चलो मान लेता हूं मैं कमजोर हूं ,
फिर भी मेरा लड़ना नहीं देखा तुमने ,
पता है मुझे समाज में हजारों ताकते खड़ी है ,
मुझे मिट्टी में दबा देने को ,
फिर तुझे तो पता है ना मैं फिर अंकुरित हो जाऊ गा इस बंजर जमीन को ,
मै फिर से खड़ा होऊं गा समाज में, फलदायक पौधा उभर कर ,
जब मुझे मिटाया जाए गा , मेरे जैसे हजार जिद्दी पौधे उगा कर जाऊ गा बंजर भूमि को ,
चलो मान लेता हूं मैं कमजोर हू ,
फिर भी लड़ना नहीं देखा तुम ने मेरा अब तक ।