वो पंछी पिंजरें में कैद था,
कैद कहां किसीको अच्छी लगती है।
वह सुंदर था,
बस उसकी सुंदरता ही पीजरे में लेकर आयी है।
नहीं, नहीं।
पीजरे में कैद करनेवाले की 'माया' उसको 'कैद' में लायीं है।
सुंदर तो वह आकाश में उड़ता था तब भी ज्यादा था।
एकबार मुक्त करो बंधनों से,
फिर देखो बन्धन से मुक्ति में तीनों तरफ की खुशियां आती है।
आप,पंछी और सर्व शक्तिमान ईश्वर।