दिल को पता नहीं है इसे जाना कहां है ?
रहते हमदर्द सा अब कोई फसाना नहीं है
तू वो समुंदर है जिसका किराना मैं तो नहीं
मैं हूं अभी तेरे साथ ये कम तो नहीं,,,,,,

नींदों में आया वो ख्वाब जिसमें
दिखा मुझे वो तस्वीर कहीं तुम तो नहीं
माना मैं बहुत गुस्से और खामोश रहने वाली पर
मैं हूं अभी तेरे साथ ये कम तो नहीं,,,,,,,

दूर रह कर भी हूं मैं तेरे आस - पास
अंधेरों में छुप कर रोया चेहरा वो मै तो नहीं
माना मैं चांद की खूबसूरती नहीं
मैं हूं अभी तेरे साथ ये कम तो नहीं,,,,,,,,




my fav poem written by me

Hindi Poem by Manshi K : 111940638
K K 5 day ago

Kam kaise hoga

Manshi K 6 day ago

Thankuuu bhaiyuu 😊

Manshi K 6 day ago

Thanks to you

Devesh Sony 6 day ago

Bahut khoob…👌

Manshi K 6 day ago

Bilkul sahi kaha apne sir ..

Lotus 6 day ago

जिनकी आखें आसुओं से भीगी नही है क्या समझते हो उनको गम नहीं है तुम तड़प कर रो दिए तो क्या हुआ गम छुपाकर हशने वाला किसी से कम नहीं

New bites

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