औकात तो नहीं मेरी कि सवाल उठाऊं रब पे,
मन में एक सवाल हैं ना जाने कब से।
पूछना है मंदिर के भगवान से
मस्जिद के खुदा कुरान से,
सुना हैं सुन लेते हो आप
दिल की बिना बोले बात।
क्या सुनाई नहीं देती उस बहु की चीखे,
जिसे धन के लोभी जिंदा जला रहे ?
क्या सुनाई नहीं देती उन लड़कियों की पुकार ?
नन्हीं परियों की आवाज जो बन रही हवस का शिकार।
आपके बनाए हुए बंदे जो बन गए अब दरिंदे ,
करके इनका कत्ल फेंक देते सड़क के किनारे।
क्या ये आपकी फरियाद दिल से नहीं करती?
क्या चीखती चिल्लाती आवाज सुनाई नहीं देती ?
अगर सुनाई देती हैं तो
दिखाया करो कोई करिश्मा,
भेजा करो कोई फरिश्ता
जो दे इन दरिंदों को रूह कांपने वाली सजा।