तुम मुझमे दृढ़ हो !
हाँ ! तुमसे मिली हर
तकलीफ हृदय की पीड़ा,
आँखो के आँसू सोख लेते है |
तुम पर मेरा विश्वास ऐसा ही है ,
जैसे शरीर के साथ श्वास का ,
हृदय के साथ हृदय गति का |
यही तुमसे मेरे प्रेम का आधार है,
विश्वास और अविश्वास की चौखट
पर मै दम नही तोड़ूँगी ,मै दोनो से
बाहर हूँ | तुम्हारे नाटक तुम्हे मुबारक,
ये दुःख ,ये पीड़ा , ये शिकायत सब ,
मेरी काया के साथ एक दिन समाप्त
हो जायेगा , हाँ ! मृत्यु के बाद केवल ,
प्रेम मेरे साथ जायेगा | (अंश )