Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

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New bites

"गहराई में छुपा है रूप सुनहरा,
लहरों की बांहों में सपन सवेरा,
मछली है तू, या जादू कोई,
हर रंग में छिपा एक राग गहरा।"
"प्रवाल की नगरी, तू है राजकुमारी,
मछली है तू, या कोई चित्रकारी,
सपनों के शहर में, तेरा बसेरा,
हर लहर है बस तेरी आभारी।"
"चमकती त्वचा पर सतरंगी रंग,
पानी की धारा में तेरा तरंग,
तू वो मछली है, सबसे हसीं,
तेरे साथ है ये गहरा नीला उमंग।"

rammake323039

यह तो बस एक झलक है…
ऐसी ही गहराई से भरी अनेक कविताओं, विचारों और आत्मा को स्पर्श करने वाले शब्दों को पढ़ने के लिए पढ़िए —
‘शब्द और सत्य’
मेरे द्वारा लिखित एक भावपूर्ण पुस्तक।
— शिवराज भोकरे.....✍️

shivrajbhokare342239

Do You Know that the Lord has said, "If you improve, then everything else will improve in your presence"?

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#selfhelp #selfimprovement #doyouknow #facts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

પ્રથમ પ્રયાસ તમારી સાથે જોડાવાની મનથી

મન કરે છે....

ssatish

Good Morning 🌄

harshparmar8722

🙏🙏आप अन्य को त्याग करने को कह सकते हो,

उसमें ना नहीं है।

कुछ 'अच्छा हो रहा हो तो त्याग करना' चाहिए,

अच्छी बात है।

बस वह त्याग प्रथम हमें करना चाहिए
बाद में किसी ओर को कहना चाहिए,

तभी तो एक उदाहरण बनेगा नहीं तो फिर व्यर्थ बातें।

सच्ची और अच्छी बातों का कोई भी कभी खुलकर विरोध नहीं कर पाएगा,

क्यूंकि सच सच ही होता है।

हमारी कथनी ओर करनी में साम्यता होनी चाहिए।

बुद्ध, महावीर, गांधी को उनके समर्थक तो ठीक है विरोधीयों भी ऐसे ही प्रणाम नहीं करते होंगे।🦚🦚

parmarmayur6557

कौन कहता हैं कि खता
सिर्फ़ नज़रों कि होती हैं
नज़र तो बेचारी मज़बूर
हाथों ज़िगर के होती हैं

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

Goodnight friends sleep well

kattupayas.101947

अंतहीन अकेलापन
कविता


अंतहीन अकेलापन
परी सुखा और बंजर जमीन
और आसमान में करारे के धूप
दूर दूर तक कोई हरियाली नहीं
कोई समुद्र नहीं
ना बारिश आने की कोई उम्मीद है

ऐसा लग रहा है कि रेगिस्तान में
भुखे प्यास गिरते पड़ते मुसाफिर चल रहा है
बिना कोई आश के
बस उम्मीद लिए

कही बंजर जमीन खत्म हो जाए
और हरियाली दिखे
कहीं रेत के किनारा मिले
और समुद्र देखें
कहीं मौसम बदले कढ़ी धूप को बादल ढक ले
और बारिश हो जाए

और इस बेजान शरीर में जाना आऐ गे
कहीं तो अनाज का एक निवाला भी
एक टुकड़ा भी मरते हुए आत्मा को नसीब हो

इस अंतहीन अकेलेपन में बस चलते रहना उम्मीद किए हुए डरावना लगता है
और इस डरावनी सफर से गुजरना नामुमकिन है

फिर भी यह जिंदगी है
बस नामुमकिन सफर पर चलते रहना
मंजिल का कोई ना किनारा पाना
बस अकेले अपने दर्द गम तन्हाई की बोझ को ढोते रहना

सबसे बड़ी नाइंसाफी है
जिंदगी मिलने के बाद एक प्राणी के लिए


फिर भी कुदरत अपनी फितरत नहीं बदलते
ना हीं किसी पे रेहेम दिखाते हैं
और हम बस जीते रहते हैं
इस अंतहीन आस लिए
जिसका कोई मतलब ही नहीं

abhinisha

🥭आंब्याचे सांदणे

आंब्याच्या मोसमात सांदणे खुप वेळा केले जाते
प्रत्येक वेळेस नविन कलात्मकता वापरायची 🙂

🏵️सव्वा वाटी केशरी रवा
अथवा थोडा जाडसर रवा
एक वाटीभर आंब्याचा रस थोडे केशर घालून
(केशर आपल्या आवडीनुसार वापरावे )
चवीनुसार मीठ
पांव चमचा सोडा
चार चमचे साखर (आंब्याच्या गोडी नुसार)


🏵️रवा कोरडाच भाजुन घ्यावा
आंब्याचा रस व रवा एकत्रित करून भिजवून घेणे
लागल्यास थोडे दूध वापरावे
दोन तासांनी पुन्हा मिश्रण थोडे घट्ट होते
परत लागेल तितके दूध घालून
सरसरित करून घेणे ..

🏵️आंब्याच्या गोडीच्या प्रमाणात साखर घालणे
गोड पदार्थात घालतो तसे थोडे चवी पुंरते मीठ घालणे
व मिश्रण पाव चमचा सोडा घालून चांगले फेटून घेणे
आमचा घरचा आंबा गोड असल्याने मी अजिबात साखर घातली नाही

🏵️कुकरच्या भांड्यात वाफवून याच्या बदामी आकाराच्या साच्यात वड्या पाडल्या

फोटो घरच्या बागेतील हिरवळी वर....

jayvrishaligmailcom

મોજેરીબા by Vishakha Mothiya | વેબ ગુર્જરી

અરુણાચલ પ્રદેશના એક એવા સ્વાતંત્ર્ય સેનાનીની વાત કરીશું, જેણે ભારત દેશની આઝાદીની લડતમાં ભાગ લેવા માટે પોતાનો વેપાર છોડી દીધો હતો.

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#unsungheroes #indiaindependence #jaihind #gujaratiwriter #janvajevu

mothiyavgmail.com3309

jai shree ram.....

sonambrijwasi549078

kis chamgadad ne likha hai . sale kutte sab kutte hi hote hai waise mard sab usse bhi bade kutte hote hai. nibhana inke bas ki bat hi ni hai

hindbharat

हे प्रभु
कैसी है ये दुनिया बनाई
मुझे तो समझ ना आई
क्या सही क्या बुरा
सब कुछ तुमने ही रचाया
एक बीज से कैसे पौधा बनता
इंद्रधनुष आकाश में कैसे बनता
कहीं धरती मिलती आकाश से
कहीं नदियां मिलती समन्दर से
कहीं ऊँची-ऊँची इमारतें
कहीं टेढ़े-मेढ़े रास्ते
जितना मैं सोचूं, उतना ही उलझूं
कैसी ये रीत, कैसी परम्परा
अंत में सब राख हो जाना है
यही रह जायेगी सब माया
साथ नहीं कुछ जाना है
जीवन है क्षणिक बुलबुला जल का
कब फूट जाय किसने जाना है
पांच तत्व जल, भू, अग्नि, वायु, आकाश
प्राण है कहाँ, कहाँ चले जायेंगे
तेरा-मेरा, जीवन का सब फेरा
आए कितने और कितने सिकन्दर जायेंगे
ये दुनिया एक छलावा है
जान ले खुद को समय से पहले
आयेगा तेरा भी कल बुलावा है
न आदि है न अंत है
सब शून्य है, शून्य में ही यही सृष्टि है
एक चक्र है ये जीवन, दर्शन उसकी दृष्टि है

मैं कौन हूँ क्या है मेरा ध्येय
ले लो शरण मुझे अब अपनी
नहीं समझना मुझे कुछ भी,
शेष न रहे अब कुछ ज्ञान
तेरे दर्शन की प्यास है
अब तेरी ही आस है
परब्रह्म परमेश्वर तू मेरा विश्वास है
हे प्रभु आपको वंदन बारम्बार है।
।। जय महाकाल ।।
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

बालकनी
हर घर में होती है
बालकनी
एक ऐसी जगह
जहाँ से खुलती है विचारों की खिड़की
दिखाई देता है सारा आसमां
मिलते हैं मेरे सपनों को पंख
बीतपाने आती है एक नन्ही चिड़िया
दूर पेड़ पर करतब दिखाती नन्ही गिलहरी
एक ऐसी जगह
जहाँ अक्सर आती हैं महिलाएं
अपने केश संवारने
युवा अपने फ़ोन पर बीतपाने
बुजुर्ग अपनी पोतों के किस्से सुनाने
बच्चे आते हैं नयी दुनिया को समझने
कुछ सामान बाहर फेंकते हैं
कुछ अन्दर तोड़फोड़ करते हैं
बालकनी से झाँक - झाँक कर
राहगीरों को आवाज़ लगाते हैं
कभी बन्दर, कभी चिड़िया
जीत - जीत चिल्लाते हैं
एक ऐसी जगह
जहाँ छिपाते हैं कुछ अपने आंसू
मिटाते हैं कुछ अपनी उदासी
जलाते हैं कुछ अपना क्रोध
जब शांत हो जाता है मन
हल्का सा मुस्काते हैं
और बीतपाते हैं
एक कप काफी लेकर
बीतपाती हैं साथ उनके बालकनी - - - ||
=============....

डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

धरती सी सहनशील माँ है
पिता आकाश से भी ऊँचे
मन तो पिता का भी करता है
खेलूँ अपने बच्चे के साथ
करूँ कुछ मस्ती ,कुछ पागलपन
सिखाऊं कुछ नया साथ रहकर
मारकर अपने मन को वो भविष्यसृष्टा पिता
जाता है अपने काम पर
खटता है रात -दिन ,सुनता है बॉस की
बीमारी में भी करता काम
कभी बयां न किया अपना दर्द
किसी के आगे ,रहता मजबूत
अपने परिवार के आगे. खटता है रात -दिन ,सुनता है बॉस की
बीमारी में भी करता काम
कभी बयां न किया अपना दर्द
किसी के आगे ,रहता मजबूत
अपने परिवार के आगे
थका -हारा घर जब वो लोटे
देख संतान को सोता चैन से
भूल जाता सारे गम ,सारी चिंता
करने पूर्ण बच्चों के सपने ,इच्छाएं
करता है तमाम कोशिशें
दुनिया ने पत्थर दिल कह तो दिया पिता को
पर सूखे आंसू ,दबे जज्बात ना देखे
पूरी ज़िंदगी संघर्ष में हवन कर दी जिसने
उस पिता को शत -शत प्रणाम डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

मायके की गलियां
आज बस यूं एक ख्याल आया
मैं हूँ अपनी माँ की परछाई
वो ममता भरा साया
ससुराल हो भले ही कितना प्यारा
अवचेतन मन में महकता हमेशा बचपन प्यारा
वो मायके की गलियां, वो शरारतें
साँझ होते ही लग जाती थीं छत पर बैठक
पापा सुनाते हमें अपने संघर्ष के किस्से
पर नटखट बचपन आया हमारे हिस्से
लड़की चाहे बूढ़िया भी हो जाए
मायके की याद ना दिल से जाए
क्योंकि वहाँ वो पापा की राजकुमारी थी
भाइयों की दुलारी थी, जिद्दी थी
बेफिक्र हँसती थी, नये ख्वाब बुनती थी
ना कोई जिम्मेदारी थी,
बस पढ़ना ही एक लाचारी थी
सभी के लिए मायका होता है सुहाना सपना
चाहे बाद में कोई प्यार न करे अपना
एक उम्र के बाद बस यादें रह जाती हैं
मायका शब्द सुनते ही, अधरों पर
मुस्कान आती है
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi

drvandnasharma8596

Do you know that there is absolutely no need to continue feeling the way you do? Investigate and search for the causes which are contributing to the way you are feeling. If you are truly committed to finding a solution to your present dilemma, then things will most certainly resolve themselves.

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#facts #spirituality #spiritualfacts #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

🙏🙏किसी के दर्दको संवेदना से महसूस करना उसके दुःखों को समझना और हृदय से आश्वासन देने का काम एक "नर्स" बेहतर तरीके से निभातीं है।🦚🦚

parmarmayur6557

Good Morning 🌅

harshparmar8722

यूंही गिरते गिरते एक दिन सभंल जाऊंगी
बदला नहीं लूगीं किसी से बस बदल जाऊंगी

priya216447