Quotes by bhagwat singh naruka in Bitesapp read free

bhagwat singh naruka

bhagwat singh naruka

@mystory021699
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कबर और कदर में कोई फर्क नहीं दोनों मरने के बाद ही मिलती है...ये एक सच्चाई है ।
अर्थी जनाजे के पीछे चल रहे लोग उसकी अच्छाई बुराई के बारे आपको बता देते है ।


बात अच्छी लगी हो तो कॉमेंट करके बताई ।

लेखक भगवत सिंह नरुका ✍️✍️✍️✍️

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छोड़ दी हमने े चालाकी करना वरना तुम जैस े कार्टून को पेंसिल से बना कर थूक से मिटाया करते थे...!!


लेखक भगवत सिंह नरुका ✍️✍️ बात अच्छी लगे तो कॉमेंट में बताओ

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तेरी खुशियों को सजाना चाहती हूँ,
तुझे देखकर मुस्कुराना चाहती हूँ,

मेरी ज़िंदगी में क्या अहमियत है तेरी,
मैं तेरे पास आकर बताना चाहती हूँ।

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कैसे कह दूं कि,,
मर्द प्यारा नहीं हो सकता...🤍

वो ज़माने भर में अकड़ के चलने वाला
लड़का मेरी हर बात मान लेता  है..

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उसके भूगोल को तलाशते तलाशते जब तुम... उसके इतिहास पर प्रश्न चिन्ह लगा देते हो ना....

*तभी तुम प्रेम नामक विषय में अनुत्तीर्ण हो जाते हो.....🙃💔*

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जब मै समेट नहीं पाती हूँ खुद को
तो इक दफा सबसे छुपकर
फूटफूट कर रो लेती हूँ
न चीखती हूँ न शोर करती हूँ
बस मन की पीड़ा को
आंसुओं में बहने देती हूँ
नहीं कहे जाते कुछ दर्द
कुछ पीड़ाएं केवल खुद की होती है
केवल खुद के सहन करने के लिए
उसे किसी और से कहकर भी
मन शांत नहीं होता
मन को चाहिए एक एकांत
एक शांत सी जगह
खुद को खाली करने के लिए
मन बहुत भारी सा हो जाता है जब
एक गुबार सा जो
बाहर निकलने को आतुर है
और आंसुओं में बहकर
फिर हो जाता है मन एकदम शांत
जैसे हल्की बारिश के बाद
धरती हो जाती है तृप्त सी !!😌

#लेखक_भगवतसिंह_नरूका

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सुनो ना…

आज मासिक धर्म पर खुलकर
बात करते हैं...

सुनो ना…

आज उस ख़ामोशी को तोड़ते हैं,
जो हर महीने
एक औरत के दर्द को
शर्म के पर्दे में छुपा देती है।
ये कोई गुनाह नहीं,
ना ही कोई कमजोरी है,
ये तो प्रकृति की वो भाषा है
जिससे जीवन जन्म लेता है।
फिर क्यों फुसफुसाहट में
कहा जाता है इसका नाम..?

फिर क्यों निगाहें झुक जाती हैं,
और सवाल पूछना भी
गुनाह समझ लिया जाता है..?
पेट की ऐंठन,
मन की थकान,
और चेहरे पर मुस्कान ओढ़े
दुनिया निभा लेना...
क्या ये कम हिम्मत की बात है..?

सुनो ना…

आज सिखाओ बच्चों को
कि ये “गंदा” नहीं,
बल्कि “ज़रूरी” है।
आज कहो सबको
ये तो औरत होने की
सबसे सच्ची पहचान है।
चलो आज
खुलकर बात करते हैं,
क्योंकि जब बात होगी,
तभी समझ बढ़ेगी,
और जब समझ बढ़ेगी
तभी सम्मान मिलेगा...!!

एक सच्चाई है ये इस लिए सोच बदलो मर्दों ♥️♥️♥️♥️✍️✍️✍️✍️
❤️💯🔥✍️

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कोई एक ऐसा भी है जो मेरी काबिलियत को समझ सका

थोड़ी ही मगर वो हमारी असलियत को समझ सका

दिल से धन्यवाद है उस इन्सान का

जो हमारी लिखावट को काफी लोगो तक पहुचाने की कोशिश कर सका ।
♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️writer bhagwat singhnaruka ✍️

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*प्रिय साथी*

“अरमान" सिर्फ़
उतने ही अच्छे हैं,
जिनमें
"स्वाभिमान" गिरवी
रखने की
ज़रूरत ना पड़े...

writerbhagwat singh naruka

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*प्रिय स्टूडेंट्स*


*वक्त का रुख कैसे किसी को बदलता है ये अखबार से पूछिये,जो सुबह कीमती होता है और शाम को रद्दी हो जाता है।*

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