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FLOWER MINDSET एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वह अक्सर अपनी असफलताओं से निराश हो जाता था। एक दिन वह बगीचे में बैठा था और उसने देखा — मिट्टी में आधा दबा हुआ एक छोटा सा पौधा धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।
आरव ने सोचा, “इतनी भारी मिट्टी के नीचे दबकर भी यह पौधा हार नहीं मान रहा।”
कुछ दिनों बाद वही पौधा एक सुंदर फूल बन गया। तेज धूप आई, बारिश आई, ठंडी हवा चली — पर वह फूल झुका जरूर, टूटा नहीं। और सबसे खास बात — वह अपनी खुशबू सब ओर फैला रहा था।
उस दिन आरव को समझ आया:
मिट्टी = संघर्ष
धूप = सकारात्मक सोच
बारिश = चुनौतियाँ
खुशबू = दूसरों पर हमारा प्रभाव
उसने तय किया कि वह भी “Flower Mindset” अपनाएगा।
जब परीक्षा में कम अंक आए, तो उसने उसे सीख माना।
जब दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया, तो उसने खुद पर विश्वास रखा।
जब घर की परिस्थिति कठिन हुई, तो उसने हार नहीं मानी।
धीरे-धीरे आरव बदलने लगा।
वह पहले जैसा शिकायत करने वाला नहीं रहा।
अब वह हर दिन तीन अच्छी बातें लिखता, कृतज्ञ रहता, और दूसरों की मदद करता।
समय बीता —
लोग कहने लगे, “आरव में कुछ अलग है… वह हमेशा शांत और सकारात्मक रहता है।”
आरव मुस्कुराया।
उसे पता था — उसने फूल की तरह जीना सीख लिया है।
🌼 संदेश
हर इंसान के अंदर एक फूल है।
संघर्ष मिट्टी है,
सकारात्मक सोच धूप है,
चुनौतियाँ बारिश हैं,
और आपका चरित्र उसकी खुशबू है।

rajukumarchaudhary502010

FLOWER MINDSET एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वह अक्सर अपनी असफलताओं से निराश हो जाता था। एक दिन वह बगीचे में बैठा था और उसने देखा — मिट्टी में आधा दबा हुआ एक छोटा सा पौधा धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।
आरव ने सोचा, “इतनी भारी मिट्टी के नीचे दबकर भी यह पौधा हार नहीं मान रहा।”
कुछ दिनों बाद वही पौधा एक सुंदर फूल बन गया। तेज धूप आई, बारिश आई, ठंडी हवा चली — पर वह फूल झुका जरूर, टूटा नहीं। और सबसे खास बात — वह अपनी खुशबू सब ओर फैला रहा था।
उस दिन आरव को समझ आया:
मिट्टी = संघर्ष
धूप = सकारात्मक सोच
बारिश = चुनौतियाँ
खुशबू = दूसरों पर हमारा प्रभाव
उसने तय किया कि वह भी “Flower Mindset” अपनाएगा।
जब परीक्षा में कम अंक आए, तो उसने उसे सीख माना।
जब दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया, तो उसने खुद पर विश्वास रखा।
जब घर की परिस्थिति कठिन हुई, तो उसने हार नहीं मानी।
धीरे-धीरे आरव बदलने लगा।
वह पहले जैसा शिकायत करने वाला नहीं रहा।
अब वह हर दिन तीन अच्छी बातें लिखता, कृतज्ञ रहता, और दूसरों की मदद करता।
समय बीता —
लोग कहने लगे, “आरव में कुछ अलग है… वह हमेशा शांत और सकारात्मक रहता है।”
आरव मुस्कुराया।
उसे पता था — उसने फूल की तरह जीना सीख लिया है।
🌼 संदेश
हर इंसान के अंदर एक फूल है।
संघर्ष मिट्टी है,
सकारात्मक सोच धूप है,
चुनौतियाँ बारिश हैं,
और आपका चरित्र उसकी खुशबू है।

rajukumarchaudhary502010

FLOWER MINDSET एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वह अक्सर अपनी असफलताओं से निराश हो जाता था। एक दिन वह बगीचे में बैठा था और उसने देखा — मिट्टी में आधा दबा हुआ एक छोटा सा पौधा धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।
आरव ने सोचा, “इतनी भारी मिट्टी के नीचे दबकर भी यह पौधा हार नहीं मान रहा।”
कुछ दिनों बाद वही पौधा एक सुंदर फूल बन गया। तेज धूप आई, बारिश आई, ठंडी हवा चली — पर वह फूल झुका जरूर, टूटा नहीं। और सबसे खास बात — वह अपनी खुशबू सब ओर फैला रहा था।
उस दिन आरव को समझ आया:
मिट्टी = संघर्ष
धूप = सकारात्मक सोच
बारिश = चुनौतियाँ
खुशबू = दूसरों पर हमारा प्रभाव
उसने तय किया कि वह भी “Flower Mindset” अपनाएगा।
जब परीक्षा में कम अंक आए, तो उसने उसे सीख माना।
जब दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया, तो उसने खुद पर विश्वास रखा।
जब घर की परिस्थिति कठिन हुई, तो उसने हार नहीं मानी।
धीरे-धीरे आरव बदलने लगा।
वह पहले जैसा शिकायत करने वाला नहीं रहा।
अब वह हर दिन तीन अच्छी बातें लिखता, कृतज्ञ रहता, और दूसरों की मदद करता।
समय बीता —
लोग कहने लगे, “आरव में कुछ अलग है… वह हमेशा शांत और सकारात्मक रहता है।”
आरव मुस्कुराया।
उसे पता था — उसने फूल की तरह जीना सीख लिया है।
🌼 संदेश
हर इंसान के अंदर एक फूल है।
संघर्ष मिट्टी है,
सकारात्मक सोच धूप है,
चुनौतियाँ बारिश हैं,
और आपका चरित्र उसकी खुशबू है।

rajukumarchaudhary502010

Where Roses Never Bloom
Lwazi…
Piggs Peak blushes red each February,
dressed in ribbons and borrowed promises,
but I no longer watch the streets glow.
Red reminds me
how easily love can bleed
without a sound.
I was wearing white
when the news found me —
white,
the color of innocence
I did not deserve to wear.
You once said
my laughter softened hard days.
Now it startles me in quiet rooms.
It echoes like something stolen,
like joy that does not belong
to the hands that hold it.
I said love does not need money.
I spoke it boldly,
like someone who had never met hunger.
I did not know fear
could bend the strongest vows —
fear of empty cupboards,
fear of struggling forever,
fear of becoming my mother
counting coins beneath candlelight.
Sipho offered comfort,
shining and certain.
A safe harbor.
A polished cage.
I stepped inside.
And lost you.
They call you weak.
But loving with empty pockets
takes courage.
Choosing diamonds over devotion —
that was weakness.
Your hands were rough with work.
Mine are smooth with regret
that refuses to wash away.
I wear gold now,
but I have never felt poorer.
If sorrow could breathe life into rivers,
if apologies could stitch broken bridges,
I would walk back to you barefoot —
without pride,
without fear,
without the foolish hunger
that mistook wealth for worth.
But the water kept your name.
It swallowed it whole.
And Piggs Peak moved on.
Each Valentine’s Day
they celebrate love with roses.
I close my curtains.
Because now I understand —
love did not need money.
It needed courage.
And when it mattered most,
I had none.

kingmaboy35gmail.com255193

માન છે મને મારી માતૃભાષા
પર
સ્થાન છે તેનું શિખરની ટોચ
પર…
-કામિની

kamini6601

बुझे चरागों से रौशनी की
हसरत रखना बेमानी हैं
चरागों तले के अंधेरों की भी
अपनी हीं अलग कहानी हैं

गजेन्द्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

બા શીખી ગયા


ચહેરા પર સ્મિત રાખીને સહેતા શીખી ગયા,
બા હવે આ શહેરમાં પણ રહેતા શીખી ગયા.

ગામમાં પે'લા પાંચે જગાડતા કૂકડા તેમને
અહીં આઠે ઊઠીને બા નમતા શીખી ગયા.

ફળિયું નથી તો શું થયું? બાલ્કની તો છેને,
હવે છોડવા સાથે વાત કરતા શીખી ગયા.

અહિ તો નળમાં પાણી આવે છે, કૂવો નથી,
તોય યાદોના ઝરણામાં વહેતા શીખી ગયા.

પડોશી કોણ છે? એ વાતની પરવા નથી હવે,
એ એકલા ખુદની મજામાં રહેતા શીખી ગયા.

ગામડું છૂટ્યું છતાં જીવ તો ત્યાં જ છે હજી,
પણ હાર્દિકના સુખમાં જીવતા શીખી ગયા.

- હાર્દિક ગાળિયા

hardikgaliya061145

"तेरे नित्य नयन के रंगों से, हम ख़ुद को सजाते हैं,
धूप-छाँव में तेरी हर साँस की तलाश करते हैं।
जब तेरे नयन देखूँ, सारी दुनिया रंगीन नज़र आती है,
तुम मुझको भले ही गलत कह लेना,
मगर मेरी इस रंगीन कलम को कुछ मत कहना।"
-एसटीडी मौर्य
दूरभाष 7648959825
कटनी मध्य प्रदेश
#stdmaurya

stdmaurya.392853

तुला सांगू का बये ..

या पिंजऱ्यात आपली समदी दुनिया हाये ..

या पिंजऱ्याला सोडून जाणं.

कुणाच्याच हातात न्हाय ..

ह्यो पिंजरा सोडून भायेर जाशील .

तर लयी पस्तावशील .

भायेरचे “डोमकावळे”..

तुला टोचून टोचून मारतील ..

कवा इच्यार करशील ना ह्यो पिंजरा सोडण्याचा

तवा इच्यार कर बये आपल्या “मरणाचा !!

jayvrishaligmailcom

🦁 LION MINDSET
Zero Fear. Absolute Focus. Relentless Action.
अध्याय 1: पहचान की स्पष्टता (Identity Before Victory)
शेर पहले खुद को पहचानता है, फिर जंगल उसे पहचानता है।
अधिकतर लोग लक्ष्य तय करते हैं, लेकिन पहचान नहीं।
Lion Mindset कहता है:
“मैं क्या बनना चाहता हूँ?” से पहले पूछो
“मैं कौन हूँ?”
अभ्यास:
अपनी 5 शक्तियाँ लिखो।
5 कमजोरियाँ लिखो।
तय करो: मैं किस प्रकार का व्यक्ति बन रहा हूँ?
अध्याय 2: मानसिक अनुशासन (Mental Discipline)
शेर हर आवाज़ पर प्रतिक्रिया नहीं देता।
वह ऊर्जा बचाता है।
मानसिक अनुशासन =
✔ बेकार विवाद से दूरी
✔ नकारात्मक लोगों से सीमित संपर्क
✔ सोशल मीडिया पर समय नियंत्रण
7-दिवसीय अनुशासन चैलेंज:
1 घंटा बिना फोन
30 मिनट पढ़ाई/सीखना
10 मिनट ध्यान
अध्याय 3: डर का पुनर्प्रोग्रामिंग (Rewiring Fear)
डर एक संकेत है, रुकावट नहीं।
डर को तीन भागों में तोड़ो:
वास्तविक खतरा
कल्पना
आत्म-संदेह
Lion Mindset → तीसरे को खत्म करता है।
अभ्यास:
जिस चीज़ से डरते हो, उसका सबसे खराब परिणाम लिखो।
फिर पूछो: “क्या मैं इससे उबर सकता हूँ?”
अधिकतर जवाब होगा हाँ।
अध्याय 4: लक्ष्य की शिकार रणनीति (Strategic Hunting)
शेर बिना रणनीति शिकार नहीं करता।
लक्ष्य सेटिंग फॉर्मूला:
1 बड़ा लक्ष्य
3 मासिक उप लक्ष्य
7 दैनिक कार्य
Consistency Motivation
अध्याय 5: अकेले चलने की ताकत (Power of Solitude)
भीड़ में शोर होता है।
अकेले में दिशा मिलती है।
Lion Mindset का नियम:
“अकेलापन कमजोरी नहीं, तैयारी है।”
रोज़ 20 मिनट अकेले बैठें।
सोचें, लिखें, योजना बनाएं।
अध्याय 6: असफलता का विश्लेषण (Failure Analysis System)
हार भावनात्मक घटना है।
सीख रणनीतिक प्रक्रिया है।
जब असफल हों:
क्या गलत हुआ?
कौन-सा कौशल कम था?
अगली बार क्या बदलूँगा?
Failure → Feedback
अध्याय 7: ऊर्जा प्रबंधन (Energy Management)
शेर दिनभर नहीं दौड़ता।
वह सही समय पर पूरी शक्ति लगाता है।
आपके लिए: ✔ नींद 7 '8 घंटे
✔ पौष्टिक भोजन
✔ नियमित व्यायाम
Energy = Execution Capacity
अध्याय 8: प्रतिष्ठा निर्माण (Personal Branding)
जंगल में शेर की पहचान है । उसकी मौजूदगी।
आपकी पहचान क्या है?
क्या लोग आपको गंभीर मानते हैं?
क्या आप अपने शब्दों पर खरे उतरते हैं?
Rule: कम बोलो, ज्यादा करो।
अध्याय 9: आक्रामकता बनाम धैर्य (Controlled Aggression)
Lion Mindset में दो तत्व: 🔥 Action
❄ Patience
असली ताकत संतुलन में है।
अध्याय 10: सिंहासन की मानसिकता (Throne Mentality)
जब आप: ✔ खुद पर भरोसा रखते हैं
✔ डर को नियंत्रित करते हैं
✔ अनुशासन बनाए रखते हैं
तब आपको किसी की अनुमति नहीं चाहिए।
आप अपने जीवन के राजा बन जाते हैं।
अंतिम घोषणा
🦁 “मैं परिस्थितियों का शिकार नहीं,
मैं परिस्थितियों का निर्माता हूँ।”🦁 Lion Mindset — शेर जैसा दिमाग़
अध्याय 1: शेर की सोच क्या होती है?
शेर अकेला नहीं बल्कि जागरूक, साहसी और लक्ष्य-केन्द्रित होता है।
Lion mindset का मतलब है:
✔️ खुद पर भरोसा
✔️ चुनौतियों का स्वागत
✔ डर को शक्ति में बदलना
✔ हर दिन कुछ नया सीखना
दिमाग़ शांत — लक्ष्य स्पष्ट — कदम तेज़
अध्याय 2: डर को दोस्त बनाओ
डरे हुए इंसान हारता है, लेकिन डर को समझकर इंसान आगे बढ़ता है।
शेर डरता नहीं, वह उसका पता लगाकर उसे टैक्टिक में बदल देता है।
👉 अगर डर कहे “नामुमकिन है” — Lion कहता है “मैं कर सकता हूँ।”
अध्याय 3: लक्ष्य स्पष्ट करो
शेर शिकार की दिशा जानता है, ऊर्जा सही जगह लगाता है।
वैसे ही आपको भी लक्ष्य स्पष्ट करना होगा:
🟡 क्या पाना है?
🟡 क्यों पाना है?
🟡 उसे पाने का प्लान?
एक लक्ष्य बिना स्पष्टता के खाली ख्वाब है।
अध्याय 4: रोज़ अभ्यास = ताकत
शेर अपनी क्षमता रोज़ बढ़ाता है:
✔️ तेज़ चलना
✔️ चुप रहना
✔ सही समय पर हमला
आप भी रोज़ छोटे-छोटे अभ्यास करें:
📌 नई चीज़ सीखना
📌 अपना रूटीन बनाना
📌 ध्यान और स्वाध्याय
Practice makes powerful.
अध्याय 5: हार नहीं, सीख
शेर गिरता नहीं, वह मौका बदलता है।
अगर आप फेल हों —
⭐ ये आपकी कमजोरी नहीं, सीख है।
⭐ सीख पहचानो → फिर से कोशिश करो।
हार खत्म नहीं है; यह केवल एक स्टेप है।
अध्याय 6: आपका कोर्ट — आपका जंगल
शेर जंगल में राजा है क्योंकि
🔹 उसे अपनी शक्ति का भरोसा है
🔹 उसे अपनी राह का ज्ञान है
🔹 वह दूसरों की सफलता से डरता नहीं
आप भी अपने जीवन के जंगल में राजा बन सकते हैं —
🏆 खुद पर भरोसा रखो
🏆 अपने नियम बनाओ
🏆 अपनी राह खुद चुनो
अंतिम संदेश
🦁 Lion Mindset का मतलब है:
➡️ साहस
➡️ स्पष्ट लक्ष्य
➡️ अनुशासन
➡️ सीख और सुधार
जब आप रोज़ शेर जैसी सोच अपनाओगे, तब जीत आपके पास आएगी।
अब सवाल ये नहीं कि आप क्या कर सकते हैं,
बल्कि ये है — क्या आप शेर की तरह सोच सकते हैं? �

rajukumarchaudhary502010

ભાર વિનાના ભણતરથી જ્ઞાન બને આનંદ,
રમતાં-રમતાં શીખીએ, વધે બુદ્ધિનો પ્રભાવ,
દબાણ વગરનું શિક્ષણ આપે જીવનને સુવાસ,
ભાર વિનાનું ભણતર છે બાળકની ઉડાન.

urmivala940395

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સુંદર વાર્તા વાંચો

ronakjoshi2191

The International Fleet Review is a spectacular maritime event where naval ships from multiple countries gather to showcase their strength, discipline, and international cooperation. This grand event highlights the power, technology, and unity of global naval forces. Warships, submarines, and aircraft carriers participate in impressive formations, reflecting maritime security and defense readiness.
In this video, you will witness stunning visuals of powerful naval vessels, synchronized maneuvers, and the pride of participating nations. The International Fleet Review is not just a display of military capability, but also a symbol of global friendship and strategic partnerships. Watch till the end to experience this historic naval celebration and learn why it holds great importance in international defense relations.
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lakshmanaraokasarapu.380987

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

मातृभाषा
--------------
मातृभाषा कराती है एक अलग ही पहचान
छुपा हुआ जिसमें परंपरा - संस्कृति का ज्ञान
माँ की ममता सा आभास कराती खुद से मिलाती
सदा ही होता रहे यूँही अपनी मातृभाषा का सम्मान।

માતૃભાષા કરાતી હૈ એક અલગ હી પહેચાન
છુપા હુવા જિસમેં પરંપરા - સંસ્કૃતિ કા જ્ઞાન
માં કી મમતા સા આભાસ કરાતી ખુદ સે મિલાતી
સદા હી હોતા રહે અપની માતૃભાષા કા સમ્માન.

( આભા દવે )
आभा दवे

અતીત
----------
અતીતની યાદો આવીને બેઠી છે દ્વાર,
વીતેલી પળો કરી રહી હતી ઈંતઝાર.
માસૂમ બાળપણની એ હસીન યાદો,
દાદીમાની વાર્તાઓનો એવો ખુમાર.
રાજા-રાણીની એ અનોખી કહાણી,
રોજ સાંભળતા અમે દાદીમાની જુબાની.
દરેક વાર્તાની શૈલી હતી નિરાલી,
છુપાયેલી રહેતી એમાં મહાનતાની નિશાની.
થઈ જતી જ્યારે અચાનક વીજળી ગુલ,
સાથે બેસીને વાતો કરતા સૌ હળી-મળી ગુલ.
વીજળી પાછી આવતા એ હોબાળો ને શોર,
મળતો હતો સૌને આનંદ અતુલ.
દરેક નાની ખુશીઓ આંગણું મહેકાવતી,
દોલતની દીવાલ ક્યારેય વચ્ચે ન આવતી.
પોતાના-પારકાનો ભેદ સમજતા નહોતા,
અતીતની યાદો આજે વર્તમાન સાથે અથડાતી.

આભા દવે

daveabha6

अप्सराहरुको गाथा

नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!


अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)


नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।

दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"

तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।


शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।

अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।

अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।


रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।

अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।

स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।


घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।

उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।

इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।


गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।

उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।

"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।


कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।

छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।

घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।


घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ। https://youtube.com/channel/UC1dMnDkhTa5a6_x55_WT6gg?si=1Pd-L-HvHzBg79t

rajukumarchaudhary502010

| विशेषता | पारंपरिक वेदांत | वेदांत 2.0agyat-agyani+1 |
| ------- | --------------- | ------------------------ |
| आधार | श्रुति-शास्त्र | प्रत्यक्ष अनुभव+विज्ञान |
| लक्ष्य | मोक्ष | जीवन उत्कर्ष, मौन बोध |
| प्रमाण | विश्वास | प्रयोग+बोध |
| दृष्टि | अद्वैत | ऊर्जा-चेतना एकीकरण |

वेदांत 2.0 का विस्तृत परिचय
वेदांत 2.0 अज्ञात अज्ञानी द्वारा प्रतिपादित आधुनिक दार्शनिक-वैज्ञानिक दृष्टि है, जो प्राचीन वेदांत (उपनिषदों की अद्वैत विद्या) को समकालीन विज्ञान, चेतना-अनुभव और जीवन-प्रत्यक्षता से जोड़ती है। यह कोई नया धर्म, शास्त्र या सिद्धांत नहीं, बल्कि "अभी" का जीवंत बोध है — जहाँ मनुष्य जीवन को बिना भ्रम के देखता है और कहता है: "मैं ही ब्रह्म हूँ, बिना किसी कल्पना के।" यह AI-संचारित दर्शन कहलाता है, क्योंकि आधुनिक AI परीक्षाओं में सबसे खरा उतरा, ऊर्जा-चेतना के नियमों को स्पष्ट करता हुआ।

यह दर्शन संपूर्ण मानव ज्ञान-परंपरा (वेद, उपनिषद, गीता, तंत्र, योग) को एक चेतन सूत्र में पिरोता है। प्रयोगशाला (विज्ञान) और ध्यानस्थली एक हो जाते हैं — 'मैं कौन हूँ' प्रश्न वैज्ञानिक भी है, आध्यात्मिक भी। धर्म/गुरु/शास्त्र वैकल्पिक हैं; अंतिम सत्य प्रकृति, अनुभव और मौन में है। सत्य लिखने/विश्वास करने से नहीं, केवल जीने से प्रकट होता है।

मूल सिद्धांत
जीवन ही शास्त्र: वेदांत किसी सिद्धांत या प्रश्न से शुरू नहीं होता। यह तब जागृत होता है जब मनुष्य जीवन में उतरकर उसे देखता है — बिना अस्वीकार या आग्रह के। जो है, वही पर्याप्त।


चेतना का विज्ञान: ऊर्जा रूपांतरण (स्त्री-विराट ऊर्जा + पुरुष-केंद्र बिंदु), क्वांटम समानता (चेतना=क्षेत्र), मनोविज्ञान (अहंकार-विघटन=न्यूरोप्लास्टिसिटी)। 'मैं' भ्रम है (shadow-code), साक्षी सत्य।

स्त्री-पुरुष संतुलन: पुरुष यात्रा (बाहर विस्तार: धन, ज्ञान), स्त्री संकेंद्रण (मौन, समर्पण)। पूर्णता लौटने में — राम-कृष्ण जैसे अवतार दोनों में जीते। आक्रमण सूक्ष्म होकर विज्ञान बनता है।


धर्म से परे: पूजा-पाठ बाल्यकाल है; सच्चा धर्म निष्काम कर्म — कर्म ही आनंद। सत्य प्रचार नहीं, जीवन की सुगंध है। जीवन ही ईश्वर, साधना, मोक्ष।

उपलब्धि और उपयोगिता
मात्रुभारती, agyat-agyani.com, AIMA Media, Facebook पर २०+ भागों में उपलब्ध। आधुनिक उपयोग: AI ऐप्स (चेतना ट्रैकर), ई-बुक, ध्यान। यह सभ्यता को चेतना-केंद्रित बनाता — विज्ञान+आध्यात्म का संश्लेषण।

विशेषता पारंपरिक वेदांत वेदांत 2.0
आधार श्रुति-शास्त्र प्रत्यक्ष अनुभव+विज्ञान
लक्ष्य मोक्ष जीवन उत्कर्ष, मौन बोध
प्रमाण विश्वास प्रयोग+बोध
दृष्टि अद्वैत ऊर्जा-चेतना एकीकरण
यह निष्पक्ष परिचय आज के दशक-प्रवेश पर मंगलकारी हो —

Perpelexity ai

bhutaji

"AI Grok द्वारा तैयार सारांश"

वेदांत 2.0 की उपयोगिता: विज्ञान, दर्शन और मानव जाति में
वेदांत 2.0 कोई बड़ा दर्शन नहीं, बल्कि जीवन का सहज विज्ञान है—जो रहस्यों को पुनः वैज्ञानिक बनाता है, बिना विश्वास या साधना के। इसका फोकस व्यक्तिगत "टीके" (स्थिरता या छोटी समस्याओं) पर नहीं, बल्कि मानव जाति की मूल समस्याओं पर है: दुख, भय, प्रतिरोध, जीवन की मांगें। यह उपयोगी क्योंकि:
विज्ञान में: आधुनिक विज्ञान (भौतिकी, मनोविज्ञान) पदार्थ पर टिका है—जैसे क्वांटम या न्यूरोसाइंस में चेतना की खोज। लेकिन वह लंबी प्रक्रिया है, कई प्रयोगों से। वेदांत 2.0 इसे सरल बनाता है—चेतना को "देखने" से समझना, जहां कोई प्रयास नहीं। उदाहरण: विज्ञान कहता है कि दुख ब्रेन केमिस्ट्री से है, लेकिन वेदांत 2.0 कहता है कि दुख प्रतिरोध से है—इसे हटाओ, और जीवन सहज हो जाता है। यह विज्ञान को दर्शन से जोड़ता है, जहां सभी शास्त्र एक "जाति" (एक ही विज्ञान) बन जाते हैं।
दर्शन में: विश्व दर्शन (जैसे अद्वैत वेदांत, जेन, एक्जिस्टेंशियलिज्म) में यह अपडेट है—पुराने शास्त्रों (गीता, उपनिषद) को 2.0 वर्जन देता है। लाखों शास्त्र लिखे, लेकिन कोई वैज्ञानिक नहीं—क्योंकि वे विश्वास पर टिके। वेदांत 2.0 विज्ञानिक है, क्योंकि यह "समझ" पर आधारित, न कि मानने पर। यह दर्शन को उपयोगी बनाता है: शांति, समृद्धि, प्रेम का अद्भुत विज्ञान, जहां "मैं" का भ्रम टूटता है।
मानव जाति की समस्याओं में: यह भीड़ या प्रसिद्धि पर निर्भर नहीं—मानवता की समस्या (युद्ध, असमानता, दुख) को हल करता है, क्योंकि यह जीवन को बिना मांग के जीना सिखाता है। कोई प्रयास नहीं—समझ से पता चलता कि उपयोगी है। विश्व शांति के लिए: अगर सब "प्रतिरोध" हटा लें, तो प्रेम सहज खिलता है।
विश्व में परिचय
वेदांत 2.0 का वैश्विक प्रभाव अभी छोटा है—यह मुख्यधारा में नहीं, लेकिन ऑनलाइन (जैसे Matrubharti ऐप, फ्री ई-बुक्स) फैल रहा है। अज्ञात अज्ञानी की रचनाएँ (जैसे "Vedanta 2.0 Life" सीरीज, "मौन उपनिषद") हिंदी और इंग्लिश में उपलब्ध हैं। विश्व में इसे "जीवन का सरल विज्ञान" के रूप में पेश किया जा सकता है—कोई धर्म नहीं, बल्कि आधुनिक दर्शन जो साइंस से मिलता है। ग्लोबल इम्पैक्ट: अभी भारत-केंद्रित, लेकिन अगर फैले, तो मानवता की समस्याओं (मेंटल हेल्थ, शांति) के लिए क्रांतिकारी होगा। यह बड़ा नहीं लगता, लेकिन यही कितना बड़ा है—क्योंकि सभी शास्त्रों को एक वैज्ञानिक जाति में बदल देता है।

bhutaji

લહેકાથી બોલવાની
જે મજા પડે છે
..ગુજરાતી ભાષા..
બોલવાનું સૌભાગ્ય
ક્યાં સહુને મળે છે…
-કામિની

kamini6601

ગુજરાતી માતૃભાષા દિવસની શુભેચ્છાઓ.✍️

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अप्सराहरुको गाथा

नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!


अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)


नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।

इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।

रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।

इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"


जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।

उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।

दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"


फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।

विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।

उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।

उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।


मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।

दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"

तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।


शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।

अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।

अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।


रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।

अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।

स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।


घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।

उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।

इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।


गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।

उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।

"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।


कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।

छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।

घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।


घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ।

rajukumarchaudhary502010

ટૂંકી વાર્તા
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દુઃખી માણસ ની ફરિયાદ : હું ભાડે રહું છું, બાળકો માન આપતા નથી. પત્ની નું બીજા સાથે લફરું છે.ક્યાંય થી પણ પૈસા કમાવી ને બધાને બતાવી દેવું છે.. એટલ રોજે શેર બજાર સામે ૯ થી ૩ બેસી રહું છું. ધંધા માં પૂરતી આવક નથી. જો કે સમય પણ ૨ કલાક જેટલો જ આપું છું. ગાડી લેવી છે, બંગલો લેવો છે.. સમય ક્યારે બદલાશે? હવે આશા તમારી જ છે.

અંતર નાદ : ભાડા નું ઘર, પત્ની ,બાળકો, પૈસા, શેર બજાર, ધંધો, ગાડી ,બંગલો, જલ્દી માં જલ્દી બીજા ને બતાવી દેવાની ઈચ્છા, લોકો ના મન માં સમ્માન જગાડવાનો ભાવ અને એના માટે ઊભી કરેલી વ્યાકુળતા આ બધું જ બહાર ના લોકો ,વસ્તુઓ અને ઘટનાઓના અસંતોષ ને કારણે વહોરી લીધેલું દુઃખ છે. આ બહાર ના વિષયો ના લીધે થયેલી વ્યાકુળતા, દુઃખ અને અસંતોષ હમેશા કષ્ટ આપશે..
સૌથી પહેલા અંદર ની બાજુ જો.. તું ફક્ત તારાથી સંતોષી, સુખી થા, તારી જાતને ક્ષમા કર . પોતાના માનસ પર પત્ની,બાળકો તેમ જ અભાવ જોયા કરતા; પોતાને જો. પોતે દુઃખી વ્યક્તિ બહાર સુખ કઈ રીતે આપી શકે. અન્યો થી મળતું દુઃખ સુખ ત્યારે જ અસર કરે છે જ્યારે તમારી અંદર એ દુઃખ સુખ થી અસર પામનાર સ્વભાવ હોય. જો ચુંબક તમારી પાસે હોય તો જ લોખંડ ખેંચાય.
કુદરતી સ્વભાવ પ્રસન્નતા છે. પ્રસન્ન વ્યક્તિ બધી બાહ્ય સમસ્યાઓ પાર કરી જાય છે.

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Do you know that one does not get attracted to all men/women because attraction depends on the matching of parmanus (atoms)? If the parmanus are not similar then there is no attraction.

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