हँस के मिलती है मगर काफ़ी थकी लगती है,
उसकी आँखें कई सदियों से जगी लगती हैं।
चेहरे पर मुस्कान है, पर दिल में खामोशी गहरी,
हर हँसी के पीछे एक अधूरी कहानी छुपी लगती है।
लोग समझते हैं उसे बेफिक्र और खुशमिज़ाज,
पर उसकी खामोशी बहुत कुछ कहती लगती है।
वो सबके सामने खुद को मजबूत दिखा लेती है,
पर तन्हाई में उसकी आँखें भीगी लगती हैं।