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✧ मूल तत्व विज्ञान ✧

तेज से जड़ तक — और पुनः तेज तक
✍🏻 — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

प्रस्तावना

यह ग्रंथ केवल शब्दों का संग्रह नहीं है —
यह जीवन और ब्रह्मांड का संपूर्ण मानचित्र है।
इसमें वह बीज है जिससे सम्पूर्ण अस्तित्व का वृक्ष फैलता है —
और वह द्वार है जहाँ से सम्पूर्ण अस्तित्व मौन में लौट जाता है।

यह न केवल वेदांत की गहराई से जुड़ा है,
बल्कि आधुनिक विज्ञान की दृष्टि में भी यह एक पूर्ण, तार्किक और प्रमाणिक चक्र है।

जो इस ग्रंथ को पढ़े, वह केवल “जान” न पाए,
बल्कि अपने भीतर “देख” सके —
कि उसका जन्म, विकास और अंत —
एक ही धारा का प्रवाह है।

अध्याय 1 — सूत्र

> "सत्य पाया नहीं जा सकता — हम सत्य से बने हैं।
पुनः सत्य बनना ही सत्य तक पहुँचने का मार्ग है।"

अध्याय 2 — सूत्र का विज्ञान

1. सत्य = तेज

तेज न प्रकाश है, न अग्नि, न ऊर्जा — बल्कि उन सबका मूल कारण।

तेज परिवर्तनरहित, मौन, और स्थिर है।

उसका कोई आकार, रंग, गंध या माप नहीं — वह अज्ञेय है।

2. तेज से संसार

जब तेज का एक अंश अपने मूल केंद्र से बाहर आता है, तब परिवर्तन शुरू होता है।

यह परिवर्तन पंचतत्व में होता है:

1. आकाश — केवल विस्तार।

2. वायु — गति का जन्म।

3. अग्नि — गति से ताप।

4. जल — ताप से द्रवता।

5. पृथ्वी — स्थिरता का अंतिम रूप।

3. पंचतत्व में तेज का अंश

प्रत्येक तत्व में तेज मौजूद रहता है, जैसे बीज में जीवन।

इन्हीं तत्वों के तेज से जीवात्मा बनती है — कोई बाहरी चेतना प्रवेश नहीं करती।

4. जीव का विकास–चक्र

जीव 84 लाख योनियों में रूपांतरण करता है।

अंतिम और सर्वोच्च रूप — मानव है।

5. मानव की स्थिति

जन्म में मानव पृथ्वी तत्व प्रधान (जड़ और अज्ञान) होता है।

अनुभव और जन्मों की यात्रा में वह पुनः सूक्ष्म तत्वों की ओर लौटता है — जल → अग्नि → वायु → आकाश।

6. आकाश के पार

आकाश के ऊपर कोई तत्व नहीं, केवल शुद्ध तेज है — यही आत्मा है।

तेज में विलीन होना = जन्म–मृत्यु से मुक्ति।

अध्याय 3 — जन्म और मृत्यु का संकेत

जन्म = तेज का पंचतत्व में प्रवेश।

जीवन = पंचतत्व में यात्रा और विकास।

मृत्यु = पंचतत्व से तेज का मुक्त होना।

जब तेज पूर्ण रूप से लौट जाता है, चक्र समाप्त हो जाता है।

जो नहीं लौटता, वह पुनः नए रूप में प्रवेश करता है — यही पुनर्जन्म है।

अध्याय 4 — तीन शरीर और यात्रा

1. स्थूल शरीर — पृथ्वी तत्व प्रधान।

2. सूक्ष्म शरीर — मन, इंद्रियाँ, अनुभव।

3. कारण शरीर — चेतना, जो तेज है।

मन की यात्रा: जड़ से ज्ञान (आकाश) तक।
ज्ञान के बाद — मौन, और मौन में तेज।
अध्याय 5 — सूत्र का बोध

यह सूत्र न केवल कहता है कि “सत्य पाया नहीं जा सकता”,
बल्कि यह भी बताता है कि हमारे पास लौटने का एकमात्र मार्ग — पुनः अपने मूल में विलीन होना है।

यह कोई विश्वास, धर्म या उपासना का विषय नहीं —
यह एक पूर्ण विज्ञान है, जिसमें आरंभ और अंत दोनों दिखाई देते हैं।

सारांश

एक साधारण व्यक्ति भी समझ सके,

और जिसमें जन्म और मृत्यु का संकेत,

विकास और अंत की पूरी प्रक्रिया,

और रहस्य का समाधान — सब एक ही सूत्र में छिपा हो।

मतलब यह सूत्र केवल "ज्ञान" नहीं, बल्कि पूरा जीवन-चक्र का नक्शा है।

bhutaji

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anand5870

Good evening friends

kattupayas.101947

રક્ત પિશાચ નો કહેર Coming Soon....
એક જૂના કિલ્લામાં સૂતેલા લોકોનું લોહી ચૂસીને મારનાર રક્ત પિશાચ રહે છે. ગામનો યુવક વિક્રમ જિજ્ઞાસાથી કિલ્લામાં જાય છે અને પોતે પિશાચ બની જાય છે. પછી ગામની વૃદ્ધ કમલા પણ તેના સાથે પિશાચ બની જાય છે. ગામમાં ભય ફેલાય છે અને બહાદુર હરીશ પિશાચોને નાશ કરવા કિલ્લામાં જાય છે. ત્યાં તેને ખબર પડે છે કે વિક્રમ અને કમલા તો માત્ર ગુલામ છે, સાચો શાસક પિશાચ કોફિનમાં કેદ છે. સાંકળ તૂટતા એ મહાકાય પિશાચ બહાર આવે છે અને ગામનો નાશ શરૂ કરે છે. હરીશ એક પ્રાચીન મંત્રથી શાપ તોડવાનો પ્રયત્ન કરે છે, જેમાં તેને પોતાનું હૃદય બલિદાન આપવું પડે છે. મંત્રથી બધા પિશાચો નાશ પામે છે, પણ અંતે હરીશ પોતે નવો પિશાચ શાસક બની જાય છે, જે સૂચવે છે કે ડરનો અંત આવ્યો નથી.
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vedantkana527861

Time for 😴

kattupayas.101947

બારીમાંથી મારી નજર આકાશ પર ગઈ. આકાશની પહોળાઈને જોઈને, એક પંખી મુક્તપણે ઉડી રહ્યો હતો. તેની પાંખોની હળવી લહેરાતી અસર અને હવામાં તેનુ નિર્ભય રીતે ઉડાન ભરવી. આ જોઈને મને મનમાં અજાણી શાંતી અને એક અનોખી ઊર્જાવાન આવિષ્કાર આપી રહી હતી. પંખી જ્યાં જાય ત્યાં કોઈ બાધા નહીં, કોઈ મર્યાદા નહીં. તે સંપૂર્ણ રીતે પોતાના ઈચ્છાથી ઉડે છે.

મારા મનમાં એક સુંદર આશા જાગી કે, ક્યારેક હું પણ એમ મુક્તપણે, મારા સપનાના આકાશમાં, પોતાની મર્યાદાઓને ભૂલી જઇને, નિઃશંક અને નિર્ભય રીતે ઉડી શકું. આ વિચાર મારી અંદર એક અનોખો ઉત્સાહ જગાવતો રહ્યો, જે મને જીવનની નવી ઊંચાઇઓ અને નવા રસ્તાઓ શોધવાની પ્રેરણા આપતો રહ્યો.

sandhyacc1812gmailco

Good afternoon friends

kattupayas.101947

मेरे महादेव🌏

uvoyzxzp6189.mb

truth💗

uvoyzxzp6189.mb

maa💗

uvoyzxzp6189.mb

it's tea time c u guys

kattupayas.101947

Do you know that if one accepts three hundred insults in his ledger, then the fear of insults no longer remains for him? When the fear of insults no longer remains, then no one will insult that person; that is indeed the rule.

To know more visit here: https://dbf.adalaj.org/ML02zOwT

#doyouknow #spirituality #facts #spiritualknowledge #dadabhagwanfoundation

dadabhagwan1150

ओम नम शिवाय
ओम नम शिवाय
हर हर भोले नम शिवाय
🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻
Har Har Mahadev
🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻💐🙏🏻

shaileshjoshi0106gma

happiness

kattupayas.101947

Happiness

kattupayas.101947

Good morning friends

kattupayas.101947

शास्त्र के शब्द —
बिना अनुभव के —
बस ठंडी राख हैं।
उनमें कोई ताप नहीं, कोई जलन नहीं,
जो भीतर सवाल जला दे।

इसलिए लोग इन शब्दों से खेलते रहते हैं,
पर आग को छूने का साहस नहीं करते।
राख तो तुम्हें कभी चोट नहीं देगी,
लेकिन आग तुम्हें बदल देगी।

मूल रहस्य —
जिस दृष्टि से शास्त्र रचे गए थे —
वह दृष्टि तुम्हारे पास नहीं है,
क्योंकि तुम केवल शब्दों से चिपके हो,
और अनुभव से दूर हो।

जब बोध जागेगा,
तभी इन शब्दों में आग दिखेगी।
तब वही राख अंगार बन जाएगी।
वरना —
शब्द तुम्हें केवल सपना और विश्वास देंगे,
सत्य नहीं।
अज्ञात अज्ञानी

bhutaji

जल्द पढ़े👇👇👇👇

kumar00

USKA INTAZAR.....🥀🤍

isshi3165

मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


जाते जाते आधे रास्ते से,
तेरा लौट आना वो।
रूकने के लिए तेरा,
बहाने बनाना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मेरी जिंदगी में तेरा,
रंग सजाना वो।
मुझको देख के तेरा,
पलके झुकाना वो।

मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।

पास आने पर तेरा,
शरमा के भाग जाना वो।
मुझको जाता देख के,
तेरा दौड़ के आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझे आता देख के,
आधे रस्ते  से तेरा लौट आना वो।
मुझे रोकने को
सौ बात तेरा सुनाना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।


मुझको देख कर,
तेरा मुस्कुराना वो।
बहाना बना कर तेरा,
मुझसे मिलने आना वो।
मेरी जिंदगी का बन गया,
अब एक फसाना वो।

vrinda1030gmail.com621948

કોઈ તો ધક્કો મારે છે, એમ આગળ વધે છે,
કોઈ તો બળ છે, એટલે જ બધું ચાલે છે,

મંદિર ગયો છું, મસ્જીદ પણ ગયો છું,
ગયો ગુરુદ્વારા, તારું જ બધે ચાલે છે,

નાનાં છે મોટાં પણ છે, એમ જીવન વધે છે,
કોઈ તો શકિત છે, એટલે જ બધું ચાલે છે,

સુખ આપે છો, દુઃખ પણ આપે છો,
સમતા રાખે છો, તું જ તો બધું કરે છો,

તું જ રહસ્ય છે, તું જ અદ્રશ્ય પણ છે,
તું હાજર પણ છે, એટલે જ બધું ચાલે છે.

મનોજ નાવડીયા
જામનગર.

manojnavadiya7402

चांदनी रात 🌝

muskan1810

सफलता का भ्रम — और हार की सच्चाई
✍🏻 — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

दुनिया चाहती है कि हम वैसा जिएँ,
जैसा वह "सफल" मानती है।
इसीलिए सफलता की कुंजी बताने वाली
लाखों किताबें बिक जाती हैं।

पर क्या कभी किसी ने कहा है —
कि उसकी सफलता उसी किताब से आई?
अगर आई भी है, तो वह सिर्फ एक इत्तफाक है।

ना कोई किताब,
ना कोई साधु–संत,
ना कोई मंदिर या देवी–देवता —
तुम्हें सफलता दे सकते हैं।

जीवन में असली सवाल यह नहीं है कि
"कैसे सफल हों?"
बल्कि यह है —
"तुम कौन हो?"
"कहाँ और क्यों सफल होना चाहते हो?"

सफलता से तुम्हें
क्या सचमुच शांति या मंज़िल मिल जाएगी?
अगर मिलती, तो सफल लोग
पूर्ण हो चुके होते —
लेकिन ऐसा नहीं है।

सफलता सिर्फ प्रतिस्पर्धा है —
दूसरों से आगे निकलने का खेल।
सत्य उसमें कहीं नहीं है।

पर जब तुम हारते हो,
और भीतर कोई शिकायत नहीं बचती,
तभी एक अद्भुत द्वार खुलता है —
जहाँ मिल जाती है जीवन,
जैसा वह है।

और यही हार
सबसे बड़ी सफलता बन जाती है —
आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत।

सूत्र 1 — सफलता का कोई शास्त्र नहीं — वह बस एक इत्तफाक है।
दुनिया सफलता को विज्ञान की तरह सिखाने की कोशिश करती है, पर असल में सफलता का कोई निश्चित सूत्र नहीं। वह संयोग, समय और परिस्थिति का मेल है।

सूत्र 2 — किताबें, गुरु, मंदिर — सफलता नहीं देते; सिर्फ़ दिशा दिखाते हैं।
कोई बाहरी साधन तुम्हारे भीतर का बीज नहीं बो सकता। वे बस संकेत हैं; बीज तुम्हें ही बोना और उगाना है।

सूत्र 3 — असली सवाल है — तुम कौन हो?
जब तक यह सवाल अनुत्तरित है, सफलता सिर्फ़ एक बाहरी उपलब्धि है। अपनी पहचान जाने बिना कोई भी यात्रा अधूरी है।

सूत्र 4 — यह समझे बिना कोई भी सफलता अधूरी है।
तुम कहाँ जा रहे हो, क्यों जा रहे हो — यह जाने बिना सफलता सिर्फ़ दिशा-हीन दौड़ है।

सूत्र 5 — सफलता शांति नहीं देती, बस नई दौड़ शुरू करती है।
जीत के साथ ही अगली मंज़िल की भूख पैदा होती है। यह यात्रा कभी ख़त्म नहीं होती।

सूत्र 6 — सफलता प्रतिस्पर्धा है — जीवन नहीं।
प्रतिस्पर्धा तुलना पर टिकी है, और तुलना हमेशा कमी का अहसास देती है। जीवन तुलना से नहीं, अनुभव से पूर्ण होता है।

सूत्र 7 — सत्य किसी भी सफलता में नहीं है।
सत्य भीतर के मौन में है — बाहरी जीत-हार में नहीं।

सूत्र 8 — हार में जो शांति है, वह जीत में नहीं।
जब हार को स्वीकार कर लिया जाता है, तब मन की दौड़ रुक जाती है। यही रुकना शांति का द्वार है।

सूत्र 9 — हार के साथ अगर स्वीकार आ जाए — वही पूर्णता है।
स्वीकार का अर्थ है — अब कोई शिकायत, कोई पछतावा नहीं। जो है, वही ठीक है।

सूत्र 10 — यही हार — आध्यात्मिक जीवन का आरंभ है।
यहीं से यात्रा बाहर से भीतर की ओर मुड़ती है। यही असली जीत है — जिसे दुनिया अक्सर हार समझती है।

अज्ञात अज्ञानी

bhutaji