धर्म (दोहा - छंद)
**************
हानि होत जब धर्म की, बढ़ता है तब पाप।
धरती पर अवतार ले, आते हो प्रभु आप।।
धर्म की रक्षा के लिए, लेते प्रभु अवतार।
यह क्रम तो चलता रहे, जग में बारंबार।।
धर्म नाम पर आज कल, लगता है बाजार।
धर्म नाम पर कर रहे, देखो सब व्यापार।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित