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🌺 प्रकृति रूपी भुवनेश्वरी को समर्पित भाव स्तुति 🌺
तू प्रकृति है, भुवनेश्वरी है, संसार की गति है।
प्रेम की पूर्णता है तू, सौंदर्य की सजीव रेखा है।
आकर्षण भी तू है, करुणा भी तू —
मेरा हर कदम, तुझसे ही तो प्रेरणा पाता है।
जब प्रेम की राह पर चलने का संकल्प होता है,
तब भीतर से एक स्वर उठता है —
"तू ही मेरी गति है, तू ही मेरा सहारा।"
संसार तुझमें है और तू संसार में।
तू हर फूल की मुस्कान है,
हर पत्ते की थिरकन, हर नदी की लय है।
तू सृष्टि के मस्तक पर विराजमान है —
साँसों के आरोह-अवरोह में बहती चेतना है।
उतार-चढ़ाव तुझमें हैं, पर तू स्थिर भी है।
तू चंचला है, परंतु सच्चिदानंद भी।
क्या तुझ पर कुछ लिख पाऊँ मैं?
नमन ही कर सकता हूँ, समर्पण ही मेरा शब्द है।
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