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'Unsent' ड्राफ्ट कॉलेज कैंटीन का वो कोना आज भी वैसा ही था—थोड़ा शोर, थोड़ी चाय की खुशबू और बहुत सारी यादें। मैंने अपना फोन निकाला और उसका प्रोफाइल सर्च किया। 'Block' नहीं थी मैं, पर 'Connected' भी नहीं थी। हम अक्सर उन लोगों को सबसे ज्यादा याद करते हैं जिन्हें हमने खुद अपनी लाइफ से जाने को कहा होता है। अजीब है न? मैंने टाइप करना शुरू किया— "याद आ रही है तुम्हारी। क्या हम फिर से...?" उंगलियां रुक गईं। एक गहरी सांस ली और सारा टेक्स्ट 'Select' करके 'Delete' कर दिया। शायद हमारी पीढ़ी की सबसे खूबसूरत कहानियाँ वही हैं जो कभी 'Send' ही नहीं की गईं। वो जो सिर्फ हमारे फोन के 'Notes' ऐप या मन के किसी कोने में 'Draft' बनकर रह गईं। — लावण्य ✨ "क्या आपके पास भी कोई ऐसा 'Unsent' मैसेज है? कमेंट्स में दिल (❤️) ड्राप करें।"
"कभी-कभी सबसे कीमती तोहफे वे नहीं होते जो शोर मचाते हैं, बल्कि वे होते हैं जो दिल की खामोशी को समझते हैं। ये लाल चूड़ियाँ, ये झुमके और कागज पर उकेरे गए वे चंद अल्फाज़... इनमें एक ऐसी रूहानी चमक है जो किसी महंगे जेवर में नहीं मिलती। ये सिर्फ तोहफे नहीं, एक वादा हैं—साथ रहने का, सादगी का और उस मोहब्बत का जो वक्त के साथ फीकी नहीं पड़ती। प्यार को महंगा होना जरूरी नहीं, उसका सच्चा होना ही काफी है।"
"कभी-कभी ज़िंदगी की रफ़्तार से थककर, बस एक ऐसे कोने की तलाश होती है जहाँ घड़ी की सुइयाँ नहीं, बल्कि दिल की धड़कनें सुनाई दें। खिड़की से छनकर आती वो सुनहरी धूप, मेज़ पर रखी चाय की गर्म प्याली और चारों ओर ये हरी-भरी खामोशी... जैसे कह रही हो कि ठहर जाओ, अभी भागने की ज़रूरत नहीं है। असली सुख महलों में नहीं, बल्कि इन छोटे-छोटे पलों में छुपा है जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। आज बस मैं हूँ, मेरा सुकून है और ये ख़ूबसूरत अहसास कि ज़िंदगी सच में बहुत हसीन है।"
"कंधों पर बस्ते का बोझ था, तब मन स्थिर था... अब कंधों पर ज़िम्मेदारियां हैं, तो मन विचलित है। ये एडल्टहुड भी अजीब है दोस्त, आज़ादी तो मिली, पर सुकून कहीं खो गया है।" "बचपन में माँ की उँगली पकड़ कर चलते थे तो गिरने का डर नहीं था। आज एडल्टहुड में अकेले चल रहे हैं और डर ये नहीं कि हम गिरेंगे, डर ये है कि अगर हम गिर गए तो माँ-बाप का भरोसा टूट जाएगा। ये ज़िम्मेदारी का बोझ ही सबसे बड़ा 'विचलन' पैदा करता है।" "एडल्टहुड एक ऐसी फिल्म है जिसका 'ट्रेलर' तो हमें बड़ा फैंसी दिखाया गया था, लेकिन 'मूवी' शुरू होते ही पता चला कि यहाँ तो हर सीन में सस्पेंस और स्ट्रगल है। पर याद रखना, विचलित वही होता है जो चल रहा है। जो बैठा है, वो तो जड़ है।" "अजीब कशमकश है न? कल तक हम अपनी मर्ज़ी के मालिक बनना चाहते थे, और आज जब अपनी मर्ज़ी चलाने का वक्त आया, तो ज़िम्मेदारियों के बोझ ने मन को विचलित कर दिया है। कभी-कभी रात को छत की तरफ देखते हुए ये खयाल आता है कि क्या हम वाकई वही बन रहे हैं जो हम बनना चाहते थे? या फिर सिर्फ 'बड़े' होने की इस भीड़ में शामिल होकर अपनी पहचान कहीं खो दी है। एडल्टहुड की इस दौड़ में हम अक्सर दूसरों को खुश करने के चक्कर में खुद से ही विचलित हो जाते हैं। पर शायद, यही भटकाव हमें ये सिखाने आता है कि दुनिया की भीड़ में सबसे ज़रूरी इंसान, जिसे हमें ढूंढना है, वो हम खुद हैं।" "दोस्त, क्या आपको भी कभी लगता है कि एडल्टहुड एक ट्रैप है? अपनी बात कमेंट्स में बताओ।"
एक 180 दिनों का कॉन्ट्रैक्ट... और एक न बुझने वाली आग!" ⛓️❤️ रात का सन्नाटा, हवेली की बालकनी और हाथ में कड़क चाय का प्याला... अभिमान ने अन्वेषा को घेरे में लेते हुए कहा— "ये चाय सुकून नहीं, आज रात तुम्हारी नींद हराम करने का बहाना है।"अन्वेषा ने आँखों में आँखें डालकर जवाब दिया— "हुकुम, नींद उनकी हराम होती है जिनके इरादे कमज़ोर हों, डीएम की कलम नहीं!" 👉 अभी पढ़िए 'सफ़र-ए-दिल' के सभी धमाकेदार एपिसोड! (रेटिंग देना और फॉलो करना न भूलें!) 🖋️✨
तस्वीरें बोलती हैं, बस सुनने वाला चाहिए, सुकून यहीं कहीं है, बस ठहरने का बहाना चाहिए। न जाने कौन सी दौलत है इन छोटी चीज़ों में, हज़ार खुशियाँ वार दूँ, सादगी के इन लम्हों में। ✨️धूप, यादें और ये गुलाबी सर्दी✨️ सर्दियों की वो नर्म धूप जब आंगन में उतरती है, तो अपने साथ ढेर सारी पुरानी यादें और एक अजीब सा सुकून लेकर आती है। आज की भागती-दौड़ती दुनिया में, जहाँ हम घड़ी की सुइयों के गुलाम बन चुके हैं, ये तस्वीरें हमें 'Slow Life' यानी ठहरकर जीने का सलीका सिखाती हैं। सर्दियों का असली मज़ा किसी बड़े मॉल या शोर-शराबे में नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी चीज़ों में है जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। सिल-बट्टे पर पिसती चटनी की वो सोंधी महक, अंगीठी की गर्माहट में सुखाए गए ऊनी कपड़े, और हाथ में चाय का वो गर्म प्याला जिसकी भाप में शायद हमारी आधी थकान उड़ जाती है। Slow Life का जादू... पेड़ की ऊँची टहनियों में फंसी वो लाल पतंग शायद हम सबकी बचपन की उन ख्वाहिशों जैसी है, जो कहीं पीछे छूट गई हैं। पर आज भी, जब हम ठहर कर उसे देखते हैं, तो वो बचपन फिर से ज़िंदा हो जाता है। ज़िंदगी बस यही है—धीमी आंच पर पकती हुई चाय, दरवाज़े पर बैठी एक शांत बिल्ली और अपनों के हाथों से मिलती हुई खुशियाँ। चलिए, इस सर्दी थोड़ा कम भागते हैं और थोड़ा ज़्यादा महसूस करते हैं।
"साहित्य और कला की देवी माँ सरस्वती आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। बसंत पंचमी के इस पावन पर्व पर दुआ करती हूँ कि आपकी ज़िंदगी खुशियों के रंगों से भर जाए और सफलता आपके कदम चूमे। 🌾💛 मेरी कहानियों को इतना प्यार देने के लिए आप सभी का दिल से आभार। सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ! 📖🙏✨"
"प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम"🩷 पढ़िए "सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए क्या प्यार की बलि देना ज़रूरी है?" पर समय का पहिया घूमता है और हिसाब बराबर करने के लिए वापस आता है।
पढ़िए मेरी नयी रचना मायाजाल 🖤 (The Professional Brides) "मीठी बातों का ज़हर और लालच का फंदा—यही है इन शातिर दुल्हनों का गंदा धंधा।" 🐍
hello everyone मेरी new रचना प्रकाशित हुए हैं l आप सभी मेरी रचनाओं को पढ़िए और अपना प्यार दे l आपकी Abantika
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