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ज्यादा समझदारी भी इंसान को अकेला कर देती हैं। पर इस समझदारी में शांति और सुकून होता हैं आज जब सबका असली चेहरा मेरे सामने आ गया हैं तब बस ये एक बात समझ आई...लोग सिर्फ झूठे ही नहीं वह बुरे हैं इतने की वह किसी की भावनाओ के साथ खेल भी सकते हैं और दूसरो के रोने पर हंस भी सकते हैं। हर मंदिर जाने वाला और व्रत रखने वाला इंसान अच्छा नहीं होता वो बस इन सब धार्मिक कार्यो के पीछे अपने गलत कामो छुपा रहे होते हैं। ऐसे लोगो को कभी अपनी गलती का एहसास नहीं होता । इन्हें दूसरो के आसूं बहते देखकर खुशी और सुकून मिलता हैं शायद वेदो और पुराणो में जिन राक्षसो की बात की गई हैं वह ये लोग ही हैं। मैं राक्षसो से मिल चुकी हूं अब भगवान का मिलना बाकी हैं। अब भी ईश्वर के इंतजार मैं.... Priya kashyap....
यूंही गिरते गिरते एक दिन सभंल जाऊंगी बदला नहीं लूगीं किसी से बस बदल जाऊंगी
सब झूठे हैं यहाँ तो सच्चा कौन हैं अब दो तरफा प्यार करता कौन हैं मेरी मंजिल में सिर्फ मैं ही रहूं इस सच से यहां डरता कौन हैं कल भी अकेले थे आज भी अकेले हैं जमाने की परवाह अब करता कौन हैं मैं रूक नहीं सकता ये सोचकर अब मुझें याद करता कौन हैं ...... Priya kashyap.....
Life is not easy for me coming soon.......
I Deeply Feel Like I Don't Belong To Anyone's Memory
start write a diary before it's too late
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