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Manshi K

Manshi K Matrubharti Verified

@manshik094934
(67)

एक याद जो मैने खुद के ख्वाबों से चुराई थी
बेवजह सवालों का जवाब ढूंढ कहीं से लाई थी
मालूम नहीं क्यों वीरान सी थी बस्ती हमारी
जहां सपनों को जलाकर ख़ाक में मिलाई थी ....

-Manshi K

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एक ख़्वाब अधूरा थी मैं
जो कभी हकीकत बन न पाई
चूड़ियों के खनक में सपने वो मैं देख न पाई
पायलों का पैरों में शोर मचाना
मुझे बेड़ियों की याद दिलाती है
श्रृंगार स्त्री का गहना है ,कहते हैं सभी
ये बात मैं आज तक क्यों समझ न पाई.....

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इश्क हूं मैं कोई एतबार नही
हां सच है ये मुझे किसी से प्यार नहीं
मरती हूं मैं खुद की अदाओं पर ही
तेरा जिक्र किया है बस कोई हिसाब नहीं .....

खत हूं मैं कोई बिखरा अल्फाज नही
अभी चुप हूं मैं मगर खामोश नही
कहते है सारे मैं थोड़ी सी ना समझ हूं
तो जरा बता दूं मैं उनको
मैं इंसान हूं कोई दुआ फरियाद नहीं.......

-Manshi K

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कुछ यादें जो बदल रही थी,
रातें यूं ही तन्हा गुजर रही थी
मानो जैसे अभी अभी तो हुआ था
मेरा होकर भी मुझसे वो जुदा था।।।।

बातें यूं सिमट गई
कहने की क्या जरूरत थी ?
सोचा मैंने कल लौट आएगा
वो मेरा था मुझसे कहां जुदा होगा ?

पहले दिन कुछ अलग थे
मुस्कुराते हुए बित गए
अब सिकन रहता माथे पर
मेरे दिल की चुप्पी भी मुझे समझ अाया
क्यों मेरा होकर भी मुझसे जुदा था ?

-Manshi K

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किस ओर ले जायेगी जिंदगी के अधूरे किस्से
जिसमें मैंने खुद को खोया था
खुद को खोकर रिश्ता दर्दों से जुड़ा था
पतझड़ सी थी जिंदगी
जिसमें मैंने सावन के बरसात में
रंग बिरंगे फूलों को फिर से खिलाया था .....

-Manshi K

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मैं रहूं या न रहूं यादें तो रहेगी न
पास आकर ठहरा वो वक्त कुछ सवाल करेंगे न
मालूम नहीं क्यों खुली आंखों से
सब कुछ धुंधला नजर आता है
आते जाते मुसाफिरों में तुम्हारा छवि नजर आता है.....

-Manshi K

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एक खूबसूरत सा ख्वान हो क्या तुम ?
मेरे कहने पर अपने आंखों के नमी को
हंसी में बदलोगे क्या तुम ??
बातें तो मैं साफ लहज़े में ही कह रही हूं
मेरे हर सवालों का जवाब बनोगे क्या तुम ??
होठों पर छाए खामोशी का आवाज बनोगे क्या तुम??
अब क्या कहूं मैं तुमसे , खुले आसमां के नीचे बैठ कर दो चार बातें करोगे क्या तुम ??
जवाब क्या होगा तुम्हारा मुझे पता नहीं
इशारों में ही कुछ समझा जाना तुम ________

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एक राह तुम्हारी देखी मैंने वर्षों बीत गए
आए भी तो क्या आए मेरे हिस्से सिर्फ इंतेजार ....
माना हम एक दूसरे से दूर थे
पर दखो न आज मिलने को कीतना है बेताब .....

-Manshi K

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दो पल की खुशियां नसीब ही क्यों होती है ?
जब दो लोगों को मिलकर
एक दिन बिछड़ना ही होता है ....

-Manshi K

मेरे हाथों के लकीरों में क्या लिखा है?
मैं क्यों सोचूं खुदा??
तकदीर तो उनकी भी होती है न
जिनके हाथों में कोई लकीर होता ही नही .....

-Manshi K

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