The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
किताबें तुम्हें कोई झूठा दिलासा नहीं देतीं, तुम्हारे अंदर के लालच को हवा नहीं देतीं। पढ़ोगे होश से तो समझ जाओगे ये कड़वा सच, ये आईना दिखाती हैं, पर कभी दगा नहीं देतीं। .
माझी प्रेरणादायी मराठी डायरी "आत्ममग्न मी" आधीच प्रकाशित झाली आहे. जर तुम्ही अजून ती वाचली नसेल, तर एकदा नक्की वाचा. ही फक्त शब्दांची मांडणी नाही, तर स्वतःला शोधण्याचा, स्वतःशी संवाद साधण्याचा आणि आयुष्याकडे नव्या नजरेने पाहण्याचा एक छोटासा प्रयत्न आहे. जर तुम्ही ती आधी वाचली असेल, तर तुमचा अभिप्राय नक्की कळवा. आणि अजून वाचली नसेल, तर आजच "आत्ममग्न मी" सोबत हा प्रवास सुरू करा. –शिवराज भोकरे...🙏..
क्या जीवन की भागदौड़, तनाव, असफलता, रिश्तों की उलझन और मन की बेचैनी ने आपको कभी यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर सच्चा समाधान कहाँ है? यह पुस्तक केवल गीता की व्याख्या नहीं, बल्कि आज के इंसान के जीवन का दर्पण है। इसमें हर अध्याय आपको स्वयं से मिलाने, सही दृष्टि देने और जीवन को नई दिशा में देखने का निमंत्रण देता है। यदि आप केवल पढ़ना नहीं, बल्कि अपने जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है। गीता: आज के इंसान के लिए ✍️ Shivraj Bhokare
🫵
यह तो बस एक झलक है… ऐसी ही गहराई से भरी अनेक कविताओं, विचारों और आत्मा को स्पर्श करने वाले शब्दों को पढ़ने के लिए पढ़िए — ‘शब्द और सत्य’ मेरे द्वारा लिखित एक भावपूर्ण पुस्तक। — शिवराज भोकरे.....✍️
“शब्द और सत्य” — जल्द ही आ रहा है… कुछ एहसास, कुछ कड़वे सच, और कुछ ऐसे सवाल… जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे। तैयार रहिए…
बेटी: पिंजरे की चिड़िया नहीं, आसमान की दावेदार तू किसी के आंगन की बस शोभा नहीं, तू 'पराया धन' होने का कोई धोखा नहीं। तुझे सिखाया गया कि झुकना ही तेरी शान है, पर याद रख, तेरे भीतर भी वही असीम आसमान है। तुझे विदा करने की तैयारी बचपन से शुरू हुई, तेरी बुद्धिमत्ता, बस चूल्हे और चौखट तक रुकी। पर बेटी वह है, जो संस्कारों के जालों को काट दे, जो अपनी नियति को खुद अपने हाथों से बाँट दे। आचार्य कहते हैं—मत बना उसे विदाई की एक वस्तु, उसे बना ऐसा कि वह सत्य के लिए हो सके प्रस्तुत। उसे गहने नहीं, उसे 'ज्ञान' के हथियार दो, उसे विवाह का डर नहीं, उसे 'विवेक' का विस्तार दो। असली कन्यादान वह है, जहाँ अज्ञान का दान हो, जहाँ बेटी के भीतर, उसके अपने 'स्व' का भान हो। वह किसी की अर्धांगिनी होने से पहले 'पूर्ण' बने, वह भीड़ का हिस्सा नहीं, खुद में एक संपूर्ण बने। (आचार्य प्रशांत से प्रेरित)-Shivraj Bhokare..✍️
सच्चा इंसान: जो दर्पण जैसा साफ हो तुमने ओढ़ रखे हैं नकाब, शराफत और नेकी के, पर भीतर पल रहे हैं कीड़े, लालच और बेरुखी के। सच्चा होना वह नहीं, जो दुनिया को तुम दिखाते हो, सच्चा होना वह है, जो तुम अंधेरे में खुद को पाते हो। जो अपनी मान्यताओं को सत्य की आग में तपा सके, जो अपने ही झूठ को देख, उसे जड़ से मिटा सके। वह सच्चा है, जो समाज की भीड़ में खोया नहीं, जो संस्कारों की लोरी सुनकर, चैन से सोया नहीं। तुम सत्य बोलते हो ताकि तुम्हारी इज़्ज़त बनी रहे, यह तो व्यापार है, ताकि दुनिया की नज़र तनी रहे। सच्चा इंसान तो वह है, जिसे खोने का कोई डर नहीं, जिसके अहंकार का अब इस संसार में कोई घर नहीं। आचार्य कहते हैं—मत बनो 'अच्छा', बस 'सच्चे' बन जाओ, इन थोपे हुए गुणों के बोझ से, तुम आज़ाद हो जाओ। सच्चाई कोई मंज़िल नहीं, यह तो हर पल की लड़ाई है, अपने ही भ्रमों को चीरकर, मिली हुई गहराई है। (आचार्य प्रशांत से प्रेरित)-Shivraj Bhokare.. ✍️
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Nichetech.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser