Hindi Quote in Blog by Komal Mehta

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विषय : मुबईकर

हम मुंबईकर की जिंदगी ना ट्रेन से भी ज्यादा तेज चलती है।
हालाकि थोड़ा होल्ड आता है कभी कभी कुछ वक्त के लिए लेकिन.....
फिर जिंदगी वही तेजी से चल पड़ती है।
हमारी सुबह ना कभी आम सी नही होती है।
हमे हर चीज ना समय पे करनी होती है, अगर एक ट्रेन छूट गया तो मानो जिंदगी हिल जायेगी।
लोग को कहते सुना है मुंबई वालो को तो भाई जलसे है।
आके जरा यहां देखे आखिर हम कितने मजे से जी रहे है जिंदगी को।

हमे सुबह सुबह समय पे ट्रेन पकड़ना रहता है, उसके बाद जो रोज ट्रेन में रोज का नाटक होता है झगड़ा, वो सब जेलो। कुछ विचित्र लोको को कभी कभी सबक सिखाना भी अनिवार्य होता है, कभी प्यार से कभी गुस्से से।
यहां हमारा संघर्ष खतम नही होता है मेरे दोस्त।
फिर स्टेशन उतरने के बाद हमे ऑटो के लिए मेहनत लगती है।
मानो की कोई इंसान दिन का केवल 300rs कमाता है, अगर वैसे इंसान को दिन 80rs ऑटो में देना पड़े, तो वो तो सीधी सी बात है ऑटो में सफर नही करेगा! वो जायेगा बस से,बस में लंबी सी लाइन होती है, सिर पे पंचिंग मशीन का टेंशन होता है, तीन लेट मार्क हुआ तो एक हाफ डे कट हो जायेगा।

आम इंसान का एक रुपिया कट हुआ तो जान निकल जाती है उतना दर्द होता है, और हम मुंबईकर ऐसा दर्द हर महीने सहते है। ये तो सिर्फ सफर का संघर्ष हुआ।

हमे हर जगह अंतरंगी लोग मिल जाते है, वैसे लोगो को शांति से हैंडल करना भी कहा सरल होता है। हर किसी को सब कुछ अच्छा तो नही मिलता तो हमारी नोकरी में भी बहुत संघर्ष होता है जनाब। यूं ही हम मुंबईकर emotionally strong नहीं कहेलाए जाते। Toxic environment में भी मै मुंबईकर अपनी जॉब नहीं छोड़ते है। मुंबईकर कभी हारना नही जानते, वो डट के मुसीबतों का सामना करते है।ये सब कुछ उन्हे बाहर की दुनया सीखा देती है।
अगर तुम्हे करना है जिंदगी का असली अनुभव तो भाई आजाओ हमारी मुंबई में, जहा लोग सोते कम है, है समय मुंबई जागती मिलेगी, हमारी ट्रेन की तरह चार घंटा लोग सोते है, तो आप यहां आके रहो ट्रेन में सफर करो, और जॉब करो ६ महीना नहीं होगा और तुम वापिस अपने घर को लौट जाओगे। मुंबई जिसे रास आ गई वो कहा से कहा पहोंच जायेगा। लेकिन उसके लिए एक दशक या दो दशक लग सकता है, और कुछ शॉर्ट कट लगाके तो आप समझ ही गए।

मुंबई सब कुछ देती है,

जैसे की...

1. Emotionally strong बना ती है।

2. मुंबई तुम्हे कही ना कही स्वार्थी मानुष की श्रेणी में भी लेके जाती है।

3.मुंबई तुम्हे artificial intelligence भी सीखा ही देती है कुछ हद तक।

अगर अपने फ्री समय में आप अपने आस पास भी थोड़ा गौर फमायेगे तो आप बहुत कुछ सीख पाओगे। यहां हर इंसान गोडो से ज्यादा रेस में तेज दौड़ते है।

दौड़ते नही तो जिंदगी में कुछ हासिल केसे कर पाएंगे।

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