगे। किन्तु शेयर होल्डर्स न तो मैनेजरो का वेतन रोक सकेंगे और न ही उन्हें नौकरी से निकाल सकेंगे। यदि अमुक शेयर होल्डर्स समृद्ध है तो सोशल मीडिया आदि पर भी अपना असंतोष वगेरह प्रकट कर सकते है।
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शेयर होल्डर्स के लिए सुझाव :
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कृपया नौकरी पर रखने से पूर्व अपने मेनेजरो के बारे में गहन जांच पड़ताल करें तथा ईमानदार मैनेजर को ही चुने। बेहतर होगा कि आप मेनेजर का ब्लड टेस्ट करवा ले कि उसमें HBC ( Honest Blood Cells ) यानी ईमानदारू कोशिकाओ का स्तर क्या है। प्रत्येक मनुष्य के खून में ये कोशिकाएं पायी जाती है। पेड मीडिया कर्मी जब भी आपको ईमानदार मेनेजर को नौकरी पर रखने की सलाह देते है तो उनका आशय HBC काउंट चेक करने से ही होता है। HBC टेस्टिंग के बारे और अधिक जानकारी के लिए आप किसी भी पेड मीडिया कर्मी या पेड बुद्धिजीवी से सम्पर्क कर सकते है।
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इस क़ानून के आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ?
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मेरा मानना है कि, जल्दी ही फैक्ट्री की अलग अलग यूनिट्स के सभी मैनेजर आपस में गठजोड़ बना लेंगे और नौकर भी इनके गठजोड़ में शामिल हो जायेंगे। यदि शेयर होल्डर्स 5 वर्ष बाद मेनेजरो को बदल भी देंगे तो नियुक्त होने के साथ ही वे भी भ्रष्ट हो जायेंगे। और यदि इत्तिफाक से कोई ईमानदार मैनेजर आ भी जाता है तो शेष मेनेजर मिलकर या तो उसे दबा देंगे या फिर शेष मैनेजरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा।
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फैक्ट्री को सबसे अधिक नुकसान नौकरों की तरफ से होगा। चूंकि उन्हें 30 वर्ष से पहले किसी भी स्थिति में निकाला नहीं जा सकता अत: उनमे से ज्यादातर भ्रष्ट हो जायेंगे, और ईमानदार मैनेजर के आने के बावजूद नौकरों का भ्रष्टाचार जारी रहेगा। जो भी नये मैनेजर आयेंगे, ये भ्रष्ट नौकर जल्द ही उनसे गठजोड़ बना लेंगे। अब मैनेजरों एवं नौकरों का ये गठजोड़ फैक्ट्री में चोरी चकारी करना शुरू करेगा, और धीरे धीरे फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता गिरने लगेगी। और तब एक बिंदु के बाद फैक्ट्री की दशा यह हो जायेगी कि उसे चलाना मुश्किल हो जाएगा। तब मैनेजर वगेरह इसकी विभिन्न यूनिट्स को घूस खाकर बेचना शुरू करेंगे, और एक एक करके सभी यूनिट्स बेच देने के बाद फैक्ट्री बंद हो जायेगी।
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यदि आपको ये सब मजाक लग रहा है तो आप वही बात कह रहे है, जो कि 1925 में अहिंसा मूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल एवं अहिंसा मूर्ती महात्मा चन्द्र शेखर आजाद ने कही थी, तथा 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी ने इस बात को दोहराया था।
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भारत में पिछले 70 वर्षो से देश की राजनेतिक व्यवस्था इसी तरीके से चल रही है। ऊपर दी गयी व्यवस्था में यदि आप मैनेजरों की जगह जन प्रतिनिधियों ( विधायक, सांसद, पार्षद, सरपंच ) को तथा नौकरो की जगह सरकारी अधिकारियों को रख ले तो आप इस फैक्ट्री के शेयर होल्डर है !!
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भारत के नागरिको के पास शीर्ष सरकारी अधिकारियों को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। इसके अलावा भारत के नागरिको के पास सरकारी अधिकारीयों को दण्डित करने की शक्ति भी नहीं है। नागरिको के प्रति वे शून्य जवाबदेह है। उन्हें बस अपने उच्च अधिकारी को खुश रखना होता है। तो वे जनता से जो घूस वसूलते है उसमे से एक हिस्सा उच्च अधिकारियों को दे देते है। और जो अधिकारी ज्यादा घूस ऊपर पहुंचाता है उसकी पदोन्नति के अवसर भी बढ़ जाते है। इस तरह यहाँ नकारात्मक प्रोत्साहन है।
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निजी क्षेत्र में मालिक के पास अपने नौकर को नौकरी से निकालने एवं पदोन्नत करने का अधिकार होता है, अत: कर्मचारी अपना बेहतर योगदान देने की कोशिश करते है।
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अमेरिका के सरकारी विभागों में भारत की तुलना में कम भ्रष्टाचार क्यों है ?
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अमेरिका के नागरिको के पास अपने कई जिला एवं राज्य स्तर के अधिकारियों जैसे एसपी, शिक्षा अधिकारी, जिला जज, मुख्यमंत्री आदि को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को वोट वापसी कहते है। नौकरी से निकाले जाने के इस भय की वजह से वे जनता के प्रति जवाबदेह बने रहते है, और कार्यकुशलता का प्रदर्शन करते है। यदि कोई अधिकारी निकम्मापन एवं भ्रष्ट आचरण करता है तो वहां के नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उन्हें नौकरी से निकाल देते है। इसके अलावा यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो उसकी सुनवाई करने एवं दंड देने की शक्ति भी वहां के नागरिको के पास है।
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मेरा मानना है यदि अमेरिका के नागरिको से वोट वापसी का क़ानून छीन लिया जाए तो महीने भर में ही अमेरिका के सरकारी अधिकारी भारतीय अधिकारियों से भी ज्यादा निकम्मे हो जायेंगे और आम अमेरिकी से किसी न किसी बहाने से घूस वसूलना शुरू कर देंगे।
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बहरहाल, हमें अमेरिका की व्यवस्था को बदतर बनाने की जगह इस बात पर विचार करना चाहिए कि भारत के सरकारी विभागों को किस तरह ईमानदार एवं कार्यकुशल बनाया जा सकता है।
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भारत के सरकारी विभागों को कार्यकुशल एवं ईमानदार बनाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए ?
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मेरा मानना है कि यदि भारत में वोट वापसी एवं जूरी सिस्टम कानून लागू कर दिए जाते है तो भ्रष्टाचार में तेजी से गिरावट आएगी, और सरकारी अधिकारीयों की कार्य कुशलता में सुधार होने लगेगा। मैंने इसके लिए जूरी कोर्ट का क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है। इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :

जिला पुलिस प्रमुख
जिला शिक्षा अधिकारी
जिला चिकित्सा अधिकारी
जिला जूरी प्रशासक
मिलावट रोक अधिकारी
DD चेयरमेन
RBI गवर्नर
CBI डायरेक्टर
BSNL चेयरमेन
सेंसर बोर्ड चेयरमेन
जिला जज
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
राष्ट्रिय जूरी प्रशासक
केन्द्रीय सूचना आयुक्त
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तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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इसके अलावा यदि उपरोक्त अधिकारियों के खिलाफ को शिकायत आती है तो इसकी सुनवाई आम नागरिको की जूरी करेगी। यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे।
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जूरी कोर्ट का पूरा ड्राफ्ट जूरी कोर्ट मंच पर देखा जा सकता है

sonukumai

🎬 “The Drama Queen of the CEO” – हिंदी में पूरी कहानी
कहानी एक लड़की से शुरू होती है, जो बाहर से बहुत नाटकीय (Drama Queen), जिद्दी और एटीट्यूड वाली होती है, लेकिन अंदर से काफी मजबूत और समझदार होती है।
वह एक साधारण जिंदगी जी रही होती है, लेकिन उसकी जिंदगी अचानक बदल जाती है जब उसकी मुलाकात एक बड़े बिज़नेस टायकून यानी CEO से होती है।
💔 पहली मुलाकात – टकराव और गलतफहमी
पहली बार मिलने पर दोनों के बीच झगड़ा हो जाता है।
CEO उसे एक overacting करने वाली लड़की (Drama Queen) समझता है,
और लड़की उसे घमंडी, ठंडा और निर्दयी इंसान मानती है।
दोनों एक-दूसरे से नफरत करने लगते हैं।
🔥 कॉन्ट्रैक्ट रिलेशन / मजबूरी
कुछ परिस्थितियों के कारण (जैसे फैमिली प्रेशर, बिज़नेस डील या फेक रिलेशन),
दोनों को एक साथ रहना या शादी जैसा रिश्ता निभाना पड़ता है।
यहाँ से कहानी दिलचस्प बनती है 👇
बाहर से दोनों “परफेक्ट कपल” बनते हैं
अंदर से दोनों एक-दूसरे को सहन नहीं कर पाते
❤️ धीरे-धीरे प्यार की शुरुआत
समय के साथ CEO को पता चलता है कि लड़की सिर्फ ड्रामा नहीं करती,
बल्कि वह ईमानदार, बहादुर और दिल की साफ है।
दूसरी तरफ लड़की भी देखती है कि CEO उतना बुरा नहीं है—
वह अंदर से अकेला और भावनात्मक रूप से टूटा हुआ है।
👉 यहीं से दोनों के बीच नफरत → दोस्ती → प्यार में बदलने लगता है
⚡ ट्विस्ट – धोखा और सच्चाई
कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है:
CEO का past (ex-girlfriend या family secrets) सामने आता है
लड़की को लगता है कि वह सिर्फ इस्तेमाल हुई है
दोनों के बीच गलतफहमियाँ बढ़ जाती हैं
😢 जुदाई और संघर्ष
लड़की खुद को साबित करने के लिए अलग हो जाती है
और अपने दम पर कुछ बनती है
👉 वह अब सिर्फ “Drama Queen” नहीं रहती
बल्कि एक strong independent woman बन जाती है
💖 क्लाइमेक्स – असली प्यार की जीत
आखिर में CEO अपनी गलती समझता है
और लड़की को वापस पाने के लिए हर कोशिश करता है
अपने ego को छोड़ देता है
सच्चे दिल से माफी मांगता है
साबित करता है कि वह उससे सच में प्यार करता है
👉 अंत में दोनों मिल जाते हैं और
Happy Ending ❤️
🎯 कहानी का मुख्य मैसेज
किसी को उसके व्यवहार से जज मत करो
सच्चा प्यार बदल सकता है इंसान को
एक मजबूत लड़की कभी हार नहीं मानती
video link
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

rajukumarchaudhary502010

Goodnight friends.. sleep well

kattupayas.101947