इब्रतें
इब्रतों के वास्ते दर दर भटकता रह गया,
खानदानी शान से हाथों में कासा रह गया ।
सब के अरमानों का सूरज जगमगा उठा मगर,
इक मिरी क़िस्मत का गर्दिश में सितारा रह गया ।
घर की इंट बिक गई अस्वाद-ओ-जेवर बिक गए
है खुदा का शुक्र हिम्मत का असासा रह गया ॥
🙏
- Umakant