अरे भोर हो गयी
नक्षत्रों से दोस्त गुम हो गये हैं
गहरी रात में जो चमकते रहे थे,
उम्र की दराज से खिसक गये हैं।
प्यार की हवा कहाँ चल रही है,
गुम हुए दोस्त कहाँ मिल रहे हैं?
समझो, यादों की बड़ी नदी बन गयी है,
दोस्तों की बातों की चहल-पहल दिख गयी है।
पुरानी यादों में एक फकीर नजर आया है,
कह दूँ, वह मेरी ही दोस्ती है,
साधु सी मुलाकातें सुरमयी रहती हैं,
उम्र की दराज में मेरी दोस्ती रूक गयी है।
***महेश रौतेला