यह तन मन धन जिसका है ,
उनको अर्पण क्या कर सकती ,
यह करते अपनी मनमानी ,
न बात मानते कभी मेरी यह देख
दुःखी होता अन्तर , जाने बैठा है कौन मगर! | आप जो जीवन मे आये , जीवन की लगता राह दिखी | कभी माँ मेरे कभी पिता बने आँचल मे समाये प्रेम लिए | मेरे अपराध क्षमा करके हर क्षण मुझपर ममता रखते | यह कलम नही सक्षम गुरूवर , यह शब्द भी हैं निश्तेज हुए | लिखने बैठूँ जो चरणों पर यह महिमा भी न गा सकते | मुझको न दिखाना राह मगर , धर चलना मेरी बाँह डगर | इतनी ही किरपा बस करना मेरी श्वाँस -श्वाँस मे भर रहना | 🙏🙏♥️🙌🙌🙌🙌