हम खुद से जंग लड रहे हैं,और क्या
पत्थर उठाये आईने की तरफ बढ़ रहे हैं और क्या
जहन किस बू से है परेशां इतना
हम अंदर मरे सड़ रहें हैं और क्या
आज हर कोई खुश है अर्श देखकर
आस्मां से तारें उतर रहें हैं, और क्या
मैं अब लतीफें सुनाऊंगा, कोई कहानी नहीं
किरदारों से बच्चे डर रहें हैं, और क्या
आते तुफां की दस्तक सुन ली हमनें
कदम घर की तरफ बढ़ रहें हैं और क्या