Quotes by Rajeev Namdeo Rana lidhori in Bitesapp read free

Rajeev Namdeo Rana lidhori

Rajeev Namdeo Rana lidhori

@rajeevnamdeoranalidhori247627


#हिन्दी_दोहे - #भरोसा

नहीं भरोसा तोड़ना,जो करते विश्वास।
खरा उतरना भी सदा,देना उसे उजास।।

जहाँ भरोसा हो प्रबल, व्यक्त करो उद्गार।
या फिर चुप्पी साधकर,करना वहाँ किनार।।

नहीं भरोसा जो करे, उसे न रखना मित्र।
सभी नहीं अच्छे बने,एक हाथ से चित्र।।
*** दिनांक -22.9.2026
*✍️ #राजीव_नामदेव "#राना_लिधौरी "
संपादक "#आकांक्षा " पत्रिका
संपादक-'#अनुश्रुति 'त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog - rajeevranalidhori. blogspot. com
#rajeev_namdeo_rana_lidhori
#Jai_Bundeli_sahitya_samoh_Tikamgarh

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#हार्दिक_आभार 119 देशों के #तीन_लाख से अधिक ब्लॉग पाठकों का शुक्रिया, आभार, थैंक्स

मेरा #राजीव_नामदेव #राना_लिधौरी * का ब्लॉग अपडेट
*ब्लॉग अपडेट* दिनांक 17-.9.2026
*Blog - rajeevranalidhori.blogspot.com*

*संख्या- 119 देश के*
*302543 पाठक व्यू*

1-भारत- 188687
2-अमेरिका-24271
3-सिंगापुर-20620
4-नीदरलैंड-13299
5-जर्मनी-8174
6-हांगकांग-7032
7-ब्राजील-2754
8-रूस-7113
9-यूनाटेडकिंगडम-1403
10-फ्रांस-1412
11-मैक्सिको-1201
12-कनाडा-1194
13- फिनलैंड -1170
14-वियतनाम-1184
15-इज़राइल-1034
16-स्वीडन-744
17-अर्जेनटाइना-687
18-आयरलैंड-675
19-चीन-460
20-पुर्तगाल-641
21-इंडोनेशिया-514
22- कोलांबिया-521
23-पाकिस्तान-462
24-बांग्लादेश-329
25-आस्टेलिया-308
26-यूक्रेन-226
27-चिली-227
28-रोमानिया-188
29- पोलेंड- 176
30-द.अफ्रीका-173
31-तुर्किये-157
32-इक्वाडोर-154
33-साउदी अरब-141
34- हंगरी-110
35-वेनेजुएला-106
36-फिलीपींस-102
37-मलेशिया-99
38-मोरक्को-97
39-सं.अरब अमीरात-93
40-तुर्कमेनिस्तान-80
41-स्पेन-80
42-नेपाल-77
43-स्विटजरलैंड-58
44-जापान-47
45-चैकिया- 37
46-इटली-37
47-थाइलैंड-34
48-द.कोरिया-24
49- इराक-19
50-आस्टिया-18
51-केन्या-17
52- घाना-15
53-नार्वे-13
54-बेल्जियम-11
55-ताइवान-11
56- जार्डन -10
57-अल्वानिया-09
58- सीरिया -09
59-कतर-07
60- अल्जीरिया -07
61-ईरान-07
62-बोलिविया-07
63-ट्यूनीशिया-07
64-श्रीलंका-06
65-सर्विया-06
66-मारीशस-06
67-लिथोआनिया-06
68-मिस्र-05
69 -पेरु- 05
70-ब्रिटेन-04
71-ओमान-04
72-उज्बेकिस्तान-03
73-डेनमार्क-03
74-अजरबेजार-03
75-लग्जवर्ग-03
76- माल्डोवा-02
77-बेलारूस-02
78-रवांडा-02
79-स्लोवकानिया-02
80-जार्जिया-02
81-किर्गिस्तान-02
82-कुवैत-02
83-पनामा-02
84--बुल्गारिया-02
85- कोस्टारिका -02
86-जमैका-02
87-ग्वाटेमाला-02
88-बोत्साना-02
89-मोजांबिक-02
90- फिजी-02
91-नाइजेरिया-02
92-कजाकिस्तान-02
93- उराग्वे-02
94-त्रिनिदाद,टुवैको-01
95-चैक गणराज्य-01
96-म्यांमार,वर्मा-01
97-न्यूजीलैंड-01
98-गिनी-01
99- पोटोरिको-01
100-लाइबेरिया-01
101-न्यूकेलेडोनिया-01
102-मकाउ-01
103-लातविया-01
104-गुयाना-01
105- मंगोलिया -01
106-होंडूरास-01
107-साइप्रस-01
108- यमन-01
109- पराग्वे -01
110-डोमिनिकन ग.रा.01
111-कांगोकिरांग-01
112-कांगो किंशासा-01
113-बहरीन-01
114-आइसलैंड-01
115-यूनान-01
116-जाम्बिया-01
117-बोस्निया व हर्जेगो-1
118-कोतदिबुआर-01
119-लेवनान-01
#अज्ञात क्षेत्र-36726

*अन्य सोशल मीडिया पर पाठक-*

1-साहित्यपीडिया-312018(50)
2--यू ट्यूव-598K (265)
3--प्रतिलिपी-27390(331)
4--पब्लिक ऐप-6896 फालोवर
5-नोजोटो-3579(362)
6-फेसबुक-4916
7-फेसबुक पेज-526+212
8-जय बुंदेली साहित्य समूह-729+504
9-इंस्टाग्राम-421
10-कुटुंब ऐप-16063(242)
11-डेलीहंट-154- 12-एक्स-11
13-शब्द इन-119 फालोवर(19)
14-सोफीजन-4223(6)
15-अनुश्रुति-396
16-मातृभारती-16
17- मप्र लेखक संघ -436

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*बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -276*
11-7-26- शनिवार- *गुलरया* (मन में गाली देना)
संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

*प्राप्त प्रविष्ठियां :-*
*1*
धौंस गुलरया में गुँजा, खूब झाड़वें शान l
शाबाशी जिनखों हँसी, सुनबे लगतें कान ll
***
-लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया 'लल्लन मुनि',महाराजपुर
*2*
कुबढाइ जब जबर करै, कोऊ कछु ना केत।
अगर लरम साजी कबै, सबइ गुलरया देत।।
***
-विशाल कड़ा “मांझी”,बडोरा घाट
*3*
भनक लगी जब मंथरा, राजतिलक श्रीराम।
बता गुलरया कें दऔ, कैकइ सुत कौ नाम। ।
***
- रामानंद पाठक 'नंद' नैगुवां
*4*
खूब गुलरया रय बलम, दारू पी कें रोज।
धीरें-धीरें दव मिटा, पूरे घर कौ खोज।।
***
- अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
*5*

पैसा रुपया लै भगे, राम लला के नाम।
गुलरयात सबरे फिरैं, भड़यन को जो काम।।
***
-डॉ रेणु श्रीवास्तव भोपाल
*6*
उयै चिनूना काट रय, जांनत है सब गाँव।
धरो जनम कौ गलरया, कोई न लेबै नाँव।।
***
- डॉ. देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
*7*
कुबढ़ाई में जो फसौ,झंझट ऊके संग।
इक दिन उड़ ही जायगौ,मौड़े कौ सब रंग।।
***
-प्रो.शरद नारायण खरे, मंडला
*8*
काम बनै नै जौंन सैं, मतलब होय न सिद्ध।
मौन गुलरया कैत सब, कउआ कुत्ता गिद्ध।।
***
- अमर सिंह राय, नौगांव
*9*
मन माँ देत गुलरया, बाहर हँसे सुहाय।
कपटी मन के चाल सों, नेह न कबहुँ निभाय॥।
***
- डॉ. महावीर पूर्णिया
*10*
अरे गुलरया छोड़ दै,आदत जा बेकार।
गुससां पूरौ गांव है,जलदीं करौ सुधार।।
***
- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
*11*
खीज भरे छाती जला , दांतन खौं दे मीस |
गटा निकारत लाल है , भरत गुलरया हीस ||
***
-सुभाष सिंघई, जतारा
*12*
बुरौ गुलरया होत है, साप करौ सब बात।
मन मै जो खुन्नस भरी, बोलें सैं मिट जात।।
***
-तरुणा खरे'तनु' जबलपुर
*13*
बेइ जन गुलरया करें, तन धन तें कमजोर।
जे सशक्त मुँह में कहें, पटकें सकत मरोर।
***
-रामलाल द्विवेदी प्राणेश, कर्बी
*14*
कहौ काम की जो कजन, सुनें न एकउ बात।
नार गुलरया ढोलती, तुरत बायरें जात।।
***
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
*15*
दूर गुलरया सैं रओ, करहे मन बेचैन।
मुशकल से कटवै समव, ऐसे हों दिन रैन।।
***
-श्यामराव धर्मपुरीकर, गंजबासौदा
*16*
बुलयावें हंँस-हँस धना,बोल गुलरया बोल ।
गालन गड़कुलियाँ परैं,कहें दबा कें पोल ।।
***
-प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़

*©संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'*
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

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*प्रैस विज्ञप्ति-*

*' वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की पावस पर कवि गोष्ठी हुई-*

टीकमगढ़// नगर की सक्रिय साहित्यिक संस्था वनमाली सृजन केन्द्र जिला इकाई टीकमगढ़ की पावस पर केन्द्रित कवि गोष्ठी ‘आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़’ में आयोजित की गयी।
कवि गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ बुंदेली कवि रामानंद पाठक ‘नंद’ (नैगुवाँ) ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार यदुकुलनंदन खरे (बल्देवगढ़) एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ शायर हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ रहे।
गोष्ठी की शुरूआत सरस्वती पूजन दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात कवि प्रमोद मिश्रा (बल्देवगढ़) ने सरस्वती वंदना कर ये रचना सुनायी-
मिलो परिचय जो बुंदेली पानी कौ,नाव दुनिया में झाँसी की रानी कौ।
शायर जनाब खालिद बेग (गुरसराय) ने ग़ज़ल कही-
तजकिरा उल्फ़त हो दिनरात हिन्दुस्तान में।
पर न हो नफ़रत की कोई बात हिन्दुस्तान में।।

वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ के अध्यक्ष एवं संयोजक
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने पावस दोहे सुनाए-
काले बादल ला रहे, पानी अपने साथ।
धरती स्वागत के लिए बड़ा रही है हाथ।।

प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने पढ़ा- लगबै बसकारौ बसकारौ, लगन लगो इँदयारौ।परदेसी प्रीतम प्यारे बिन, बेकल जिया हमारौ।।

रामगोपाल रैकवार ने दोहे पढ़े-
फिर आ गए आषाढ़ के दिन आ गए।फिर छा गए आषाड़ के घन छा गए।।रामनंद पाठक ‘नंद’ (नैगुवाँ) ने पढ़ा-
बसकारे के दिन जे प्यारे तपन सिरावन बारे।रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे मोरन पँख पसारे।।स्वप्निल तिवारी ने पढ़ा- पत्ते से पत्ते पर नन्हें कदम, समाहित वह मिट्टी में गतिमान।गिरती बूँदे रंग बदलते आसमान।।

वफा शैदा ने ग़ज़ल कही-
वो मेरी खूब वफ़ाओं का सिला देते हैं।जब भी देते हैं हमें दोस्त दगा देते हैं।कमलेश सेन ने सुनाया- जब-जब पावस आता है। हमको बहुत लुभाता है।।

यदुकुल नंदन खरे ने पढ़ा-
भले आपके आगे कोई षटरस व्यंजन का थाल लिए हो।
सियाराम अहिरवार ने पढ़ा- पावस ऋतु आई है फिर से, झरना झरने लगे हैं गिर से।।
शकील खान ने ग़ज़ल कही-
काले काले ये बादल घने छा गए।सबके मन को बहुत आज फिर भा गए।।डी.पी.यादव ने पढ़ा- बरसै बदरा करो करो, जानों आ गव है बसकारो।

हाज़ी ज़फ़रउल्ला खां ज़फ़र’ ने ग़ज़ल कही- जईफी आई है जब से नया साथी मिला है।नहीं तंहा हूँ मैं ये दर्द मेरे साथ तौ है।।शायर सलीम खान एवं बसीर फराज़ ने भी अपने कलाम पढ़े।
कविगोष्ठी का संचालन कमलेश सेन ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ने किया।
***
*रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’* टीकमगढ़(म.प्र.)मोबाइल-9893520965

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#उपलब्धि

#उम्मीदों_के_शिखर_पर ' (काव्य संग्रह)

भारत की 27भाषाओं के अनुवादित कविताएं कवि- डॉ बनवारीलाल अग्रवाल 'स्नेही' #हैदराबाद
मूल्य -875रु.(15 $)पेज-415 सन् -2026
बोधि प्रकाशन जयपुर
में मेरे द्वारा 10 कविताओं का #बुंदेली में अनुवाद किया गया है।
इस प्रकार का नया प्रयोग साहित्य में पहली बार हुआ है। आज मुझे निःशुल्क लेखकीय प्रति प्राप्त हुई है पढ़कर गौरवान्वित हुआ कि हमारी बुंदेली इन 27 भाषाओं के साथ एक साथ एक ही पुस्तक में सुशोभित हो रही है।
#जय_बुंदेली #जय_बुन्देलखण्ड
आभार कवि श्री स्नेही जी एवं बोधि प्रकाशन जयपुर
***

✍️ #राजीव_नामदेव '#राना_लिधौरी '
संपादक '#आकांक्षा ' पत्रिका
संपादक-'#अनुश्रुति 'त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog - rajeevranalidhori. blogspot. com

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#बुन्देली_दोहा_प्रतियोगिता --269*(निःशुल्क*)*
##दिनांक -23-05-2026
  *बिषय- #अवढ़ाय /अवढ़ारे (अपने आप)
दोहा मेरे व्हाट्स ऐप नंबर-९८९३५२०९६५ (9893520965) पर या मेसेंजर पर शुक्रवार रात 8 बजे से शनिवार सुबह ११ बजे तक भेजिए
सर्वाधिक अंक लाने वाले तीन विजेताओं के आकर्षक ई सम्मान पत्र प्रदान किया जाएगा।
संयोजक/एडमिन- #राजीव_नामदेव '#राना_लिधौरी ', टीकमगढ़
आयोजक- #जय_बुंदेली_साहित्य_समूह_टीकमगढ़
#Jai_Bundeli_sahitya_samoh_Tikamgarh
#Rajeev_Namdeo #followersRana_lidhorI #Tikamgarh
मोबाइल नंबर-9893520965
@followers @highlight
@ranalidhori @rajeevnamdeo

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भगवान श्री राम जी की असीम कृपा से आज मुझे एक और सम्मान पत्र प्रदान किया गया है तथा अतिथि वक्ता के रूप में आभारी पटल पर संगोष्ठी में आमंत्रित किया गया है।

*सभी सम्माननीय सदस्यों को सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि "श्री राम और सामाजिक समरसता"विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 13/5/26 और 14/5/26 को किया जा रहा है।

प्रस्तावित नामों के अनुसार क्रमशः वक्ता उक्त विषय पर निर्धारित पांच मिनट में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। दो दिवसीय ऑनलाइन संगोष्ठी का समय सांय 7: 30 रहेगा।

प्रथम दिवस 13/5/26 वक्ता रहेंगे -

1 -डॉ राजेश तिवारी मक्खन झांसी, उ प्र

2- दीप्ति गुर्जर

3-डॉ शिव प्रताप सिंह भदौरिया म प्र

4डॉ करु लाल जामदा

5-दीपल सिंह भदौरिया म प्र

6- दिलीप कर्पे म प्र

7- राजीव नामदेव राना लिधौरी टीकमगढ

8-डॉ सरोज गुप्ता, कोंच, उप्र

आभार

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बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -268
दोहा दिवस दिनांक-16.5.2026
प्रदत्त शब्द #अनयाव (अन्याय)
प्राप्त प्रविष्ठियां:-

1
मचा हुआ अन्याव है,अब तो चारों ओर।
कोई कुछ नइं कर रहा,मचा रहे बस शोर।।
*
- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
2
हड़प रहे जांगा जमीं,करबैं निसदिन घात।
अनयाव राजई करें,कितै जोरबैं हात।।
*
-प्रदीप खरे 'मंजुल',टीकमगढ़
3
गय अतीक अनयाव कर , मर गय दुबें विकास ।
किलन चेंपला मूँत रय,देखो होगइँ नाश।।
*
-प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़
4
बड़े बड़े न्यालय बने, सिस्टम बड़ौ बनाव।
न्याव मिलो ना वक़्त पै, जौइ बड़ौ अनयाव।।
*
-अरविन्द श्रीवास्तव,भोपाल
5
छल अनीत अनयाव जे, औगुन के सब नाम।
कीरत माटी में मिलत, बुरै देत अंजाम ।।
*
-विद्या चौहान, फरीदाबाद
6
करौ काउ के संग में, जीनें भी अन्याव।
विपदा भोगी ओइ नें, करनी कौ फल पाव।।
*
- अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
7
जब-जब असुरन नें करो, धरती पै अनयाव।
विविध रूप धर विस्नु नें,उनकौ मान घटाव।।
*
-गोकुल प्रसाद यादव, नन्हींटेहरी
8
सहो बिभीसन भाइ को, जब खूबइ अनयाव।
सरन गही सिरि राम की, कुल को नास कराव।।
*
-तरुणा खरे'तनु' जबलपुर
9
जीत रई नित न्याय की , हारत रय अनयाव।
सौ भाई सोए समर, कौरव के कुनयाव।।
*
-आचार्य रामलाल द्विवेदी प्राणेश,चित्रकूट
10
कभउॅ॑ किसी के स॑ग मे॑,करियौ नै अन्याव।
साजौ कोई ना बनै॑,बुरव न रखियौ ख्वाब ।।
*
-शोभारामदाॅ॑गी"इ॑दु,न॑दनवारा
11
जब तक जा धरती रहो,करियो मत अन्याव।
मूरत भूले सें कभी,बुरो न होय तुमाव।।
*
-मूरत सिंह यादव दतिया
12
मार -मार भाँनेज सब, कंश करौ अन्याव।
किशन जन्म लै जेल में ,मम्में मार गिराव।।
*
-एस आर 'सरल',टीकमगढ़
13
रचो चक्रव्यू द्रोण ने, भओ बड़ो अनयाव।
अभिमन्यू से शूर खों,जुर मिल मार गिराव।।
*
-आशा रिछारिया,निवाड़ी
14
राजा होके जो करत,जनता पै अनयाव।
रैयत ऊँकी जान लो, देत न ऊखों भाव।।
*
-सुभाष सिंघई, जतारा
© संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

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बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-266
दिनांक-2.5.26-प्रदत्त शब्द-नरौ (परसौ)
संयोजक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

प्राप्त प्रविष्ठियां-
1
जीवन सबरौ कड गऔ,परो नरों में आज।
राम भजन ना कर सके,आरइ है अब लाज।।
-रामानंद पाठक'नंद' नैगुवां
2
नरौं बरे लंका सुनो,लुअर देय लंगूर ।
त्रिजटा ने सपनो कहौ,पूरौ हुयै जरूर।।
-प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़
3
दै खालें रुपया नरों,रोज-रोज टरकात।
भग जातइ घर छोड़ कें,जब हम माँगन जात।।
-अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
4
काल कभउँ नइँ आत है,करत नरौ की बात।
भ्यानें देखे ‌भुन्सरा,कीखों ‌है सौगात।।
-सुभाष सिंघई ,जतारा

5 (तृतीय स्थान प्राप्त दोहा)
परों नरों के फेर में,ना परियो जजमान।
आज करै जो काम सब,बन जैहै भगवान।।
-अमिताभ गोस्वामी,भोपाल
6
नरौ दिवाई दोज है,दिया मगा लो आज।
तैयारी ऐसी करौ,समर जाय सब काज।।
-सियाराम अहिरवार,टीकमगढ़
7
भलौ करौगे आज तो,काल खिलेगो फूल।
परसौं तो खुशियाँ मिलें,नरसौ रहै न शूल।।
-प्रो शरद नारायण खरे,मंडला
8
जीवन के हैं चार पन,नरौ तलक की देह।
मोह करे कछु हो नहीं,लगा प्रभू सैं नेह।।
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
9
भूलत नइयां ऐ सखी, नरौं रात की बात।
सपनन आये श्याम जू,हँस हँस पकरें हात।।
-आशा रिछारिया(निवाड़ी)
10
जानें हैं कल देखबे,मोखों अपने हार।
परसों कौ कछु नइं पतौ,नरौं तलैया पार।।
- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
11
लगे मनाबे राम जू, लगो नरौ से ध्यान।
विनय न मानी मूढ़ ने, तब तानो तो बान।।
-विशाल कड़ा मांझी,बडोराघाट

12 (प्रथम स्थान प्राप्त दोहा)
जो होंनें हो कें रनें, करौ न झूटी आस।
परौं नरौं की का खबर,पल कौ ना बिस्वास।।
-डॉ.देवदत्त द्विवेदी,बड़ामलहरा

13
परों नरौं जो करत नर,मन नइ लगवे काम ।
काज विगारत खुदइ को,उनकी सडवे चाम।।
*-डॉ.आर.बी पटेल,छतरपुर
14
जाव न घूमन हो जितै,जीवन नै महफूज।
परौं-नरौं ही डूब गव,बरगी में इक क्रूज।।
-अमर सिंह राय, नौगांव

15 (द्वितीय स्थान प्राप्त दोहा)
परौं नरौं तुम जिन करौ, कर डारौ ततकाल।
औसर चूकैं कब भलो,होत हाल बेहाल।।
* -श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा

16
आज मरे कल दूसरो,परों तीसरो होय।
नरों होय चौथो दिनाँ, फिर नइँ पूँछै कोय।।
*-तरुणा खरे'तनु',जबलपुर में
17
नरो करम से जानियत, जाति कहे का होय
भलो कर सो भलो कऔ,बुरो करै सो खोय।
* -भावना शर्मा,सागर
© संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी

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