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New bites

आषाढी निमित्ताने-
वारी निघाली पंढरपूरी
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विठू राहे पंढरपूरी
मंदिर चंद्रभागे तिरी
आली आली आषाढी
वारीत चाले वारकरी ।।

पाहण्यास श्री विठ्ठला
भाव अंतरी हो दाटला
टाळ- चिपळ्या वाजवी
हरिनाम तेओठावरी ।।

वीणा-टाळ ,मृदंग वाजे
रामकृष्ण हरी नाम साजे
आनंद अनिवार हो अंतरी
जयघोष करी वारकरी ।।

पंढरपुरी जाती वारकरी
पाहण्या सावळा श्रीहरी
म्हणे कवी अरुणदास
नाम गोड श्रीहरी श्रीहरी ।।
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कवी अरुणदास"अरुण वि.देशपांडे-पुणे
9850177342
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arunvdeshpande

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dadabhagwan1150

#उपवास स्पेशल..

🍂राजगिरा बटाटा थालिपीठ

🍂साहित्य
राजगिरा पीठ एक वाटी
दाण्याचे कूट अर्धी वाटी
एक बटाटा
जिरे,
मीठ,
साखर (ऐच्छिक)
बारीक चिरलेली मिरची,
कोथिंबीर (उपासाला चालत नसेल तर घेऊ नये)

🍂कृती
बटाट्याचा सालासकट कीस करून घ्यावा
बटाटा कीस व सर्व साहित्य एकत्रित करून पीठ भिजवावे
अर्धा तास झाकून ठेवावे
यानंतर तव्यावर तूप सोडून
थालिपीठ लावावे
बोटांनी मध्ये मध्ये गोल करून
त्यात तूप सोडावे

🍂झाकण ठेवून दोन्हीकडून चांगले भाजुन घ्यावे
हे थालीपीठ कुरकुरीत व चविष्ट होते

🍂सोबत घरचे ताजे लोणी🙂

🍂उपासाला चालत नसल्याने अथवा इतर तब्येतीच्या कारणामुळे काही लोक साबुदाणा खात नाही त्यांच्यासाठी हे थालिपीठ चांगले आहे

jayvrishaligmailcom

#उपवास स्पेशल..

🍂राजगिरा बटाटा थालिपीठ

🍂साहित्य
राजगिरा पीठ एक वाटी
दाण्याचे कूट अर्धी वाटी
एक बटाटा
जिरे,
मीठ,
साखर (ऐच्छिक)
बारीक चिरलेली मिरची,
कोथिंबीर (उपासाला चालत नसेल तर घेऊ नये)

🍂कृती
बटाट्याचा सालासकट कीस करून घ्यावा
बटाटा कीस व सर्व साहित्य एकत्रित करून पीठ भिजवावे
अर्धा तास झाकून ठेवावे
यानंतर तव्यावर तूप सोडून
थालिपीठ लावावे
बोटांनी मध्ये मध्ये गोल करून
त्यात तूप सोडावे

🍂झाकण ठेवून दोन्हीकडून चांगले भाजुन घ्यावे
हे थालीपीठ कुरकुरीत व चविष्ट होते

🍂सोबत घरचे ताजे लोणी🙂

🍂उपासाला चालत नसल्याने अथवा इतर तब्येतीच्या कारणामुळे काही लोक साबुदाणा खात नाही त्यांच्यासाठी हे थालिपीठ चांगले आहे

jayvrishaligmailcom

न्याय मांगना वहीं शोभा जाता है,
जहां न्याय की सच्ची,
परिभाषा मालूम हो।

यदि उल्लू को पुछेंगे कि,
सूर्य कैसा होता है?

तब वह अंधकार की,
वाहवाही करने लगेगा।

parmarmayur6557

“पत्थर की यात्रा”

एक दिन  
रास्ते पर मेरा पाँव एक पत्थर से टकराया।  
मैंने देखा नहीं।  
बस ठोकर मार दी।  
एक बार, फिर बार-बार।  

और वह मेरे साथ चलता रहा।  
मुझे लगा मैं खेल रही हूँ।  
शायद उसे भी यही लगा।  

जब मेरी मंज़िल आ गई,  
मैं भीतर चली गई।  
वह वहीं छूट गया  
धूल में, खरोंचों से भरा।  
उस पर मेरे पैरों के निशान थे।  
और दुनिया की मिट्टी।  

फिर कोई और आया।  
फिर कोई और ठोकर।  
फिर कोई और सफ़र।  

शायद कुछ पत्थरों की तक़दीर में  
चलना नहीं लिखा होता।  
सिर्फ घिसटना लिखा होता है।  

पर हर रास्ता एक-सा नहीं होता।  

एक दिन एक ज़ोर की ठोकर ने  
उसे सड़क से उठाकर नदी में फेंक दिया।  
वह डर गया।  
वह तो रास्ते का था, पानी का नहीं।  

नदी ने कुछ नहीं पूछा।  
बस बहती रही।  
और उसकी देह से धूल धोती रही।  
सालों की खरोंचों में  
ठंडा पानी भरती रही।  

वहाँ उसे अपने जैसे और पत्थर मिले।  
कोई पहाड़ से टूटा था,  
कोई मंदिर से।  
सबके पास अपनी टूटन थी।  
इसलिए किसी ने किसी का दर्द नहीं पूछा।  

वक़्त बहता रहा।  
नदी बहती रही।  
वह भी बहता रहा।  

और एक दिन  
जब उसने पहली बार समुद्र देखा,  
तो भूल गया कि कभी वह  
किसी की ठोकर था।  

अब वह धूल से खाली था।  
खरोंचों से मुक्त था।  
शांत था।  
चमकता हुआ।  
अपनी ख़ामोशी में पूरा।  

तब समझ आया  
हम भी पत्थरों जैसे होते हैं।  

कुछ लोग हमें रास्ते में  
ठोकर समझकर साथ रखते हैं।  
और मंज़िल आते ही छोड़ जाते हैं।  

उस वक़्त लगता है यही अंत है।  

पर अक्सर…  
वहीं से नदी शुरू होती है।  

जो रास्तों पर छूट जाते हैं,  
वही एक दिन  
समुद्र तक पहुँचकर  
मोती नहीं बनते,  
पर अपनी चमक ज़रूर पा लेते हैं।
प्राची गुर्जर…..

prachitanwar111

good morning 🌅😊

nikitavinzuda6548

it's tea time..

kattupayas.101947

कभी किसी पेड़ की छाँव हीं
उसकी दुश्मन बन जाती हैं।
कभी अनजाने में हीं उसके
क़ातिल को पनाह दे जाती हैं।

गजेंद्र

kudmate.gaju78gmail.com202313

Good morning friends.. have a great day

kattupayas.101947

छुपा कर भी नहीं छुपती ये मोहब्बत हमसे,
तुम्हारा ज़िक्र आते ही चेहरा खिल ज़रूर जाता है.💞

narayanmahajan.307843

माँ का प्रेम शब्दों में समेटना संभव नहीं, फिर भी यह एक छोटा-सा प्रयास है।

"आँचल के उस पार"
माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और संस्कारों को समर्पित मेरी नई कविता।

आपका स्नेह और सुझाव हमेशा प्रेरणा देता है।

✍️ Poet ~ Sp Singh

spsingh

jai mata di

skptech

Good evening friends.. have a nice time

kattupayas.101947

जीवन मुश्किल है पर हंसी उसकी दवा

ashuashu858439

Om Namo Bhagavate Vasudevaya!🙏

Lord Shri Krishna was a Vasudev. Vasudev means one of the sixty-three Shalaka Purush (human beings with extraordinary, super human energies and accomplishments)!

To know more about "Lord Krishna" visit: https://dbf.adalaj.org/0YLP366N

#LordKrishna #LordJagannath #RathYatra #Spirituality #Faith #dadabhagwanfoundation

dadabhagwan1150

सावन दस्तक देने लगा है

सावन दस्तक देने लगा है
मौसम अब बरसने लगा है

कितनी ही आंखें राह देखती
सावन में ही मायके की देहरी मिलती

अपनों से मिलन की आस में
आंखों से सावन झरने लगा है

महादेव की मस्ती में दीवाने
भक्त कावर सजाने लगे हैं

फसलों को लहराता देख
किसान भी सपने सजाने लगे हैं

धरती हरा-हरा श्रृंगार किए बैठी है
दूर देश से पंछी भी अब आने लगे हैं

सावन अब दस्तक देने लगा है

जिंदगी की तपिश में, उम्र की दुपहरी में
बारिश की बूंदें, जख्म सहलाने लगी हैं

सबकी आस अपनी है सावन से
सावन सबको भाने लगा है

सावन की मस्ती संग है लाती
तीज का मनुहार, राखी का प्यार
अमिया के झूले, मन करे बेक़रार
सबको रहता इसका इंतज़ार

सावन दस्तक देने लगा है
रिमझिम सावन बरसने लगा है

---
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली

drvandnasharma8596

કાલિદાસ જયંતિ ની ખૂબખૂબ ખુબ શુભેચ્છાઓ 🌹🌹🙏🌹🌹😊

drbhattdamayntih1903

કાલિદાસ જયંતિ ની ખુબ ખુબ શુભેચ્છાઓ🌹🌹🙏🌹🌹😊

drbhattdamayntih1903

🥕गाजर मशरूम सूप ..

🥕साहित्य
चार केशरी गाजरे
सात ते आठ मशरूम
चार मोठे चमचे मिल्क पावडर
मिरी पावडर
मीठ चवीनुसार

🥕कृती

प्रथम गाजर व मशरूम चे तुकडे करून
तुपात परतून झाकण ठेवून वाफवून घेणे
गार झाल्यावर दोन्ही मिळून मिक्सर मध्ये थोडी जाडसर पेस्ट करून घ्यावी
आता दोन मोठे बाउल पाणी यात घालून
मिश्रण उकळण्या साठी ठेवावे
उकळी आल्यावर चार मोठे चमचे मिल्क पावडर पाण्यात कालवून ती पेस्ट यात हळूहळू घालावी
सूप आवडीप्रमाणे दाटसर करून घ्यावे
गरज असल्यास थोडे पाणी वापरावे
एक ते दोन लहान चमचे मिरी पावडर व चवीनुसार मीठ घालावे
सजावटी साठी वर चमचाभर लोणी आणि पुदिना पाने घालावी
मिल्क पावडर मुळे एक गोडसरपणा
आणि मिरी पावडर मुळे तिखटपणा अशी दुहेरी चव या सुपला येते .

jayvrishaligmailcom

" કચ્છી નવા વર્ષની હાર્દિક શુભકામના "

આવ્યો રે આવ્યો મહિનો અષાઢ
કચ્છી હૈયાં આજ હરખાય અગાધ.
આસમાનમાં કેવી ચમકે છે વીજ,
આવી રે આવી લ્યો અષાઢી બીજ.

મોરલા ટહુકે, કોયલ કરે મીઠો સાદ,
કચ્છી હૈયાઓમાં છે હરખ અગાધ.
નવા વર્ષનો આજથી મંગળ પ્રારંભ,
નવી આશા, નવા ઉમંગનો આરંભ.

દુઃખ કે દર્દ કોઈની ના આવે પાસ,
ઘરમાં લક્ષ્મીજીનો રહે સદા નિવાસ.
જય શ્રી લક્ષ્મીનારાયણ મુખે ગવાય,
કચ્છીઓના મનમાં હરખ ના સમાય.

નૂતન વર્ષના સહુને રામ રામ ભાઇ,
આનંદ વેરો ને આજ વહેંચો મીઠાઇ.
ખેતરે વરસજો "વ્યોમ" અમી સહર્ષ,
હર કોઈને ફળે આ કચ્છી નવું વર્ષ!

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી),... અંજાર.

omjay818

good morning 🌅

nikitavinzuda6548