गांव ,शहर और घर
जैसे हमारे साथ- साथ हमारी परिच्छायां होती हैं,
वैसे ही गांव,शहर,घर की तस्वीरें जुड़ी होती हैं।
गांव से क्या कहें वह याद बन गया है,
आजकल हमारी मिट्टी का ऐसा स्वभाव हो गया है।
दूर से उसे देख दिल में हलचल होती है,
पास आने पर उससे बात नहीं होती है।
***महेश रौतेला
१५.०४.२०१८