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आज कोई कविता नहीं बस:- सत सत नमन करता हूं वीर भगत सिंह को, जिन्होंने हमारी आजादी के लिए दे दिया अपना बलिदान। आप सब से भी निवेदन है कि आज वीर भगत सिंह के जयंती पर उनके लिए दो शब्द जरूर लिखें।
कांटो से यारी न करने वालों को, सफलता मिल नहीं करती। बिना संघर्ष के मंजिल पाने वालों के पास, सफलता टीका नहीं करती।
बिना संघर्षों के लक्ष्य कभी पूरा नहीं होता। बिना हरे जीतने का मजा नहीं आता।
कांटो से यारी करके ही मंजिल मिला करती है, गिर गिर कर संभलने वालों के ही सफलता कदम चुमा करती है।
जिंदगी ने फिर से हरा दिया। हंसते हुए को रुला दिया। हाथों के लकीरों को सच बना दिया। फिर से किस्मत ने मेहनत को झुका दिया।
जिसको जितना रुलाना था रूल लिय। जिसको जितना सताना था सता लिया। जिसको जितना उपहास बनाना था बना लिया।जिसको जितना मजाक उड़ाना था उड़ा लिया।अबकी बार कोशिश भी मत करना वरना फोड़ देंगे। अबकी बार तुम्हारा घमंड भी तोड़ देंगे।
आंखों में नींद है पर अभी सोना नहीं है। दिल में चाहत है पर अभी खोना नहीं है। मेहनत है बहुत पर अभी थकना नहीं है। जब तक मंजिल ना मिल जाए रुकना नहीं है। - Ashu Ashu
रुलालो जितना रुका सकते हो तुम, एक दिन हमारा भी वक्त आएगा। सता लो जितना सता सकते हो तुम, एक वक्त किस्मत तुम्हें सता जाएगा। ~Ashu
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