चौपाई छंद - प्रश्न
अपने सारे प्रश्न उठाओ।
बिल्कुल आप नहीं पछताओ।।
जितना चाहो झंडे गाड़ो।
क्यों आखिर तुम मौका ताड़ो।।
सबके अपने प्रश्न हैं भारी।
इक दिन आती सबकी बारी।।
चीनी प्याज का दाम रुलाए।
बड़ा प्रश्न ये दिन क्यों आए।।
विपक्ष आज प्रश्न पर जीता।
उसे लग रहा प्रश्न है गीता।।
कुछ प्रश्नों के उत्तर मिलते।
कुछ के उत्तर से खुद डरते।।
सबके अलग प्रश्न हैं होते।
कुछ को मजबूरी में ढोते।।
ईश्वर पर भी प्रश्न हैं उठते।
जाने कितने जाते ठगते।।
बहुत प्रश्न जीवन में होता।
कोई हँसता कोई रोता।।
खड़ा प्रश्न है आज हमारे।
इससे हमको कौन उबारे।।
यमराज मित्र ने प्रश्न उठाया।
घन-घमंड में क्यों भरमाया।।
या फिर प्रश्न समझ ना आया।
मानव तेरी उल्टी छाया।।
सुधीर श्रीवास्तव