एक प्यारा सा दो अक्षर का नाम है,
जिसका नाम गांव है।
जहा अभी भी है वो पीपल की छाया,
और खुदसे पके हुए " आम " है।
जब कभी भी हो कोरोना का डर,
या हो लोग नोकरी से बेदखल,
लोग अभी भी ढूंढते गांव है !
बस यही है दुवा युही हँसता खेलता रहे ये छोटासा शब्द,
और उमसें रहते जो लोग तमाम है । ...#MR