“इस राष्ट्रीय खेल दिवस पर आओ हम कसम उठाते हैं,
चलो भारत को खेलों में भी विश्वविजय बनाते हैं।
हर घर, गली, नुक्कड़ से खिलाड़ी को उठाते हैं,
क्यूँ ना भारत भू पर हम खेलों की फसल उगाते है।।
क्षेत्र आरक्षण, राज्य आरक्षण खेल पाबंदी को हटाते हैं,
दिल्ली, हरियाणा और पंजाब ही नहीं,
अपितु पूरे भारत को खिलाड़ी दिलाते हैं।
तू छोरी मैं छोरा यह मतभेद हटाते हैं,
चल हम दोनों मिलकर भारत को पदक दिलाते हैं।।
एक राज्य, एक राष्ट्र, एक खिलाड़ी की भावना को लाते हैं,
मक़सद साफ़ है मेरे भारत के हर कोने कोने में खेल खिलाते हैं।
क्यूँकि मुट्ठी भर मैडल से कुछ नहीं होगा,
खेलेगा इंडिया तो खिलेगा इंडिया, आओ इस सोच को बढ़ाते है।।
चल भारत कि झोली में बोरी भर मैडल लाते हैं,
आओ इसी सोच के साथ हम सब यह राष्ट्रीय खेल दिवस मनाते हैं।
भारत की मिट्टी की ताकत अब दुनिया को दिखालाते हैं,
चलो भारत को खेलों में भी विश्वविजय बनाते हैं।।” – © जतिन त्यागी