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Chirag Vora

Chirag Vora Matrubharti Verified

@chiragvora055249
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पुरुष हमेशा पीछे रहे

अपने पिता को गले लगाने में
माँ की गोद में सर रख पाने में
अपनी पसंदीदा स्त्री से प्यार जताने में
पुरुष हमेशा पीछे रह गए

इन तीनों घटनाओं में अथाह प्रेम था इतना
प्रेम कि कोई एक घटना भी अगर घटित हो
तो पुरुष फफक-फफक के रो पड़े

पुरुष के पीछे रह जाने के पीछे
झिझक से कहीं ज्यादा मुझे डर लगा
वह डर उसे अंदर से रोक लेता है

यह कोई बाहरी ख़तरे का डर नहीं
यह भीतर का, बहुत गहरा और
सामाजिक रूप से गढ़ा हुआ डर है।

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विवाह

हमारे यहाँ दो व्यक्तियों से पहले
शादी धर्म की होती है
जाति की होती है
परिवारों की होती है
नीतियों की होती है
परंपराओं की होती है
उम्र की भी होती है

हमारे यहाँ की शादी कभी भी
दो प्रेमियों की नहीं होती
उनकी इच्छाओं की नहीं होती
दो जोड़ों की ख़ुशियों की नहीं
होती उनके खुद के निर्णय की कभी नहीं होती

शायद समाज का मानना है
कि प्रेम के बंधन से ज्यादा मजबूत
सिर पर थोपा गया ज़िम्मेदारी का बंधन होता है।

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तुम आना मेरी अंतिम सास छूटने से पहले
तुम आना मेरे प्राणों के रूठने से पहले

तुम तब भी आ सकते हो
जब मुझे शमशान ले जाया जा रहा होगा
तुम तब भी आ सकते हो
जब मुझे चीता पर लिटाया जा रहा होगा

बस तुम छू लेना मुझे जलने से पहले
अग्नि की गोद में पलने से पहले
दे देना मुझे मुक्ति अपनी एक छूअन से
कर देना मुझे मुक्त चीता के धूअन से
तुम आना मेरी आत्मा के उठने से पहले
तुम आना मेरे प्राणों के रूठने से पहले

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ज़हर !
लड़के चाहते तो,
चुन सकते थे,
ज़हर..!!
प्रेम में हारने के बाद !
किंतु उन्होंने चुना,
सिगरेट और शराब को !
शायद
उन्हें वहम था कि
धीमे ज़हर से
काटा जा सकता है
विरह का विष !

शून्या..❤️‍🩹🕊️✨

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तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ
ये मौसम भी बदल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

मुझे ग़म है कि मैं ने ज़िंदगी में कुछ नहीं पाया
ये ग़म दिल से निकल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

ये दुनिया भर के झगड़े घर के क़िस्से काम की बातें
बला हर एक टल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

नहीं मिलते हो मुझ से तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझ से जल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

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બુક: સતી સાવિત્રી
લેખક: દેવદાત પટનાયક

એમ તો ખૂબ નવા લેખક છે મારી માટે..
નારી જાતિમાં જ્યાં એક સમય હતો
જ્યાં બાળકોના નામ પાછળ તેની માતાનું નામ લખવામાં આવતું તે સમયથી લઈ ને ઉપનિષ, વેદ,રામાયણ અને મહાભારત સુઘીની નારીઓની નાની કથા અને માન્યતા સાથે ખૂબ સારી રીતે વિચાર રજુ કરેલ છે.. આ બુક વાંચીને ખરેખર ખૂબ મજા આવી.. જો તમને પણ ઈતિહાસમાં મનુષ્યના જીવનમાં ભૂતકાળોમાં સ્ત્રી નું સ્થાન પ્રથા અને સમાજ વિશે જાણવામાં રસ હોય તો આ બુક જરૂરથી વાંચજો..

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ડોક્ટરની ડાયરી..
ડૉ. શરદ ઠાકર..

ઘણા બધા પોતાના અને બીજા ડૉક્ટરના...
જીવનમાં બનેલા ઘટનાના અનુભવો
રજૂ કરતી ખૂબ જ સુંદર બુક છે...
જો કે ઘણી બુકો મે આ લેખકની વાચી છે.
એમ મને માણસો કરતા બુકો સાથે વધુ લગાવ છે...
સારા માણસો મને મળ્યા નહીં...
તો સારી બુકો સાથે મારી દોસ્તી છે..
મારે ધણી બધી વાર કોઈની જરૂર હોય ..ને...
ત્યારે કોઈ વ્યક્તિ કરતા બુક મારી નજીક હોય છે..
તે પણ ઘણા વર્ષોથી..
મને બુક સમજાવે છે..
ધણી બધી વાતો..☺️

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क्या हाल हमारे दिल का है,
क्या सब को बतलाते हैं..

है जीत हमारी मुठ्ठी में,
बस तुमसे हार जाते हैं.

आँखे दरिया ना बन जाए इसलिए दिल पत्थर कर लिया..

જે ભાવુક હોય, એ જ પરેશાન હોય છે.
ભાવનશૂન્ય થી શું અપેક્ષા.