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अगर भारत में भी अमेरिका की तरह बिना लाइसेंस बंदूक खरीदने की अनुमति दी जाए तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं?
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पेड मीडिया के प्रायोजक पूरी दुनिया के नागरिको को हथियार विहीन बनाये रखना चाहते है। अत: बंदूक रखने के अधिकार को लेकर पेड मीडिया द्वारा बहुत बड़े पैमाने पर भ्रम फैलाया गया है। जब से पेड मीडिया का प्रादुर्भाव हुआ है तब से उन्होंने जितनी गलत फहमियां Gun Rights के बारे में फैलायी है उतनी किसी और विषय के बारे में नही फैलायी।
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और भारत को Arms Control के कारण जितनी क्षति उठानी पड़ी उतनी क्षति और किसी अन्य वजह से नहीं उठानी पड़ी। और जहाँ तक मैं देखता हूँ, आने वाले समय में भारत को जो सबसे गंभीर नुकसान उठाना पड़ेगा वह भी गन कंट्रोल के कानून के कारण ही उठाना पड़ेगा !!
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[ टिप्पणी : इस जवाब में 3 खंड है -
खंड (अ) में कुछ तर्क एवं सूचनाएं है जो पेड मीडिया द्वारा Gun Rights के बारे में फैलाये गए भ्रम को काटती है।
खंड (ब) में वह प्रकिया है जिसके गेजेट में आने से देश व्यापी जनमत संग्रह प्रक्रिया शुरू होगी ताकि आम भारतीय नागरिक यह तय कर सके कि वे बंदूक रखने का अधिकार चाहते है या नहीं।
खंड (स) में मैंने बताया है कि भारत में प्रस्तावित Gun Law लागू होने से किस तरह के संभावित परिवर्तन आयेंगे।
खंड (ब) महत्वपूर्ण है, और यदि आप इस तथ्य से परिचित है कि हथियार विहीन नागरिक समुदायों का क्या हश्र होता है तो सीधे खंड (ब) पढ़ सकते है। ]
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खंड (अ)
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हालांकि, पेड मीडिया द्वारा Gun Rights के बारे में दिए जाने वाले कई आर्गुमेंट इतने बकवास होते है, है उन्हें उत्तरित ही नहीं किया जाना चाहिए। अत: गन कंट्रोल के पक्ष में दिए जाने वाले निहायत ही स्तरहीन तर्कों को मैंने इसमें शामिल नहीं किया है।
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(1) दरअसल, जब किसी देश का कानून यह कहता है कि आप बंदूक नहीं रख सकते तो इसका परिणाम यह होता है कि :
जो 0.05% व्यक्ति क़ानून में नहीं मानते, वे क़ानून तोड़कर अवैध रूप से बंदूक ले आते है,
और जो क़ानून में मानते है, वे क़ानून की चपेट में आकर बंदूक नहीं ले पाते
हथियारबंद होने के कारण अब ये 0.05% अपराधी शेष Law Abide Citizens पर बढ़त बना लेते है !!
तो अंततोगत्वा बंदूक नहीं रखने का क़ानून बनाकर सरकार समुदाय के 99.95% शरीफ लोगो को हथियारों से वंचित कर देती है, लेकिन उन 0.05% को नहीं रोकती / रोक पाती जो क़ानून को उड़ता हुआ भुनगा समझते है !!
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(2) दरअसल ज्यादातर गन क्राइम अवैध बंदूको से होते है, लाइसेंसी या रजिस्टर्ड बंदूक से अपराध की सम्भावना बेहद कम होती है। वजह ?
लाइसेंस वाली बंदूक को ट्रेक किया जा सकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति को रजिस्टर्ड बंदूक थमा दी जाए तो जब भी गन क्राइम होगा तब व्यक्ति पकड़ा जाएगा। क्योंकि पंजीकृत या लाइसेंस वाली बंदूक को ट्रेक किया जा सकता है।
लेकिन जब सरकार बंदूक रखने का अधिकार नहीं देती तो क़ानून तोड़ने वाले व्यक्ति अवैध बंदूके ले आते है, और वे जानते है कि उन्हें ट्रेक नहीं किया जा सकता, अत: अपराध करने के लिए प्रोत्साहित होते है !!
इस तरह बंदूक न रखने का क़ानून यह सुनिश्चित करता है कि लोग अवैध बंदूके रखेंगे, फिर उनसे वे क्राइम करेंगे और फिर उन्हें पकड़ा भी नहीं जा सकेगा !! अपराधी के पास रजिस्टर्ड / लाइसेंसी बंदूक होगी तो उसका जोखिम बढ़ जायेगा, और उसके अपराध करने की सम्भावना घटेगी।
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(3) वास्तविकता यह है कि बंदूक अच्छी या बुरी नहीं होती। बंदूक से अपराध होगा या रक्षा होगी यह इस बात से तय होता है, कि बंदूक किसके हाथ में है। क़ानून के मानने वाले के हाथ में बंदूक सुरक्षा देती है, लेकिन जब बंदूक अपराधिक प्रवृति के व्यक्ति के हाथ में होती है तो यह हमें नुकसान देने लगती है।
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तो आपके घर परिवार में, मोहल्ले में फेसबुक फ्रेंड्सलिस्ट आदि में ऐसे कितने लोग है जिनके हाथ में बंदूक आने के साथ ही वे लूटपाट करना शुरू कर देंगे !! मेरे अनुमान में किसी भी समाज में इनकी संख्या 0.05% से अधिक नहीं है।
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यह स्थापित तथ्य है कि समुदाय के 99.05% नागरिक क़ानून का पालन करने वाले होते है, अत: जब Mass के पास बंदूक जाती है तो इस वजह से क्राइम रेट कभी नहीं बढती, कि आम नागरिको को बंदूक दे दी गयी है। क्राइम रेट बढ़ने की वजहें भिन्न होती है, किन्तु उन्हें गन क्राइम के खाते में दिखाया जाता है, ताकि नागरिको के दिमाग में बंदूक के प्रति नफरत डाली जा सके।
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जब बंदूक की वजह से किसी की जान जाती है तो इसे बड़े पैमाने पर कवरेज दिया जाता है, किन्तु उन घटनाओ को छिपा लिया जाता है जब बंदूको ने नागरिको की रक्षा की। और इस तरह असंतुलित रिपोर्टिंग करके वे यह सुनिश्चित करते है कि आम नागरिक बंदूक रखने के अधिकार के खिलाफ बने रहे।
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(4) क्या भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार नहीं देंगे ?
यह गलत धारणा ( Height of Misconception ) पेड मीडिया द्वारा खड़ी की गयी है ताकि नागरिको को हथियार विहीन रखने के लिए कन्विंस किया जा सके। वे एक तरफ़ा एवं चयनात्मक सूचनाओ का इस्तेमाल करके यह भ्रम खड़ा करते है। मैं आपको इसका एक जीता जागता व्यवहारिक उदाहरण देता हूँ ।
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भारत के ही कर्नाटक राज्य के कूर्ग जिले में लगभग 70 से 80% नागरिको के पास बंदूके है, किन्तु वहां पर गन क्राइम रेट तुलनात्मक रूप से निम्न है। कर्नाटक भी भारत में ही है, और यदि भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार देंगे तो अब तक कूर्ग में लोगो ने एक दुसरो को मार क्यों नहीं दिया। मतलब यहाँ कोई लॉजिक लगाने की जगह ही नहीं है !! सीधा सबूत सामने है !!
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वहां के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने की छूट है, और महिला, पुरुष सभी बंदूके रखते है। और अनिवार्य रूप से रखते है। और कई कई बंदूके रखते है !!
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यह एक वास्तविक उदाहरण है जो यह सिद्ध करता है कि - भारतीयों को बंदूक रखने का अधिकार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे , नामक धारणा पूरी तरह से झूठ है, और पेड मीडिया द्वारा भारतीयों के दिमाग में डाली गयी है।
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और ज्यादातर भारतीय इस धारणा के शिकार इसीलिए है क्योंकि पेड मीडिया इस सूचना को छिपाता है कि, कूर्ग जिले के 80% नागरिको के पास पंजीकृत बंदूके है !! और इसी तर्ज पर बंदूक के बारे में सही सूचना देने वाली कई खबरें छिपायी जाती है, और भ्रमित करने वाली खबरों को उछाला जाता है !!
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आजादी के बाद कूर्ग जिले के नागरिको से बंदूके छीनने की 2 बार तिकड़म लगायी गयी लेकिन दोनों बार कोई वाजिब वजह नहीं होने के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा। पहली कोशिश (शायद 1972 में) इंदिरा जी ने की थी और दूसरा प्रयास 2013 में चिदम्बरम ने किया।
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तब कूर्ग में चुनाव थे, अत: जिलाधीश ने सरकार को चिट्ठी लिखी कि – शांति पूर्ण ढंग से चुनाव सम्पन्न करवाने के लिए नागरिको के हथियार जब्त करने की अनुमति दी जाए, और चुनाव के बाद इन्हें बंदूके फिर से वितरित कर दी जाएगी !!
DC’s letter on Kodava firearm licence kicks up a row
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जब नागरिको को यह जानकारी हुयी तो उन्होंने कलेक्टर एवं एसपी कार्यालय को घेर लिया। उनका तर्क था कि पिछले 150 वर्षो से हम बंदूके रख रहे है, और आज तक कभी क़ानून व्यवस्था की गड़बड़ी नहीं हुयी है, तो किस आधार पर इस तरह का पत्र लिखा गया है। अंतत सरकार को पीछे हटना पड़ा।
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कूर्ग जिले के नागरिको को बंदूक रखने की छूट ब्रिटिश ने दी थी। और तब से उन्हें लगातार आर्म्स एक्ट में यह छूट दी जाती रही है। कूर्ग के प्रत्येक मूल निवासी को बंदूक रखने और धारण करने की छूट है। और जब वे अपने शहर से बाहर जाते है तब भी उन्हें छूट है कि वे 100 राउंड कारतूस एवं बंदूक साथ में लेकर जा सकते है !! अभी उनकी इस छूट को 2029 तक बढ़ा दिया गया है। और 2029 में इस छूट को फिर से 10 साल आगे बढ़ाना पड़ेगा, क्योंकि वे अपने हथियार किसी भी कीमत पर देने के लिए राजी नहीं है।
Government continues British-era exemption given to Kodavas of Coorg for arms licence
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और वे जब प्रदर्शन करने सड़को पर आते है तो भी उनके हाथो में बंदूक रहती है !! और फिर भी आपको भारत में अपने आस पास हर तरफ ऐसे लोग मिलेंगे जो लगातार यह बात दोहराते है कि भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार देंगे !! क्यों ?
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क्योंकि पेड मीडिया में उन्होंने यही सब देखा पढ़ा सुना है !!! मैं और मेरे जैसे कई कार्यकर्ता पिछले 6-7 साल से विभिन्न मंचो पर कूर्ग के बारे में यह तथ्य रख रहे है, लेकिन आश्चर्य का विषय है कि अभी तक पेड मीडिया के प्रायोजको को अभी तक कूर्ग के बारे में कोई लॉजिक नहीं सूझा है !! बहरहाल, उम्मीद है कि , जल्दी ही वे इस बारे में कोई थ्योरी गढ़ कर लायेंगे ताकि तथ्य होने के बावजूद इसे तर्क से काटा जा सके !!
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तलवार के बारे में यही छूट सिक्खों को 1923 में दी गयी थी। हालांकि सिक्खों को यह छूट ऑफिशियली नहीं है, किन्तु सिक्ख यदि तलवार धारण करता है, तो प्रशासन द्वारा इसकी अवहेलना की जाती है। उल्लेखनीय है कि मास्टर तारा सिंह जी ने कृपाण दा मोर्चा आन्दोलन चलाकर यह छूट देने के लिए गोरो को बाध्य कर दिया था।
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(5) कैसे अमेरिकी नेता अपने नागरिको को बंदूक रखने को प्रोत्साहित करते है ?
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ओबामा का उदाहरण लीजिये। राष्ट्रपति रहते हुए आपने ओबामा को पेड मीडिया में गन कंट्रोल के बारे में काफी रोते धोते हुए देखा होगा। दरअसल वे यह ड्रामा बंदूके बेचने के लिए करते थे। जब भी हथियारों की बिक्री में गिरावट आती है, हथियार कम्पनियाँ नेताओं को बन्दूको पर प्रतिबन्ध लगाने का बयान देने को कहती है। नतीजा — लोग ज्यादा बन्दुके खरीदते है।
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ओबामा कहते है कि मैं बन्दूको पर प्रतिबन्ध लगा दूंगा। पर वे सिर्फ बयान देते है, इसके लिए क़ानून नहीं बनाते !!
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यह इस तरह है कि, यदि सरकार द्वारा टोस्टर पर प्रतिबन्ध लगाने का बयान दिया जाए और आपके पास टोस्टर न हो तो आप सबसे पहले क्या खरीदेंगे ? टोस्टर !! और इस तरह के बयान सुनकर सभी अमेरिकी नागरिक बंदूके खरीदने के लिए दौड़ लगाने लगते है !!
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ऐसा ड्रामा ओबामा दो बार कर चुके है, और दोनों ही बार बन्दूको की बिक्री में जबरदस्तउछाल आया।
Obama gun control push backfires as industry sees unprecedented surge
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इस तरह के बयानों को पूरे विश्व में पेड मिडिया द्वारा इस तरह फैलाया जाता है ताकि हथियार विहीन देशो के भोले जीव इस मुगालते के शिकार हो जाए कि ओबामा नागरिको को हथियार रखने की छूट देने के खिलाफ है, अमेरिका में बन्दूको के कारण गदर मची पड़ी है, अत: हमें भी बन्दूको के खिलाफ और भी सख्त कानून बनाने चाहिए !!
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बयानों को सुनने के जगह यदि आप अमेरिकी नेताओं द्वारा बनाए गए क़ानून देखिये, तो तस्वीर उल्टी नजर आती है। जोर्जिया यह कानून पास करता है, प्रत्येक परिवार को कम से कम एक बंदूक रखना अनिवार्य होगा !!
‘You must own a gun’: Georgia town passes mandatory firearms law
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अगले खंड में मैंने उस इबारत के बारे में बताया है, जिसे गेजेट में छापने से भारत में हथियारबंद नागरिक समाज की रचना की दिशा में काम शुरू होगा।
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खंड (ब)
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बंदूक रखने का अधिकार इस तरह का है कि, इस क़ानून के आने से प्रारंभिक चरण में एक आयाम में नकारत्मक नतीजे भी आयेंगे, और कई आयाम में यह अच्छे परिणाम भी देगा। यदि किसी कानून के आने से किसी आयाम में नुकसान होना संभावित है तो मेरे विचार में ऐसे कानून को सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इस पर जनमत संग्रह करवाया जाना चाहिए, ताकि देश के नागरिक इस बारे में फैसला ले सके। यदि नागरिको का बहुमत ऐसे क़ानून को ख़ारिज कर देता है तो इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
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वस्तुत: मैंने भारत में Gun Law का जो क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है, वह सीधे लागू नहीं होगा। पहले इस पर देश व्यापी जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि देश की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इस पर हाँ दर्ज कर देते है तो हो यह क़ानून पीएम लागू करेंगे अन्यथा नहीं। निचे मैंने इसका प्रस्तावित ड्राफ्ट दिया है :
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—-क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ—-
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जनमत संग्रह का प्रस्ताव ; बंदूक रखने का अधिकार
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( Proposal for Referendum ; Right to Bear Gun )
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इस क़ानून का सार : प्रधानमंत्री इस क़ानून को 'सिर्फ तब' लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में भारत के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं। जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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यह क़ानून प्रत्येक भारतीय को बंदूक रखने का अधिकार देता है। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 जिंदा कारतूस रखना अनिवार्य होगा। प्रधानमंत्री किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून किसी राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री भी इस क़ानून को अपने राज्य के कुछ जिलो या पूरे राज्य में लागू कर सकते है। #GunLawReferendum
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नागरिको एवं अधिकारियों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही भारत में एक देश व्यापी जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि भारत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए हाँ दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ ‘हाँ’ या ‘ना’ दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले प्रधानमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद भारत का कोई भी मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
यदि देश की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो प्रधानमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।
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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है - ऐसा भारतीय नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून 22 वर्ष से कम उम्र के नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक स्पष्ट रूप से इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद भारत का कोई भी वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत (Registered) बन्दूक रख सकेगा।
बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की 2 बंदूके अपने पास रख सकेगा।
दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित संख्या में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
10 लाख से अधिक संपत्ति – 1 छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
20 लाख से अधिक संपत्ति – 1 मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
30 लाख से अधिक संपत्ति – 1 बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
संपत्ति में 1 करोड़ के मूल्य तक के 1 घर एवं तथा 10 लाख तक के फर्नीचर को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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अधिकारीयों के लिए निर्देश
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(06) प्रधानमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की के लिए धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीनगन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
छोटी बंदूको के प्रकार।
मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
बड़ी बंदूको के प्रकार।
कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों को बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक ट्रेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क की दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा तय की जाएँगी।
DGO प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। DGO या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) भारत सरकार इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो ‘इंसास से कम’ के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेगी। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से बिना किसी लाइसेंस के, सिर्फ पंजीकरण करवाकर बंदूक, बन्दुक के पुर्जे, कारतूस, बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने की फैक्ट्री लगा सकता है।
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(10) भारत में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या किसी भी विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
यह क़ानून लागू होने के बाद भारत में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व वाली इकाइयां ही बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महाजूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयुवर्ग के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
महाजूरी सदस्य हर शनिवार और रविवार को बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे और समाप्त शाम 4 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती 600 रु. एवं यात्रा खर्च मिलेगा।
यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन से काट सकता है।
सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार
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(12.1) जूरी किसी नागरिक को बंदूक रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेगी। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.3) यदि कोई नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले की सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.4) यदि किसी बंदूक निर्माण इकाई के खिलाफ कोई शिकायत आती है, या कारखाने के मालिक के खिलाफ टैक्स वगेरह का कोई भी मामला दायर होता है तो सुनवाई जूरी द्वारा की जायेगी, जज द्वारा नहीं।
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(12.5) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी के खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई भी जूरी करेगी।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना ( इस संपत्ति में 1 करोड़ का 1 घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा ) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।
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(14) वोट वापसी ; जिला शस्त्र अधिकारी
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी नागरिक जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(14.2) कोई भी नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
पटवारी प्रत्येक सोमवार एवं कलेक्टर प्रत्येक 5 तारीख को उम्मीदवारों की स्वीकृतियां सार्वजनिक करेंगे।
[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी ‘हाँ’ SMS, ATM, मोबाईल एप द्वारा दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग – प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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——-ड्राफ्ट का समापन——
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(*) उपरोक्त क़ानून के राज्य एवं जिला स्तर के ड्राफ्ट भी प्रस्तावित किये है। अत: पीएम या सीएम चाहे तो यह क़ानून किसी एक राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है।
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खंड (स)
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ऊपर दिए गए क़ानून के बारे में कुछ स्पष्टीकरण
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(1) यह क़ानून भारत में कैसे लागू होगा ?
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इस क़ानून की धारा (1) में जनमत संग्रह का प्रावधान दिया गया है। प्रधानमंत्री इस क़ानून पर हस्ताक्षर करके इसे गेजेट में निकालेंगे और गेजेट में आने के साथ ही इस पर जनमत संग्रह शुरू हो जाएगा। तब भारत का कोई भी नागरिक चाहे तो पटवारी कार्यालय में जाकर या अपने रजिस्टर्ड मोबाइल द्वारा SMS भेजकर इस कानून पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकता।
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यदि देश के कुल मतदाताओं के 55% नागरिक इस पर अपनी सहमती दर्ज करवा देते है, तब सिर्फ तब ही यह क़ानून देश में लागू होगा। जब तक 55% मतदाता इस पर अपनी सहमती दर्ज नहीं करते है, तब तक जनमत संग्रह जारी रहेगा। यदि किसी मतदाता ने इस क़ानून पर अपनी सहमती दर्ज करवा दी है, और वह अपनी सहमती रद्द करना चाहता है तो वह किसी भी दिन अपनी स्वीकृति को रद्द भी कर सकता है। इस तरह यह क़ानून नागरिको का स्पष्ट बहुमत प्राप्त करने के बाद ही देश में लागू होगा अन्यथा नहीं।
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(2) क्या प्रधानमंत्री यह क़ानून बिना जनमत संग्रह के लागू कर सकते है ?
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यदि प्रधानमंत्री चाहे तो इस कानून की धारा 1 में से जनमत संग्रह का प्रावधान निकाल कर इसे सीधे देश में लागू कर सकते है। प्रधानमंत्री चाहे तो बिना जनमत संग्रह के इस क़ानून को देश के किसी राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि, यह क़ानून 55% नागरिको की स्पष्ट सहमती प्राप्त करने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।
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(3) हमें इस क़ानून की जरूरत क्यों है ?

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3.1. बाह्य आक्रमण : हथियारबंद नागरिक समाज लोकतंत्र की जननी है। प्रत्येक नागरिक का शस्त्रधारी होना राज्य को इतनी शक्ति प्रदान कर देता है कि सेना के हारने के बावजूद वे खुद की एवं अपने राज्य की रक्षा कर पाते है।
हिटलर ने स्विट्जर्लेंड पर हमला करने की योजना को इसीलिए स्थगित कर दिया था, क्योंकि तब सभी स्विस नागरिको के पास बंदूक थी। जब प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होती है तो इसे सेना द्वारा हराया नहीं जा सकता, और न ही राज्य पर पूरी तरह से कंट्रोल लिया जा सकता है।
प्रत्येक अफगान के पास बंदूक होने के कारण अमेरिका, ब्रिटेन और रूस भी कई वर्षो तक चली लड़ाइयो के बावजूद अफगानिस्तान पर कभी भी पूरी तरह से नियंत्रण नहीं बना सके।
विएतनाम अमेरिका से 20 वर्षो तक लड़ने में इसीलिए कामयाब रहा क्योंकि सेना के हारने के बाद यह युद्ध वहां के नागरिक लड़ रहे थे। सोवियत रूस ने नागरिको को हथियार भेजे और वे अपने देश की रक्षा कर पाए।
ब्रिटिश भारत पर 200 वर्षो तक इसीलिए शासन कर पाए क्योंकि भारत के नागरिक हथियार विहीन थे। गोरो के पास सिर्फ 1 लाख बंदूके थे, और इन 1 लाख बन्दूको के माध्यम से उन्होंने 60 करोड़ नागरिको पर शासन किया। यदि सिर्फ 1% यानी 60 लाख भारतीयों के पास बंदूक होती तो ब्रिटिश भारत को नियंत्रित नहीं कर पाते थे।
यदि आज भारत का चीन से युद्ध हो जाता है, और अमेरिका हमें हथियारों की मदद देने से इनकार कर देता, या हमें देरी से हथियार भेजता है, तो हथियारो के अभाव में ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि हमारी सेना रूपी दीवार दीवार टूट जायेगी। और एक बाद यदि हमारी सीमाओं में सेना घुस आती है तो नागरिको के पास प्रतिरोध करने के लिए कोई हथियार नहीं है। तब हमारी अवस्था ईराक जैसी हो जायेगी। ऐसे संभावित संकट से बचने के लिए यह क़ानून जरुरी है।
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3.2. आंतरिक आक्रमण : प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होने से आन्तरिक स्तर पर भी देश काफी हद तक सुरक्षित हो जाता है, और विभिन्न अपराधो में कमी आती है।
कसाब दर्जनों नागरिको को इसीलिए मार सका था क्योंकि नागरिको के पास हथियार नहीं थे। यदि मुम्बई वासियों के पास बंदूक होती तो कसाब आता नहीं था, और आ भी जाता तो 5-7 लोगो से ज्यादा को नहीं मार पाता। और आगे भी यदि इस तरह के हमले बड़े पैमाने पर होने लगते है तो हमारे पास कोई उपाय नहीं है।
सिर्फ 2000 हथियारबंद इस्लामिक आतंकियों के दस्ते ने 2 लाख कश्मीरी पंडितो को घाटी से खदेड़ दिया था। यदि कश्मीरी पंडितो के पास बंदूके होती थी, तो उन्हें कभी पलायन नहीं करना पड़ता था।
2012 में असम के कोकराझार में सिर्फ 4000 हथियारबंद मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपेठियो ने हमला करके 2 लाख हिन्दु नागरिको को अपनी जमीन, संपत्ति आदि छोड़कर पलायन करने पर मजबूर कर दिया था। यदि सभी नागरिको के पास बंदूक होती तो उन्हें अपना घर बार छोड़कर भागना नहीं पड़ता।2012 Assam violence - Wikipedia
1947 में विभाजन के दौरान भी 20 लाख हथियार विहीन नागरिको को अपनी जान-माल गंवाना पड़ा था। वजह यह थी कि सीधी कार्यवाही करने वाले पक्ष के पास हथियार थे, जबकि दूसरे पक्ष के नागरिक हथियार विहीन थे। चूंकि सिक्खों के पास हथियार थे, अत: वे कुछ हद तक इसका प्रतिरोध कर पाए।
भारत में निरंतर चुनाव होने, जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। किन्तु कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहे तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर, आतंकवादी हमले करवाकर, असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल तख्ता पलट कर सकता है।
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(4) इस क़ानून के गेजेट में आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ?
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4.1. नकारात्मक प्रभाव : प्रथम चरण में गन क्राइम जैसे क्रोध जनित हमले आदि में वृद्धि होगी और बन्दुक से होने वाली मौतों में इजाफा होगा। लेकिन जैसे जैसे प्रत्येक नागरिक के पास बन्दुक पहुंचेगी वैसे वैसे दुसरे चरण में इस हिंसा में थोड़ी कमी आने लगेगी। इस क़ानून में किसी व्यक्ति को बंदूक रखने की अनुमति देने का अधिकार नागरिको की जूरी को दिया गया है। अत: जूरी मंडल गन क्राइम करने वाले नागरिको को हथियारों से वंचित कर देगा, और अपराध में गिरावट आने लगेगी। यदि पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पा

sonukumai

राख ओढ़कर जो सच को जीता है,
वो हर झूठे रिश्ते से रीता है।
यहाँ ना सुंदर, ना कुरूप का भेद है,
हर चेहरा अंत में बस भस्म का खेद है।
जिसे दुनिया अपवित्र कहकर ठुकराती है,
अघोरी उसी में शिव को पाता है।
मांस, मरण, और मौन का संग है,
यहीं असली जीवन का प्रसंग है।
जहाँ डर खत्म, वहीं दरवाज़ा खुलता है,
जो भागे श्मशान से, वो जीवन भर जलता है।
अघोरी कहता—ना कुछ तेरा, ना मेरा अधिकार है,
जो है, बस इस क्षण का उधार है।
ना पाप यहाँ, ना पुण्य का हिसाब है,
हर कर्म बस एक अधूरा जवाब है।
जब टूटे हर धारणा, हर विचार है,
तभी दिखे—तू ही शिव, तू ही अंधकार है। 🔱

@beyond_word✍️

jatinlad746528

तेरे मिलने की खुशी एक तरफ,
तुझे खोने का गम एक तरफ,
तुझे पाकर भी खो दिया, ये सवाल एक तरफ।
मुझे पता है कि तू वापस नहीं आएगा,
तेरा प्यार और गुस्सा एक तरफ…

मेरी गलतियाँ भी कम नहीं थीं,
मेरी खामोशियाँ भी गुनाह बन गईं,
तुझे संभाल न सका, ये अफसोस एक तरफ।

तू दूर होकर भी दिल के पास है,
तेरी यादों का एहसास एक तरफ,
तुझे भूलने की हर कोशिश…
और तेरा हर बार याद आ जाना एक तरफ।

अब ना कोई शिकायत है, ना कोई हक़ बाकी,
बस तेरी खुशियों की दुआ है एक तरफ,
और मेरी अधूरी मोहब्बत की कहानी एक तरफ।

brokenboy190253

Goodnight friends.. sweet dreams

kattupayas.101947

कितनी बार रुकी हूँ, ये हिसाब नहीं रखा,
कितनी बार टूटी हूँ, ये जवाब नहीं रखा।
बस एक जिद है दिल में — खुद को साबित करने की,
और इसी जिद ने मुझे कभी कमजोर नहीं रखा। 👑✨


by piyu 7soul

parmarsantok136152

तुझे किसी और के करीब देखना गवारा नहीं,
मेरी मोहब्बत में कोई ‘शेयर’ का इशारा नहीं…
तू मेरी है, बस मेरी ही रहेगी,
इस दिल को तुझ पर कोई दूसरा हक़ प्यारा नहीं…”

sonambrijwasi549078

ओह नील गगन"

ओह नील गगन, तेरी बरखा आई
लहराके इतराके सावन लाई।
मैं एक बंजर धरती हूं,
रूखी हूं, प्यासी हूं,
तुझ बिन जैसे अधूरी हूं,
हां मैं बंजर धरती हूं।
तुम बरसें कहीं किसी वन के ऊपर,
कभी शहरों में, कभी गलियारों में।
कभी यूं ही बह जाती हों,
नदियों में मिल जाती हों।
कभी ठहरें तो झीलों में,
वरना सागर में मिल जाती हों।
एक मेहरबानी करना,
बरस जाना कभी मुझ पर इतना।
न वन जितना,
पर उग जाए थोड़े पौधें कि मैं बंजर ना कहलाऊ,
हरियाली मुझ पर छाएं,
मैं लताओं के जैसे लहराऊं।
ओह नील गगन, हैं फ़रियाद तुमसे,
आओ भी कभी मिलने हमसे।
मेरा दामन हरियाली से भर दो,
लेकर अपने बरखा को साथ।
ताकि मुझे भी लगें इस बार,
हां आई है बरसात।
By- Radhika

storybug

🔥 आज कहानी ने नया मोड़ लिया है…
“झांसी: The Price of a Bride”
Episode 2 अब LIVE है 👑
792 लोग इस कहानी का हिस्सा बन चुके हैं…
228 लोगों ने इसे अपने पास संभाल कर रखा है ❤️
और 16 लोगों ने इसे 5⭐ दिया 😳
अब असली खेल शुरू होगा…
क्या भार्गवी सच में बेबस है?
या वो कुछ ऐसा छुपा रही है जो सब बदल देगा?
👉 अभी पढ़ो और बताओ—
Team मजबूरी ❤️
या
Team चाल 😏
– piyu 7soul

parmarsantok136152

Don't change yourself to fit into someone else's expectations. First, learn to love yourself- because when you truly value who you are, you won't need anyone else's approval to feel loved.

anjanaakulkarni.976115

"तुम मिलें"

तुम मिले तो हर ख़ुशी मिली,
तुम मिलें तो मैं खुद से मिली।
खो चुकी थी गुमनाम जिंदगी में मैं,
मगर तुम मिले तो मुझे नई जिंदगी मिलीं।

storybug

ख्वाब हमने बहुत देखे,
पढ़-लिखकर बाबू बने।
जोब मिलीं महानगर में,
सीखने को बहुत मिला।

बस हमें दूसरों से क्या वास्ता,
अपना काम और अपना भाग्य।
बढ़ते रहे हम अपने पथ पर,
अकेलापन महसूस नहीं हुआ।

हमने अपनी खुशी के साथ साथ,
परिवार को खुशी में जोड़ दिया।

अकेलापन महसूस करने वालों,
अपने परिवार से प्यार करों।

खुशियां बांटते रहे और जिंदगी बढ़ती गई,
आज सखी, मुने रंग लाग्यो महानगर को,
छोड़ कर हम तो नहीं जियो।

अब गांव कहा तक रह गया है? गांव ख़ाली ख़ाली है,
कमाई के चक्कर में सब महानगर की और दौड़ पड़े।

यहां फुर्सत कहां है हम सबको, अपने आप में खोये है,
जरुरत आन पड़ी तो, दोस्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।

बस बाग बगिया खिलता रहा, परिवार खुशहाल हैं,
महानगर की भीड़ में अकेलापन कहां मेहसूस किया?
- कौशिक दवे

kaushikdave4631

મારા જન્મ દિવસે હું દિલથી માતૃભારતી પરથી વિદાય લઉં છું.........bye bye Aju mane support karnar matrubharti na tamam mitrono khub khub abhar.......😭😭😭😭😭😭🙏🙏🙏🙏🙏🙏

ajit3539

🦚मेरे सखा कृष्णा 🦚💛
मैं सखी हूँ तेरी, तुम मेरे सखा हो,
ये रिश्ता ना दुनिया समझे, ना कोई लिखा है।
जब भी दिल मेरा चुपके से रोता है,
तू बंसी की धुन बनकर मुझे हँसा जाता है।
ना कोई डर है, ना कोई दूरी,
तेरे साथ हर पल लगता है पूरी।
मैं अपनी हर बात तुझसे कह जाती हूँ,
तू बिना बोले ही सब समझ जाता है।
कभी मैं रूठ जाऊँ, तो तू मनाने आ जाता है,
कभी मैं खो जाऊँ, तो राह दिखा जाता है।
ना तुझसे कुछ छुपा है, ना कुछ कहना बाकी,
तुम ही मेरे सखा, तुम ही मेरे साथी।
इस दुनिया की भीड़ में जब कोई अपना नहीं लगता,
तब तू ही मेरे दिल को सुकून सा देता है।
हे कान्हा…
बस इतना सा रिश्ता बना रहे हमेशा,
मैं तुम्हारी सखी रहूँ… और तुम मेरे सखा। 💛🦚
by piyu 7soul ❤️

parmarsantok136152

Do you know that at the root of a negative viewpoint lies a negative ego? When the ego is nurtured, one feels positive, but when the ego is hurt, one feels negative.

Read more on: https://dbf.adalaj.org/M4Tepcqv

#selfhelp #selfimprovement #spirituality #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

हममें तो खूब हौसला था तेरे हर सितम सहने का मोहन..
मगर शायद तुम ही थक गए होंगे हम पर यूँ सितम ढाते ढाते..

momosh99

माई_डियर_प्रोफेसर पधार चुकी है। आप लोग पढ हकते हो।

gautamreena712gmail.com185620

👑🐍 कल आ रही है एक ऐसी कहानी… जो आपको हिला कर रख देगी!
वो एक साधारण लड़की नहीं…
बल्कि एक रहस्य है…
एक ऐसा श्राप…
जो उसकी पहचान छीन चुका है…
और एक ऐसा इंसान—
जो कभी प्यार नहीं करना चाहता…
❤️ जब ये दोनों मिलेंगे…
तो क्या होगा?
🔥 नागमणि की श्रापित रानी 🔥
⚡ कल LIVE होगी ⚡
👉 तैयार रहना…
क्योंकि ये कहानी आपको शुरुआत से ही बांध लेगी…

parmarsantok136152

कमज़ोर नहीं हूँ, बस वक्त मेरा खामोश है,
मेहनत मेरी जारी है, बस मुकाम थोड़ा दूर है।
जो आज नजरअंदाज करते हैं मेरी कहानी को,
कल वही कहेंगे — ये लड़की कुछ खास जरूर है। 😏💛#motivational sayari#struggle#


by piyu 7soul 📝📘📘

parmarsantok136152

Good morning friends..have a great weekend

kattupayas.101947

विश्व रंगमंच दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

अभिनय
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विशाल धरा पर अपने -अपने किरदार सभी निभा रहे हैं
पर रंगमंच पर आकर कलाकार अपना अभिनय दिखा रहे हैं
रंगमंच पर हर एक भाव को बड़ी ही खूबी से पेश करते हैं
अपने हावभावों से सभी को वो अपना बना रहें हैं।

इतना आसान नहीं होता है रंगमंच पर अभिनय करना
अपने आप को भूलकर किरदारों को आत्मसात करना
तन -मन में कितना ही दुख दर्द छुपा हो करते हैं ये अभिनय में कमाल
ये ठान लेते हैं अपने आप को भूलकर शानदार अभिनय है करना।

विश्व रंगमंच दिवस समर्पित है सभी कलाकारों को
जो नयी शक्ति भरता है नये अभिनय के जानकारों को
सभी बधाई के पात्र हैं अपने अभिनय के जो साथ हैं
इसी तरह आगे बढ़ते हुए आकषिर्त करतें रहें सभागारों को।

आभा दवे
मुंबई

daveabha6

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સુંદર ભાવનાત્મક વાર્તા વાંચો મારા ફેસબુક પેજ પર.

ronakjoshi2191

प्रेम ऐसा हो,,
मेरी चंचल सी नादानियों में,
तुम्हारी गहरी सी समझ हो,,
यूं घूरने वालों की कगार में,
तुम्हारी निहारने वाली नज़र हो।।
❤️ 👀

nandiv

Goodnight friends.. sleep well

kattupayas.101947