महाभारत होगा तो
लहू तो कहीं गिरेगा,
कहीं सिर कटेगा
कहीं जान के लिए जयद्रथ भागेगा।
राजा पुत्र मोह में
सत्ता खो देगा,
कोई अंधा होगा
तो कोई अंधकार चुन लेगा।
ज्ञान की गंगा भी
छलछलाती ज्ञान चक्षु खोलेगी,
गिरे धनुष-बाण
भाग्य हथेली फिर खोलेगी।
युद्ध में वीर अतुलित
युद्ध नीति भूल जायेंगे,
सभा में वरिष्ठ ज्ञानी जन
न्याय- तेज विस्मृत कर देंगे।
महाभारत होगा तो
वाणी से प्रलय आयेगा,
वैमनस्य में जीते जी
सब कुछ स्वाह हो जायेगा।
विद्ध होगे श्रीकृष्ण जहाँ-तहाँ
नहीं सुनेगा बात विरोधी मन,
कोई इस कारण
कोई उस कारण।
विधाता का तेज सूक्ष्म
किसी को दिख जायेगा,
मति किसी की मारी जायेगी
और स्वयं ज्ञान किसी पर छा जायेगा।
* महेश रौतेला