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palvisha

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@vrinda1030gmail.com621948
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ले आए हो जो तुम हनुमान
मेरी सिया का पता,

तुम ही उद्धारक मेरे हो।
और आज से तुम मेरे प्रिय।

आज और अभी इसी क्षण से
तुम बन भक्त नहीं मित्र हो।

- palvisha

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- vrinda

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vrinda
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बीत चुके है इतने दिन, 
हे रघुनंदन अब तो आ जाओ।

ना सही जाए यह पीड़ा मुझसे, 
आकर इस लंका से अपनी सिया को लिवा ले जाओ। 

पल पल व्याकुल तुम बिन यहां मैं
हे नाथ अब तो आ जाओ।

ना सही जाए यह विरह
आ कर दर्श दिखा जाओ।

सोने की इस लंका में ना कोई सुख मैं पाती हूं
तुम बिन हे रघुनाथ मैं विरह अग्नि में तपती जाती हूं।

करो कृपा हे अवध बिहारी
रो रो पुकारे सीता तुम्हारी।

बीत चुके है इतने दिन अब, 
हे रघुनंदन आ जाओ।

वध करके इन दुष्टों का प्रभु
संग अपने तुम लिवा जाओ

- vrinda

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