* हर लम्हा जुदाई का ज़हर है घोलता, तेरे बिन अब।
* ये धड़कन भी बेजान सी है, जैसे हो कोई पत्थर, तेरे बिन अब।
* मेरी रातों की तन्हाई पूछती है हरदम, कहाँ है मेरा हमसफ़र, तेरे बिन अब।
* ये दुनिया भी लगती है इक बोझ सा मुझ पर, नहीं मिलता कोई मंज़र, तेरे बिन अब।
- saif Ansari